Midlife Crisis या Menodivorce? 50 की उम्र में Hormones कैसे बन रहे हैं तलाक की बड़ी वजह?

मेनो डिवोर्स 45 से 65 साल की महिलाओं से जुड़ा है, जो मेनोपॉज के दौरान होने वाले हार्मोनल, शारीरिक और मानसिक बदलावों के कारण अपनी शादी को खत्म करने का फैसला लेती हैं। यह निर्णय अक्सर आत्म-संतुष्टि और स्वतंत्रता की तलाश में लिया जाता है, जहां महिलाएं अपने रिश्ते का पुनर्मूल्यांकन करती हैं।
आजकल रिश्तों से जुड़े नए शब्द सुनने को मिल रहे हैं। पहले ग्रे डिवोर्स और साइलेंट डिवोर्स की चर्चा होती थी, अब एक नया शब्द सामने आया है, वो है मेनो डिवोर्स। यह शब्द खास तौर पर 45 से 65 साल की उम्र के कपल्स से जुड़ा है, जहां महिलाएं कई साल की शादी के बाद अलग होने का फैसला कर रही हैं।
मेनो डिवोर्स क्या है?
मेनो डिवोर्स का मतलब है कि पेरिमेनोपॉज या मेनोपॉज के दौर से गुजर रही महिलाएं सोच समझकर अपनी शादी खत्म करने का निर्णय लेती हैं। इस उम्र में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिससे शारीरिक और मानसिक असर पड़ता है। कई सर्वे बताते हैं कि इस उम्र की बहुत सी महिलाएं खुद को ज्यादा आजाद और संतुष्ट महसूस करना चाहती हैं।
इसे भी पढ़ें: 'No Sex' के बावजूद रिश्ते में 'Love' कैसे बढ़ाएं? मैरिज एक्सपर्ट ने बताए 2026 के लिए Must-Know Tips
इसके कारण क्या हैं?
मिडलाइफ में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन कम हो जाते हैं, जिससे चिड़चिड़ापन, थकान, नींद की कमी और तनाव बढ़ सकता है। जो बातें पहले नजरअंदाज हो जाती थीं, वे अब बड़ी लगने लगती हैं। बच्चे बड़े होकर घर छोड़ देते हैं और महिला खुद से पूछती है, क्या यह रिश्ता अब भी मुझे खुश रख रहा है? इसके अलावा, आर्थिक आत्मनिर्भरता और समाज में सोच का बदलना भी एक बड़ा कारण है। भारत में भी अब महिलाएं केवल समझौते के लिए रिश्ते में बने रहना जरूरी नहीं समझतीं।
इसे भी पढ़ें: Relationship Tips For Busy Couples । ऑफिस की थकान के बाद भी रिश्ते में प्यार जगाने के 4 जादुई तरीके
मेनो डिवोर्स से कैसे बचा जा सकता है?
खुलकर बातचीत करना सबसे जरूरी है। पार्टनर को अपनी परेशानी समझाएं। जरूरत पड़े तो डॉक्टर या काउंसलर की मदद लें। साथ समय बिताएं, जिम्मेदारियां बांटें और सबसे अहम, अपनी सेहत और खुशी को प्राथमिकता दें। मेनो डिवोर्स तलाक की मजबूरी नहीं है बल्कि यह आत्म-मंथन का दौर है, जिसमें सही समझ और सहयोग से रिश्ते को बचाया भी जा सकता है।
अन्य न्यूज़












