मध्य प्रदेश के सागर और नीमच जिले को जल शक्ति मंत्रालय से मिला राष्ट्रीय पुरस्कार

 Madhya Pradesh received National Award
दिनेश शुक्ल । Oct 29, 2020 11:12AM
जबकि प्रदेश के नीमच जिले ने नदी संरक्षण के लिए श्रेष्ठ जिले का अवार्ड प्राप्त किया है। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा घोषित राष्ट्रीय पुरस्कारों में सागर और नीमच जिलों की झोली में दो पुरस्कार आए है।

भोपाल। जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा वर्ष 2019 अंतर्गत नेशनल वाटर अवार्ड की घोषणा कर दी है। जिसमें मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के सागर जिले ने बाजी मारी है। कभी जल संकट के चलते आत्महत्या के लिए पहचाने वाले वाले बुंदेलखंड अंचल के सागर जिले ने यह पुरस्कार जीत कर अपनी इस छवि को ना केवल पूरी तरह बदल कर रख दिया है बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जल संरक्षण के लिए श्रेष्ठ जिला होने का राष्ट्रीय अवार्ड लेकर प्रदेश का गौरव भी बढ़ाया है। जबकि प्रदेश के नीमच जिले ने नदी संरक्षण के लिए श्रेष्ठ जिले का अवार्ड प्राप्त किया है। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा घोषित राष्ट्रीय पुरस्कारों में सागर और नीमच जिलों की झोली में दो पुरस्कार आए है।

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जल संरक्षण के उत्कृष्ट कार्य के लिए सागर जिले को देश के पश्चिमी क्षेत्र के अंतर्गत तीसरा स्थान प्राप्त हुआ है। सागर कलेक्टर दीपक सिंह ने इस उपलब्धि के लिए जिलावासियों व सागर जिला पंचायत को बधाई दी है। साथ ही आगे भी इसी तरह कार्य करते रहने और जिले को जल संरक्षण के प्रयासों में लगातार कार्यरत रहने के निर्देश दिए हैं। तो वहीं सागर जिले की रहली तहसील की ग्राम पंचायत पिपरिया गोपाल को देश के पश्चिमी क्षेत्र वेस्ट रीजन अंतर्गत प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है। जिला पंचायत सागर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. इच्छित गढपाले ने बताया कि जल संरक्षण क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्पूर्ण देश से प्रस्ताव बुलाए गए थे। जिसके बाद सागर जिले का जल संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यो का प्रस्ताव एवं वेस्ट पंचायत केटेगिरी में रहली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत पिपरिया गोपाल का प्रस्ताव भारत शासन को प्रेषित किया गया था।

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भारत सरकार द्वारा एक पर्यवेक्षक नियुक्ति कर कार्यो का सत्यापन, गुणवत्ता एवं परिणामों का मूल्यांकन भी कराया गया था। पर्यवेक्षक के द्वारा ग्राम पंचायत पिपरिया गोपाल में मुख्य रूप से जल संरक्षण के कार्य जैसे खेत तालाब, चेक डेम के कार्यो का सत्यापन किया गया। वाटरशेड योजना से निर्मित खेत तालाब संरचना से स्प्रिंकलर पद्धति से फसलों को सिंचित कर शासन के उद्देश्य पर ड्रोप मोरक्रप के सिद्धांत को सफल होना पर्यवेक्षक के द्वारा पाया गया। ग्राम पंचायत पिपरिया गोपाल में जल संरक्षण के कार्यो की गुणवत्ता एवं इनके परिणामों को भी सराहा गया था। जिले की ग्राम पंचायत पिपरिया गोपाल को सम्पूर्ण देश में यह प्रथम पुरुस्कार प्राप्त हुआ है। सागर जिला एवं पिपरिया गोपाल ग्राम पंचायत को भारत सरकार जल शक्ति मंत्रालय के द्वारा यह पुरस्कार माह नवंबर की 9 एवं 10 तारीख को वितरित नई दिल्ली में दिए जाएंगे।

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प्रदेश के सागर जिला 10 लाख 22 हजार 759 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। जिले में विभागीय प्रमुख मनोज श्रीवास्तव के नेतृत्व में कलेक्टर सागर और जिला पंचायत सीईओ द्वारा किए गए प्रयासों से 9 लाख 25 हजार 400 हेक्टेयर क्षेत्र को रिचार्ज किया गया है। इसके लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा दिया गया है। इसमें सूखे इलाकों में वर्षा संरक्षण के संरचनाओं से इस तरह पानी बचाया गया कि उसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है। साथ ही जिले में सरकारी भवनों पर ही 4 हजार 446 रेन वाटर हार्वेस्टिंग उपकरण लगाए गए है। इसके अलावा खराब पानी के रिसाइकल कर उपयोग करने के प्रयोग भी जिले में किए गए है। ऐसी कुल 5 हजार 148 संरचनाओं के जरिए एक करोड़ 51 लाख लीटर जल संरक्षित किया।

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जबकि प्रदेश के नीमच जिले को रिवाइवल ऑफ रीवर के श्रेष्ठ जिलों की श्रेणी का राष्ट्रीय स्तर का तीसरा पुरस्कार मिला है। नीमच जिले में जो नदियां है उनमें जलस्तर बढ़ाने के लिए अलग-अलग प्रयास किए गए है। नदियों की खुदाई, उदगम स्थलों का जीर्णोद्धार, वाटर हार्वेस्टिंग, छोटे स्टाप डेम और नदियों के जीणोद्धार के लिए जन सहयोग से काफी प्रयास किए गए। इसके चलते नीमच की नदियों में जल स्तर तेजी से बढ़ा है। इसीलिए जिले को यह पुरस्कार मिला है।

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