SIR पर MK Stalin ने की मिलीभगत, TVK नेता आधव अर्जुन का बड़ा आरोप

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तमिलगा वेत्री कषगम नेता आधव अर्जुन ने चेन्नई में एम. के. स्टालिन पर मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर निर्वाचन आयोग और केंद्र के साथ सांठगांठ का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया के तहत 97 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए। टीवीके ने इस मामले को लेकर उच्चतम न्यायालय में भी याचिका दायर की थी।

सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेता आधव अर्जुन ने द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का विरोध करने का ‘‘ढोंग’’ करने और गुपचुप तरीके से निर्वाचन आयोग व केंद्र सरकार के साथ ‘‘मिलीभगत’’ कर ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ करने का गंभीर आरोप लगाया। तमिलनाडु सरकार में लोक निर्माण विभाग के मंत्री अर्जुन ने तर्क दिया कि एसआईआर भले ही निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू किया गया, लेकिन द्रमुक तमिलनाडु की हर गली और मोहल्ले में इसे पूर्ण रूप से लागू करने के लिए जिम्मेदार रही। उन्होंने स्टालिन को इस दावे को गलत साबित करने की चुनौती देते हुए द्रमुक प्रमुख को इसका “सबसे बड़ा दोषी” करार दिया।

टीवीके के महासचिव अर्जुन ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 97 लाख से अधिक मतदाताओं (विशेषकर 30 वर्ष से कम आयु के युवाओं और महिलाओं) के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए, लेकिन द्रमुक की ओर से इसके खिलाफ न तो कोई विरोध हुआ और न ही कोई आधिकारिक बयान आया। उन्होंने कहा कि जब अनियमितताएं सामने आईं, तो उनकी पार्टी टीवीके ने इस प्रक्रिया को रद्द कराने के लिए उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की थी। अर्जुन ने कहा कि स्टालिन अब एसआईआर को लेकर ‘‘घड़ियाली आंसू’’ बहा रहे हैं।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि तमिलनाडु की जनता लोकतंत्र के साथ किए गए इस ‘‘विश्वासघात’’ के लिए द्रमुक को कभी माफ नहीं करेगी। टीवीके नेता ने बुधवार को जारी एक कड़े बयान में पूर्व मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वह राज्य के अधिकारों के मुद्दे पर केंद्र सरकार का विरोध करने की छवि पेश करते हैं, लेकिन पर्दे के पीछे उन्होंने तमिलनाडु में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया द्रमुक के नियंत्रण में संचालित करने के लिए केंद्र की सत्तारूढ़ भाजपा और निर्वाचन आयोग के साथ “गुपचुप हाथ मिलाया’’था। टीवीके के अनुसार, 27 अक्टूबर 2025 से 23 फरवरी 2026 के बीच एसआईआर के दौरान सत्तारूढ़ दल के हितों को साधने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया गया।

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि द्रमुक ने निर्वाचन आयोग और राज्य तंत्र से डेटा निकालने के लिए एक निजी फर्म का इस्तेमाल किया, जिसने मतदान के दिन मतदाताओं पर नजर रखने के लिए एक विशेष ऐप विकसित किया था। उन्होंने दावा किया कि यदि एसआईआर प्रक्रिया में मतदाता सूचियों से मतदाताओं के नाम न हटाए गए होते, तो टीवीके विधानसभा चुनाव में मिली 108 सीट के बजाय 160 से अधिक सीट हासिल करती और द्रमुक प्रमुख विपक्षी दल का दर्जा पाने लायक भी नहीं रहती।

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