Prabhasakshi Newsroom: Mission 2027 पर RSS, CM Yogi से मिले मोहन भागवत, चुनावी रणनीति पर चर्चा!

लखनऊ में सीएम योगी आदित्यनाथ और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बीच हुई बैठक 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति पर केंद्रित रही, जिसमें समाजवादी पार्टी के पीडीए फॉर्मूले की काट और संगठनात्मक मजबूती पर गहन चर्चा हुई। 2024 के नतीजों के बाद हुई यह मुलाकात यूपी में सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने और भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने के लिए अहम मानी जा रही है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भगवत से मुलाकात की, जो दो दिवसीय दौरे पर लखनऊ में हैं। निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में हुई यह मुलाकात 40 मिनट तक चली। मुलाकात का एजेंडा गुप्त रखा गया है। हालांकि, विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण भगवत का राज्य का यह नियमित दौरा महत्वपूर्ण है। इससे पहले वे आरएसएस के शताब्दी समारोह के तहत मथुरा और गोरखपुर में थे।
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लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान भगवत ने हिंदू आबादी में गिरावट, धर्मांतरण और हिंदू एकता के आह्वान जैसे मुद्दों पर बात की। आरएसएस नेता का दौरा इसी संदेश के साथ समाप्त हुआ। सूत्रों के अनुसार, योगी आदित्यनाथ और मोहन भगवत के बातचीत में मुख्य रूप से समाजवादी पार्टी के पीडीए (PDA) फॉर्मूलेशन और यूजीसी विनियम, 2026 के देशव्यापी विवाद के इर्द-गिर्द घूमती रही। ऐसी अटकलें हैं कि मुख्यमंत्री ने आरएसएस प्रमुख को यूजीसी विनियमों और 2027 के विधानसभा चुनावों में पार्टी पर इसके संभावित प्रभावों के बारे में अपनी चिंता व्यक्त की होगी, यदि इन विनियमों का उचित समाधान नहीं किया गया।
सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए नए नियमों पर रोक लगा दी थी। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि इस बैठक में उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, संगठन की मजबूती और आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। माना जा रहा है कि चुनावी रणनीति, संगठनात्मक ढांचे को और प्रभावी बनाने तथा सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर भी विचार-विमर्श हुआ।
उत्तर प्रदेश भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, खासकर 2024 के आम चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन में भारी गिरावट के बाद। इसलिए, अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में इस बैठक को राजनीतिक हलकों में महत्वपूर्ण माना गया। यह मुलाकात केवल औपचारिक नहीं बल्कि राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस बात की संभावना अब तेज हो गई है कि आने वाले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़े बदलाव हो सकते हैं। आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह के सिलसिले में देशभर में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों और उनकी रूपरेखा पर भी चर्चा हुई।
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हालांकि, भागवत द्वारा लगातार हिंदू एकता पर जोर दिए जाने के मद्देनजर इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह मुख्यमंत्री के हालिया भाषणों के सुर से मेल खाता है जिनमें उन्होंने प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए अभियान’ का जिक्र किया है। भागवत जनवरी में 10 दिन के दौरे पर मथुरा गए थे। इसी महीने वह फिर उत्तर प्रदेश आए और अपने कार्यक्रम की शुरुआत गोरखपुर के तीन दिवसीय दौरे से की, जिसके बाद वह लखनऊ पहुंचे। आरएसएस इसे शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियान का हिस्सा बता रहा है, जबकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन बैठकों का राजनीतिक महत्व भी है।
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