Supreme Court ने Polygamy पर केंद्र से मांगा जवाब, मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा की मांग

सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह को अपराध घोषित करने और महिलाओं के लिए आर्थिक व कानूनी सुरक्षा की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस प्रथा के कारण कई महिलाएं उपेक्षित और असुरक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं। न्यायालय ने लैंगिक समानता और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े इस मामले पर सरकार से उसकी राय मांगी है।
नई दिल्ली: भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम समुदाय में बहुविवाह (Polygamy) को आपराधिक बनाने और दूसरी शादी के बाद पतियों द्वारा छोड़ी गई महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा और कानूनी सुरक्षा की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
याचिका में क्या है मांग? यह याचिका मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से दायर की गई है। इसमें मांग की गई है कि मुस्लिम पुरुषों द्वारा एक से अधिक विवाह करने को गैरकानूनी घोषित किया जाए और इसे अपराध की श्रेणी में लाया जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस प्रथा के कारण कई महिलाएं असुरक्षित और उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं। वे पतियों द्वारा छोड़े जाने के बाद आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर हो जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब इस महत्वपूर्ण मामले पर संज्ञान लेते हुए, सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर इस याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा है। न्यायालय यह जानना चाहता है कि इस मुद्दे पर सरकार की क्या राय है और क्या इस संबंध में कोई कदम उठाने की आवश्यकता है। यह मामला मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता से जुड़ा हुआ है, जिस पर समाज और कानून में लंबे समय से बहस चल रही है।
बहुविवाह का मुद्दा भारत में बहुविवाह एक संवेदनशील और विवादास्पद मुद्दा रहा है। हालांकि, मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत कुछ शर्तों के साथ पुरुषों को एक से अधिक विवाह की अनुमति है। याचिकाकर्ता इस प्रथा को समाप्त करने और महिलाओं को समान अधिकार दिलाने की वकालत कर रहे हैं। न्यायालय का यह कदम इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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