Ayodhya चंदा विवाद पर RSS प्रमुख मोहन भागवत का पहला रिएक्शन, 'राम-राम' के क्या हैं मायने?

Ram Mandir
ANI
अभिनय आकाश । Jul 4 2026 4:10PM

भागवत की यह संक्षिप्त टिप्पणी RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी ने राम भक्तों और आम समाज की आस्था को 'गहरी चोट' पहुंचाई है, और मांग की थी कि दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए।

अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले चंदे में कथित हेराफेरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत से इस आरोप के बारे में पूछा गया कि कुछ लोग भगवान राम में लोगों की आस्था को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं, तो उन्होंने शनिवार को इस पर संक्षिप्त लेकिन तीखी प्रतिक्रिया दी। जब नागपुर में पत्रकारों ने भागवत से उन दावों पर प्रतिक्रिया मांगी कि भगवान राम में भक्तों की आस्था को कम करने की कोशिशें की जा रही हैं, तो RSS प्रमुख ने बस "राम-राम" कहा और आगे बढ़ गए।

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RSS की पहली प्रतिक्रिया

भागवत की यह संक्षिप्त टिप्पणी RSS के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि राम मंदिर के चंदे में कथित हेराफेरी ने राम भक्तों और आम समाज की आस्था को "गहरी चोट" पहुंचाई है, और मांग की थी कि दोषियों को कड़ी सज़ा दी जाए। शुक्रवार को एक बयान में होसाबले ने कहा कि आरएसएस कथित घटना से "बेहद दुखी और क्रोधित" है और मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि "हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतें" हिंदू धर्म को बदनाम करने के लिए इस घटना का फायदा उठाने का प्रयास कर रही थीं, साथ ही उन्होंने भक्तों से धैर्य और संयम बरतने का आह्वान किया। होसबोले ने कहा कि कथित घटना ने भक्तों की भावनाओं को गहराई से आहत किया है और कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मंदिर के प्रबंधन और संचालन में कमियों को दूर करने के लिए प्रभावी कदम उठाकर इस मामले को असाधारण मानना ​​चाहिए। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़ी अनिश्चितता गहन जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ समाप्त होनी चाहिए।

इस मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है। इनमें भक्तों के चढ़ावे की गिनती करने वाले छह आउटसोर्स कर्मचारी और ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय के करीबी सहयोगी राम शंकर यादव उर्फ़ टिन्नू शामिल हैं। अविनाश शुक्ला उन छह आउटसोर्स कर्मचारियों में से एक थे। उत्तर प्रदेश पुलिस ने शुक्रवार को इस मामले में अपनी समानांतर आपराधिक जांच तेज़ कर दी। पुलिस ने गिरफ़्तार आरोपी अविनाश शुक्ला को 24 घंटे की पुलिस कस्टडी में लिया ताकि बरामदगी की जा सके, घटनाक्रम को फिर से समझा जा सके और नई जानकारियों की पुष्टि की जा सके। वहीं, राज्य सरकार की SIT श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज की जांच करती रही। पुलिस की एक टीम सुबह करीब 9 बजे अयोध्या ज़िला जेल पहुँची और शुक्ला को कस्टडी में लेकर रिज़र्व पुलिस लाइन्स ले गई, जहाँ उससे लगभग दो घंटे तक पूछताछ की गई। HT की एक पुरानी रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इसके बाद जाँचकर्ता उसे अयोध्या में कई जगहों पर और बाद में उसके गृह ज़िले प्रतापगढ़ ले गए ताकि उसके बयानों की पुष्टि की जा सके।

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