क्या राहुल को फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की हो गई तैयारियां ? कांग्रेस के भीतर पनप रहा अंतर्विरोध

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 21, 2020   17:13
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क्या राहुल को फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की हो गई तैयारियां ? कांग्रेस के भीतर पनप रहा अंतर्विरोध
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राजद नेता शिवानंद तिवारी ने बिहार में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि राहुल गांधी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन 70 रैलियां भी नहीं की। इसके साथ ही राहुल गांधी पर चुनावों के दौरान शिमला में छुट्टियां मनाने का भी आरोप लगा था।

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन की वजह से महागठबंधन की सरकार बनते-बनते रह गई और पार्टी के भीतर अंतर्विरोध शुरू हो गया। बिहार में मिली हार की समीक्षा करने की बजाय पार्टी नेता आपस में ही एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष के चुनाव के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी विषय पर प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे जी ने विस्तार से चर्चा की और बताया कि कांग्रेस को अपनी रणनीति में सुधार करने की आवश्यकता है।

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राजद नेता शिवानंद तिवारी ने बिहार में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़े किए थे और कहा था कि राहुल गांधी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा लेकिन 70 रैलियां भी नहीं की। इसके साथ ही राहुल गांधी पर चुनावों के दौरान शिमला में छुट्टियां मनाने का भी आरोप लगा था।

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इसी बीच कांग्रेस ने कहा कि उसे उम्मीद है कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी कार्यकर्ताओं की आवाज सुनेंगे और फिर से अध्यक्ष पद संभालेंगे। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, ‘‘इसमें कोई संदेह नहीं है कि राहुल गांधी हमारे शीर्ष नेता हैं और हर मुद्दे पर हमारे प्रेरणा रहेंगे। कांग्रेस के करोड़ों कार्यकर्ता उनके नेतृत्व में विश्वास करते हैं।’’ इसका मतलब साफ है कि राहुल गांधी को कहीं-न-कहीं फिर से राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की कवायद शुरु हो गई है। कहने को तो पिछली बार राहुल गांधी को चुनौती देने के लिए शहजाद पूनावाला राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए अपनी दावेदारी पेश करना चाहते थे लेकिन उन्होंने किनारे कर दिया गया।







किसान तो हल चलाता है पर यह आंदोलनकारी तलवार दिखा रहे हैं

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 28, 2020   11:40
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किसान तो हल चलाता है पर यह आंदोलनकारी तलवार दिखा रहे हैं
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पंजाब में आंदोलन की साजिश रची जा रही थी और कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे रही। सवाल उठता है कि अमरिंदर सरकार ने समय रहते क्यों इस तरह की अराजकता रोकने के लिए कदम नहीं उठाये और क्यों पड़ोसी राज्यों को इस बारे में समय पर सूचना नहीं दी।

केन्द्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ ‘दिल्ली चलो’ मार्च के तहत राष्ट्रीय राजधानी की ओर आते हुए आंदोलनकारियों ने सड़कों पर जो उत्पात मचाया वह लोकतांत्रिक तरीका नहीं कहा जा सकता। पुलिस पर पथराव, गाड़ियों में तोड़फोड़ क्या यह अपनी मांगें मनवाने का तरीका है? हवा में तलवार लहराने वाला क्या किसान हो सकता है? किसान तो हल चलाता है तलवार नहीं। किसान देश का अन्नदाता है और हमेशा शांतिप्रिय ढंग से अपनी बात रखता है। किसानों के वेष में जिस तरह राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं की ओर से शांति भंग करने का प्रयास किया गया वह एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है। शरारती तत्वों ने इस आंदोलन के दौरान जिस तरह शांति भंग कर किसानों को बदनाम किया वह सबके सामने है।

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पंजाब में इस तरह के आंदोलन की साजिश रची जा रही थी और कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठे रही। सवाल उठता है कि अमरिंदर सिंह सरकार ने समय रहते क्यों इस तरह की अराजकता रोकने के लिए कदम नहीं उठाये और क्यों अपने पड़ोसी राज्यों को इस बारे में समय पर सूचना नहीं दी। अमरिंदर सिंह की मंशा पर सवाल इसलिए भी उठता है क्योंकि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा है कि वह तीन दिन से पंजाब के मुख्यमंत्री से बात करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन अमरिंदर बात नहीं करना चाह रहे हैं।

दिल्ली चलो मार्च के लिए किसान अपनी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर राशन और अन्य आवश्यक सामान के साथ एकत्रित हुए। संघर्ष के बाद दिल्ली भी पहुँच गये। कृषि कानूनों से इन आंदोलनकारियों को नुकसान हो या ना हो लेकिन अपनी जिद के चलते इन लोगों ने रेलवे को हजारों करोड़ रुपए का नुकसान करा दिया। कोरोना काल में संघर्ष कर रही अर्थव्यवस्था को उबारने के सरकारी प्रयासों को जिस तरह इन आंदोलनकारियों ने क्षति पहुँचाई है वह देशहित में सही नहीं कही जा सकती।

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अब देखना होगा कि केंद्र सरकार और किसानों के बीच तीन दिसंबर को होने वाली बातचीत का क्या निष्कर्ष निकलता है। केंद्र सरकार ने किसान यूनियनों को मंत्रिस्तरीय बातचीत के लिए आमंत्रित किया है। इससे पहले पंजाब के किसान नेताओं ने सोमवार को अपने ‘रेल रोको’ आंदोलन को वापस लेने की घोषणा करते हुए एक और मंत्रिस्तरीय बैठक की शर्त रखी थी। इसके बाद किसानों ने दो माह के रेल रोको आंदोलन को वापस लेते हुए सिर्फ मालगाड़ियों के लिए रास्ता खोला। बहरहाल, मंत्रिस्तरीय बातचीत का निष्कर्ष जो भी निकले किसानों को और देश के सभी नागरिकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वादे पर भरोसा करना ही चाहिए कि एमएसपी कभी समाप्त नहीं होगी ना ही मंडियों को समाप्त किया जा रहा है। इसके अलावा यहां यह भी बात ध्यान देने योग्य है कि कृषि कानूनों का विरोध सिर्फ पंजाब के ही किसानों का एक गुट कर रहा है जबकि देशभर के किसानों ने इन तीनों कृषि कानूनों का स्वागत किया है।







बिहार चुनाव के नतीजों में दिखा चाचा vs भतीजा, चिराग की चिंगारी से NDA को हुआ नुकसान

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 13, 2020   13:58
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बिहार चुनाव के नतीजों में दिखा चाचा vs भतीजा, चिराग की चिंगारी से NDA को हुआ नुकसान
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करीब 16 घंटे चली मतों की गिनती के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 74 सीटों के साथ दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। दूसरी तरफ जदयू और कांग्रेस को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा है। जदयू को 2015 के चुनाव में जीती 71 सीटों के मुकाबले इस बार 43 सीटें ही मिलीं।

बिहार विधानसभा चुनाव में बेहद रोमांचक मुकाबले में विपक्ष की कड़ी चुनौती का मुकाबला करते हुए नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने 243 सीटों में से 125 सीटों पर जीत का परचम लहरा कर बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल कर लिया जबकि महागठबंधन के खाते में 110 सीटें आईं। बिहार चुनाव में हालांकि कई बड़े उलटफेर देखने को भी मिले। एक ओर जहां सरकार के मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा, सुरेश शर्मा, शैलेश कुमार, फिरोज अहमद, ब्रजकिशोर बिंद और जयकुमार सिंह को हार का सामना करना पड़ा, वहीं राजद के अब्दुलबारी सिद्दिकी, भाजपा से लोजपा में गए राजेंद्र सिंह और वीआईपी पार्टी के नेता मुकेश सहनी सहित कई दिग्गज भी चुनाव हार गए। चुनाव में भले ही राजग ने बहुमत हासिल किया है, लेकिन इस चुनाव में विपक्षी ‘महागठबंधन’ का नेतृत्व कर रहा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) 75 सीटें अपने नाम करके सबसे बड़े दल के रूप में उभरा है। करीब 16 घंटे चली मतों की गिनती के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 74 सीटों के साथ दूसरे सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। दूसरी तरफ जदयू और कांग्रेस को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा है। जदयू को 2015 के चुनाव में जीती 71 सीटों के मुकाबले इस बार 43 सीटें ही मिलीं। कांग्रेस को वर्ष 2015 में 27 सीटें मिली थी जबकि इस बार उसे 19 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। साल 2015 में नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। चुनाव में ‘हम’ प्रमुख जीतन राम मांझी 16,034 वोटों के अंतर से इमामगंज सीट से जीते। वहीं राजद नेता तेजप्रताप यादव 21,139 वोटों के अंतर से हसनपुर सीट से चुनाव जीते। महागठबंधन से मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तेजस्वी यादव ने 37 हजार वोटों से ज्यादा अंतर से जीत दर्ज की।

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विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सरायरंजन से अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी को 4,000 मतों के अंतर से पराजित किया। राजद के अब्दुलबारी सिद्दीकी केवटी सीट से भाजपा के मुरारी मोहन झा से 5,267 वोटों के अंतर से हारे। वहीं लालू प्रसाद के करीबी माने जाने वाले भोला यादव को हायाघाट विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के राम चंद्र प्रसाद ने 10,252 वोटों के अंतर से हराया। राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक विजेता एवं भाजपा उम्मीदवार श्रेयसी सिंह ने राजद के विजय प्रकाश को 41 हजार मतों से पराजित किया जबकि कांग्रेस उम्मीदवार और शरद यादव की बेटी सुभाषिनी यादव को मधेपुरा के बिहारीगंज सीट से हार का सामना करना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा प्रमुख जे पी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह जैसे नेता पहले ही कुमार को मुख्यमंत्री पद का अपना उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं और यह स्पष्ट कर चुके हैं कि नीतीश ही राजग गठबंधन के मुख्यमंत्री बनेंगे। ऐसे में नीतीश कुमार की पार्टी का प्रदर्शन भले ही गिरा है, राजग के बहुमत का आंकड़ा हासिल करने के बाद अब नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने का मार्ग एक बार फिर प्रशस्त हो गया है। चुनाव में चिराग पासवान की लोजपा के कारण जदयू को काफी नुकसान झेलना पड़ा है। लोजपा को हालांकि एक सीट पर जीत मिली, लेकिन उसने कम से कम 30 सीटों पर जदयू को नुकसान पहुंचाया। जद(यू) के प्रवक्ता के सी त्यागी ने नयी दिल्ली में ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में आरोप लगाया कि एक ‘‘साजिश’’ के तहत नीतीश कुमार के खिलाफ ‘‘अपमानजनक अभियान’’ चलाया गया। उन्होंने किसी का नाम लिएबगैर कहा, इसमें ‘‘अपने भी शामिल थे और बेगाने भी।’’ उन्होंने हालांकि उम्मीद जताई कि नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार ही राजग सरकार का नेतृत्व करेंगे। 

भाजपा की 74 और जदयू की 43 सीटों के अलावा सत्तारूढ़ गठबंधन साझीदारों में हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा को चार और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) को चार सीटें मिलीं। वहीं, विपक्षी महागठबंधन में राजद को 75, कांग्रेस को 19, भाकपा माले को 12 और भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटों पर जीत मिली। इस चुनाव में वामदलों और असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन(एआईएमआईएम) को सबसे अधिक फायदा हुआ है। महागठबंधन को मुस्लिम वोट बंटने का भी नुकसान हुआ। मुस्लिम वोट एआईएमआईएम, बसपा और आरएसएलपी समेत पार्टियों के बीच बंटने का लाभ राजग को मिला। ओवैसी की पार्टी को चुनाव में पांच सीटें मिली है लेकिन सीमांचल क्षेत्र में उसने मुस्लिम मतदाताओं के बीच अच्छी खासी सेंध लगायी है जिसका नुकसान राजद को उठाना पड़ा है। एआईएमआईएम की सहयोगी बसपा ने भी एक सीट पर जीत हासिल की। राजग से अलग होकर अकेले चुनाव मैदान में उतरी चिराग पसवान की लोक जनशक्ति पार्टी एक सीट पर ही जीत हासिल कर सकी है। उसने 135 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किये थे लेकिन सिर्फ बेगूसराय के मटिहानी से राजकुमार सिंह चुनाव जीतने में सफल रहे। तेजस्वी यादव के नेतृत्व में पिछले साल लोकसभा चुनाव में राजद खाता भी नहीं खोल पायी थी लेकिन विधानसभा चुनाव में उनके नेतृत्व में राजद, सत्तारूढ़ राजग को कड़ी टक्कर देते हुए सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है। मुख्य रूप से दो गठबंधनों के बीच हुए इस मुकाबले में वाम दलों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया। भाकपा माले को 12 और उसके बाद भाकपा एवं माकपा को दो-दो सीटें मिली। निवर्तमान विधानसभा में भाकपा माले की तीन सीटों के अलावा सदन में वाम दलों की कोई मौजूदगी नहीं थी। चुनाव नतीजों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा नेता नित्यानंद राय ने कहा कि वह बिहार की जनता के आभारी है कि लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास’ का साथ दिया और बिहार सरकार के सुशासन पर भरोसा किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि जनता ने पिछले छह साल में मोदी सरकार के जनकल्याण के कार्यों और राज्य सरकार के सुशासन पर मुहर लगाई है।

21वीं सदी में विकास ही राजनीति का आधार, नारी शक्ति भाजपा के ‘साइलेंट वोटरों’ का समूह: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव और विभिन्न राज्यों के उपचुनावों के परिणामों ने साबित कर दिया है कि 21वीं सदी में ‘‘विकास’’ ही राजनीति का आधार होगा। साथ ही उन्होंने भाजपा को लगातार मिल रही जीत का श्रेय नारी शक्ति को दिया और उन्हें भाजपा के ‘‘साइलेंट’’ मतदाताओं का सबसे बड़ा समूह बताया। प्रधानमंत्री ने परिवारवादी पार्टियों को लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बताते हुए बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सफलता को ‘‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’’ के मंत्र की जीत करार दिया। मोदी बिहार विधानसभा चुनाव और देश के विभिन्न राज्यों के उपचुनावों में भाजपा को मिली विजय के उपलक्ष्य में भाजपा मुख्यालय में आयोजित धन्यवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर भी जोरदार हमला बोला और कहा कि जो लोग लोकतांत्रिक तरीकों से मुकाबला नहीं कर पा रहे है, उन्होंने भाजपा के कार्यकर्ताओं की ‘‘हत्या’’ करने का रास्ता अपनाया है। मोदी ने अपने संबोधन में एक बार फिर सार्वजनिक मंच से स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही बिहार में राजग का नेतृत्व करेंगे, भले ही उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड का प्रदर्शन भाजपा के मुकाबले अच्छा न रहा हो। बिहार को अपने लिए सबसे खास बताते हुए मोदी ने कहा, ‘‘आप आज बिहार के चुनाव नतीजों के बारे में पूछेंगे तो मेरा जवाब भी जनता के जनादेश की तरह स्पष्ट और साफ सुथरा है। चुनाव जीतने का एक ही रहस्य है। ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के मंत्र की जीत हुई है बिहार में।’’

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बिहार की जीत को विकास कार्यों की भी जीत बताते हुए मोदी ने कहा कि राज्य की जनता ने एक बार फिर साफ कर दिया कि उसे क्यों लोकतंत्र की ज़मीन कहा जाता है। उन्होंने कहा, ‘‘आपने फिर सिद्ध किया है कि वाकई, बिहारवासी पारखी भी हैं और जागरूक भी।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘आत्मनिर्भर बिहार के संकल्प के लिए बिहार ने जो अपार प्यार दिया है, उससे मैं और हमारी पूरी टीम अभिभूत है। हम सभी भाजपा के कार्यकर्ता नीतीश जी के नेतृत्व में हर बिहारवासी के साथ इस संकल्प को सिद्ध करने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे।’’ उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि बिहार में तीन बार सरकार में रहने के बाद भाजपा ही एकमात्र पार्टी है, जिसकी सीटों में बढ़ोतरी हुई। उल्लेखनीय है कि बिहार में पहली बार भाजपा जदयू से अधिक सीटें जीतने में सफल रही है। भाजपा को जहां 74 सीटें मिलीं, वहीं जदयू 43 सीटों पर सिमटकर रह गई। मोदी ने देश की नारी शक्ति को भाजपा के ‘‘साइलेंट वोटरों’’ का सबसे बड़ा समूह बताया और कहा कि उनकी गूंज चुनावी नतीजों में भी सुनाई देने लगी है। उन्होंने कहा कि भाजपा शासन काल में महिला केंद्रित योजनाओं के माध्यम से उनका सम्मान और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की वजह से ऐसा हुआ है। मोदी ने कहा ‘‘अब साइलेंट वोटरों की गूंज सुनाई देने लगी है। भाजपा के पास साइलेंट वोटरों का एक ऐसा वर्ग है जो उसे बार-बार वोट दे रहा है। निरंतर वोट दे रहा है। और ये साइलेंट वोटर हैं देश की माताएं, बहनें, महिलाएं और देश की नारी शक्ति।’’ उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी इलाकों तक महिला मतदाता ही भाजपा का सबसे बड़ा ‘‘साइलेंट वोटरों’’ का समूह बन गया है। मोदी ने कहा, ‘‘ऐसा इसलिए है, क्योंकि भाजपा के शासन में महिलाओं को सम्मान भी मिलता है और सुरक्षा भी मिलती है।’’ उन्होंने कहा कि बैंकों में खाता खोलने से लेकर ऋण लेने तक, गर्भावस्था के दौरान मुफ्त जांच से लेकर छह महीने के अवकाश तक, रसोई को धुएं से मुक्त करने से लेकर शौचालयों के निर्माण तक, एक रुपये में सेनेटरी पैड की सुविधा हो या हर घर बिजली पहुंचाना हो या फिर घर-घर जल के लिए नल अभियान, भाजपा ही है जो भारत की महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने के लिए उम्र के हर पड़ाव को देखते हुए विशेष प्रयास कर रही है। 

मोदी ने कहा, ‘‘इसलिए भाजपा पर ये साइलेंट वोटर्स अपना स्नेह दिखाते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा ही देश की एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है जिसमें गरीब, दलित, पीड़ित, शोषित और वंचित अपना प्रतिनिधित्व देखते हैं और अपना भविष्य भी देखते हैं। उन्होंने कहा कि आज भाजपा ही देश की एकमात्र राष्ट्रीय पार्टी है जो समाज के हर वर्ग की आवश्यकता और हर क्षेत्र की आवश्यकताओं को समझती है तथा उनके लिए काम कर रही है। मोदी ने कहा, ‘‘आज भाजपा ही एकमात्र पार्टी है जो राष्ट्रीय आकांक्षाओं के साथ ही हर क्षेत्र के गौरव को भी उतने ही गर्व के साथ अपने साथ लेकर चलती है। इसलिए देश के नौजवानों को सबसे ज्यादा भरोसा किसी पर है तो भाजपा पर है।’’ उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तीकरण और उनकी गरिमा को सुनिश्चित करने के लिए भी देश की जनता को भाजपा पर ही भरोसा है। जनता के भरोसे को अपने लिए सबसे बड़ी पूंजी बताते हुए मोदी ने कहा कि यही वजह है कि भाजपा को चुनाव दर चुनाव सफलता मिल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘देश के लोग भाजपा को ही बार-बार मौका दे रहे हैं और भाजपा पर ही सबसे ज्यादा विश्वास कर रहे हैं। भाजपा की इस सफलता के पीछे उसका सुशासन का मॉडल है। भाजपा सरकारों की पहचान ही सुशासन है।’’ कोरोना महामारी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जनता कर्फ्यू से लेकर अभी तक जिस तरह देश ने इस महामारी का मुकाबला किया, चुनाव नतीजों ने उसे भी अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना काल में गरीब को राशन से लेकर रोजगार तक भारत में जो प्रयास हुए, यह उसका समर्थन है। कोरोना काल में बचाया गया एक-एक जीवन भारत की सफलता की कहानी है।’’ प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान कांग्रेस और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर भी हमला बोला। हालांकि इस दौरान उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा, ‘‘कश्मीर से कन्याकुमारी तक परिवारवादी पार्टियों का जाल लोकतंत्र के लिए खतरा बनता जा रहा है। दुर्भाग्य से एक राष्ट्रीय पार्टी भी एक परिवार के चंगुल में फंस गई है। यह देश का युवा भली-भांति जानता है। परिवारों की पार्टियां या परिवारवादी पार्टियां, लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे में भारतीय जनता पार्टी का दायित्व और बढ़ जाता है कि वह अपने दल में लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखे। 

मोदी ने कहा, ‘‘हमें अपनी पार्टी को जीवंत लोकतंत्र का जीता-जागता उदाहरण बनाना है। पार्टी हर कार्यकर्ता और हर नागरिक के लिए अवसरों का एक बेहतरीन मंच बने।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग ये नहीं समझ रहे, इस बार भी उनकी जगह-जगह जमानत जब्त हो गयी है। ये बिहार की आकांक्षाओं की जीत है, बिहार के गौरव की जीत है।’’ बिहार के साथ ही विभिन्न उपचुनावों में भाजपा का परचम लहराने का उल्लेख करते हुए और चुनावों में भाजपा को लगातार मिल रही सफलता की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के भारत के नागरिक, बार-बार अपना संदेश स्पष्ट कर रहे हैं कि अब सेवा का मौका उसी को मिलेगा, जो देश के विकास के लक्ष्य के साथ ईमानदारी से काम करेगा। उन्होंने कहा, ‘‘हर राजनीतिक दल से देश के लोगों की यही अपेक्षा है कि देश के लिए काम करो, देश के काम से मतलब रखो।’’ पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए मोदी ने कहा कि देश के कुछ हिस्सों में भाजपा के कार्यकर्ताओं को मौत के घाट उतारा जा रहा है और उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे अपने मंसूबे पूरे कर लेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘जो लोग लोकतांत्रिक तरीकों से मुकाबला नहीं कर पा रहे हैं, चुनौती नहीं दे पा रहे हैं, ऐसे कुछ लोगों ने भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या करने का रास्ता अपनाया है। मैं उन सभी को आग्रहपूर्वक समझाने का प्रयास करता हूं। मुझे चेतावनी देने की जरूरत नहीं है, वो काम जनता-जर्नादन करेगी।’’ मोदी ने कहा, ‘‘चुनाव आते हैं, जाते हैं। जय-पराजय का खेल होता रहा है। कभी ये बैठैगा, कभी वो बैठेगा...लेकिन ये मौत का खेल लोकतंत्र में कभी नहीं चल सकता है।’’ ‘‘भारत माता की जय’’ के नारे के साथ अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मोदी ने कोरोना संक्रमण काल में भारी संख्या में मतदान के लिए और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए निर्वाचन आयोग का आभार जताया। मोदी ने देश के युवाओं का आह्वान किया कि वे आगे आएं और भाजपा के माध्यम से देश की सेवा में जुट जाएं। उन्होंने कहा, ‘‘अपने सपनों को साकार करने के लिए, अपने संकल्पों को सिद्ध करने के लिए, कमल को हाथ में लेकर चल पड़ें।







बंगाल में ममता सरकार के खिलाफ अमित शाह की हुंकार तो बिहार में किसकी बयार

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  नवंबर 7, 2020   13:40
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बंगाल में ममता सरकार के खिलाफ अमित शाह की हुंकार तो बिहार में किसकी बयार
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केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा कि वह राज्य में राजनीतिक हत्याओं पर श्वेत-पत्र लेकर आएं और हैरानी जताई कि प्रदेश सरकार ने क्यों राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को अपराध के आंकड़े नहीं भेजे।

चुनावी उठा-पटक के बीच हमने प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में पश्चिम बंगाल और बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा की। 2021 में पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा पूरी तरीके से कमर कस चुकी है। खास बात यह है कि भाजपा भावनात्मक तरीके से लोगों को आकर्षित करने में जुटी हुई है। दशहरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वहां के कार्यकर्ताओं से बातचीत की तो वही अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर पश्चिम बंगाल पहुंचे। शाह का यह दौरा काली पूजा के ठीक पहले का है। अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने हर वर्ग को साधने की कोशिश की और इसी के तहत वह पार्टी के मारे गए कार्यकर्ताओं के परिजनों से मिले और गरीबों के घर खाना भी खाया। ममता सरकार पर अमित शाह जमकर बरसे और अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में 200 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा भी कर दिया। वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके है। अब नतीजों का इंतजार है। 10 तारीख को नतीजे आएंगे। लेकिन इस सप्ताह सबसे ज्यादा इस बात की चर्चा रही कि क्या वाकई नीतीश कुमार 2025 के चुनाव में नहीं लड़ेंगे?

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केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कहा कि वह राज्य में राजनीतिक हत्याओं पर श्वेत-पत्र लेकर आएं और हैरानी जताई कि प्रदेश सरकार ने क्यों राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) को अपराध के आंकड़े नहीं भेजे। संशोधित नागरिकता कानून के लागू होने का जिक्र करते हुए शाह ने कहा कि कानून अपनी जगह है और यह केंद्र सरकार का संकल्प है। शाह ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “विकास के नए युग में हम एक मजबूत बंगाल बनाने का लक्ष्य रखते हैं। ममता बनर्जी अपने भतीजे को अगला मुख्यमंत्री बनाने का लक्ष्य रखती हैं।” उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल सरकार ने 2018 से एनसीआरबी को अपराध के आंकड़े नहीं भेजे हैं। मैं कहना चाहता हूं कि ममता बनर्जी राजनीतिक हत्याओं पर श्वेत-पत्र लेकर आएं। राजनीतिक हत्याओं के लिहाज से बंगाल शीर्ष पर है।” राज्य में सरकारी अधिकारियों का राजनीतिकरण और अपराधीकरण होने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, “पश्चिम बंगाल में तीन कानून हैं- एक भतीजे के लिये, एक अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण के लिये और एक आम लोगों के लिये।” राज्यपाल जगदीप धनखड़ और प्रदेश सरकार के बीच टकराव पर शाह ने कहा कि राज्यपाल अपने संवैधानिक दायरे के तहत काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “राज्यपाल के खिलाफ इस्तेमाल शब्द अस्वीकार्य हैं। मैं जानना चाहूंगा कि (दार्जिलिंग) के जिलाधिकारी कहां हैं जिन्हें राज्यपाल से मुलाकात के बाद हटाया गया था।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि आज मेरा बंगाल का दो दिवसीय दौरा समाप्त हो रहा है। इस दौरे के दौरान भाजपा के 4 विभागों के कार्यकर्ता और समाज के अन्य कार्यकर्ताओं से मिलना हुआ। करीब 180 से ज्यादा संस्थाओं के प्रतिनिधियों से भी संवाद हुआ। इस बीच उन्होंने कहा कि 2010 में बड़े चाव के साथ 11 अप्रैल को मां, माटी और मानुष के नारे के साथ बंगाल में परिवर्तन हुआ था। बंगाल की जनता के मन मे ढेर सारी अपेक्षायें और आशाएं थी। उन्होंने कहा कि कम्यूनिस्ट शासन से त्रस्त होकर ममता बनर्जी के हाथों में बंगाल की कमान दी गई थी। मगर आज मां, माटी और मानुष का नारा तुष्टिकरण, तानाशाही और टोलबाजी में परिवर्तित हो गया है। तृणमूल सरकार जनता की अपेक्षाओं को पूरा नहीं कर सकी है। शाह ने कहा कि बंगाल की जनता में एक अजीब प्रकार का वातावरण दिख रहा है। मैं जहां भी गया तो सैकड़ों लोग सकड़ों पर आए थे। जब वो भारत माता की जय, वंदे मातरम, जय श्रीराम के नारे लगाते थे, वो हमारे स्वागत में कम, ममता सरकार के प्रति गुस्से को ज्यादा दिखाते थे।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कोलकाता के उत्तर में स्थित बगुईहाटी में मतुआ समुदाय के एक सदस्य के घर गए और वहां पर दोपहर का भोजन किया। समुदाय के एक सदस्य नवीन बिस्वास के घर जाने से पहले शाह मोहल्ले में स्थित मतुआ समुदाय के एक मंदिर में गए और वहां कुछ समय व्यतीत किया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के ‘‘खोए गौरव’’ को वापस लाने की आवश्यकता है और राज्य में ‘‘तुष्टिकरण की मौजूदा राजनीति’’ ने राष्ट्र की आध्यात्मिक चेतना को बनाए रखने की अपनी सदियों पुरानी परंपरा को चोट पहुंचाई है। शाह ने कहा कि पश्चिम बंगाल चैतन्य महाप्रभु, श्री रामकृष्ण और स्वामी विवेकानंद जैसी हस्तियों की भूमि है। उन्होंने कहा कि यह राज्य पहले पूरे देश में आध्यात्मिक जागृति का केंद्र हुआ करता था। 

अमित शाह ने पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का आश्वासन दिया है: भाजपा नेताओं ने कहा

केंद्रीय गृह मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने पार्टी की पश्चिम बंगाल इकाई को आश्वासन दिया कि केंद्र राज्य में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष विधानसभा चुनाव सुनिश्चित करेगा। यह जानकारी पार्टी सूत्रों ने दी। राज्य में विधानसभा चुनाव अप्रैल-मई 2021 में होने की उम्मीद है। शाह ने भाजपा की एक आंतरिक बैठक को संबोधित करते हुए राज्य इकाई को कड़ी मेहनत करने के लिए कहा ताकि पार्टी तृणमूल कांग्रेस को सत्ता से हटाकर राज्य में अगली सरकार बना सके। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठन को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि केंद्र की जन-समर्थक नीतियों के बारे में आम लोग अवगत हों। प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने बैठक के बाद कहा, ‘‘बैठक के दौरान अमित शाह जी ने कहा कि कुछ लोग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान हिंसा के बारे में आशंकित हैं। 

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 मेरा अंतिम चुनाव: नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य में हो रहा विधानसभा चुनाव उनका अंतिम चुनाव है। पूर्णिया के धमदाहा में एक चुनावी जनसभा को संबोधित कर रहे नीतीश कुमार ने कहा, ‘‘आज चुनाव प्रचार का अंतिम दिन है। परसों मतदानहै और यह मेरा अंतिम चुनाव है। अंत भला तो सब भला। ’’ गौरतलब है कि नीतीश कुमार ने साल 1977 में अपना पहला चुनाव लड़ा था। वह कई बार लोकसभा के सांसद रहे और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे। नीतीश कुमार साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री हैं। जनता से बिहार के विकास के लिए राजग को वोट देने की अपील करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि राज्य की पहले की स्थिति और आज की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य को अभी विकास के नए आयाम तय करने हैं और इसके लिए राजग के पक्ष में मतदान जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा ‘‘जब हमें काम करने का मौका मिला, तब हमने कहा था कि न्याय के साथ विकास किया जाएगा। हमने अपना वादा पूरा किया। हमने किसी की भी उपेक्षा नहीं की, सबको साथ ले कर चले, सबका विकास किया। आगे मौका मिला तो राज्य को विकास की नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

जदयू का दावा: नीतीश के दिमाग में रिटायरमेंट नहीं

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह कहकर राजनीतिक हलकों में उथल-पुथल मचा दी है कि यह विधानसभा चुनाव उनका अंतिम चुनाव है। उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ जनता दल (यूनाइटेड) ने स्पष्ट रूप से उन चर्चाओं को खारिज कर दिया कि पार्टी प्रमुख नीतीश कुमार राजनीति से संन्यास लेने के बारे में सोच रहे हैं। 30 वर्षों से भी अधिक समय से नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहने वाले और वर्तमान में पार्टी की राज्य इकाई के प्रमुख व दिग्गज समाजवादी नेता वशिष्ठ नारायण सिंह ने इन विवेचनाओं को खारिज कर दिया। कुमार के इस बयान पर विपक्षी दलों की ओर से प्रतिक्रियाओं की झड़ी लग गई जिनका दावा है कि कुमार के बयान से लगता है कि वह अपनी हार मान चुके हैं। राज्यसभा सांसद सिंह ने कहा, ‘‘क्या कोई राजनीतिक या सामाजिक कार्यकर्ता कभी सेवानिवृत्त होता है? क्या नीतीश कुमार खुद विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं?’’ सिंह ने कहा, ‘‘यदि पूरा बयान सुने या संदर्भ को समझे बिना विपक्ष अपनी गलतफहमी से खुश हो रहा है, तो इसमें हम कुछ नहीं कर सकते। जबकि तथ्य यह है कि तीसरे और अंतिम चरण के चुनाव के लिए प्रचार से कुछ समय पहले वह अपनी अंतिम चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे, जिसका वह जिक्र कर रहे थे।’’ राज्य के मंत्री संजय कुमार झा ने भी इसी तरह की बात कही। मुख्यमंत्री के करीबी झा ने बताया, 2005 के बाद से हर बार प्रचार के दौरान अपनी आखिरी जनसभा में कुमार इस तरह कहते रहे हैं। इसका यह मतलब निकालना कि यह उनका आखिरी चुनाव है, यह बिल्कुल गलत है। उन्होंने कहा, ‘‘जब तक जनता चाहती है, तब तक कुमार राज्य और यहां के लोगों की सेवा करते रहेंगे।’’ 

विपक्ष का तंज

राजद की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने इस पर कहा, हमारी बात सही साबित हुई। हम सब कह रहे थे कि नीतीश कुमार थक चुके हैं और अब बिहार पर शासन करने में वह सक्षम नहीं है। सेवानिवृत्ति उनके लिए अच्छी रहेगी।’’ इसके साथ ही लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख चिराग पासवान ने भी मुख्यमंत्री की टिप्पणी पर तंज कसा है। चिराग ने ट्वीट कर कहा, ‘‘साहब ने कहा है कि यह उनका आख़िरी चुनाव है। इस बार पिछले 5 साल का हिसाब दिया नहीं और अभी से बता दिया कि अगली बार हिसाब देने आएँगे नहीं। अपना अधिकार उनको ना दें जो कल आपका आशीर्वाद फिर माँगने नहीं आएँगे। अगले चुनाव में ना साहब रहेंगे ना जे॰डी॰यू॰।फिर हिसाब किससे लेंगे हम लोग?’’ कांग्रेस के विधान पार्षद प्रेम चंद्र मिश्रा ने मुख्यमंत्री के बयान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया।