जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाला जी-20 शिखर सम्मेलन सभी दुष्प्रचारों की हवा निकाल देगा

Jammu Kashmir
ANI
जहां तक जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका की बात है तो आपको बता दें कि भारत 1999 में जी-20 की स्थापना के बाद से ही इसका सदस्य है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

कश्मीर को लेकर फैलाये जाने वाले दुष्प्रचार का वैसे तो भारत हमेशा तगड़ा जवाब देता रहा है लेकिन अब कुछ ऐसा होने जा रहा है जिसके जरिये पूरी दुनिया जम्मू-कश्मीर के विकास और यहां के लोगों की भारत भक्ति को सीधे देख सकेगी। दरअसल दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के प्रभावशाली समूह जी-20 की बैठक जम्मू-कश्मीर में होने जा रही है जिसमें इन देशों के बड़े नेताओं समेत कई बड़ी राजनीतिक, कूटनीतिक और औद्योगिक हस्तियां शामिल होंगी। हम आपको बता दें कि मोदी सरकार द्वारा अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के तहत तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को प्राप्त विशेष दर्जे की समाप्ति और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों का स्वरूप दिये जाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में आयोजित होने वाला यह पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन होगा। माना जा रहा है कि जी-20 सम्मेलन का आयोजन साल 2023 के अंत में जम्मू-कश्मीर में किया जायेगा। इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी गयी है। केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन ने बैठकों के समग्र समन्वय के लिए पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है।

हम आपको बता दें कि जी-20 में भारत और यूरोपीय संघ समेत 20 देश शामिल हैं। भारत के खास मित्र देश अमेरिका, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया, जर्मनी, रूस और जापान तो जी-20 के सदस्य हैं ही साथ ही इस समूह के अन्य सदस्यों में चीन, अर्जेंटीना, ब्राजील, कनाडा, इंडोनेशिया, इटली, मेक्सिको, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और तुर्की भी शामिल हैं। जी-20 सम्मेलन में जिन विषयों पर अक्सर चर्चा होती है उनमें आतंकवाद, आर्थिक चिंताएं, ग्लोबल वार्मिंग और स्वास्थ्य आदि प्रमुख रहते हैं। जब जम्मू-कश्मीर में दुनिया के 20 बड़े देश आतंकवाद पर चर्चा कर रहे होंगे तो निश्चित रूप से पाकिस्तान और उसके आका चीन को मिर्ची लगेगी। देखा जाये तो जम्मू-कश्मीर में जी-20 सम्मेलन का आयोजन भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है क्योंकि जी-20 में चीन और तुर्की भी शामिल हैं जोकि कश्मीर मुद्दे को लेकर हमेशा पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते नजर आते हैं।

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वैसे अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद विश्व जगत का यह पहला जम्मू-कश्मीर दौरा नहीं होगा। हम आपको याद दिला दें कि 5 अगस्त 2019 के भारत सरकार के फैसले के बाद जब पाकिस्तान ने दुनियाभर में रोना-पीटना शुरू किया था तब भारत ने कई विदेशी राजनयिकों और नेताओं को जम्मू-कश्मीर का दौरा करवा कर वहां की हकीकत दिखायी थी। भारत सरकार के इस कदम से पाकिस्तान के आरोपों की हवा निकल गयी थी। अब जब भारत में पहला जी-20 शिखर सम्मेलन होने जा रहा है तो उसके लिए आयोजन स्थल के रूप में जम्मू-कश्मीर का चयन दर्शाता है कि इस केंद्र शासित प्रदेश को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए मोदी सरकार कितना प्रयत्न कर रही है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर में जो निवेशक सम्मेलन आयोजित किया गया था उसने भी इस केंद्र शासित प्रदेश को औद्योगिक राज्य बनने की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया है। अब जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन से पहले यहां बुनियादी ढांचे के और विकास तथा अन्य संबंधित परियोजनाएं मिलने से रोजगार भी बढ़ेगा और लोगों की सहुलियतें भी बढ़ेंगी।

जहां तक जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका की बात है तो आपको बता दें कि भारत 1999 में जी-20 की स्थापना के बाद से ही इसका सदस्य है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 से जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। भारत एक दिसंबर 2022 से जी-20 की अध्यक्षता करेगा और 2023 में पहली बार जी-20 नेताओं के शिखर सम्मेलन का आयोजन करेगा। माना जा रहा है कि अध्यक्ष पद पर भारत के कार्यकाल का समापन इस शिखर सम्मेलन के साथ ही होगा।

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जहां तक जी-20 सम्मेलन के भारत में आयोजन के संबंध में बनायी गयी समिति की बात है तो हम आपको बता दें कि एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव समिति के अध्यक्ष होंगे। यह समिति जी-20 बैठकों के समग्र समन्वय का काम करेगी। समिति के सदस्यों में आयुक्त सचिव (परिवहन), प्रशासनिक सचिव (पर्यटन), प्रशासनिक सचिव (आतिथ्य एवं प्रोटोकॉल) और प्रशासनिक सचिव (संस्कृति) शामिल हैं। आधिकारिक आदेश में कहा गया है कि इसके अलावा, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में जी-20 बैठकों की व्यवस्था के समन्वय के लिए सरकार के प्रधान सचिव (आवास और शहरी विकास विभाग) को केंद्र शासित प्रदेश स्तर के नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है।

बहरहाल, जी-20 शिखर सम्मेलन का आयोजन स्थल बनने से जम्मू-कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। जो लोग भारत विरोधी एजेंडा चलाते हुए जम्मू-कश्मीर की स्थिति के बारे में दुष्प्रचार करते रहते हैं उनको इस केंद्र शासित प्रदेश में आयोजित होने वाला जी-20 सम्मेलन तो जवाब देगा ही साथ ही वैश्विक सम्मेलनों के केंद्र के रूप में भी जम्मू-कश्मीर उभर कर आयेगा। वैसे तो धरती पर स्वर्ग माने जाने वाले कश्मीर में दुनियाभर से पर्यटक आते हैं लेकिन जी-20 शिखर सम्मेलन के आयोजन से केंद्र शासित प्रदेश के पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह भी संभव है कि भविष्य में ऐसे और सम्मेलनों की मेजबानी का सौभाग्य जम्मू-कश्मीर को लगातार मिलता रहे।

-नीरज कुमार दुबे

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