आजम खान और अखिलेश यादव के बीच मनमुटाव? मुसलमानों पर समाजवादी पार्टी का क्या होगा फ्यूचर प्लान

 Samajwadi Party
ani
रेनू तिवारी । May 22, 2022 11:05AM
समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को 27 महीने बाद शुक्रवार 20 मई को उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल से रिहा कर दिया गया। उन पर कई मामले दर्ज थे। जेल से रिहाई के बाद उन्होंने अपने बेबाक अंदाज में एक बार फिर से वापसी की और विरोधियों पर जमकर निशाना साधा।

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को 27 महीने बाद शुक्रवार 20 मई को उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल से रिहा कर दिया गया। उन पर कई मामले दर्ज थे। जेल से रिहाई के बाद उन्होंने अपने बेबाक अंदाज में एक बार फिर से वापसी की और विरोधियों पर जमकर निशाना साधा। आजम खान ने जेस ले रिहा होने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और तमाम सवालों का जवाब दिया। आजम खान और अखिलेख यादव के रिश्ते को लेकर काफी ज्यादा पार्टी में कंफ्यूजन चल रहा था। अखिलेश यादव का सीतापुर जेल में आजम खान से मिलने न जाना लोगों को यह संकेद दे रहा था कि अखिलेश और आजम खान के बीच सबकुछ ठीक नहीं हैं। हांलाकि आजम खान मीडिया से रूबरू होने के दौरान अखिलेश यादव के मुद्दे पर कुछ खास नहीं बोल सके लेकिन अन्य मुद्दों पर वह खुलकर बोले। 

इसे भी पढ़ें: सांसद वरूण गांधी, सपा, कांग्रेस ने राशनकार्ड सत्यापन दिशानिर्देश को लेकर यूपी सरकार पर साधा निशाना

रिहाई के बाद एक चैनल द्वारा आजम खान से उनके खिलाफ मामलों, ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे और सपा नेता के भविष्य के बारे में बात की।

इसे भी पढ़ें: जीत के साथ सत्र समाप्त करना चाहेंगे सनराइजर्स हैदराबाद और पंजाब किंग्स

जौहर विश्वविद्यालय केस

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों की एक टीम जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े आजम खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले की जांच कर रही है। दस्तावेज जौहर विश्वविद्यालय से संबंधित हैं, जिसके स्थायी कुलपति सपा विधायक आजम खान हैं। खान ने इंडिया टुडे को बताया, मुझे माफिया कहा जाता था, जौहर विश्वविद्यालय मेरा अपराध है। मुझ पर बकरियां और मुर्गियां चोरी करने का आरोप लगाया गया था। 20 दिनों में मैं सबसे बड़ा अपराधी बन गया। मैं चुनावी एजेंडे में था। उन्होंने कहा, मुझे जेल में जितने वोट मिले, उतने वोट मुझे बाहर नहीं मिले। कानूनी लड़ाई में सच्चाई ही सच्चाई है।

उन्होंने आरोप लगाया जिला प्रशासन द्वारा जेल में आने वालों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। मैं किसी से भी नहीं मिल सकता था। मुझे बाहरी दुनिया के बारे में कुछ भी नहीं पता था। मैं एक बहुत छोटे सेल में रहता था, जिसे अंग्रेज फांसी से पहले कैदियों को रखते थे।

मैं हार्दिक पटेल नहीं हूं

सपा में अपने भविष्य के बारे में पूछे जाने पर खान ने कहा, "मैं हार्दिक पटेल नहीं हूं। सपा और अखिलेश यादव से कोई नाराजगी नहीं है। मैं पहले अपनी स्थिति [शारीरिक] ठीक करूंगा, फिर मैं सोचूंगा कि मैं किस दिशा में हूं।"

ज्ञानवापी मस्जिद के मुद्दे पर खान ने कहा कि अदालत के फैसले को सभी को स्वीकार करना चाहिए और माहौल शांतिपूर्ण रहना चाहिए। इससे पहले, खान का रामपुर में उनके विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) नेता शिवपाल सिंह यादव के साथ बड़ी संख्या में समर्थकों ने स्वागत किया।

नोट:कोरोना वायरस से भारत की लड़ाई में हम पूर्ण रूप से सहभागी हैं। इस कठिन समय में अपनी जिम्मेदारी का पूर्णतः पालन करते हुए हमारा हरसंभव प्रयास है कि तथ्यों पर आधारित खबरें ही प्रकाशित हों। हम स्व-अनुशासन में भी हैं और सरकार की ओर से जारी सभी नियमों का पालन भी हमारी पहली प्राथमिकता है।

अन्य न्यूज़