हनुमानजी को सब अपना मानते हैं, इसीलिए अपनी जाति, धर्म को बताने की मची है होड़

By संजय सक्सेना | Publish Date: Dec 24 2018 12:02PM
हनुमानजी को सब अपना मानते हैं, इसीलिए अपनी जाति, धर्म को बताने की मची है होड़
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भगवान राम के परमसेवक हनुमानजी की जाति बताने को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है। ऐसा लगता है कि हनुमानजी की जाति बताना कोई बहुत बड़ा गुनाह हो गया हो। हिन्दुस्तान की तो पूरी की पूरी आबादी ही जातियों में बंटी है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक चुनावी सभा में पवन पुत्र हनुमान को दलित क्या बताया तब से हनुमान जी की जाति को लेकर नित नये दावे हो रहे हैं। उन्हें आदिवासी से लेकर मुसलमान तक बता दिया गया है। भगवान राम के परमसेवक हनुमानजी की जाति बताने को लेकर सियासी बयानबाजी जारी है। ऐसा लगता है कि हनुमानजी की जाति बताना कोई बहुत बड़ा गुनाह हो गया हो। हिन्दुस्तान की तो पूरी की पूरी आबादी ही जातियों में बंटी है। हमारे देश का यह दुर्भाग्य है कि यहां बड़े से बड़े नेताओं और राजाओं तक को जाति के दायरे में बांध दिया जाता है। इसीलिये तो संविधान निर्माता बाबा साहब अम्बेडकर को दलित बताया जाता है। अखण्ड भारत का निर्माण करने वाले सरदार बल्लभ भाई पटेल की पहचान पटेल तक सीमित रह जाती है। महाराणा प्रताप पर मराठी अपना एकाधिकार समझते हैं। यहां तक की महात्मा गांधी तब बनिये हो जाते हैं। जब सबके अराध्य भगवान श्री राम क्षत्रिय और भगवान कृष्ण, यादव हो सकते हैं तो हनुमानजी को भी जाति के दायरे में बांटना गलत कैसे हो सकता है। ऐसे ही तो तमाम भगवान जातियों में बंटे हुए नजर आते हैं। बीजेपी नेता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक बयान के बाद जो बहस शुरू हुई थी उसे देर−सबेर समाजवादी पार्टी सहित तमाम दलों के नेता भी आगे बढ़ाने में लगे। कहीं इसको लेकर गंभीरता का भाव है तो कहीं हलके−फुलके ढंग में हनुमान जी की जाति का वर्णन हो रहा है।
भाजपा को जिताए
 
 


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा हनुमानजी दलित कहे जाने के बाद अब योगी सरकार के मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने जाट तो सपा महासचिव ने बजरंग बली को गोंड जाति का करार दिया। इस बाबत सभी के अपने−अपने तर्क भी हैं। विधानमंडल सत्र के दौरान एक मंत्री ने पवन पुत्र को अपनी जाति का बताया था। केंद्रीय मंत्री सत्यपाल चौधरी, आयोग अध्यक्ष नंद किशोर, यूपी मिनिस्टर लक्ष्मी नारायण और भाजपा एमएलसी बुक्कल नवाब हनुमानजी का जाति धर्म बता चुके हैं।
 
हनुमानजी को लेकर बयानबाजी के दौर में कुछ नेता अपनी−अपनी सहूलियत के हिसाब से भी टिप्पणी कर रहे हैं। कुछ नेता संकेतों में भी बहुत कुछ कहते नजर आते हैं। इसी तरह के एक मामले में यूपी सरकार के और मंत्री सुरेश खन्ना भी शामिल रहे। हालांकि उन्होंने हनुमानजी के लिए कुछ कहा नहीं लेकिन इशारों−इशारों में बता दिया कि वह रामभक्त हैं। अब तक अंजनी नंदन को विविध जाति−धर्म का बताने वालों की फेहरिस्त लंबी हो चुकी है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री सत्यपाल चौधरी हनुमानजी को आर्य, यूपी मिनिस्टर लक्ष्मी नारायण बजरंग बली को जाट और एमएलसी बुक्कल नवाब मुसलमान बता चुके हैं।
 


 
हनुमानजी की जाति विवाद पर केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह कहते हैं कि भगवान राम और हनुमानजी के युग में इस देश में कोई जाति व्यवस्था नहीं थी, कोई दलित, वंचित, शोषित नहीं था। वाल्मिकी रामायण और रामचरितमानस को आप पढ़ेंगे तो आपको मालूम चलेगा कि उस समय जाति व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने आगे कहा कि हनुमानजी आर्य थे। उस समय आर्य जाति थी और हनुमान जी उसी आर्य जाति के महापुरुष थे।
 
बात जहां तक धार्मिक मान्यता की है तो हनुमानजी को हिन्दू देवताओं में सबसे शक्तिशाली माना गया है। चैत्र महीने के शुक्ल अष्टमी को हनुमान सुबह 4 बजे अपनी माँ अंजना के गर्भ से इस धरती पर त्रेता युग में भगवान शिव के अवतार के अवतरित हुए थे। माना जाता है कि हनुमानजी भगवान शिव के ग्यारवें रूद्र अवतार थे, जो श्रीराम की सेवा करने और उनका साथ देने त्रेता युग में अवतरित हुए थे। श्री हनुमानजी को बजरंग बली, मारुति नंदन, पवनपुत्र, केशरी नंदन आदि इनके अनेकों नामों से भी बुलाया जाता है। पवन पुत्र हनुमान को सात चिरंजिवियों में से एक माना जाता है। भगवान हनुमान अपने शरीर को किसी भी वेश में किसी भी रूप में यानी वह अपने शरीर को पर्वत की तरह बड़ा कर सकते थे, तो अगले ही पल अपने शरीर को नाखून से भी छोटे कर सकते थे। एक छलांग में वो हिन्द महासागर को पार कर सकते थे। वे राक्षसों, दानवों के नाशक थे।



 
कहा जाता है कि श्री हनुमानजी का जन्म ही राम भक्ति और उनके कार्यों को पूर्ण करने के लिए हुआ है। उनकी हर सांस में हर खून की बूंद में राम बसे हैं। एक प्रसंग में विभीषण के ताना मारने पर हनुमानजी ने सीना चीर कर भरी सभा में राम और जानकी के दर्शन अपने सीने में करा दिए थे। हनुमानजी भगवान श्रीराम और लक्ष्मण से किशकिन्दा में मिले जब वो दोनों माता सीता की तलाश कर रहे थे। श्री हनुमान वानरराज सुग्रीव के परम मित्र और उनकी वानर सेना के सेनापति थे। अपरहण के बाद माता सीता से भेंट करने वाले राम के प्रथम दूत श्री हनुमान ही थे।
 
बहरहाल, लब्बोलुआब यह है कि आज पवन पुत्र हनुमान को सब अपनी जाति से जोड़कर बता रहे हैं। इससे उनका कद छोटा नहीं होता है। यह बजरंगबली के विराट रूप को दर्शाता है। कोई ऐसे ही नहीं सभी के दिलों में बस जाता है। सब हनुमान जी को अपना मानते हैं। ऐसा चमत्कार बिरले ही देखने को मिलता है। खास उस देश में जहां बांटने की सियासत पनपती हो और देशवासी जातियों में बंटे हों।
 
-संजय सक्सेना
 

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