रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या होगी भारत की रणनीति ? चर्चा के लिए प्रधानमंत्री मोदी करेंगे बड़ी बैठक

रूस-यूक्रेन युद्ध पर क्या होगी भारत की रणनीति ? चर्चा के लिए प्रधानमंत्री मोदी करेंगे बड़ी बैठक
प्रतिरूप फोटो

भारत के सामने धर्मसंकट की स्थिति बनी हुई है क्योंकि रूस हमेशा से ही भारत का समर्थक रहा है। कोरोना महामारी के दौरान सबसे पहले रूस ने ही भारत की मदद की थी। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से नाटों और अमेरिका के साथ भी भारत के संबंध बेहतर हुए हैं।

नयी दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध को लेकर भारत की चिंताए भी तेज हो गई हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य की रणनीतियां तैयार करने के लिए सीसीएस की बैठक करने वाले हैं। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव का प्रचार समाप्त कर प्रधानमंत्री दिल्ली पहुंचेंगे। जहां पर सीसीएस की बैठक होगी। इस बैठक में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, तीनों सेना प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी शामिल होंगे। 

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किसकी मदद करेगा भारत ?

भारत के सामने धर्मसंकट की स्थिति बनी हुई है क्योंकि रूस हमेशा से ही भारत का समर्थक रहा है। कोरोना महामारी के दौरान सबसे पहले रूस ने ही भारत की मदद की थी। इसके अलावा पिछले कुछ सालों से नाटों और अमेरिका के साथ भी भारत के संबंध बेहतर हुए हैं। ऐसे में भारत के सामने धर्मसंकट की स्थिति है कि वह किसकी मदद करे। इन्हीं तमाम मसलों पर सीसीएस की बैठक में चर्चा हो सकती है।

रूस-यूक्रेन के बीच शुरू हुआ युद्ध

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू हो चुका है। यूक्रेन ने दावा किया है कि रूसी हमले में अब तक करीब 40 लोग मारे जा चुके हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के सलाहकार ओलेक्सी एरेस्टोविच ने बताया कि रूसी हमले में कई लोग जख्मी हुए हैं। हालांकि उसमें आम नागरिक शामिल हैं या नहीं। इसकी अभी कोई जानकारी नहीं दी गई है। यूक्रेन ने आरोप लगाया है कि रूस ने उनके कई हिस्सों पर एक साथ हमला किया है। वहीं यूक्रेन का दावा है कि उन्होंने रूस को मुहंतोड़ जवाब देते हुए उनके 7 लड़ाकू विमानों को नेस्तनाबूत कर दिया है। 

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सुरक्षाबलों की तैनाती को और मजबूत करेगा नाटो

नाटो ने यूक्रेन और रूस के पास स्थित अपने पूर्वी किनारे में अपनी जमीनी, समुद्री बलों और वायुसेना की तैनाती को मजबूत करने पर एक आपातकालीन बैठक में सहमति जताई। नाटो के दूतों ने आपातकालीन बैठक के बाद एक बयान जारी कर बताया कि हम गठबंधन के पूर्वी हिस्से में अतिरिक्त रक्षात्मक जमीनी और वायुसेना, साथ ही अतिरिक्त समुद्री परिसंपत्ति तैनात कर रहे हैं। हमने सभी तरह की आकस्मिक स्थिति का जवाब देने के लिए अपने बलों की तैयारी बढ़ा दी है।





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