Bankim Chandra Chatterjee Birth Anniversary: Vande Mataram के रचयिता Bankim Chandra Chatterjee, जिनकी कलम ने फूंकी थी क्रांति की मशाल

Bankim Chandra Chatterjee
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अपनी कविताओं और उपन्यासों से देश को प्रेरित करने वाले बंकिम चंद्र चटर्जी महान उपन्यासकार और कवि थे। भारतीय जनमानस उनको राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' के रचयिता के रूप में जानते हैं।

आज ही के दिन यानी की 26 जून को वन्दे मातरम् गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटर्जी का जन्म हुआ था। वह एक प्रख्यात कवि, उपन्यासकार, गद्यकार और पत्रकार के रूप में जाने जाते हैं। उनको भारत का एलेक्जेंडर ड्यूमा भी कहा जाता है। बंगला साहित्य को जनमानस तक पहुंचाने वाले वह पहले साहित्यकार माने जाते हैं। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर बंकिम चंद्र चटर्जी के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...

जन्म और परिवार

पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के कांठलपाड़ा गांव में 26 जून 1838 को बंकिम चंद्र चटर्जी का जन्म हुआ था। उनका महज 11 साल की उम्र में विवाह हो गया था। लेकिन कुछ समय बाद ही उनकी पत्नी का निधन हो गया था। जिसके बाद उन्होंने दूसरा विवाह किया था।

रचनाएं

बंकिम चंद्र चटर्जी ने अपना पहला उपन्यास 'रायमोहन्स वाइफ' लिखा था। जोकि अंग्रेजी में था। फिर साल 1865 में उनकी पहली बांग्ला कृति दुर्गेशनंदिनी प्रकाशित हुई थी। इसके साथ ही उन्होंने 'विषवृक्ष', 'मृणालिनी', 'सीताराम', 'राजसिंह', 'कपालकुंडला', 'विज्ञान रहस्य', 'कृष्ण कांतेर विल', 'रजनी', 'कमला कांतेर दप्तर', 'लोकरहस्य', 'देवी चौधुरानी आईं' और 'धर्मतत्व' जैसी कई रचनाएं लिखीं।

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आंदोलन में ऐसे लिया भाग

सरकारी नौकरी के कारण बंकिम चंद्र चटर्जी किसी सार्वजनिक आंदोलन में हिस्सा नहीं ले पाते थे। जिसका उनको काफी मलाल रहता था। बाद में उन्होंने साहित्य के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन के लिए जागृति का संकल्प लेकर इस पर काम करना शुरूकर दिया।

वंदे मातरम् गीत

बंकिमचंद्र चटर्जी ने अपने उपन्यास आनंदमठ में राष्ट्रीय गीत वन्देमातरम् की रचना की थी। साल 1882 में यह उपन्यास प्रकाशित हुआ था। आनंदमठ में ईस्ट इंडिया कंपनी से वेतन के लिए लड़ने वाले भारतीय मुसलमानों और संन्यासी ब्राह्मण सेना का वर्णन किया गया। वंदे मातरम् इतना लोकप्रिय गीत था कि खुद गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसका संगीत तैयार किया था। दुनिया की कई भाषाओं में बंकिमचंद्र चटर्जी की रचनाओं के अनुवाद हुए। वहीं उनकी रचनाओं पर फिल्में भी बनी हैं।

मृत्यु

वहीं 08 अप्रैल 1894 को बंकिम चंद्र चटर्जी का निधन हो गया था।

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