• हॉकी के जादूगर के नाम पर होगा खेल रत्न पुरस्कार तो राहुल की सक्रियता विपक्ष को देगी मजबूती

अंकित सिंह Aug 07, 2021 12:31

भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न की जगह मेजर ध्यानचंद खेल रत्न रखने के फैसले का खेल जगत ने स्वागत किया है। संसद में जारी गतिरोध के बीच जिस तरह से विपक्ष की राजनीति है उसमें राहुल गांधी की अहम भूमिका मानी जा रही है।

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के प्रदर्शन को लेकर हर तरफ वाहवाही हो रही है। इन सबके बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ह़ॉकी खिलाड़ियों के प्रदर्शन से प्रभावित होकर देश की मांग को ध्यान में रखते हुए राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार को अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार करने की बात कही। प्रधानमंत्री के इस ऐलान के बाद जहां देश में एक तरफ लोगों ने इसका खूब स्वागत किया वहीं कुछ राजनीतिक दल इस पर अपनी सधी हुई प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर इस कदम का स्वागत किया परंतु इशारों-इशारों में यह भी कह दिया कि अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम का भी नाम बदलकर किसी खिलाड़ी के नाम पर रखने की आवश्यकता है। हमने प्रभासाक्षी के खास कार्यक्रम चाय पर समीक्षा में इसी बात पर चर्चा की। प्रभासाक्षी के संपादक नीरज कुमार दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह ऐलान अपने-आप में स्वागत योग्य है। देश के महान खिलाड़ी के नाम पर इस तरह के सम्मान का नामकरण करना बड़ी बात है। हालांकि उन्होंने इस बात को भी स्वीकार किया कि कांग्रेस के लिए झटका हो सकता है। परंतु वह खुलकर इसका विरोध नहीं कर सकते हैं।

इसे भी पढ़ें: ऐसा लगता है संसद का सत्र चलाने की परवाह न तो सरकार को है और न विपक्ष को

विपक्षी एकता पर बात करते हुए नीरज कुमार दुबे ने कहा कि राहुल गांधी के पक्ष को एकजुट करने की कोशिश में है। वह अपने आपको सक्रिय राजनीति में दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही साथ यह भी सिद्ध करने की कोशिश कर रहे हैं कि वह विपक्ष को एक साथ लेकर आगे बढ़ सकते हैं। संसद में जारी गतिरोध के बीच जिस तरह से विपक्ष की राजनीति है उसमें राहुल गांधी की अहम भूमिका मानी जा रही है। वहीं देश में ओबीसी और जाति आधारित जनगणना को लेकर भी खूब राजनीति हो रही है। बिहार और उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय राजनीतिक दल लगातार जाति आधारित जनगणना की मांग कर रहे हैं। साथ-साथ ओबीसी को लेकर कुछ मांग भी कर रहे हैं। प्रभासाक्षी के कार्यक्रम में हमने इस बात पर भी चर्चा की। 

खेलरत्न पुरस्कार का नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न

भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब राजीव गांधी खेल रत्न नहीं बल्कि मेजर ध्यानचंद खेल रत्न होगा। भारतीय हॉकी टीमों के तोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें देश से भी नागरिकों के अनुरोध मिल रहे हैं कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद के नाम पर रखा जाये। मोदी ने ट्वीट किया, ''उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए खेल रत्न पुरस्कार को अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जायेगा। मेजर ध्यानचंद खेलों में भारत को गौरवान्वित और सम्मानित करने वाले अग्रणी खिलाड़ियों में से थे। देश के सर्वोच्च खेल सम्मान का नाम उनके नाम पर ही होना चाहिये।’’ प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों के प्रदर्शन ने पूरे देश को रोमांचित किया है। उन्होंने कहा कि अब हॉकी में लोगों की दिलचस्पी फिर से बढ़ी है जो आने वाले समय के लिये सकारात्मक संकेत है। खेल रत्न सम्मान के तहत 25 लाख रुपये नकद पुरस्कार दिया जाता है।

खेल रत्न पुरस्कार का नाम ध्यानचंद के नाम पर करने का खेल जगत ने किया स्वागत

भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी खेल रत्न की जगह मेजर ध्यानचंद खेल रत्न रखने के फैसले का खेल जगत ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की कि नागरिकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए खेल रत्न पुरस्कार को अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा। तोक्यो ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीमों के शानदार प्रदर्शन के बाद इस सम्मान का नाम महान हॉकी खिलाड़ी के नाम पर रखने का फैसला लिया गया। इस फैसले का भारतीय खेल जगत ने स्वागत किया है। केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि ध्यानचंद खेलों में भारत के सबसे बड़े नायक रहे है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘मेजर ध्यानचंद जी ने अपने असाधारण खेल से विश्व पटल पर भारत को एक नई पहचान दी व अनगिनत खिलाड़ियों के प्रेरणास्रोत बने। जनभावना को देखते हुए खेल रत्न पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार करने पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक धन्यवाद।’’ भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी से सांसद बने गौतम गंभीर ट्वीट किया, ''किसी (खेल) नायक का नाम पुरस्कार को और प्रतिष्ठित बनाता है।’’ ओलंपिक पदक विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त ने भी इस कदम के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया करते हुए कहा, ‘‘खेल के सबसे बड़े पुरस्कार खेल रत्न को देश के श्रेष्ठ खिलाड़ी और हॉकी के जादूगर ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न’ रखने के फैसले के लिए मैं भारत सरकार और आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक धन्यवाद करता हूं।’’ पूर्व खेल मंत्री किरेन रीजीजू ने भी इस कदम के लिए प्रधानमंत्री का शुक्रिया करते हुए लिखा, ''धन्यवाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी हमेशा हमारे सच्चे नायकों का सम्मान करने और उन्हें पहचान देने के लिए। हमारे देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार को मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कहा जाएगा। महान खिलाड़ी और भारतीय खेलों को सम्मानित करने के लिए एक सही श्रद्धांजलि। जय हिंद।

खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद के नाम पर करने का स्वागत: कांग्रेस

कांग्रेस ने ‘राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार’ का नाम ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ किये जाने के फैसले का शुक्रवार को स्वागत किया और साथ ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर महान हॉकी खिलाड़ी के नाम का उपयोग अपने राजनीतिक उद्देश्य के लिए करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम एवं दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम का नाम भी बदला जाना चाहिए। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने यह भी कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी देश के नायक हैं जो किसी पुरस्कार से नहीं, बल्कि अपनी शहादत, विचार और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए जाने जाते हैं। सुरजेवाला ने कहा, ‘‘राजीव गांधी इस देश के लिए नायक थे, हैं और रहेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के प्रति सम्मान प्रकट करने का कांग्रेस स्वागत करती है। लेकिन नरेंद्र मोदी जी उनका नाम अपने छोटे राजनीतिक उद्देश्यों के नहीं घसीटते तो अच्छा होता। बहरहाल, हम मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल रत्न पुरस्कार का नाम रखने का स्वागत करते हैं।’’ उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘ओलंपिक वर्ष में जब खेल का बजट घटा दिया गया तो नरेंद्र मोदी जी ध्यान भटकाने का काम कर रहे हैं। कभी किसानों की समस्या से तो कभी जासूसी के मामले से और कभी महंगाई से ध्यान भटका रहे हैं।’’ कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘अब हमें उम्मीद है कि देश के खिलाड़ियों के नाम पर और स्टेडियम एवं योजनाओं का नाम रखा जाएगा। सबसे पहले नरेंद्र मोदी स्टेडियम का नाम बदल दीजिए, अरुण जेटली स्टेडियम का नाम बदल दीजिए, भाजपा नेताओं के नाम से निर्मित स्टेडियम के नाम बदल दीजिए। अब पीटी ऊषा, मिल्खा सिंह, सचिन तेंदुलकर, सुनील गावस्कर, अभिनव बिंद्रा, लिएंडर पेस, पुलेला गोपीचंद और सानिया मिर्जा के नाम पर स्टेडियम के नाम रखिये।’’ उन्होंने दावा किया, ‘‘मोदी जी बड़ी लकीर खींचना नहीं जानते। वह दूसरों की लकीर मिटाना चाहते हैं।’’ उल्लेखनीय है कि भारत के सर्वोच्च खेल सम्मान खेल रत्न पुरस्कार का नाम अब राजीव गांधी खेल रत्न नहीं बल्कि मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह घोषणा की।

इसे भी पढ़ें: नये कश्मीर में क्या-क्या बदला यदि यह सवाल आपके मन में भी है तो यह रहे जवाब

राहुल समेत कई विपक्षी नेताओं ने ‘किसान संसद’ पहुंचकर समर्थन जताया, तोमर ने ‘मीडिया इवेंट’ बताया

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेताओं ने जंतर-मंतर पहुंच कर तीन केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों के साथ एकजुटता प्रकट की तथा इन कानूनों को निरस्त करने की मांग की। दूसरी तरफ, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विपक्ष के इस कदम ‘मीडिया इवेंट (मीडिया को ध्यान में रखकर किया गया आयोजन)’करार देते हुए कहा कि अगर विपक्षी दल किसानों के मुद्दों को लेकर ईमानदार होते तो संसद में चर्चा करते। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है। किसान संगठनों द्वारा आयोजित ‘किसान संसद’ में भाग लेने के बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्षी पार्टियों ने किसानों के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया है और तीनों नये कृषि कानूनों को निरस्त करने पर जोर दिया है। राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता एक बस में सवार होकर जंतर-मंतर पहुंचे जहां किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर पिछले कुछ दिनों से सांकेतिक ‘किसान संसद’ का आयोजन किए हुए हैं। किसान संगठनों की मांग तीन नये कृषि कानूनों को निरस्त करने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी का कानून बनाने की है। किसानों का समर्थन करने के लिए पहुंचने वाले नेताओं में राहुल गांधी, राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, द्रमुक नेता तिरुची शिवा, शिवसेना के संजय राउत, राजद के मनोज झा, भाकपा के विनय विश्वम, माकपा ई. करीम, समाजवादी पार्टी के एसटी हसन और अन्य विपक्षी नेता शामिल थे। राहुल गांधी के साथ तृणमूल कांग्रेस का कोई सदस्य जंतर-मंतर नहीं पहुंचा, जबकि पिछले दिनों कांग्रेस नेता के बुलाने पर तृणमूल कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी और सौगत रॉय नाश्ते पर पहुंचे थे। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस की तरफ से बताया गया कि उनके नेता पहले ही जंतर-मंतर पहुंचकर किसानों से मुलाकात कर चुके हैं और इसी कारण आज वे नहीं पहुंचे। दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के सांसद सुशील गुप्ता ने कहा कि अगर खड़गे की अगुवाई में विपक्षी नेता जंतर-मंतर जाते तो उनकी पार्टी पहुंचती, लेकिन वो राहुल गांधी की अगुवाई में वहां नहीं जा सकती। राहुल गांधी और कई अन्य विपक्षी नेता जंतर-मंतर पहुंचकर कुछ देर तक किसानों के बीच बैठे और किसान नेताओं का भाषण सुना। ‘किसान संसद’ में शामिल होने के बाद राहुल गांधी ने कहा, ‘‘विपक्ष की पार्टियां यहां हिंदुस्तान के किसानों का समर्थन करने के लिए आई थीं। ये तीन कानून खत्म होने चाहिए। हम अपने पूरा समर्थन दिया है।’’ उन्होंने यह दावा भी किया कि सरकार सदन में विपक्ष को नहीं सुनना चाह रही और पेगासस के मामले पर चर्चा नहीं करा रही है। उधर, विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए तोमर ने कहा, ‘‘प्रतिपक्ष का जंतर-मंतर जाना सिर्फ मीडिया इवेंट है। अगर उनके मन में किसानों के लिए जरा सा स्थान होता, ईमानदारी होती तो वह उनके विषय को सदन में उठाते और अगर समाधान नहीं निकलता तो संघर्ष करते।’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार इस पर चर्चा करने के लिए तैयार है और विपक्ष चर्चा से भाग रहा है, तो यह पूरा देश देख रहा है। अगर आप (मीडिया) ये दिखाना बंद करे तो यह बंद हो जाएगा।’’ इससे पहले, खड़गे के संसद भवन स्थित कक्ष में बैठक कर विपक्षी सदस्यों ने यह निर्णय लिया कि वे किसानों का समर्थन करने के लिए ‘जंतर-मंतर’ पहुंचेंगे। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी नेताओं की बैठक में यह भी तय किया गया कि पेगासस जासूसी मामला और महंगाई के मुद्दे पर सरकार को आगे भी घेरा जाएगा। पेगासस, कृषि कानूनों और कुछ अन्य मुद्दों को लेकर, संसद के मॉनसून सत्र में शुरू से ही दोनों सदनों में गतिरोध बना हुआ है। 19 जुलाई से यह सत्र आरंभ हुआ था, लेकिन अब तक दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित होती रही है।

राज्यों, संघ क्षेत्रों को ओबीसी सूची तैयार करने का आधिकार बहाल करने के विधेयक को मंत्रिमंडल की मंजूरी: सूत्र

ऐसा माना जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक संविधान संशोधन विधेयक को बुधवार को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची तैयार करने का अधिकार प्रदान किया गया है। सूत्रों ने बताया कि यह विधेयक पारित होने के लिये अब संसद में पेश किया जायेगा। उच्चतम न्यायालय ने 5 मई के बहुमत आधारित फैसले की समीक्षा करने की केंद्र की याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें यह कहा गया था कि 102वां संविधान संशोधन नौकरियों एवं दाखिले में सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े (एसईबीसी) को आरक्षण देने के राज्य के अधिकार को ले लेता है। वर्ष 2018 के 102वें संविधान संशोधन अधिनियम में अनुच्छेद 338 बी जोड़ा गया था जो राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के ढांचे, कर्तव्यों और शक्तियों से संबंधित है। जबकि 342 ए किसी विशिष्ट जाति को एसईबीसी अधिसूचित करने और सूची में बदलाव करने के संसद के अधिकारों से संबंधित है। गौरतलब है कि विपक्षी दल ने इस मुद्दें को लेकर केंद्र पर संघीय ढांचे पर आघात करने का आरोप लगाया है। वहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारित मंत्री वीरेन्द्र कुमार ने पिछले महीने राज्य सभा में कहा कि सरकार इस मुद्दे को लेकर कानूनी विशेषज्ञों और विधि मंत्रालय से विचार विमर्श कर रही है और ओबीसी सूची का निर्धारण करने के राज्यों के अधिकारों की सुरक्षा के रास्ते तलाश रही है। सूत्रों ने बुधवार को बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें राज्यों एवं संघ क्षेत्रों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची तैयार करने का आधिकार प्रदान किया गया है।

जातीय जनगणना: हमने प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिख मिलने का समय मांगा है- नीतिश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर जातीय जनगणना के मुद्दे पर सर्वदलीय शिष्टमंडल के साथ उनसे मिलने का समय मांगा है। पटना, नालंदा, गया और जहानाबाद जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद पटना हवाईअड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में नीतीश से जातीय जनगणना के संबंध में सवाल करने पर उन्होंने कहा, ‘‘हमने पत्र भेज दिया है।’’ प्रधानमंत्री से मुलाकात के लिए जदयू सांसदों को वक्त नहीं मिलने और जबकि बिहार सरकार में शामिल हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा से मंत्री संतोष कुमार सुमन के प्रधानमंत्री से मिलने के बारे में पूछे जाने पर नीतीश ने कहा, ‘‘हमारी पार्टी के सांसदों ने अमित शाह से मिलकर भी अपनी बातें रखी है।’’ गौरतलब है कि जदयू सांसदों की केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह से भेंट हुई थी। फोन टैपिंग से जुड़े सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित है और उसके फैसले का इंतजार है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के सर्वेक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने दक्षिण बिहार की नदियों के जलस्तर की स्थिति, ओवरटॉपिंग, नदियों के कटाव की स्थिति, क्षतिग्रस्त स्थलों पर बाढ़ से राहत-बचाव कार्य, सहित तमाम स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पटना जिले के दनियांवा, फतुहा, धनरुआ प्रखंड, नालंदा जिले के हिलसा, करायपरसुराय, एकंगरसराय, रहुई प्रखंड, जहानाबाद जिले के हुलासगंज, मोदनगंज प्रखंड तथा गया जिले के बोधगया, टेकारी प्रखंडों का हवाई सर्वेक्षण किया। हवाई सर्वेक्षण के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि इन जिलों के कई इलाके बाढ़ से बहुत ज्यादा प्रभावित हैं और अगर गंगा नदी का जलस्तर और बढ़ता है तो इन इलाकों में बाढ़ का खतरा और ज्यादा बढ़ जायेगा। नीतीश ने कहा, ‘‘अगले सप्ताह हम फिर इन क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करेंगे। बाढ़ को नियंत्रित करने के लिए विभाग ने कार्य शुरु कर दिया है लेकिन फिर से वर्षा होने पर गंगा नदी का जलस्तर और ज्यादा बढ़ेगा, जिससे इन क्षेत्रों में और पानी फैल सकता है।’’ नदियों को जोड़ने के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटी नदियों को जोड़ने से काफी लाभ होगा, जल संग्रहण हो सकेगा और जल संकट दूर किया जा सकेगा।

- अंकित सिंह