Rajasthan High Court का आदेश, पिता की सहमति बिना भी नाबालिग को मिलेगा Passport

जोधपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय ने विदेश में पढ़ाई के लिए एक नाबालिग लड़के को पासपोर्ट जारी करने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि माता-पिता के तलाक के बाद मां के साथ रह रहे बच्चे को यात्रा के संवैधानिक अधिकार से वंचित करना उसके करियर के लिए नुकसानदेह होगा। न्यायमूर्ति अनूप कुमार धंड ने पासपोर्ट कार्यालय द्वारा पिता की अनिवार्य सहमति के अभाव में आवेदन खारिज करने के कदम को अनुचित माना।
राजस्थान उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे विदेश में पढ़ाई करने के लिए एक नाबालिग को पासपोर्ट जारी करें, भले ही उसके आवेदन में उसके पिता की सहमति न हो। अदालत ने कहा कि यात्रा करने के संवैधानिक अधिकार से वंचित करने से उसके करियर की संभावनाओं को अपूरणीय क्षति होगी। लड़के के माता-पिता का तलाक हो चुका है और वह अपनी मां के साथ रहता है।
नाबालिग ने अपनी मां के माध्यम से उच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा था कि उसने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था, लेकिन आवेदन में पिता का उल्लेख नहीं होने के कारण अधिकारियों ने पासपोर्ट जारी करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पासपोर्ट अधिकारियों ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि इसमें पिता की अनिवार्य सहमति शामिल नहीं है। याचिका मंजूर करते हुए न्यायमूर्ति अनूप कुमार धंड ने कहा कि पासपोर्ट देने से इनकार करने का कोई भी यांत्रिक तरीका न केवल आवेदक को प्रभावित करेगा, बल्कि उसके करियर की संभावनाओं को भी अपूरणीय क्षति पहुंचा सकता है।
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