SIR को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, 13 जनवरी को अर्जियों पर सुनवाई

6 जनवरी को, निर्वाचन आयोग ने पीठ को बताया था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने का अधिकार और क्षमता उसके पास है, साथ ही यह सुनिश्चित करना संवैधानिक कर्तव्य है कि किसी भी विदेशी को मतदाता के रूप में पंजीकृत न किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार समेत कई राज्यों में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए भारत निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर अंतिम सुनवाई 13 जनवरी तक के लिए स्थगित कर दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिन में इन याचिकाओं की सुनवाई तय की थी, लेकिन बाद में कहा कि वह मंगलवार (13 जनवरी) को कार्यवाही फिर से शुरू करेगी। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी मामले में अपनी दलीलें फिर से पेश करने वाले थे। 6 जनवरी को, निर्वाचन आयोग ने पीठ को बताया था कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करने का अधिकार और क्षमता उसके पास है, साथ ही यह सुनिश्चित करना संवैधानिक कर्तव्य है कि किसी भी विदेशी को मतदाता के रूप में पंजीकृत न किया जाए।
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चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि कार्यवाही मंगलवार को फिर से शुरू की जाएगी। मामले में चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी को अपने तर्क आगे बढ़ाने थे। 6 जनवरी को चुनाव आयोग ने पीठ को बताया था कि उसके पास मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) करने की शक्ति और क्षमता है, और इसके साथ ही यह संवैधानिक दायित्व भी है कि कोई भी विदेशी मतदाता के रूप में पंजीकृत न हो। इन याचिकाओं में बिहार सहित कई राज्यों में एसआईआर कराने के चुनाव आयोग के निर्णय को चुनौती दी गई है और इनमें चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा, नागरिकता तथा मतदान के अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं।
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सर्वोच्च न्यायालय उन कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है जिनमें यह तर्क दिया गया है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग की संवैधानिक शक्तियों का उल्लंघन कर सकती है। इन कार्यवाही के परिणाम से मतदाता सूची संशोधन के संबंध में चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र और इसके परस्पर संबंध के बारे में स्पष्टता आने की उम्मीद है।
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