चिदंबरम की जमानत याचिका पर SC ने CBI को जारी किया नोटिस

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 4, 2019   14:06
  • Like
चिदंबरम की जमानत याचिका पर SC ने CBI को जारी किया नोटिस

चिदंबरम की अपील पर सुनवाई शुरू करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उच्च न्यायलाय के 30 सितंबर के फैसले का जिक्र करते हुये कहा कि अदालत ने जमानत देने से इंकार करते समय तीन पहलुओं - भागने का खतरा, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करना- पर गौर किया था।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने आईएनएक्स मीडिया भ्रष्टाचार मामले में जेल में बंद पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम की जमानत याचिका पर शुक्रवार को सीबीआई को नोटिस जारी किया।  न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति ऋषिकेश राय की पीठ ने केन्द्रीय जांच ब्यूरो की ओर से पेश सालिसीटर जनरल तुषार मेहता को इस याचिका पर जवाब दाखिल करने का निर्देश देने के साथ ही चिदंबरम की याचिका 15 अक्टूबर के लिये सूचीबद्ध कर दी। चिदंबरम ने अपनी याचिका में उन्हें जमानत देने से इंकार करने के दिल्ली उच्च न्यायालय के 30 सितंबर के फैसले को चुनौती दी है। संप्रग सरकार में 2004 से 2014 के दौरान वित्त और गृह मंत्री रहे पी चिदंबरम इस समय न्यायिक हिरासत में हैं। सीबीआई ने उन्हें 21 अगस्त को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया समूह को 2007 में दूसरे देशों से 305 करोड़ रुपये का कोष प्राप्त करने के लिए विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी दिलाने में अनियमितता बरतने के आरोप 15 मई 2017 को मामला दर्ज किया था। जिस समय यह मंजूरी दी गई उस वक्त चिदंबरम वित्तमंत्री थे। इसके आधार पर उसी साल प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने धनशोधन का मामला दर्ज किया था। 

इसे भी पढ़ें: चिदंबरम ने मोदी सरकार पर उठाया सवाल, बोले- देश में कहां हैं आजादी, समानता और भाईचारा

चिदंबरम की अपील पर सुनवाई शुरू करते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उच्च न्यायलाय के 30 सितंबर के फैसले का जिक्र करते हुये कहा कि अदालत ने जमानत देने से इंकार करते समय तीन पहलुओं - भागने का खतरा, साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और गवाहों को प्रभावित करना- पर गौर किया था। सिब्बल ने कहा कि उनके भागने की संभावना और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ के पहलू पर उच्च न्यायालय ने चिदंबरम के पक्ष में व्यवस्था दी जबकि गवाहों को प्रभावित करने संबंधी तीसरे बिन्दु पर उसका निर्णय कांग्रेस नेता के खिलाफ था। पीठ ने चिदंबरम की ओर से पेश सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी से सवाल किया, ‘‘यह तो सीबीआई के मामले के बारे में है। प्रवर्तन निदेशालय के मामले का क्या हुआ।’’ इसके जवाब मे सिब्बल ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन के मामले में चिदंबरम को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। सिब्बल और सिंघवी ने कहा कि चिदंबरम की अपील पर बहस करने के लिये उन्हें 30 मिनट का वक्त चाहिए। पीठ ने इस पर सालिसीटर जनरल को सीबीआई की ओर से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को 15 अक्टूबर के लिये सूचीबद्ध कर दिया। 

इसे भी पढ़ें: INX मीडिया मामले में पी चिदंबरम को नहीं मिली राहत, करवा चौथ तक जेल में रहेंगे

मेहता ने कहा कि वह सीबीआई की ओर से 14 अक्टूबर तक जवाब दाखिल कर देंगे। सिब्ब्ल ने कहा कि अगर जरूरी हुआ तो वह सीबीआई के जवाब में अपना प्रत्युत्तर दाखिल करेंगे। पीठ ने निर्देश दिया कि इस मामले मे जवाब और प्रत्युत्तर 14 अक्टूबर तक दाखिल किये जायें।चिदंबरम ने अपनी याचिका में कहा है कि सीबीआई की ओर से मुहैया कराए गए सीलबंद दस्तावेज के आधार पर उच्च न्यायालय ने फैसला लिया लेकिन वे दस्तावेज न तो रिकॉर्ड के हिस्सा थे और न ही उन्हें दिखाया गया। यही नहीं,उन्हें इसपर अपना पक्ष रखने का भी मौका नहीं दिया गया।याचिका में दावा किया गया है कि उच्च न्यायालय ने गवाहों को प्रभावित करने की संभावना के बारेमें बिना किसी पुख्ता दस्तावेज और असत्यापित आरोपों के आधार पर जमानत याचिका खारिज कर गलती की।  चिदंबरम ने न्यायालय के निष्कर्ष को भी नकार दिया जिसके मुताबिक आईएनएक्स के पूर्व प्रवर्तक इंद्राणी और पीटर मुखर्जी ने उनसे मुलाकात की और उन्हें गलत तरीके से लाभ पहुंचाया गया। पूर्व वित्त मंत्री ने आगे कहा कि इस मामले को आर्थिक अपराध से जोड़ा नहीं गया है और सरकार को इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने उच्च न्यायालय के इस निष्कर्ष से भी इनकार किया कि कथित सह साजिशकर्ता एवं उनके बेटे कार्ति चिदंबरम के स्वामित्व या नियंत्रण वाली कंपनी में भारी संख्या में राशि आई। 





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


किसान आंदोलन पर बोले कैलाश चौधरी, यूनियन से कम्युनिस्ट निकल जाएं तो समाधान हो जाएगा

  •  अंकित सिंह
  •  जनवरी 18, 2021   13:13
  • Like
किसान आंदोलन पर बोले कैलाश चौधरी, यूनियन से कम्युनिस्ट निकल जाएं तो समाधान हो जाएगा

कैलाश चौधरी ने यह भी कहा कि शुरू में जब पहली बैठक हुई थी, तब उनके जो मुद्दे थे उन पर सरकार ने अमल करके उसमें संशोधन कर लिया है। उसके लिए लिखित में आश्वासन देने की बात भी हो चुकी है। कल इस मानसिकता के साथ बैठें कि कोई न कोई समाधान निकालना है।

सरकार और किसानों के बीच में कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध जारी है। अब तक लगभग 9 दौर की बातचीत हो चुकी है लेकिन निष्कर्ष कुछ नहीं निकल पाया है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। इस सब के बीच केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने बड़ा बयान दिया है। न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक कैलाश चौधरी ने कहा कि किसान यूनियन के कुछ नेता चाहते हैं कि इसका समाधान हो। अगर यूनियन से कम्युनिस्ट निकल जाएं तो कल इसका समाधान हो जाएगा। कम्युनिस्ट, कांग्रेस और कुछ राजनीतिक दल कभी नहीं चाहते कि इसका समाधान हो।

इसके आगे कैलाश चौधरी ने यह भी कहा कि शुरू में जब पहली बैठक हुई थी, तब उनके जो मुद्दे थे उन पर सरकार ने अमल करके उसमें संशोधन कर लिया है। उसके लिए लिखित में आश्वासन देने की बात भी हो चुकी है। कल इस मानसिकता के साथ बैठें कि कोई न कोई समाधान निकालना है। आपको बता दें कि सरकार ने विरोध प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों से तीन कृषि कानून के बारे में अपनी आपत्तियां और सुझाव रखने एवं ठोस प्रस्ताव तैयार करने के लिये एक अनौपचारिक समूह गठित करने को कहा जिस पर 19 जनवरी को अगले दौर की वार्ता में चर्चा हो सकेगी। तीन केंद्रीय मंत्रियों के साथ शुक्रवार को हुई नौवें दौर की वार्ता में प्रदर्शनकारी किसान तीन नये विवादित कृषि कानूनों को निरस्त करने की अपनी मांग पर अड़े रहे जबकि सरकार ने किसान नेताओं से उनके रुख में लचीलापन दिखाने की अपील की एवं कानून में जरूरी संशोधन के संबंध अपनी इच्छा जतायी। 





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


पाकिस्तान में अलग सिंधु देश की मांग, PM मोदी की तस्वीरों के साथ प्रदर्शन

  •  अभिनय आकाश
  •  जनवरी 18, 2021   13:03
  • Like
पाकिस्तान में अलग सिंधु देश की मांग, PM मोदी की तस्वीरों के साथ प्रदर्शन

पीएम मोदी के अलावा कई अन्य बड़े देशों के नेताओं के पोस्टर भी इस रैली में थे। प्रदर्शन करने वाले लोग अलग सिंधुदेश और पीएम मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी पीएम मोदी से सिंध को अलग गेश बनाने के लिए समर्थन भी मांग रहे थे।

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के तारे गर्दिश में हैं। पाकिस्तान में इमरान खान पर विपक्ष तो हमलावर था ही जैसा जनता का रुख है उसने भी इमरान खान की मुश्किलें बढ़ा दी है। रविवार को सिंध के सान कस्बे में सैकड़ों की संख्या में लोगों ने प्रदर्शन किया। रैली में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बैनर और पोस्टर भी देखने को मिले। पीएम मोदी के अलावा कई अन्य बड़े देशों के नेताओं के पोस्टर भी इस रैली में थे। प्रदर्शन करने वाले लोग अलग सिंधुदेश और पीएम मोदी के समर्थन में नारे लगा रहे थे। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी पीएम मोदी से सिंध को अलग गेश बनाने के लिए समर्थन भी मांग रहे थे। 

इसे भी पढ़ें: पाकिस्तान ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के टीके को दी आपात इस्तेमाल की मंजूरी

 गौरतलब है कि 1947 के भारत-पाक बंटवारे से लेकर अब तक पाकिस्तान के दोयम दर्जे की नीतियों और सेना की जूतों के तले रखने की आदतों का शिकार होना पड़ता है। जिस तरह बलूचिस्तान पश्चूनिस्तान की मांग पंजाबी वर्चस्व वाली पाकिस्तानी सरकार और सेना के लिए गले की हड्डी बनी हुई है, ठीक उसी तरह सिंध प्रांत की मांग भी लंबे अरसे की की जाती रही है। वहां की सड़कों पर रह-रहकर यह नारा जोर मारता है 'कल बना था बांग्लादेश, अब बनेगा सिंधुदेश'।





नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


ट्रैक्टर रैली रोकने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कानून-व्यस्था का मामला

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 18, 2021   13:03
  • Like
ट्रैक्टर रैली रोकने संबंधी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, यह कानून-व्यस्था का मामला

ट्रैक्टर रैली रोकने संबंधी याचिका पर न्यायालय ने कहा कि यह कानून-व्यस्था का मामला है।पीठ ने कहा, ‘‘दिल्ली में प्रवेश का मामला न्याय व्यवस्था से जुड़ा है और पुलिस इस पर फैसला करेगी।’’ उसने कहा, ‘‘अटॉर्नी जनरल, हम इस मामले की सुनवाई स्थगित कर रहे हैं और आपके पास इस मामले से निपटने का पूरा अधिकार है।

नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि 26 जनवरी को किसानों की प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है और यह फैसला लेने का पहला अधिकार पुलिस को है कि राष्ट्रीय राजधानी में किसे प्रवेश की अनुमति दी जानी चाहिए। प्रस्तावित ट्रैक्टर या ट्रॉली रैली अथवा गणतंत्र दिवस पर समारोहों एवं सभाओं को बाधित करने की कोशिश करने अन्य प्रकार के प्रदर्शनों पर रोक का अनुरोध करने वाली केंद्र की याचिका पर सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि पुलिस के पास इस मामले से निपटने का पूरा अधिकार हैं।

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में बादल छाने के कारण न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा

न्यायमूर्ति एलएन राव और न्यायमूर्ति विनीत सरन भी इस पीठ में शामिल हैं। पीठ ने कहा, ‘‘क्या उच्चतम न्यायालय यह बताएगा कि पुलिस की क्या शक्तियां हैं और वह इनका इस्तेमाल कैसे करेगी? हम आपको यह नहीं बताने जा रहे कि आपको क्या करना चाहिए।’’ पीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल को बताया कि मामले में आगे की सुनवाई 20 जनवरी को होगी। पीठ ने कहा, ‘‘दिल्ली में प्रवेश का मामला न्याय व्यवस्था से जुड़ा है और पुलिस इस पर फैसला करेगी।’’ उसने कहा, ‘‘अटॉर्नी जनरल, हम इस मामले की सुनवाई स्थगित कर रहे हैं और आपके पास इस मामले से निपटने का पूरा अधिकार है।





Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy and Cookie Policy.Accept