प्रवासी मजदूर बंगाल लौट आएं, सरकार देगी 125 दिनों का काम: शुभेंदु अधिकारी

Suvendu Adhikari
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पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने प्रवासी मजदूरों से वापस लौटने की अपील की है और उन्हें 125 दिनों का काम देने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने सिक्किम सुरंग हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को वित्तीय सहायता और सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र भी सौंपे। अधिकारी ने उत्तर बंगाल के विकास के लिए सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और औद्योगिक पहलों की घोषणा की।

(तस्वीरों के साथ) जलपाईगुड़ी, 27 जुलाई पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को राज्य के प्रवासी मजदूरों से घर लौटने की अपील की और भरोसा दिलाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत सरकार रोजगार के अवसर पैदा करेगी और जॉब कार्ड पाने वाले लोगों को 125 दिन का काम देगी। इससे पहले, शुभेंदु ने सिक्किम के नामची जिले में हाल ही में सुरंग ढहने की घटना में मारे गए राज्य के 11 प्रवासी मजदूरों के परिवारों को आर्थिक मदद सौंपी और नौ पीड़ित परिवारों के एक-एक सदस्य के लिए सरकारी नौकरी की घोषणा की। मुख्यमंत्री अधिकारी ने जलपाईगुड़ी जिलाधिकारी कार्यालय में प्रभावित परिवारों से मिलने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि प्रभावित सभी 11 परिवारों को कुल 21-21 लाख रुपये की अनुग्रह राशि मिलेगी।

उन्होंने नौकरी की तलाश में दूसरे राज्यों में गए कामगारों से वापस लौटने की अपील करते हुए कहा कि राज्य ‘‘विकास के दौर’’ में प्रवेश कर रहा है और उत्तर बंगाल में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कई पहलों की रूपरेखा पेश की। शुभेंदु ने कहा, ‘‘मैं प्रवासी मजदूरों से वापस आने की अपील करता हूं। राज्य सरकार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।

जो लोग वापस आएंगे, वे नए जॉब कार्ड बनवा सकते हैं और 125 दिनों का काम पा सकते हैं। केंद्र सरकार मुफ्त राशन दे रही है, आयुष्मान भारत योजना उपलब्ध है, और जो लोग इसके दायरे में नहीं आते, उन्हें मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ मिलेगा। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि वापस आने के बाद उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो।’’ शुभेंदु ने कहा कि राज्य सरकार दक्षिण बंगाल की तर्ज पर उत्तरी बंगाल में भी डेरी सहकारिता अमूल को 15 एकड़ भूमि आवंटित करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि उद्योग विभाग ने इस परियोजना के लिए भूमि पहले ही चिह्नित कर ली है। उन्होंने चाय उद्योग की स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में अभी 25 चाय बागान बंद हैं, जिससे कई मजदूरों को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को ‘प्रधानमंत्री चाय श्रमिक योजना’ के तहत लाया गया है, जिसके अंतर्गत चाय बागान श्रमिकों को आर्थिक सहायता के लिए 330 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

उन्होंने उम्मीद जताई कि श्रम मंत्री अर्जुन सिंह और टी बोर्ड के चेयरमैन की कोशिशों से अगले दो-तीन महीनों में बंद पड़े 10 से 12 चाय बागान फिर से चालू हो जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार मालदा में कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए भी काम कर रही है। इसमें आम, लीची, मखाना, अन्नानास और मक्के के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के साथ-साथ इलाके के मशहूर ‘तुलाईपंजी’ चावल पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना भी शामिल है।

उन्होंने उत्तर बंगाल के विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि यह क्षेत्र राज्य प्रशासन की प्राथमिकता बना हुआ है। मुख्यमंत्री ने पड़ोसी राज्य में हुए सुरंग हादसे में मारे गए परिवारों को मदद देने के बाद यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज हमने जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को आर्थिक मदद दी है। नौ परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी दी जाएगी।

इनमें से सात को होम गार्ड के तौर पर और दो को नागरिक स्वयंसेवक के तौर पर नियुक्त किया जाएगा। दुख की इस घड़ी में हम इन परिवारों के साथ मजबूती से खड़े हैं।’’ अधिकारी ने खुद पीड़ित परिवारों के सदस्यों को नियुक्ति पत्र और राज्य सरकार की ओर से आर्थिक मदद सौंपी। इनमें से कई लोग मालबाज़ार और उत्तर बंगाल के दूसरे इलाकों से आए थे।

उन्होंने मारे गए कर्मचारियों के माता-पिता, जीवनसाथी और भाई-बहनों से भी बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘‘यह कोई परमार्थ का कार्य नहीं है, बल्कि यह हमारी जिम्मेदारी है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री राहत कोष से हर शोक संतप्त परिवार को पांच-पांच लाख रुपये दे रही है।

सिक्किम सरकार पहले ही प्रत्येक परिवार को चार-चार लाख रुपये दे चुकी है। परियोजना में शामिल सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हर परिवार को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवज़ा दे रही है, जबकि काम कराने वाला निजी ठेकेदार भी हर परिवार को पांच-पांच लाख रुपये दे रहा है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।’’ उन्होंने कहा कि हादसे के तुरंत बाद राज्य सरकार सिक्किम सरकार के संपर्क में थी और बचाव कार्यों में मदद के लिए हरसंभव सहायता, जिसमें ज़रूरत पड़ने पर हेलीकॉप्टर भी शामिल थे, देने की पेशकश की थी।

शुभेंदु ने अपनी सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में कहा कि अन्नपूर्णा योजना के तहत लाभार्थियों का सत्यापन कार्य जारी है और इसे 30 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘‘अन्नपूर्णा योजना के तहत लाभ न पाने वाली पात्र महिलाओं को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है और सभी पात्र लाभार्थियों को पारदर्शी तरीके से सहायता मिलेगी।’’ भाजपा सरकार ‘अन्नपूर्णा योजना’ के तहत महिला लाभार्थियों को हर महीने 3,000 रुपये की आर्थिक मदद देती है।

राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि कई महिलाओं को जून और जुलाई का भुगतान किया जा चुका है और बाकी आवेदकों के सत्यापन का कार्य किया जा रहा है। शुभेंदु ने बाद में सिलीगुड़ी-बर्दवान रोड फ्लाईओवर का उद्घाटन करने के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार और सरकारी विभागों को उत्तर बंगाल सचिवालय ‘उत्तरकन्या’ में स्थानांतरित करके कामकाज का विस्तार करेगी। उन्होंने कहा कि इससे उत्तर बंगाल के लोगों को सरकारी काम के लिए कोलकाता जाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर खुशी जताई कि उनकी सरकार सिलीगुड़ी-बर्दवान रोड फ्लाईओवर का काम पूरा कर सकी। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा केंद्र के साथ ‘‘सहयोग नहीं करने’’ की वजह से इस परियोजना में देरी हुई। शुभेंदु ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर (जिसे ‘चिकन्स नेक’ के नाम से भी जाना जाता है) की वजह से उत्तर बंगाल को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि राज्य के इस हिस्से में लगातार बुनियादी ढांचे का विकास बहुत ज़रूरी है।

यह गलियारा पूर्वोत्तर राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने उत्तर बंगाल के लिए बजट आवंटन को दोगुना कर दिया है और बताया कि उनके मंत्रिमंडल में इस क्षेत्र से 10 मंत्री शामिल हैं, जो कि ‘अभूतपूर्व’ है।

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