Russia के Drone हमलों से Kyiv में ऊर्जा ढांचा और पुल क्षतिग्रस्त, 1 की मौत, 8 घायल

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव और आसपास के क्षेत्रों पर 172 ड्रोन और 36 बैलिस्टिक मिसाइलों से बड़ा हमला किया, जिससे एक व्यक्ति की मौत हो गई और ऊर्जा ढांचे व प्रमुख पुलों को नुकसान पहुंचा। यह हमला अबू धाबी में रूस, यूक्रेन और अमेरिका के बीच प्रस्तावित त्रिपक्षीय शांति वार्ता से ठीक पहले हुआ है।
राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने शनिवार को बताया कि रूस ने रात भर चले हमलों में यूक्रेन पर 172 ड्रोन और 36 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। जेलेंस्की ने कहा कि सभी मिसाइलें राजधानी कीव और उसके आसपास के इलाकों को निशाना बनाकर दागी गई थीं। यूक्रेन की राजधानी वाले इलाके में हुए हमले में एक व्यक्ति के मारे जाने की खबर है, जबकि एक बच्चे समेत आठ लोग घायल हो गए। अधिकारियों के अनुसार, कीव और उसके आसपास के इलाकों में हुए हमलों से यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे और निप्रो नदी पर बने एक प्रमुख पुल को नुकसान पहुंचा है। मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि रूस द्वारा कई चरणों में दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों से पूरा शहर दहल उठा, जिनमें से कुछ मिसाइलें 'नॉर्दर्न ब्रिज' (उत्तरी पुल) से टकराईं। अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों में घरों और गैर-आवासीय इमारतों को भी नुकसान पहुंचा है।
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रूस का कहना है कि उसने सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया
रूस ने बताया कि उसने यूक्रेन के सैन्य-औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ कीव और उसके आसपास के ऊर्जा और परिवहन बुनियादी ढांचे को निशाना बनाते हुए एक बड़ा हमला किया। हाल के हफ्तों में क्रेमलिन ने अपने हमलों का दायरा बढ़ाते हुए कीव के पुलों को भी निशाना बनाया है, जिससे 30 लाख से अधिक आबादी वाले इस शहर में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया कि हालिया हमलों में मध्य ज़ाइटॉमिर क्षेत्र के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।
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अबू धाबी में रूस-यूक्रेन-अमेरिका के बीच बातचीत तय
यह बातचीत अबू धाबी में यूक्रेनी और रूसी अधिकारियों के बीच होने वाली त्रिपक्षीय वार्ता के नए दौर से कुछ दिन पहले हो रही है। यह अमेरिका समर्थित शांति प्रयासों का हिस्सा है, जिसके अब तक बहुत कम नतीजे निकले हैं। ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि संघर्ष के और तेज होने के बीच, यूरोपीय देश चाहते हैं कि रूस यूक्रेन के खिलाफ अपना युद्ध रोके। इसके बाद ही वे महाद्वीप की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्रेमलिन की चिंताओं पर कोई बातचीत करने पर विचार करेंगे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूरोपीय अधिकारी इस बात पर अड़े हैं कि युद्ध से पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जो मांगें थीं—जिनके लागू होने पर पूर्वी यूरोप में नाटो की मौजूदगी खत्म हो जाती। वे अब भी स्वीकार्य नहीं हैं।
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