आप क्या छिपा रहे हैं? CEC Gyanesh Kumar के खर्च पर Saket Gokhale ने ECI से दागे तीखे सवाल

गोखले ने एक्स पर आरटीआई के जवाब की एक कॉपी शेयर की। इसके मुताबिक, चुनाव आयोग ने 31 जुलाई को दिए अपने जवाब में कहा इन पॉइंट्स के तहत मांगी गई जानकारी निजी जानकारी से जुड़ी है, इसलिए RTI एक्ट, 2005 की धारा 8(1)(j) के तहत इसे शेयर नहीं किया जा सकता।
राज्यसभा के पूर्व सांसद और तृणमूल कांग्रेस नेता साकेत गोखले ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की आधिकारिक यात्राओं और उन पर खर्च हुए सार्वजनिक धन का विवरण देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत इस जानकारी को व्यक्तिगत बताया है। गोखले ने कहा कि उन्होंने 18 जून को एक RTI आवेदन दायर किया था। इसमें उन्होंने 19 फरवरी, 2025 को CEC का पद संभालने के बाद से कुमार की सभी आधिकारिक यात्राओं और उन पर सार्वजनिक कोष से हुए खर्च का विवरण मांगा था। खबर लिखे जाने तक चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी। मांगी गई जानकारी में देश और विदेश की कुल यात्राओं की संख्या, हर यात्रा की तारीखें, जगहें, यात्रा का मकसद और तरीका, सरकारी खर्च पर CEC के साथ जाने वाले अधिकारी, और यात्रा, रहने-सहने, रोज़ के भत्ते, लोकल ट्रांसपोर्ट और दूसरे खर्चों का ब्योरा शामिल था।
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गोखले ने एक्स पर आरटीआई के जवाब की एक कॉपी शेयर की। इसके मुताबिक, चुनाव आयोग ने 31 जुलाई को दिए अपने जवाब में कहा इन पॉइंट्स के तहत मांगी गई जानकारी निजी जानकारी से जुड़ी है, इसलिए RTI एक्ट, 2005 की धारा 8(1)(j) के तहत इसे शेयर नहीं किया जा सकता। इस फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए गोखले ने पूछा कि सरकारी फ़ंड से ऑफ़िशियल दौरों पर हुए खर्च को निजी जानकारी कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि सरकारी फ़ंड से ऑफ़िशियल दौरों पर हुए खर्च को 'निजी जानकारी' कैसे कहा जा सकता है? यहाँ तक कि प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं का खर्च भी संसद में बताया गया है। तो फिर ज्ञानेश कुमार इतने खास कैसे हो गए? गोखले ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव आयोग खर्च की जानकारी छिपाकर क्या छिपाना चाहता है।
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उन्होंने पूछा कि ज्ञानेश कुमार के दौरों पर जनता का पैसा किस तरह खर्च हुआ है कि ECI इसे बताने से डर रहा है? उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जब से कुमार ने CEC का पद संभाला है, चुनाव आयोग में जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक ब्लैक होल बन गया है। गोखले ने कहा कि RTI अर्ज़ी में खास तौर पर उन सरकारी दौरों की जानकारी मांगी गई थी जिनका खर्च पूरी तरह या आंशिक रूप से जनता के पैसे से हुआ था। उन्होंने बताया कि इसमें किसी भविष्य के यात्रा कार्यक्रम, रियल-टाइम मूवमेंट की जानकारी, या सुरक्षा, एस्कॉर्ट या प्रोटोकॉल इंतज़ामों के बारे में नहीं पूछा गया था। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के जवाब से CEC की सरकारी यात्रा पर हुए खर्च को लेकर सवाल उठे हैं और उन्होंने ज़्यादा पारदर्शिता की मांग की।
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