Sambhal Masjid Case: High Court की सख्त टिप्पणी, Law & Order नहीं संभलता तो DM-SP दें इस्तीफा

Allahabad High Court
ANI
अंकित सिंह । Mar 14 2026 5:02PM

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के प्रशासनिक आदेश को रद्द करते हुए कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यदि जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ हैं, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि यह राज्य का परम कर्तव्य है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने शनिवार को संभल जिले की एक मस्जिद में नमाज अदा करने वाले लोगों की संख्या सीमित करने वाले प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया। याचिका में इस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें मस्जिद में नमाज अदा करने वाले लोगों की संख्या सीमित की गई थी। सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि स्थानीय प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने में असमर्थ है, तो संबंधित अधिकारियों को पद छोड़ देना चाहिए।

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पीठ ने कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) को लगता है कि मस्जिद परिसर में बड़ी संख्या में लोगों के नमाज अदा करने से कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है, तो उन्हें या तो अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर स्थानांतरण की मांग करनी चाहिए। न्यायालय ने आगे कहा कि यदि अधिकारियों को लगता है कि वे कानून का पालन कराने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पद छोड़ देना चाहिए, इस बात पर जोर देते हुए कि सभी परिस्थितियों में कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना राज्य का कर्तव्य है।

पीठ ने यह भी कहा कि उसने पहले एक अन्य मामले में यह टिप्पणी की थी कि निजी संपत्ति पर पूजा या प्रार्थना करने के लिए सरकार की पूर्व अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन और न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की खंडपीठ ने की। कार्यवाही के दौरान, राज्य सरकार के वकील ने मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इस बीच, याचिकाकर्ता ने प्रार्थना स्थल को दर्शाने के लिए तस्वीरें और राजस्व अभिलेख प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा।

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यह याचिका मुनाज़िर खान ने दायर की है, जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार के साथ-साथ संभल के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक को भी पक्षकार बनाया गया है। अदालत ने मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए 16 मार्च की तारीख दी है।

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