Presidency University ने स्वामी विवेकानंद का पोस्टर बिगाड़ने पर दो छात्राओं को निकाला

कोलकाता के प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय ने स्वामी विवेकानंद के पोस्टर पर आपत्तिजनक टिप्पणी लिखने के आरोप में दो छात्राओं पर निष्कासन की कार्रवाई की है। जांच समिति द्वारा सीसीटीवी फुटेज और विभिन्न पक्षों को सुनने के बाद यह कदम उठाया गया। निष्कासित छात्राएं अब विश्वविद्यालय की किसी भी शैक्षणिक गतिविधि या नए कोर्स में हिस्सा नहीं ले सकेंगी।
कोलकाता, सात नवंबर प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय ने स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाले पोस्टर पर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखने और अन्य संगठनों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करने के आरोप में दो छात्राओं को निष्कासित कर दिया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह फैसला एक जांच समिति द्वारा सीसीटीवी फुटेज की जांच करने और विभिन्न पक्षों की बात सुनने के बाद लिया गया।
अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि दोनों छात्राओं को विश्वविद्यालय की आगे की शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से रोक दिया गया है। वे संस्थान में भविष्य के किसी भी डिग्री पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए भी पात्र नहीं होंगी। विश्वविद्यालय ने एक बयान में कहा कि उसने हमेशा वैज्ञानिक और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर गरिमापूर्ण शैक्षणिक चर्चा और बहस को बढ़ावा दिया है।
विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया कि वह विचारकों, विचारों या संगठनों के खिलाफ की गई अभद्र टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करेगा। यह विवाद तब शुरू हुआ जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने आरोप लगाया कि 13 अक्टूबर को विश्वविद्यालय परिसर में उनके द्वारा लगाए गए स्वामी विवेकानंद की तस्वीर वाले पोस्टर को विरूपित कर दिया गया और उस पर अपमानजनक बातें लिख दी गईं। इसके बाद एबीवीपी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और निष्पक्ष जांच के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने विश्वविद्यालय के गेट के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया। इस बीच वामपंथी विचारधारा वाले ‘स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एसएफआई) संगठन ने पोस्टर को विरूपित किए जाने की निंदा की और कहा कि किसी भी वामपंथी संगठन ने स्वामी विवेकानंद का अपमान करने वाला ऐसा कोई काम न तो शुरू किया और न ही उसमें हिस्सा लिया। एसएफआई ने यह भी कहा कि उनका इरादा हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था।
उन्होंने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच कराने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। छात्र संगठन ने संस्थान की दो छात्राओं-एक पूर्व छात्रा और दूसरी स्नातकोत्तर की छात्रा को निष्कासित करने के फैसले की निंदा की। संगठन ने इस सजा को अत्यधिक कठोर बताते हुए चेतावनी दी कि इससे दोनों का अकादमिक भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
एसएफआई की प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय इकाई की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि वह महान हस्तियों की तस्वीरें वाले पोस्टरों को विरूपित करने का समर्थन नहीं करता, चाहे उन्हें किसी भी राजनीतिक संगठन ने लगाया हो। एसएफआई का वर्तमान में विश्वविद्यालय के छात्र संघ पर नियंत्रण है, हालांकि पिछले कई वर्षों से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। हालांकि, संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को ऐसा फैसला लेने से पहले अधिक संवेदनशीलता से मामले से निपटना चाहिए था क्योंकि इससे छात्राओं का अकादमिक भविष्य गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है।
एसएफआई की प्रेसीडेंसी इकाई के पदाधिकारी बीटन इस्लाम ने कहा, ‘‘हम न तो इस घटना का समर्थन करते हैं और न ही इसमें शामिल लोगों के कृत्यों का। हालांकि, अनुशासनात्मक कदम सुधारात्मक, पुनर्वास पर केंद्रित और अपराध के अनुपात में होने चाहिए, न कि दंडात्मक या प्रतिशोध की भावना से प्रेरित। संगठन ने कहा कि दोनों छात्राओं को ऐसी सजा देकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने एक ‘‘बेहद खतरनाक उदाहरण’’ पेश किया है जिससे उनका अकादमिक भविष्य बर्बाद हो सकता है।
एसएफआई ने एबीवीपी की भी आलोचना की। संगठन ने आरोप लगाया कि एबीवीपी ने विवेकानंद के चित्र का इस्तेमाल अपने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए किया। उसने दावा किया कि दार्शनिक विवेकानंद का बहुलवादी दृष्टिकोण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की विचारधारा से मेल नहीं खाता।
संगठन ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसरों में इन ताकतों के खिलाफ उसकी राजनीतिक और वैचारिक लड़ाई जारी रहेगी। विश्वविद्यालय ने निष्कासित की गई दोनों छात्राओं की पहचान उजागर नहीं की है।
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