नवरात्रि के आसपास प्रियंका गांधी को यूपी में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश कर सकती है कांग्रेस

  •  अजय कुमार
  •  फरवरी 13, 2021   14:27
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नवरात्रि के आसपास प्रियंका गांधी को यूपी में मुख्यमंत्री उम्मीदवार के रूप में पेश कर सकती है कांग्रेस

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बचपन प्रयागराज में बीता था। एक समय था जब पूर्वांचल में कांग्रेस की तूती बोलती थी। प्रदेश को कई कांग्रेसी मुख्यमंत्री यहीं से मिले। इसमें कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, विश्वनाथ प्रताप सिंह, वीर बहादुर सिंह, रामनरेश यादव जैसे नाम शामिल थे।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की उत्तर प्रदेश में भाग दौड़ बढ़ गई है। लक्ष्य जगजाहिर है। अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव पर उनकी नजर है। प्रियंका अपनी छवि सुधारने में लगी हैं। पिछली बार की तरह अबकी से भी प्रियंका हर हथकंडा अपना रही हैं। दरगाह से लेकर मंदिर-मंदिर दौड़ रही हैं। संगम में डुबकी लगा रही हैं। मौनी अमावस्या पर भी प्रियंका ने प्रयागराज जाकर संगम स्नान किया। जहां उनके साथ अजब ‘हादसा’ हो गया। हुआ यूं कि संगम स्नान के बाद प्रियंका ने पूजा-अर्चना की और इसके बाद मनोकामना मंदिर में द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के दर्शन करने पहुंच गयीं। शंकराचार्य जी से प्रियंका बोलीं, ''गुरु जी बहुत दिनों बाद मिलने का सौभाग्य मिला है। कैसे हैं आप और आपका स्वास्थ्य ठीक है ? शंकराचार्य ने छोटा-सा जवाब दिया मैं ठीक हूँ।'' थोड़ी देर तक प्रियंका इधर-उधर की बात करती रहीं। जब चलने की बारी आई तो प्रियंका ने शंकराचार्य जी से आशीर्वाद लिया और शंकराचार्य जी से पूछ बैठीं कि उन्हें (प्रियंका) राष्ट्रहित में क्या करना चाहिए। इस पर शंकराचार्य जी का जवाब काफी सधा हुआ रहा। शंकराचार्य जी ने प्रियंका को ऐसी सलाह दी कि प्रियंका के भी समझ में नहीं आया कि करें तो क्या करें। दरअसल, शंकराचार्य ने राष्ट्रहित में कुछ काम करने को बेचैन प्रियंका को सलाह दी थी कि वह हिन्दुओं का सम्मान व उनका विकास करें। शंकराचार्य जी के मुंह से निकले अमृत वचन सुनकर प्रियंका आगे कुछ बोल नहीं पाईं। ऐसा लग रहा था कि शंकराचार्य जी प्रियंका को ही नहीं उनके द्वारा पूरी कांग्रेस को नसीहत देना चाह रहे थे।

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इसी के साथ प्रियंका के दौरे के दौरान एक अजब संयोग भी सामने आया। प्रियंका गांधी जब नाव पर सवार होकर संगम जा रही थीं तो उसी वक्त योगी सरकार की तरफ से हेलीकॉप्टर के जरिए माघ मेले में मौजूद श्रद्धालुओं पर फूलों की बारिश हो रही थी। इस दौरान प्रियंका गांधी व उनके साथ आए लोगों पर भी फूलों की बारिश हुई।

खैर, उक्त एक-दो घटनाक्रम को अनदेखा कर दिया जाए तो प्रियंका का प्रयागराज दौरा धार्मिक कम सियासी ज्यादा रहा। कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी प्रियंका गांधी करीब दो साल बाद प्रयागराज आई हैं। इससे पूर्व जब 2019 में प्रियंका यहां आईं थीं तब लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा हुआ था। वर्ष 2019 में दो बार प्रियंका का प्रयागराज आना हुआ था। 17 मार्च 2019 को प्रियंका ने प्रयागराज से जल यात्रा निकाली थी। संगम में हनुमान मंदिर में मत्था टेकने के बाद वह सड़क मार्ग से छतनाग होते हुए दुमदुमा घाट गई थीं। उन्होंने पुलवामा में शहीद महेशराज यादव के परिजनों से मुलाकात भी की थी। इसके बाद वह गंगा के रास्ते कौड़िहार से सीतामढ़ी तक स्टीमर से गई थीं। इस दौरान प्रियंका ने युवाओं से मुलाकात भी की थी और संवाद में भी शिरकत की थी। एक गोष्ठी में भी प्रियंका शामिल हुईं थीं। इसके बाद 29 अप्रैल 2019 को प्रियंका का एक और प्रयागराज दौरा हुआ था। लोकसभा चुनाव के ठीक पहले अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के प्रियंका कुछ बच्चों के साथ प्रयागराज आ गईं थीं। यहां उन्होंने बच्चों को आनंद भवन के बारे में बताया और शाम को अमेठी रवाना हो गईं थीं।

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अब जब प्रियंका का आगमन हुआ है तो यूपी विधान सभा के चुनाव सिर पर हैं। साल के भीतर यूपी में चुनाव होने हैं। इसीलिए प्रियंका के प्रयागराज आगमन को सियासी नजरिए से ही ज्यादा देखा जा रहा है। चर्चा यह भी है कि 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रियंका को मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में सामने कर सकती है। इसकी घोषणा शारदीय नवरात्र के आसपास की जा सकती है। लब्बोलुआब यह है कि किसी भी चुनाव के समय कांग्रेस और गांधी परिवार को पूर्वांचल से काफी उम्मीद रहती है। इसकी वजह है नेहरू परिवार का यहां से जुड़ाव। प्रयागराज (पुराना नाम इलाहाबाद) पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की कर्म स्थली रही है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का बचपन भी यहीं बीता था। एक समय था जब पूर्वांचल में कांग्रेस की तूती बोलती थी। प्रदेश को कई कांग्रेसी मुख्यमंत्री यहीं से मिले। इसमें कमलापति त्रिपाठी, हेमवती नंदन बहुगुणा, विश्वनाथ प्रताप सिंह, वीर बहादुर सिंह, रामनरेश यादव जैसे नाम शामिल थे, लेकिन समय के साथ सब कुछ बदल गया। गांधी परिवार ने पूर्वांचल से दूरी बनाई तो पूर्वांचल के मतदाताओं ने भी अन्य दलों का हाथ थाम लिया। सोनिया गांधी रायबरेली तक सिमट कर रह गई हैं तो राहुल गांधी अपने परिवार की पुस्तैनी अमेठी लोकसभा सीट छोड़कर केरल के वानयाड से चुनाव जीत कर सांसद बन गए। लगातार कमजोर हो रहे गांधी परिवार की राजनीति के चलते ही पिछले दो लोकसभा चुनाव से पूर्वांचल में भारतीय जनता पार्टी का डंका बज रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी यहीं वाराणसी से सांसद हैं, जिसके सहारे भाजपा ने पूरे पूर्वांचल में दबदबा बना लिया है।

-अजय कुमार







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