तरूण गोगोई के निधन पर राहुल गांधी ने जताया दुख, कहा- मेरे लिए एक महान शिक्षक थे

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 23, 2020   19:51
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तरूण गोगोई के निधन पर राहुल गांधी ने जताया दुख, कहा- मेरे लिए एक महान शिक्षक थे

तरूण गोगोई का सोमवार को निधन हो गया। वह 84 साल के थे। कुछ सप्ताह पहले वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे।

नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के निधन पर दुख प्रकट करते हुए सोमवार को कहा कि गोगोई उनके लिए महान शिक्षक थे और उनका पूरा जीवन असम के लोगों को एकसाथ लाने में समर्पित रहा। उन्होंने गोगोई के पुत्र गौरव गोगोई और परिवार के अन्य सदस्यों के प्रति संवेदना भी प्रकट की।

राहुल गांधी ने ट्वीट किया, ‘‘श्री तरूण गोगोई एक सच्चे कांग्रेसी नेता थे। उन्होंने अपना जीवन असम में सभी लोगों और समुदायों को साथ लाने के लिए समर्पित कर दिया। मेरे लिए वह एक महान और विद्वान शिक्षक थे। मैंने उन्हें बहुत गहराई से प्रेम और सम्मान दिया। उनकी कमी मुझे महसूस होगी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘गौरव और उनके परिवार के प्रति स्नेह और संवेदना व्यक्त करता हूं।’’ तरूण गोगोई का सोमवार को निधन हो गया। वह 84 साल के थे। कुछ सप्ताह पहले वह कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए थे।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


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पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किए जाएंगे देवेन्द्र कुमार बहल

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 28, 2021   15:02
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पं. बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से अलंकृत किए जाएंगे देवेन्द्र कुमार बहल

वर्ष 2012 से संकल्पसिद्ध शिक्षार्थी भाव से हिन्दी जगत् को ‘अभिनव इमरोज़’ एवं ‘साहित्य नंदिनी’ जैसे दो महत्वपूर्ण पत्रिकाएं देकर अपनी सेवा भाव का प्रत्यक्ष प्रमाण दे रहे हैं।

नई दिल्ली। मासिक साहित्यिक पत्रिका ‘अभिनव इमरोज़’ (नई दिल्ली) के संपादक देवेन्द्र कुमार बहल को इस वर्ष का पंडित बृजलाल द्विवेदी स्मृति अखिल भारतीय साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान दिया जाएगा। 7 फरवरी को ऑनलाइन आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। देवेन्द्र कुमार बहल हिंदी प्रेम और अपने गुरु स्वर्गीय डॉ. त्रिलोक तुलसी की प्रेरणा से 70 वर्ष की आयु में संपादन-प्रकाशन की दुनिया में खींचे चले आए। वर्ष 2012 से संकल्पसिद्ध शिक्षार्थी भाव से हिन्दी जगत् को ‘अभिनव इमरोज़’ एवं ‘साहित्य नंदिनी’ जैसे दो महत्वपूर्ण पत्रिकाएं देकर अपनी सेवा भाव का प्रत्यक्ष प्रमाण दे रहे हैं। 

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त्रैमासिक पत्रिका ‘मीडिया विमर्श’ के कार्यकारी संपादक प्रो संजय द्विवेदी ने बताया कि यह पुरस्कार प्रतिवर्ष हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता को सम्मानित करने के लिए दिया जाता है। इस अवॉर्ड का यह 13वां वर्ष है। ‘मीडिया विमर्श’ द्वारा शुरू किए गए इस अवॉर्ड के तहत ग्यारह हजार रुपए, शॉल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह और सम्मान पत्र दिया जाता है। पुरस्कार के निर्णायक मंडल में नवभारत टाइम्स, मुंबई के पूर्व संपादक विश्वनाथ सचदेव, छत्तीसगढ़ ग्रंथ अकादमी, रायपुर के पूर्व निदेशक रमेश नैयर तथा इंदिरा गांधी कला केंद्र, दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी शामिल हैं।

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इससे पूर्व यह सम्मान वीणा (इंदौर) के संपादक स्व. श्यामसुंदर व्यास, दस्तावेज (गोरखपुर) के संपादक डॉ. विश्वनाथ प्रसाद तिवारी, कथादेश (दिल्ली) के संपादक हरिनारायण, अक्सर (जयपुर) के संपादक डॉ. हेतु भारद्वाज, सद्भावना दर्पण (रायपुर) के संपादक गिरीश पंकज, व्यंग्य यात्रा (दिल्ली) के संपादक डॉ. प्रेम जनमेजय, कला समय (भोपाल) के संपादक विनय उपाध्याय, संवेद (दिल्ली) के संपादक किशन कालजयी, अक्षरा (भोपाल) के संपादक कैलाशचंद्र पंत, अलाव (दिल्ली) के संपादक रामकुमार कृषक, प्रेरणा (भोपाल) के संपादक अरुण तिवारी और युगतेवर (सुल्तानपुर) के संपादक कमल नयन पाण्डेय को दिया जा चुका है।





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जानिए कौन है लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाने वाला जुगराज, परिवार पर है चार लाख का कर्ज

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 28, 2021   14:53
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जानिए कौन है लाल किले पर धार्मिक झंडा लगाने वाला जुगराज, परिवार पर है चार लाख का कर्ज

पुलिस का शिकंजा कसता देख गांव में भगदड़ सी मच गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक झंडा लगाने वाले जुगराज सिंह का परिवार फ़िलहाल गायब हो गया है। पुलिस लगातार छानबीन कर रही है।

26 जनवरी को दिल्ली में हुए किसान परेड के दौरान लाल किले पर खालसा झंडा लगाने वाला युवक जुगराज सिंह बताया जा रहा है। जुगराज पंजाब के तरनतारन के गांव तारा सिंह का रहने वाला है। जुगराज सिंह मध्यमवर्गीय परिवार से आता था और ढाई वर्ष पहले चेन्नई में वह निजी काम करने चला गया था। हालांकि 5 महीने पहले ही वह पंजाब लौटा था और खेती किसानी का काम करने लगा था। इन सब के बीच जैसे ही किसान आंदोलन शुरू हुआ, जुगराज सिंह उसमें सक्रिय हो गया। 

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ग्रामीणों का दावा है कि जुगराज सिंह सिर्फ मैट्रिक पास है। गांव वालों ने ही टीवी पर खबर देखने के बाद यह दावा किया था कि लाल किले पर झंडा लगाने वाला युवक उसी के गांव का जुगराज सिंह है। 26 जनवरी के दिन पुलिस युवराज के घर भी पहुंची थी और परिवार वालों से पूछताछ भी किया था। जुगराज सिंह के दादा मेहल सिंह ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि लाल किले पर झंडा लगाने वाला उन्हीं का पोता है। हालांकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि उनका परिवार या उसका कोई सदस्य कभी भी किसी गैर सामाजिक गतिविधि में शामिल नहीं रहा है।

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जुगराज के दादा ने बताया कि परिवार के पास 2 एकड़ जमीन है। 3 भैंस और एक गाय भी है। परिवार पर चार लाख का कर्ज भी है। वहीं, दादी ने बताया कि जुगराज गांव के गुरुद्वारे में निशान साहिब पर चोला चढ़ाने का सेवा करता था। गांववालों ने दावा किया कि जोश में आकर वह लाल किले पर चढ़ गया होगा और झंडा चढ़ा दिया होगा। गांव वालों ने इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। लगातार जुगराज के घर पर पुलिस दबिश दे रही है। गांव वाले दावा कर रहे हैं कि ऐसी कोई योजना थी ही नहीं लेकिन उसने जो किया वह गलत था। पुलिस का शिकंजा कसता देख गांव में भगदड़ सी मच गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक झंडा लगाने वाले जुगराज सिंह का परिवार फ़िलहाल गायब हो गया है। पुलिस लगातार छानबीन कर रही है।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


बजट सत्र से पहले विपक्ष ने दिखाए सख्त तेवर, राष्ट्रपति के भाषण का करेंगे बहिष्कार

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 28, 2021   14:39
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बजट सत्र से पहले विपक्ष ने दिखाए सख्त तेवर, राष्ट्रपति के भाषण का करेंगे बहिष्कार

कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ है। उनकी मांग है कि सरकार तत्काल इन तीन कृषि कानूनों को निरस्त करें।

कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि राष्ट्रपति के संसद की संयुक्त बैठक के संबोधन का 16 विपक्षी दल किसानों के मुद्दे को लेकर बहिष्कार करेंगे। विपक्षी दलों ने गणतंत्र दिवस के दिन हिंसा के मामले में केंद्र की भूमिका की जांच की मांग की। आजाद ने कहा कि इस फैसले के पीछे प्रमुख कारण यह है कि विधेयकों (फार्म कानून) को विपक्ष के बिना, सदन में जबरन पारित किया गया।

आपको बता दें कि कांग्रेस सहित कई विपक्षी दल केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ है। उनकी मांग है कि सरकार तत्काल इन तीन कृषि कानूनों को निरस्त करें। गौरतलब है कि इन तीन कृषि कानूनों को लेकर किसान लगभग 60 दिनों से दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।





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