केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने नगालैंड के सुदूर जुन्हेबोतो जिले का दौरा किया

Rajeev Chandrasekhar
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चंद्रशेखर ने कहा, ‘हमारा जोर स्थानीय संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल और शहरों की ओर पलायन को कम करने पर होना चाहिए।’ उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की तथा पदाधिकारियों से अंतिम व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए उत्साहपूर्वक काम करने का अनुरोध किया।

केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने सोमवार को नगालैंड के सुदूरवर्ती जुन्हेबोतो जिले का दौरा किया। वह चार दशक में इस पर्वतीय शहर का दौरा करने वाले पहले केंद्रीय मंत्री हैं। केंद्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री चंद्रशेखर दीमापुर से नौ घंटे की सड़क यात्रा के बाद जुन्हेबोतो शहर पहुंचे। वह नगालैंड के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। जुन्हेबोतो राज्य की राजधानी से करीब 124 किलोमीटर दूर स्थित है।

जुन्हेबोतो में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ एक बैठक में उन्होंने उनसे जिला कौशल विकास की योजना विकसित करने के लिए कहा, जिसमें स्थानीय आकांक्षाओं को जगह दी जाए और नौकरियों एवं उद्यमिता के अवसर पैदा किए जाएं। चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘हमारा जोर स्थानीय संसाधनों के अधिकतम इस्तेमाल और शहरों की ओर पलायन को कम करने पर होना चाहिए।’’ उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन की भी समीक्षा की तथा पदाधिकारियों से अंतिम व्यक्ति तक इन योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए उत्साहपूर्वक काम करने का अनुरोध किया।

उन्होंने जुन्हेबोतो तथा वोखा जिलों में केंद्र सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से भी मुलाकात की, जिन्होंने उन्हें बताया कि इन योजनाओं से कैसे उनकी जिंदगियां बदल गयी हैं। केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘ऐसे मौकों पर मुझे ‘सबका साथ, सबका विश्वास’ के जरिए जिंदगियों को बदलने की दूरदृष्टि में छोटी सी भूमिका निभाकर मोदी सरकार में मंत्री होने पर वाकई गर्व महसूस होता है।’’

चंद्रशेखर ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें भी कीं और उनके साथ ‘सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास और सबका प्रसाद’ पर आधारित नए भारत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि को साझा किया। केंद्रीय राज्यमंत्री जुन्हेबोतो में सुमी बैपटिस्ट चर्च भी गए, जिसे एशिया में सबसे बड़े बैपटिस्ट गिरजाघर के तौर पर जाना जाता है। उन्होंने गिरजाघर में प्रार्थना की। बाद में दोपहर को वह वोखा के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने जिला अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, कारोबारी समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ कई बैठकें कीं। चंद्रशेखर मंगलवार शाम को दिल्ली लौटेंगे।

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