जब देहरादून में दिखा PM मोदी का कवि रूप, तालियों से गूंज उठा पूरा मैदान

जब देहरादून में दिखा PM मोदी का कवि रूप, तालियों से गूंज उठा पूरा मैदान

प्रधानमंत्री की इन पंक्तियों को सुनते ही पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। लोग प्रधानमंत्री के वाहवाही करने लगे। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड से अपने प्रेम को जगजाहिर किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज देवभूमि उत्तराखंड में थे। उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ने कई परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इस कड़ी में प्रधानमंत्री ने केंद्र तथा प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों का भी बखान किया। हालांकि, प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत गढ़वाली में की। इसकी वजह से वहां उपस्थित लोग बेहद ही खुश हो गए और प्रधानमंत्री की वाहवाही करने लगे। लेकिन प्रधानमंत्री का कवि रूप में भी दिखाई दे गया। अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने कविता सुनाकर खूब तालियां बटोरी। प्रधानमंत्री ने हा कहा,‘‘जहां पवन बहे संकल्प लिए, जहां पर्वत गर्व सिखाते हैं, जहां ऊंचे-नीचे सब रस्ते भक्ति के सुर में गाते हैं, उस देवभूमि के ध्यान से ही मैं सदा धन्य हो जाता हूं, है भाग्य मेरा सौभाग्य मेरा, मैं तुमको शीश नवाता हूं और धन्य-धन्य हो जाता हूं।’’

प्रधानमंत्री की इन पंक्तियों को सुनते ही पूरा मैदान तालियों से गूंज उठा। लोग प्रधानमंत्री के वाहवाही करने लगे। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तराखंड से अपने प्रेम को जगजाहिर किया। इससे पहले की भाषणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार उत्तराखंड को अपनी कर्मभूमि भी बताते रहे है। अपने जीवन के शुरूआती दौर में उन्होंने केदारनाथ में लंबे समय तक प्रवास किया और साधना भी की। वर्ष 2019 में लोकसभा चुनावों के दौरान भी उन्होंने केदारनाथ जाकर वहां एक गुफा में बाबा केदार की साधना की थी।

अपने संबोधन में इस क्षेत्र का विकास, इस क्षेत्र को भव्य स्वरूप देना, डबल इंजन की सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ये परियोजनाएं इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने में एक अहम भूमिका निभाएंगी। जो लोग पूछते हैं कि डबल इंजन की सरकार का फायदा क्या है वे लोग आज देख सकते हैं कि डबल इंजन की सरकार उत्तराखंड में कैसे विकास की गंगा बहा रही है। मोदी ने कहा कि बीते वर्षों की कड़ी मेहनत के बाद, अनेक जरूरी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद आखिरकार आज ये दिन आया है। मैंने केदारपुरी की पवित्र धरती से कहा था और आज देहरादून से दोहरा रहा हूं, ये परियोजनाएं इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।





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