चरित्र हनन की राजनीति से कांग्रेस को आखिर मिलता क्या है ?

चरित्र हनन की राजनीति से कांग्रेस को आखिर मिलता क्या है ?

राज्य बाल संरक्षण आयोग के बाद अब यूपी राज्य महिला आयोग ने भी प्रियंका वाड्रा को नोटिस भेजकर भविष्य में महिलाओं पर ऐसी टिप्पणी न करने की चेतावनी देते हुए सोशल मीडिया पर उनके द्वारा लिखी गई पोस्ट के खंडन की अपेक्षा जताई है।

अगर आप किसी पर एक उंगली उठाते हैं तो आपके ऊपर तीन उंगली स्वतः उठ जाती हैं। बात यही तक सीमित नहीं है, यदि उंगली उठाने वाला साजीशन किसी पर लांछन लगता है तो उसकी जग-हंसाई भी होती है और शर्मिंदगी भी उठानी पड़ती है। किसी पर उंगली उठाते समय हमेशा इस बात का ध्यान रखा जाता है कि ऐसा करने से किसी की प्रतिष्ठा धूमिल न हो। खासकर आपकी बातों से जब किसी संस्था या व्यक्ति का चरित्र हनन होता है तो आरोप लगाने वाला कानून और समाज दोनों की नजरों में गुनहगार बन जाता है। ऐसे ही कृत्यों के चलते कांग्रेस का गांधी परिवार लगातार अपना मान-सम्मान खोता जा रहा है। राहुल गांधी तो विवादित बयानबाजी करने और फिर माफी मांग लेने में सि़द्धहस्त हैं हीं प्रियंका वाड्रा भी उनसे कम नहीं हैं। हाल ही में विवादित बयान देकर कानपुर के एक बालिका गृह की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के कारण कांग्रेस महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका वाड्रा लोगों की नजर में चढ़ गई हैं। उन्हें राज्य बाल संरक्षण आयोग और यूपी राज्य महिला आयोग ने नोटिस भेजकर चेताया है। मामला कानपुर के राजकीय बाल गृह (बालिका) की घटना पर प्रियंका की टिप्पणी से जुड़ा है।

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राज्य बाल संरक्षण आयोग के बाद अब यूपी राज्य महिला आयोग ने भी प्रियंका वाड्रा को नोटिस भेजकर भविष्य में महिलाओं पर ऐसी टिप्पणी न करने की चेतावनी देते हुए सोशल मीडिया पर उनके द्वारा लिखी गई पोस्ट के खंडन की अपेक्षा जताई है। आयोग का कहना है कि कांग्रेस महासचिव ने बालिकाओं के आत्मसम्मान और भावनाओं को ठेस पहुंचाने का शर्मनाक प्रयास किया है। यह दुख की बात है कि एक महिला होते हुए उन्होंने ऐसा किया। महिला आयोग अध्यक्ष विमला बाथम ने कांग्रेस महासचिव को जारी नोटिस में कहा है कि कानपुर स्थित राजकीय बाल गृह (बालिका) में बच्चियों के गर्भवती और एक के एचआइवी पॉजिटिव होने संबंधी पोस्ट सोशल मीडिया पर लिखी। इस घटना को देवरिया और बिहार के मुजफ्फरपुर की घटना से जोड़ा गया। टिप्पणी करने से पहले तथ्यों की जानकारी भी नहीं ली। महिला आयोग ने घटना का स्वतः संज्ञान लेकर जिला प्रोबेशन अधिकारी कानपुर से रिपोर्ट मांगी थी। रिपोर्ट में स्पष्ट बताया गया कि सात बालिकाएं गर्भवती अवस्था में ही बालगृह में संवासित कराई गई थीं। रिपोर्ट में सारे रिकॉर्ड संलग्न किए गए हैं। आयोग अध्यक्ष ने कहा है कि वास्तव में यह अत्यंत दुख का विषय है कि एक महिला होते हुए भी आपने (प्रियंका) बालिका गृह में अमानवीय घटना घटित होने और एक को एड्स पॉजिटिव होने का वक्तव्य जारी किया। अभी तक इन बालिकाओं में से कोई एड्स पॉजिटिव नहीं पाई गई है। देवरिया और मुजफ्फरपुर की घटना से भी इस मामले को जोड़ा जाना उचित नहीं है।

यूपी राज्य महिला आयोग ने कहा है कि भ्रामक टिप्पणी से समाज में गलत संदेश पहुंचा है। आयोग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में तथ्यों की जानकारी किए बिना, खास तौर पर महिलाओं के संबंध में ऐसी टिप्पणी न करें। साथ ही 21 जून को की गई पोस्ट का खंडन भी करने को कहा है, लेकिन लगता नहीं है कि प्रियंका वाड्रा तब तक माफी मांगेंगी जब तक कि उनके ऊपर कानून का शिकंजा नहीं कसेगा। कई मौकों पर देखा गया है कि गांधी परिवार जब ‘पानी सिर के ऊपर चला जाता है, तभी माफी मांगता है।  

उधर, इन सब बातों से बेफिक्र कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने अब अलीगढ़ पोस्टमार्टम हाउस की दुर्दशा को लेकर योगी सरकार पर हमला बोला है। प्रियंका ने 28 जून 2020 को ट्वीट किया और मीडिया रिपोर्ट के आधार पर योगी सरकार को घेरते हुए कहा कि अलीगढ़ पोस्टमार्टम गृह में भारी अव्यवस्था है, शव बाहर रखे हैं। मृतकों के स्वजनों से बर्फ की सिल्ली के लिए पैसे की उगाही हो रही है। कोरोना काल में सरकार के दावों के बावजूद भारी दुर्दशा की खबरें आ रही हैं। इस पर जिलाधिकारी ने तत्काल मामले की जांच को री-ट्वीट किया कि सभी कार्य संतोषजनक हैं। इस बीच कांग्रेसियों ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंच कर प्रदर्शन किया। बात पूरे घटनाक्रम की कि जाए तो करीब पांच दिन पहले पोस्टमार्टम हाउस में डीप फ्रीजर खराब हो गया था, कर्मचारियों ने मृतक के परिवारजनों से शव को रखने के लिए बर्फ की सिल्ली मंगाई थी। उस दौरान काफी हंगामा हुआ था। इस मामले को लेकर पांच दिनों बाद प्रियंका ने ट्वीट किया। 

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बहरहाल, लगता यह है कि घटिया और गलत बयानबाजी करना कांग्रेस के गांधी परिवार का शगल बन गया है। प्रियंका ही नहीं सोनिया और राहुल गांधी भी विवादित बयानबाजी करने में पीछे नहीं रहते हैं। बीते वर्ष हुए आम चुनाव को कौन भूल सकता है, जब एक चुनावी सभा में राहुल गांधी ने झूठ की पराकाष्ठा को लांघते हुए कह दिया था कि कोर्ट ने भी मान लिया है कि चौकादारी चैर है। राहुल गांधी चौकीदार चोर है, का नारा देकर पीएम मोदी की छवि छूमिल कर रहे थे, जिस पर उन्हें सुप्रीम कोर्ट में तीन-तीन बार माफी मांगना पड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामें में राहुल गांधी ने कहा था कि चुनाव के आवेश में उन्होंने चौकीदार चोर है, वाला बयान दिया था। राहुल गांधी ने इस मामले में अंडरटेकिंग देते हुए कहा कि आगे से मैं पब्लिक में कोई भी ऐसी टिप्पणी नहीं करूंगा। राहुल गांधी सुप्रीम कोर्ट के बयान को गलत तरह से पेश कर देश के लोगों को गुमराह कर रहे थे।

-अजय कुमार