किसान संगठनों ने मान के फैसले का किया स्वागत, जानिए समिति के बारे में क्या कुछ कहा

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 14, 2021   19:07
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किसान संगठनों ने मान के फैसले का किया स्वागत, जानिए समिति के बारे में क्या कुछ कहा

कुछ नेताओं ने भूपिन्दर सिंह मान को कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया। किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने समिति के सदस्यों को लेकर आशंका जाहिर करते हुए कहा था कि इसके सदस्य पूर्व में तीनों कानूनों की पैरवी कर चुके हैं।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित समिति से भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष भूपिन्दर सिंह मान के अलग होने का प्रदर्शनकारी किसानों ने स्वागत किया है। किसान नेताओं ने कहा कि वे कोई कमेटी नहीं चाहते हैं और तीनों कानूनों को रद्द किए जाने से कम उन्हें कुछ भी मंजूर नहीं है। किसान नेताओं ने कहा कि समिति के तीन अन्य सदस्यों को भी इससे अलग हो जाना चाहिए। ऐसा इसलिए कि प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने नए कृषि कानूनों पर किसानों और केंद्र के बीच गतिरोध को सुलझाने के लिए किसी समिति के गठन की मांग ही नहीं की थी। कुछ नेताओं ने मान को कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने के लिए भी आमंत्रित किया। किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने समिति के सदस्यों को लेकर आशंका जाहिर करते हुए कहा था कि इसके सदस्य पूर्व में तीनों कानूनों की पैरवी कर चुके हैं। 

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 किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, ‘‘मान का फैसला एक अच्छा कदम है क्योंकि किसान यूनियनों के लिए किसी भी समिति का कोई महत्व नहीं है क्योंकि संगठनों ने कभी इसकी मांग ही नहीं की थी। मान जानते हैं कि कोई भी किसान संगठन उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति के सामने पेश नहीं होगा, इसलिए उन्होंने यह निर्णय किया है।’’ चढूनी प्रदर्शन कर रहे करीब 40 किसान संगठनों के प्रधान संगठन संयुक्त किसान मोर्चा के वरिष्ठ सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि समिति के बाकी तीन सदस्यों के अलग हो जाने और नए सदस्यों की नियुक्ति के बावजूद किसान नेता कमेटी के सामने पेश नहीं होंगे।

उन्होंने कहा कि किसानों को तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने के सिवा कुछ और मंजूर नहीं है। एक और किसान नेता अभिमन्यु कोहार ने कहा कि सरकार जानती है कि अदालत कानूनों को निरस्त नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करना बंद कर देना चाहिए। किसान 28 नवंबर से दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार के साथ शुक्रवार को होने वाली अगली बैठक में क्या किसान नेता हिस्सा लेंगे, इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि किसान किसी भी वार्ता के खिलाफ नहीं है और वे केंद्रीय मंत्रियों के साथ वार्ता करेंगे। 

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भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने भी मान के निर्णय का स्वागत किया और उन्हें तीनों कानूनों के खिलाफ आंदोलन में जुड़ने का आमंत्रण दिया। भाकियू (एकता उगराहां) के पंजाब महासचिव सुखदेव सिंह ने कहा कि सरकार अगर तीनों कानूनों को वापस ले ले तो वह किसी भी समिति को स्वीकार लेंगे। किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने भी कहा कि तीनों कानूनों को वापस लिए जाने तथा फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दिए जाने तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।

उच्चतम न्यायालय ने तीन नये कृषि कानूनों को लेकर सरकार और दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे रहे किसानों की यूनियनों के बीच व्याप्त गतिरोध खत्म करने के इरादे से मंगलवार को इन कानूनों के अमल पर अगले आदेश तक रोक लगाने के साथ ही किसानों की समस्याओं पर विचार के लिये चार सदस्यीय समिति गठित की थी। पीठ ने इस समिति के लिये भूपिन्दर सिंह मान के अलावा शेतकरी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट, दक्षिण एशिया के अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ प्रमोद जोशी और कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी के नामों की घोषणा की थी।





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किसान और कृषि दोनों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है मोदी सरकार: नरेंद्र सिंह तोमर

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 25, 2021   17:26
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किसान और कृषि दोनों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है मोदी सरकार: नरेंद्र सिंह तोमर

किसानों के साथ 11वें दौर की वार्ता के बाद जब समाधान नहीं निकला तब मैंने किसान से कहा कि डेढ़ साल के लिए कानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित कर देते हैं,SC ने स्थगित किया है तो हम उनसे अनुरोध करेंगे कि थोड़ा और समय दें ताकि उस समय में हम लोग बातचीत के जरिए हल निकाल सकें।

केंद्र द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। किसान लगातार 60 दिनों से एक दिल्ली के बाहरी इलाकों में डटे हुए हैं। इन सबके बीच कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बड़ा बयान दिया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक कृषि मंत्री ने कहा है कि सरकार किसान और कृषि दोनों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि PM नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विगत 6 वर्षों में किसान की आमदनी बढ़ाने, खेती को नई तकनीक से जुड़ने के लिए अनेक प्रकार की योजनाएं और प्रयास किए गए हैं। MSP को डेढ़ गुना करने का काम भी PM के नेतृत्व में हुआ है।

नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि किसान को उसके उत्पादन का सही दाम मिल सके,किसान महंगी फसलों की ओर आकर्षित हो सके इसलिए जहां कानून बनाने की आवश्यकता थी वहां कानून बनाए गए और जहां कानून में बदलाव की आवश्यकता थी वहां कानून में बदलाव भी किए गए। इसके पीछे सरकार और प्रधानमंत्री की साफ नीयत हैं। भले ही सरकार और किसानों के बीच 11 दौर की बैठक हो चुकी है और सभी बैठक बेनतीजा रहे हैं। लेकिन कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को उम्मीद है कि आने वाले समय में इसका समाधान निकल जाएगा। इस पर उन्होंने कहा कि किसानों के साथ 11वें दौर की वार्ता के बाद जब समाधान नहीं निकला तब मैंने किसान से कहा कि डेढ़ साल के लिए कानूनों के क्रियान्वयन को स्थगित कर देते हैं,SC ने स्थगित किया है तो हम उनसे अनुरोध करेंगे कि थोड़ा और समय दें ताकि उस समय में हम लोग बातचीत के जरिए हल निकाल सकें।





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ममता बनर्जी का आरोप, भाजपा ने जय श्रीराम का नारा लगाकर नेताजी का अपमान किया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 25, 2021   16:49
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ममता बनर्जी का आरोप, भाजपा ने  जय श्रीराम  का नारा लगाकर नेताजी का अपमान किया

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और उस पर एक कार्यक्रम में जय श्रीराम का नारा लगाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान करने का आरोप लगाया।

पुर्सुरा (पश्चिम बंगाल)। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा और उस पर एक कार्यक्रम में जय श्रीराम का नारा लगाकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस का अपमान करने का आरोप लगाया। यह कार्यक्रम बोस की 125वीं जयंती के मौके पर आयोजित किया गया था। भाजपा को बाहरी लोगों का समूह और भारत जलाओ पार्टी बताते हुए बनर्जी ने कहा कि भाजपा लगातार बंगाल की महान शख्सियतों का अपमान कर रही है और नेताजी भी ‘‘इस फहरिस्त में शामिल हो गए हैं।’’ तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ने यहां एक रैली में कहा, ‘‘क्या आप किसी को अपने घर बुलाकर उसका अपमान करेंगे? क्या यह बंगाल या हमारे देश की संस्कृति है? अगर नेताजी के लिए नारे लगाए जाते तो मुझे कोई परेशानी नहीं होती।’’

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उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मेरा उपहास उड़ाने के लिए उन्होंने नारे लगाए जिनका कार्यक्रम से कोई संबंध नहीं था। देश के प्रधानमंत्री के सामने मेरा अपमान किया गया। यह उनकी (भाजपा) संस्कृति है।’’ सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जयंती के मौके पर शनिवार को आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में जय श्रीराम के नारे लगाए जाने के बाद बनर्जी ने कार्यक्रम को संबोधित नहीं किया था। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल थे।

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दल बदलुओं को विश्वासघाती बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस का साथ छोड़ने वाले नेताओं को फिर कभी पार्टी में वापस नहीं लिया जाएगा। बनर्जी ने कहा, ‘‘जो (पार्टी) छोड़कर गए हैं, उन्हें पता था कि उन्हें आगामी चुनाव में टिकट नहीं मिलने वाला है। यह अच्छा है कि वे चले गए अन्यथा हम उन्हें निकाल देते.... जो पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उन्हें जल्द से जल्द पार्टी छोड़ देनी चाहिए।





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किसानों के प्रदर्शन पर नाटक कर रहे हैं कुछ राजनीतिक दल: फडणवीस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 25, 2021   16:45
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किसानों के प्रदर्शन पर नाटक कर रहे हैं कुछ राजनीतिक दल: फडणवीस

फडणवीस ने भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के साथ भंडारा में विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह भंडारा के अस्पताल में पिछले महीने आग लगने से 10 बच्चों की मौत के मामले के संबंध में राज्य सरकार की ‘‘असंवेदनशील’’ रवैये के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।

नागपुर (महाराष्ट्र)। भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेन्द्र फडणवीस ने सोमवार को आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक पार्टियां केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन को लेकर ‘‘नाटक’’ कर रही हैं और गलत जानकारियां फैला रही हैं। मुम्बई में किसानों द्वारा आयोजित की गई रैली का राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) और कांग्रेस द्वारा समर्थन करने के बाद उन्होंने यह बयान दिया है। महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता फडणवीस ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस-राकांपा सरकार ने ही अनुबंध कृषि और कृषि उत्पादों की सीधी खरीद की अनुमति दी थी। उन्होंने कहा कि कृषि कानून पारित हुए काफी समय हो गया है और महाराष्ट्र में भी तक ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं हुआ।

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘ कुछ राजनीतिक दल जानबूझकर अब नाटक कर रहे हैं और गलत जानकारियां फैला कर किसानों को गुमराह कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ मेरे पास इन मोर्चों का समर्थन करने वाली पार्टियों के लिए एक सवाल है कि कांग्रेस ने अपने 2019 के चुनाव घोषणापत्र में यह क्यों कहा था कि अगर वह सत्ता में आई तो वह बाजार समितियों को निलंबित कर देगी।’’ फडणवीस ने पूछा, ‘‘ कांग्रेस और राकांपा को जवाब देने चाहिए कि उन्होंने 2006 में अनुबंध खेती अधिनियम को मंजूरी क्यों दी? उन्हें महाराष्ट्र में इस कानून से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन वे केन्द्र में इसे नहीं चाहते। यह ड्रामा क्यों?’’ 

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उन्होंने यह भी दावा किया कि किसानों की उपज की सीधी खरीद के लिए पिछले कांग्रेस-राकांपा शासन ने 29 लाइसेंस जारी किए गए थे। इस बीच, फडणवीस ने भाजपा के कई कार्यकर्ताओं के साथ भंडारा में विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन भी किया। प्रदर्शन से पहले उन्होंने पत्रकारों से कहा कि वह भंडारा के अस्पताल में पिछले महीने आग लगने से 10 बच्चों की मौत के मामले के संबंध में राज्य सरकार की ‘‘असंवेदनशील’’ रवैये के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने भंडारा में धान की खरीद के दौरान ‘‘व्यापक भ्रष्टाचार’’ का भी आरोप लगाया।





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नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


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