आजमगढ़ में साइकिल वाले से होगी रिक्शावाले की टक्कर

By अभिनय आकाश | Publish Date: May 9 2019 5:44PM
आजमगढ़ में साइकिल वाले से होगी रिक्शावाले की टक्कर
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बता दें रमाकांत यादव भाजपा के कद्दावर नेता थे और आजमगढ़ से उनकी दावेदारी पक्की मानी जा रही थी। लेकिन ऐन वक्त पर भाजपा ने रमाकांत यादव का टिकट काटकर निरहुआ को टिकट दे दिया। रमाकांत का आजमगढ़ में अपना खुद का जनाधार है। यही वजह है कि वह किसी भी दल से चुनाव लड़कर जीतते

श्रीमान जी आपका वोट हम पाएंगे, कोई नहीं किया जो वो कर दिखाएंगे साल 2004 में निरहुआ सटल रहे एल्बम के इस गाने की तर्ज पर सभी राजनीतिक दल अपने वादे-इरादे के साथ चुनावी मैदान फ़तह करने की होड़ में लगे हैं। इस गाने का एक और कनेक्शन इस लोकसभा चुनाव से भी है और वो कनेक्शन है उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ से, वहीं आजमगढ़ जिसका नाम कैफ़ी आज़मी, राहुल सांकृत्यायन और वीर कुंवर सिंह की जमीन के तौर पर इतिहास में अंकित है। जहां से इस बार भाजपा ने भोजपुरी के सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को मैदान में उतारा है। निरहुआ रिक्शावाला जैसी सुपरहिट फिल्म से भोजपुरी स्टार बने निरहुआ के सामने आज़मगढ़ की सीट पर पिता की पहले से तैयार की गयी चुनावी जमीन को सुरक्षित सीट मानकर अखिलेश यादव मैदान में हैं। 
भाजपा को जिताए

साइकिल, हाथी और 786 के नारे के साथ अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह की विरासत को आगे बढ़ाने के इरादे के साथ मैदान में हैं। वहीं यादवों के गढ़ से निरहुआ ने यदुवंशी कृष्ण के गीता के उपदेश स्वतंत्र गर्व उनका स्वातंत्र्य गर्व उनका, जो नर फाकों में प्राण गंवाते हैं पर नहीं बेच मन का प्रकाश रोटी का मोल चुकाते हैं के साथ जीत का ख़म ठोक रहे हैं। कभी समाजवादी पार्टी के लिए प्रचार करने वाले दिनेश लाल यादव आज उसी के मुखिया के खिलाफ मुखर होकर मैदान में डटे हैं। लेकिन भाजपा के लिए वहां सबसे बड़ी चुनौती रमाकांत यादव बनकर उभरे हैं। वही रमाकांत यादव जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव को कड़ी टक्कर दी थी और महज 63 हजार वोट से चुनाव हार गए थे। मुलायम ने चुनाव में 3 लाख 40 हजार 306 वोट हासिल किए जबकि रमाकांत यादव को 2 लाख 77 हजार 102 मत प्राप्त हुए थे।
 
बता दें रमाकांत यादव भाजपा के कद्दावर नेता थे और आजमगढ़ से उनकी दावेदारी पक्की मानी जा रही थी। लेकिन ऐन वक्त पर भाजपा ने रमाकांत यादव का टिकट काटकर निरहुआ को टिकट दे दिया। रमाकांत का आजमगढ़ में अपना खुद का जनाधार है। यही वजह है कि वह किसी भी दल से चुनाव लड़कर जीतते थे। लेकिन भाजपा ने उनके ऊपर निरहुआ को तरजीह देकर रमाकांत को नाराज कर दिया। यही कारण है कि रमाकांत ने आजमगढ़ में अखिलेश को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। हालांकि रमाकांत यादव कांग्रेस के टिकट पर भदोही से चुनाव भी लड़ रहे हैं जिसको लेकर बीते दिनों बसपा प्रमुख मायावती ने उनके समर्थन को दिखावा भी बताया था। लेकिन यादव वोटों का बिखराव और पिछड़े तबके के वोटों के जुड़ाव के जरिए अखिलेश यादव को मात देने का जो प्लान भाजपा के लिए कामयाब होगा या नहीं इसपर संशय है। कांग्रेस अखिलेश यादव के ख़िलाफ़ अपना प्रत्याशी नहीं उतारेगी,  इससे मुस्लिम वोटों में बंटवारा नहीं होगा।
2017 के विधानसभा चुनाव में आज़मगढ़ की 5 विधानसभा सीट में से 3 सीटों पर सपा व 2 पर बसपा ने जीत दर्ज की थी। आज़मगढ़ लोकसभा सीट का जातीय समीकरण देखें तो यह सीट यादव-मुस्लिम बाहुल्य मानी जाती है। 2014 के लोकसभा चुनाव के अनुसार इस सीट पर वोटरों की संख्या 17 लाख 70 हजार 637 है। जिसमें पुरुषों की संख्या 9 लाख 62 हजार 889 व महिलाओं की संख्या 8 लाख 7 हजार 674 है। चुनाव के लिए आजमगढ़ में विकास की कमी, बेरोजगारी, जिले में किसी विश्वविद्यालय का नहीं होना और राष्ट्रवाद आदि प्रमुख मुद्दे हैं। यहां व्यापारियों के लिए जीएसटी के सरलीकरण की मांग और ''अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न'' भी मुद्दा है। 
 
आज़मगढ़ का जातीय गणित


यादव- 3.5 लाख
मुस्लिम- 3 लाख
दलित- 2.5 लाख
ठाकुर- 1.5 लाख
ब्राह्मण- 1 लाख
राजभर- 1 लाख
विश्वकर्मा- 70 हज़ार
भूमिहार- 50 हज़ार
निषाद- 50 हज़ार
चौहान- 75 हज़ार
वैश्य- 1 लाख
प्रजापति- 60 हज़ार
पटेल- 60 हज़ार
 
अगर आज़मगढ़ के इस जातीय समीकरण का विश्लेषण करें तो यादव, मुस्लिम, दलित, विश्वकर्मा, चौहान और प्रजापति सपा का वोट माना जाता है और ठाकुर, ब्राह्मण, भूमिहार, निषाद, वैश्य, पटेल भाजपा के परंपरागत वोटर माने जाते हैं। पूर्वांचल में समाजवादियों का गढ़ कहे जाने वाले आज़मगढ़ में निरहुआ के लिए अपनी पिक्चर हिट कराना थोड़ा मुश्किल है। मौके की नज़ाकत को भांपते हुए भाजपा के सबसे बड़े स्टार और देश के चौकीदार कहे जाने वाले पीएम मोदी ने सपा के दुर्ग को भेदने के लिए आजमगढ़ में हुंकार भरी और जातीय समीकरण के सहारे जीत का स्वाद चखने के सपा के मंसूबों पर करारा प्रहार भी किया। वहीं अखिलेश के समर्थन में मायावती ने भी महागठबंधन की स्क्रिप्ट पर जीत की पटकथा लिखने की कवायद के साथ रैली कर विरोधियों पर प्रहार और अखिलेश पर जनता को भरपूर प्यार बरसाने की अपील की। ऐसे में यादव बनाम यादव की लड़ाई में जातीय तिलिस्म और राष्ट्रवाद की चुनौती के बीच आजमगढ़ में साइकिल दौड़ती है या फिर रिक्शावाले निरहुआ कमल का फूल खिलाते नजर आते हैं ये 23 मई को ही पता चलेगा।
 
- अभिनय आकाश
 

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