Supreme Court का निर्देश: Russia Ukraine War पीड़ितों की सहायता के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त हो

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को विदेश मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्देश दिया, जो रूस-यूक्रेन युद्ध में प्रभावित भारतीयों के परिजनों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। पीठ ने विदेश मंत्रालय को पीड़ित परिवारों को डीएनए मिलान और रूसी दूतावास में मुआवजे के दावे दाखिल करने में सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। इसके अलावा शीर्ष अदालत ने नालसा और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी परिजनों को हरसंभव मदद देने को कहा।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह विदेश मंत्रालय में एक नोडल अधिकारी नियुक्त करे, जो रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए, लापता या घायल हुए भारतीयों के परिजनों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने विदेश मंत्रालय को यह भी निर्देश दिया कि मारे गए लोगों से उनके परिजनों का डीएनए मिलान कराने की व्यवस्था की जाए। पीठ ने विदेश मंत्रालय से कहा कि वह प्रभावित परिवारों को नयी दिल्ली स्थित रूसी दूतावास में मुआवजे के दावे दाखिल करने में सहायता प्रदान करे तथा मामले से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी और अद्यतन सूचनाएं स्थानीय भाषाओं में उपलब्ध कराए।
पीठ ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों को भी निर्देश दिया कि वे परिजनों को शव प्राप्त करने और मुआवजे के दावे दाखिल करने में हरसंभव सहायता प्रदान करें। ये निर्देश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिए गए, जिसे उन लोगों के परिजनों ने दायर किया था, जिनकी रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए भर्ती किए जाने के बाद कथित रूप से मौत हो गई या वे लापता हो गए। याचिका में कहा गया कि कई लोगों को ट्रैवल एजेंटों ने धोखे से रूस भेजा और उन्हें युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया।
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