Vande Bharat स्लीपर ट्रेन: ICF 10 नवंबर तक तय करेगी 24 कोच का डिजाइन, 2027 में प्रोटोटाइप

चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) 10 नवंबर तक 24 डिब्बों वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के डिजाइन को अंतिम रूप देगी। इसके बाद मई या जून 2027 तक इसका पहला प्रोटोटाइप तैयार होने की संभावना है। ट्रेन के निर्माण से जुड़े सुधांशु मणि ने इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण और स्वागतयोग्य बताया है।
(जीवन प्रकाश शर्मा) नयी दिल्ली, 15 अक्टूबर भारत की वंदे भारत ट्रेन के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सुधांशु मणि ने सवारी डिब्बा कारखाना (आईसीएफ) की उस योजना का स्वागत किया है, जिसके तहत चार साल से अधिक की देरी के बाद इस साल 10 नवंबर तक 24 डिब्बों वाली स्लीपर ट्रेन के डिजाइन को अंतिम रूप देने का लक्ष्य है। चेन्नई स्थित आईसीएफ ने चार साल से अधिक समय पहले 24 बोगी वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के लिए तकनीकी आवश्यकताएं जारी की थीं। आईसीएफ ने हाल ही में घोषणा की है कि वह 10 नवंबर तक इसके डिजाइन को अंतिम रूप दे देगी।
इसके ‘प्रोटोटाइप’ के मई या जून 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है। वर्तमान में, 16 बोगी वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चल रही है जिसे यात्रियों की जबरदस्त सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। इस आधुनिक ट्रेन में यात्रियों की सुविधा के लिए कई विशेषताएं हैं जिनमें आपेक्षाकृत तेज रफ्तार, बेहतर गद्देदार और शरीर की बनावट के अनुरूप डिजाइन की गई बर्थ, डिब्बों के बीच सुगम आवाजाही के लिए गलियारे और स्वचालित दरवाजे, कम शोर के बीच आरामदायक यात्रा और बेहतर सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए कीटाणुशोधन तकनीक शामिल हैं।
मणि ने कहा, ‘‘नवंबर 2026 तक 24 बोगी वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के डिजाइन को अंतिम रूप देने और 2027 के मध्य तक उसका प्रोटोटाइप तैयार करने की आईसीएफ की योजना एक स्वागतयोग्य और महत्वपूर्ण कदम है। देर आए, दुरुस्त आए। यह समयसीमा बेहद महत्वपूर्ण है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस समयसीमा को पूरा करने से आईसीएफ को अपनी प्रमुख डिजाइन और निर्माण क्षमताओं का पूरा लाभ उठाने, अधिकतम क्षमता वाली रेलगाड़ियों के जरिये सीमित रेल पटरियों का बेहतर उपयोग करने और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप यात्रियों को सुखद अनुभव उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।’’ मणि ने कहा कि 2018 में वंदे भारत की शुरुआत से ही यह स्पष्ट था कि इसके स्लीपर संस्करण की अंततः आवश्यकता होगी।
उन्होंने आईसीएफ की डिब्बे बनाने की ऐतिहासिक विरासत की सराहना करते हुए कहा, ‘‘दिन में चलने वाली चेयर-कार ट्रेनों की मांग एक समय के बाद सीमित होनी ही थी। ऐसे में रात भर की यात्रा के लिए स्लीपर ट्रेनों की जरूरत स्वाभाविक थी। मौजूदा स्थिति भी इसकी पुष्टि करती है।
वंदे भारत की दिन में चलने वाली करीब 30 प्रतिशत ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी कम है।’’ उन्होंने देरी का उल्लेख करते हुए कहा कि मूल योजना के अनुसार, आईसीएफ को 2019 के अंत तक स्लीपर ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार कर देना था। हालांकि, वंदे भारत परियोजना में करीब चार साल की देरी के कारण निर्धारित समयसीमा पूरी नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि इस देरी के चलते एक कमतर विकल्प अपनाना पड़ा।
कुछ मार्गों पर मानक 16 डिब्बों वाली चेयर-कार वंदे भारत ट्रेन के बजाय आठ डिब्बों वाली ट्रेन चलानी पड़ी। संभवतः ऐसा सरकार द्वारा अनुमानित विभिन्न आशावादी आंकड़ों के अनुरूप सेवाएं संचालित करने के लिए किया गया। मणि ने कहा, ‘‘भारतीय रेलवे की पटरियों पर पहले से ही अत्यधिक ट्रेन दौड़ रही हैं।
ऐसे में लंबी रेलगाड़ियां चलाकर पटरियों की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना एक महत्वपूर्ण प्राथमिकता होनी चाहिए।’’ मणि ने कहा, ‘‘देश में अब रात भर की यात्रा के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेवाएं शुरू हो गई हैं। बीईएमएल द्वारा निर्मित ट्रेन ने हावड़ा और कामाख्या के बीच एक प्रमुख लंबी दूरी के मार्ग पर परिचालन शुरू करके स्लीपर सेवा की सफल शुरुआत की।’’
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