अमेठी तो गंवाया ही, अब अमेठी के राजा भी हाथ झटक कर चल दिए

भाजपा की ताकत का अंदाजा कहें या कांग्रेस की दरकती जमीन की तकाजा की पार्टी बदलने में माहिर संजय सिंह ने राज्यसभा सदस्यता खत्म होने से आठ महीने पहले ही कांग्रेस को अलविदा कह दिया।
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने पार्टी और राज्यसभा सदस्यता दोनों से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे को राज्यसभा सभापति एम वेंकैया नायडू ने स्वीकार भी कर लिया है। संजय सिंह भाजपा में शामिल हो रहे हैं। असम से राज्यसभा भेजे गए संजय सिंह का एक साल का कार्यकाल शेष था। लेकिन एक साल पहले ही उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। संजय सिंह ने इस्तीफे के बाद कहा, 'मैं कांग्रेस इसलिए छोड़ रहा हूं क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व में जीरो है। मैं 'सबका साथ सबका विकास' के कारण मोदी का समर्थन करता हूं। सिंह के इस कदम से उत्तर प्रदेश की राजनीति में प्रियंका के नेतृत्व में मिशन 2022 में लगी कांग्रेस को करारा झटका लगा है। उसका भाजपा भरपूर लाभ ले रही है। कांग्रेस के पास संजय सिंह के रुप में एक विरासत थी जिसे उन्होंने खो दिया है। अपने बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस की राजनीतिक और रणनीतिक चूक कही जाएगी कि वो संजय सिंह को पार्टी में रोक कर नहीं रख सकी। यूं तो आजादी के बाद भारत में तमाम रियासतें खत्म हो गई थी। लेकिन अमेठी रियासत के राजमहल ‘भूपति भवन’ की परंपराएं हमेशा बरकरार रहीं। इसलिए महाराजा रणंजय सिंह के बाद महल के महाराज बने संजय सिंह। जिसके बाद उनके पारिवारिक जंग से लेकर सियासत की जंग भी देखने को मिली। संजय सिंह ने बैडमिंटन के चैम्पियन सैय्यद मोदी की विधवा अमिता मोदी से शादी की थी। जिसके बाद से ही उनकी पत्नी गरिमा सिंह अमेठी के राजमहल से चली गई थीं। जिसके इसको लेकर जंग भी चली।
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