80 साल से लाल किले पर क्यों नहीं गाया वंदे मातरम? अब किस कानून से होगी शुरुआत, विवाद की जड़ क्या

1937 में सर्वसम्मति और विविधता का ध्यान रखते हुए इसके पहले दो छंदों को ही अपनाया गया था। लेकिन रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नए और ऐतिहासिक प्रोटोकॉल बदलावों के तहत, इस बार पूरे 'वंदे मातरम' के ओजस्वी स्वरों से देश के स्वाभिमान का नया अध्याय शुरू होगा!
लाल किले की प्राचीर से इस बार इतिहास रचने जा रहा है! 15 अगस्त के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन से ठीक पहले, पूरे लाल किले में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' की गूंज सुनाई देगी। आजादी के बाद यह पहला मौका होगा जब स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक और मुख्य प्रोटोकॉल में वंदे मातरम को यह विशेष स्थान दिया गया है। अब तक के कड़े सैन्य और राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत ध्वजारोहण समारोह में केवल राष्ट्रगान 'जन गण मन' को प्राथमिकता दी जाती थी। इतना ही नहीं, 1937 में सर्वसम्मति और विविधता का ध्यान रखते हुए इसके पहले दो छंदों को ही अपनाया गया था। लेकिन रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी नए और ऐतिहासिक प्रोटोकॉल बदलावों के तहत, इस बार पूरे 'वंदे मातरम' के ओजस्वी स्वरों से देश के स्वाभिमान का नया अध्याय शुरू होगा!
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आपत्तियां, सीमांकन और ऐतिहासिक मोड़
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की कविता के शुरुआती दो पद तो मातृभूमि की सामान्य स्तुति हैं, लेकिन बाद के पदों में हिंदू देवियों (जैसे दुर्गा) का साफ़ ज़िक्र और उनसे जुड़ी कल्पनाएँ हैं। इन धार्मिक संदर्भों पर मुस्लिम लीग और अन्य लोगों की आपत्तियों के कारण, 1937 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने महात्मा गांधी और रवींद्रनाथ टैगोर जैसी हस्तियों की सलाह पर बाद के पदों को हटाने और सार्वजनिक राजनीतिक मंचों के लिए केवल शुरुआती दो पदों का इस्तेमाल करने का फ़ैसला किया। जब भारत एक गणतंत्र बना, तो 1950 में संविधान सभा ने 'जन गण मन' को आधिकारिक राष्ट्रगान और 'वंदे मातरम' के शुरुआती दो पदों को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया। इस तरह उन्हें बराबर सम्मान तो दिया गया, लेकिन सरकारी प्रोटोकॉल के लिए धर्मनिरपेक्ष संतुलन भी बनाए रखा गया। राष्ट्रीय समारोहों में लंबे समय से चली आ रही रस्मी परंपरा में बदलाव हो रहा है। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में, राष्ट्रगान से ठीक पहले लाल किले की प्राचीर से 'वंदे मातरम' बजाया जाएगा। संसद ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) अधिनियम' पारित किया है, जिसके तहत 'वंदे मातरम' को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी दर्जा दिया गया है और जान-बूझकर इसमें बाधा डालने या इसका अनादर करने को दंडनीय अपराध बनाया गया है।
किस कानून में हुआ बदलाव?
संसद ने पिछले महीने जुलाई में ही Pराष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 पास कर दिया है, जिसके तहत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान के बराबर कानूनी दर्जा मिल गया। इसके साथ ही इसके गायन के दौरान जानबूझकर बाधा पैदा करने को अपमान और दंडनीय अपराध के तौर पर माना जाएगा। अभी तक साल 1971 में राष्ट्रगान से जुड़ा ‘प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर ऐक्ट’ आया था। इसके सेक्शन 2 और सेक्शन 3 के तहत गीत के गायन के दौरान अपमान करने को कानूनन अपराध घोषित किया गया। अब इसी 1971 के ऐक्ट में संशोधन करके वंदे मातरम को भी जोड़ दिया गया है।
वायुसेना क्या करने वाली है
बताया जा रहा है कि भारतीय वायुसेना का हेलीकॉप्टर एक बड़ा ध्वज भी लेकर उड़ने वाला है, जो वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने को दर्शाएगा। वैसे, इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश की युवा शक्ति को भी सम्मानित किया जाएगा। 2047 तक विकसित भारत की दिशा में जो युवा अहम योगदान दे रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी उनका सम्मान करेंगे।
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