चींटियों की तरह होती है ततैया की सामाजिक व्यवस्था

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चींटियों की कॉलोनी और मधुमक्खियों के छत्ते में रहने वाले सदस्यों को गैर-यादृच्छिक रूप से स्थान के उपयोग के लिए जाना जाता है। इनकी कॉलोनी में भीड़ होने के बावजूद सबकुछ व्यवस्थित रूप से चलता है, जो इन कीटों की सामाजिक प्रवृत्ति को दर्शाता है।

नई दिल्ली। (इंडिया साइंस वायर): चींटियों की तरह ततैया की भी अपनी सामाजिक व्यवस्था होती है। हर जगह बसने की बजाय वे अपने छत्ते के चुनिंदा स्थानों पर व्यवस्थित रूप से रहना पसंद करते हैं, जहां सबका काम बंटा होता है। ततैया की यह व्यवस्था समूह के सभी सदस्यों एवं लार्वा तक कुशलतापूर्वक भोजन पहुंचाने और उन्हें संक्रमण से बचाने में मदद करती है। इंडियन पेपर वास्प ततैया पर भारतीय शोधकर्ताओं के एक ताजा अध्ययन में यह बात उभरकर आई है। 

चींटियों, मधुमक्खियों और ततैया के बारे में माना जाता है कि इन कीटों के पास अपने आवास में पसंदीदा स्थान चुनने और व्यवस्थित रूप से रहने के सीमित विकल्प होते हैं। हालांकि, शोधकर्ताओं ने रोपालिडिया मार्जिनटा प्रजाति के ततैया के छत्ते में ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है, जहां वे 50 प्रतिशत से अधिक समय बिताते हैं। अधिकांश ततैया के लिए, यह स्थान छत्ते के कुल क्षेत्र के 50 प्रतिशत से कम पाया गया है, जो ततैया द्वारा चुनी गई वरीयता को दर्शाता है।

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ततैया द्वारा अधिकतम समय बिताए जाने वाले स्थान की पहचान के लिए एक गणितीय तकनीक का उपयोग किया गया है। यह गणितीय तकनीक पारिस्थितिकीविदों द्वारा खुले में रहने वाले बड़े जानवरों के आवास क्षेत्रों के सीमांकन के लिए उपयोग की जाती है।

चींटियों की कॉलोनी और मधुमक्खियों के छत्ते में रहने वाले सदस्यों को गैर-यादृच्छिक रूप से स्थान के उपयोग के लिए जाना जाता है। इनकी कॉलोनी में भीड़ होने के बावजूद सबकुछ व्यवस्थित रूप से चलता है, जो इन कीटों की सामाजिक प्रवृत्ति को दर्शाता है। इससे समूह के कीटों को अपने कार्य कुशलता से करने में मदद मिलती है, क्योंकि कार्य गैर-यादृच्छिक रूप से बंटे रहते हैं। उदाहरण के लिए, नर्सों को वहां होना चाहिए, जहां अंडों की देखभाल की जानी है, गार्ड ऐसी जगह तैनात होने चाहिए जहां खतरा है, और बिल्डरों को जहां मरम्मत की आवश्यकता है।

बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन शोध पत्रिका प्रोसीडिंग्स ऑफ दि रॉयल सोसायटी बी. में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं में प्रोफेसर राघवेंद्र गडगकर और उनकी शोध छात्र निकिता शर्मा शामिल थे।

प्रोफेसर राघवेंद्र गडगकर ने बताया कि “अपने छत्ते में व्यवस्थित रूप से रहने से भोजन पहुंचाने वाली ततैया परस्पर एक-दूसरे के करीब रहती हैं, जिससे भोजन के वितरण में आसानी होती है। भोजन लाने वाले ततैया बाहर से संक्रमण भी साथ ला सकते हैं। ऐसे में भोजन वितरण के साथ पूरी कॉलोनी में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। गैर यादृच्छिक रूप से स्थान को प्रयोग करने से संक्रमण फैलने का खतरा कम हो जाता है। इस तरह, क्रमिक विकास बनाए रखने वाली रानी मक्खी भोजन लाने वाले ततैया सदस्यों के संपर्क में आने से बच जाती है।”

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चींटियां एवं मधुमक्खियां कॉलोनी में भोजन का भंडारण करती हैं। इनमें से कुछ सदस्य नर्सों के रूप में कार्य करती हैं, जिनका काम भंडारण क्षेत्र से भोजन को लार्वा तक पहुंचाना होता है। हालांकि, पेपर वास्प ततैया भोजन का भंडारण नहीं करते और वे मकड़ियों एवं दूसरे कीटों को खाते हैं। इस ततैया ने रेफ्रिजरेशन सिस्टम भी ईजाद नहीं किया है, जहां भोजन भंडारित करके रखा जा सके। भोजन लाने वाले ततैया भोजन लाते हैं, जिसे अन्य सदस्यों द्वारा छत्ते में उतारा जाता है। इसके बाद, भोजन समूह में वितरित कर दिया जाता है और कुछ हिस्सा लार्वा के लिए पहुंचा दिया जाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि गतिशील रहने वाले जीवों के पास यह विकल्प होता है कि वे किसी निर्धारित समय में कहां रहना चाहते हैं। लेकिन, इस तरह की स्वतंत्रता के साथ उन पर ऐसे सुरक्षित स्थान का चयन करने की जिम्मेदारी भी होती है, जहां कठिनाइयों के बावजूद आसानी से पहुंचा जा सके। आवास के किसी हिस्से में सिमटे रहने के बावजूद कई जीव व्यवस्थित ढंग से अपनी पसंदीदा जगह पर गैर-यादृच्छिक रूप से रहना पसंद करते हैं। भोजन, आराम, प्रजनन और झगड़ने के लिए भी ये जीव विशिष्ट स्थान पसंद करते हैं। 

(इंडिया साइंस वायर)

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