Ramadan में Modern Dating कितनी जायज? जानें Unmarried Couples के लिए क्या हैं सख्त हिदायतें

रमजान का पाक महीना कपल्स के लिए प्यार, सब्र और रूहानियत का इम्तिहान है, जहाँ शादीशुदा और अनमैरिड जोड़ों को शारीरिक और भावनात्मक संयम बरतने की सलाह दी जाती है। यह लेख रमजान के दौरान रिश्तों में पवित्रता बनाए रखने के लिए जरूरी इस्लामी गाइडलाइंस और इबादत के महत्व पर प्रकाश डालता है।
रमजान का पाक महीना शुरू होने वाला है। यह वक्त सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नहीं, बल्कि दिल, सोच और रिश्तों को भी साफ करने का होता है। ऐसे में चाहे कपल्स शादीशुदा हों या अभी रिश्ते में हों, रोजे की पवित्रता बनाए रखने के लिए कुछ खास रूहानी गाइडलाइंस का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है।
रमजान हमें सिखाता है कि इबादत सिर्फ नमाज और रोजे तक सीमित नहीं, बल्कि अपनी फिजिकल इच्छाओं पर कंट्रोल करना भी उतना ही अहम है। इस महीने में न सिर्फ खाने-पीने से, बल्कि शरीर और मन की बेवजह की ख्वाहिशों से भी दूरी बनाने की सीख दी जाती है। खासकर अनमैरिड कपल्स के लिए यह समय थोड़ी ज्यादा समझदारी और जिम्मेदारी की मांग करता है।
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रमजान के दौरान मैरिड और अनमैरिड, दोनों तरह के कपल्स के लिए सबसे पहली हिदायत होती है कि वह फितना (लालच) से खुद को बचाकर रखें। इस्लाम में शादी से पहले फिजिकल रिलेशनशिप की इजाजत नहीं है और रमजान में इस नियम की अहमियत और बढ़ जाती है। किसी भी तरह की शारीरिक नजदीकी या ऐसी परिस्थिति बनाना, जिससे जज्बात बेकाबू हों, इस पाक महीने की भावना के खिलाफ माना जाता है।
जानकारों की मानें तो आज के मॉडर्न या वेस्टर्न कॉन्सेप्ट वाली डेटिंग रमजान के नियमों के खिलाफ हैं। इसलिए कपल्स को सलाह दी जाती है कि गैर-जरूरी मुलाकातें और बातचीत कम रखें। अगर बात करना जरूरी हो, तो साफ इरादे के साथ, बिना फ्लर्ट के और शालीन तरीके से करें।
रमजान में खलवा यानी एकांत का नियम और सख्ती से लागू होता है। अनमैरिड लड़का-लड़की का बंद जगह में अकेले रहना सही नहीं माना जाता। आज के डिजिटल जमाने में यह बात ऑनलाइन दुनिया पर भी लागू होती है, देर रात की वीडियो कॉल्स, पर्सनल चैट्स या इमोशनल मैसेजिंग रोजे की रूहानियत को कमजोर कर सकती है। मैरिड कपल्स को भी रोजे के दौरान संयम बरतने की सलाह दी जाती है।
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इस महीने में कपल्स से उम्मीद की जाती है कि वे अपने पहनावे, बात-चीत और व्यवहार में पूरी शालीनता रखें। बातचीत को रोमांटिक बातों से हटाकर दुआ, इबादत, दान और खुद को बेहतर इंसान बनाने जैसे पॉजिटिव टॉपिक्स की ओर मोड़ना ज्यादा बेहतर माना जाता है।
जो कपल्स भविष्य में शादी का इरादा रखते हैं, उनके लिए रमजान एक तरह का कैरक्टर टेस्ट होता है। यह वक्त बताता है कि रिश्ता सिर्फ फिजिकल अट्रैक्शन पर नहीं, बल्कि आपसी इज्जत, सब्र और साझा रूहानी वैल्यूज पर कितना मजबूत है। इस महीने की सीमाओं का सम्मान करके कपल्स न सिर्फ अपने ईमान, बल्कि एक-दूसरे के लिए अपने सम्मान को भी साबित करते हैं।
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