Ram Temple donation theft probe Updates: 17 साल बाद RMO अर्जुन देव का ट्रांसफर, जांच के दायरे में 80 लोग

Ram Temple
ANI
अभिनय आकाश । Jun 30 2026 12:28PM

अर्जुन देव 2009 से अयोध्या में काम कर रहे थे। हालांकि, इन सालों में कई बार उनके तबादले के आदेश जारी किए गए, लेकिन हर बार उन्हें रद्द कर दिया गया। लखनऊ में उनका हालिया तबादला भी रद्द कर दिया गया था। लेकिन, राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट के बाद, अब उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है। अर्जुन देव की ज़िम्मेदारी मंदिर के दान गिनने वाले कमरे के अंदर CCTV सर्विलांस सिस्टम और पूरे राम मंदिर परिसर में लगे लगभग 1,600 CCTV कैमरों की निगरानी करना था। वह परिसर के अंदर वायरलेस कम्युनिकेशन नेटवर्क के इंचार्ज भी थे।

अयोध्या में राम मंदिर में दान की कथित चोरी की जांच में तेज़ी आई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की रिपोर्ट के बाद अधिकारियों ने अहम प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाए हैं। एक बड़े घटनाक्रम में, अयोध्या में लगभग 17 साल से तैनात रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव का तबादला गोरखपुर कर दिया गया है। इस बीच, गिरफ्तार किए गए सभी आठ आरोपियों को 14 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांचकर्ता अब बैंक अधिकारियों, मंदिर के कर्मचारियों और दान की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े कई अन्य लोगों की संभावित भूमिका की जांच के लिए अपनी पड़ताल का दायरा बढ़ा रहे हैं। 

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अयोध्या में लगभग 17 साल रहने के बाद MO अर्जुन देव का तबादला

अर्जुन देव 2009 से अयोध्या में काम कर रहे थे। हालांकि, इन सालों में कई बार उनके तबादले के आदेश जारी किए गए, लेकिन हर बार उन्हें रद्द कर दिया गया। लखनऊ में उनका हालिया तबादला भी रद्द कर दिया गया था। लेकिन, राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT की रिपोर्ट के बाद, अब उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है। अर्जुन देव की ज़िम्मेदारी मंदिर के दान गिनने वाले कमरे के अंदर CCTV सर्विलांस सिस्टम और पूरे राम मंदिर परिसर में लगे लगभग 1,600 CCTV कैमरों की निगरानी करना था। वह परिसर के अंदर वायरलेस कम्युनिकेशन नेटवर्क के इंचार्ज भी थे।

SIT रिपोर्ट ने RMO की भूमिका पर सवाल उठाए

सूत्रों के मुताबिक, SIT रिपोर्ट ने मंदिर प्रशासन में देव की भूमिका पर चिंता जताई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वह अपनी आधिकारिक ज़िम्मेदारियों के अलावा कई अन्य कामों में भी शामिल थे, जैसे VVIP दर्शन की व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन के कई पहलू। सूत्रों का यह भी दावा है कि मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के साथ उनकी करीबी जान-पहचान की वजह से ही उनके तबादले के आदेश बार-बार रद्द हो पाते थे। 

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जांच का दायरा बढ़ा, 70 से 80 लोग जांच के घेरे में

जांच अब सिर्फ़ मंदिर ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय और गिरफ़्तार किए गए आठ आरोपियों तक ही सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में करीब 70 से 80 लोग जांच के दायरे में आ गए हैं। खबर है कि उन्हें नोटिस भेजे गए हैं और चल रही जांच के तहत उनसे पूछताछ की जा सकती है।

पुलिस ने SBI समेत छह बैंकों को नोटिस जारी किए

जांच राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े बैंकिंग संस्थानों तक भी पहुंच गई है। पुलिस ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ़ बड़ौदा और केनरा बैंक समेत करीब छह बैंकों को नोटिस जारी किए हैं। जांचकर्ताओं ने SBI से उन कर्मचारियों के बारे में जानकारी मांगी है जिन्हें दान की गिनती की प्रक्रिया की निगरानी का काम सौंपा गया था। पुलिस बैंक के दो कर्मचारियों, रत्नेश चतुर्वेदी और गगनदीप की भूमिका की भी जांच कर रही है, जिन्हें बैंक ने कैश की गिनती की देखरेख के लिए तैनात किया था। इसके अलावा, अधिकारियों ने अयोध्या में काम कर रहे बैंकों से राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों और उनसे जुड़े लोगों की पूरी बैंकिंग जानकारी मांगी है।

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लवकुश मिश्रा की संपत्ति की जांच

जांच के दौरान, पुलिस को पता चला कि अयोध्या के शहादतगंज इलाके में जयपुरिया स्कूल के पीछे लगभग 1,000 स्क्वायर फ़ीट का एक प्लॉट आरोपी लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदा गया था। सूत्रों के मुताबिक, यह ज़मीन अक्टूबर 2025 में लगभग 25 लाख रुपये में खरीदी गई थी। जांचकर्ताओं का अनुमान है कि इस प्रॉपर्टी पर तीन मंज़िला घर बनाने में पहले ही 80 लाख से 90 लाख रुपये तक का खर्च आ चुका है। ज़मीन समेत कुल निवेश लगभग 1.5 करोड़ रुपये होने का अनुमान है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, तीन दिन पहले तक निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन पुलिस जांच शुरू होने के बाद इसे रोक दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि लवकुश मिश्रा, जिनकी बताई गई मासिक आय लगभग 20,000 रुपये है, ने इतनी महंगी संपत्ति कैसे जुटाई।

बिना नाम वाले लोगों पर भी हो सकती है कार्रवाई

SIT की जांच के बाद राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दर्ज FIR में सिर्फ़ गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों का ही नाम नहीं है। इसमें कुछ अज्ञात लोगों का भी ज़िक्र है। इससे जांच के दौरान सामने आने वाले किसी भी अन्य व्यक्ति के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई की गुंजाइश बनी रहती है। 

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