आजीवन गरीब, मजदूर व किसानों के हितों के लिए कार्य करते रहे केशुभाई पटेल

keshubhai patel
केशुभाई पटेल जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे। वह दो बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। पहली बार जब वह मुख्यमंत्री बने तो सात महीने के कार्यकाल के बाद ही शकर सिंह वाघेला से विवाद के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल का 29 अक्टूबर को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार थे। केशुभाई पटेल 92 वर्ष के थे। वह 1995 और फिर 1998 से 2001 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री रहे। उनके बाद नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। पटेल छह बार गुजरात विधानसभा के सदस्य रहे। साल 2012 में भाजपा छोड़ने के बाद उन्होंने ‘गुजरात परिवर्तन पार्टी’ बनाई, जिसने 2012 में राज्य के विधानसभा चुनाव में बेहद खराब प्रदर्शन किया। इसके बाद 2014 में उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया। जूनागढ़ जिले के विसावदर शहर में 1928 में जन्मे पटेल 1945 में बतौर प्रचारक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए। उन्होंने अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत बतौर जन संघ कार्यकर्ता के तौर पर की थी।

इसे भी पढ़ें: लोकनायक जयप्रकाशजी की समस्त जीवन यात्रा संघर्ष तथा साधना से भरपूर रही

केशुभाई पटेल जनसंघ के संस्थापकों में से एक थे। वह दो बार गुजरात के मुख्यमंत्री बने। पहली बार जब वह मुख्यमंत्री बने तो सात महीने के कार्यकाल के बाद ही शकर सिंह वाघेला से विवाद के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। दोबारा वह 1998 में मुख्यमंत्री चुने गए। 2001 में उन्होंने खराब स्वास्थ्य का हवाला देकर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने 2001 मे भुज में आए भयानक भूकंप के दौरान कुप्रबंधन को लेकर अपना त्यागपत्र सौंपा था।

केशुभाई पटेल ‘सोमनाथ ट्रस्ट’ के अध्यक्ष भी थे, जो सौराष्ट्र क्षेत्र में प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर का प्रबंधन करता है। केशुभाई पटेल ने जनसंघ के दिनों से भाजपा को मजबूत बनाया। जिन्होंने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और किसानों की सेवा में लगा दिया। केशुभाई पटेल का लंबा सार्वजनिक जीवन लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए समर्पित रहा, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। किसानों के हितों की रक्षा की, लोगों के साथ उनका अद्भुत संबंध था। केशुभाई पटेल को समाज के हर तबके की चिंता थी। उनका जीवन गुजरात के विकास और गुजरातियों को सशक्त बनाने की दिशा में समर्पित था।

2019 के लोकसभा चुनाव की बात करें तो इस दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के अडालज में शिक्षण भवन और विद्यार्थी भवन का शिलान्यास करने के लिए मंच पर पहुंचे थे तो वहां गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल पहले से मौजूद थे। इस पर प्रधानमंत्री मोदी सभी से हाथ मिलाते हुए उनके पास आए तो उन्होंने झट से झुककर केशुभाई पटेल के पैर छू लिए थे। इस दौरान सभी की नजरें दोनों की मुलाकात पर टिक गईं थीं।

इसे भी पढ़ें: आखिर रामविलास पासवान ने क्यों छोड़ा डीएसपी का पद? जानिए उनके जीवन के अनछुये पहलुओं को

भाजपा को मजबूत बनाने और गुजरात की सेवा करने के लिए केशुभाई पटेल को सदैव याद किया जाएगा। गुजरात में कार्य करते हुए केशुभाई ने जन-जन के उत्थान के लिए अनेक प्रेरक प्रयास किये और गुजरात के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। केशुभाई पटेल की छवि एक किसान नेता की रही तथा आजीवन वे गरीब, मजदूर व किसानों के हितों की चिंता करते रहे। गुजरात को 21वीं सदी का विजन देने में उनका महत्‍वपूर्ण योगदान रहा। 2002 में उन्‍हें राज्‍यसभा का सदस्‍य चुना गया तथा 2007 में उन्‍होंने गुजरात परिवर्तन पार्टी का गठन कर भाजपा का विकल्‍प देने का ऐलान किया, हालांकि 2012 में उनकी गुजरात परिवर्तन पार्टी का भाजपा में विलय हो गया। 

गुजरात में राष्‍ट्रीय स्‍वयंसेवक संघ, जनसंघ से लेकर भाजपा की जडें जमाने वाले पूर्व मुख्‍यमंत्री केशुभाई पटेल का प्रदेश की राजनीति में ऊंचा स्‍थान रहा है। पहली बार 1945 में केशुभाई आरएसएस के प्रचारक बने थे। 1975 में आपातकाल के दौरान वे जेल भी गये थे। उन्‍हें गुजरात में लोग प्‍यार से बापा कहकर पुकारते हैं।

Disclaimer:प्रभासाक्षी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।


अन्य न्यूज़