सभी ऋतुओं का राजा है बसंत, प्रकृति को मिलता है नया जीवन

By प्रज्ञा पाण्डेय | Publish Date: Jan 20 2018 12:00AM
सभी ऋतुओं का राजा है बसंत, प्रकृति को मिलता है नया जीवन
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ऋतुराज बसंत के आने से माहौल खुशनुमा और मनोहर हो जाता है। भारतीय पंचांग के अनुसार छह प्रकार की ऋतुएं होती हैं और बसंत ऋतु को इस सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है। बसंत के आने से प्रकृति को नया जीवन मिलता है।

ऋतुराज बसंत के आने से माहौल खुशनुमा और मनोहर हो जाता है। भारतीय पंचांग के अनुसार छह प्रकार की ऋतुएं होती हैं और बसंत ऋतु को इस सभी ऋतुओं का राजा कहा जाता है। बसंत के आने से प्रकृति को नया जीवन मिलता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन से तापमान बढ़ जाता है और दिन बड़े होने लगते हैं। उत्तर भारत में पड़ने वाली कड़ाके की ठंड के बाद बसंत पंचमी से तापमान बढ़ने से मौसम सुखद हो जाता है। सभी पशु-पक्षी और जीव आनंददायक अनुभव करते हैं। सभी पेड़-पौधों में नई कपोल आने लगती है। मौसम को देखकर ऐसा लगता है जैसे प्रकृति भी उत्सव मना रही है।  

 
बसंत पंचमी का महत्व 
 


बसंत की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनायी जाती है। इस साल बसंत पंचमी 22 जनवरी को मनायी जाएगी। हिंदू कैलेंडर के हिसाब से बसंत पंचमी माघ महीने की शुक्लपक्ष की पंचमी को मनाया जाता है। इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है। साल के कुछ खास शुभ मुहूर्त में से एक होने के कारण इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है। इस दिन विवाह, गृह प्रवेश और अन्य प्रकार के शुभ कार्य सम्पन्न कराए जाते हैं। बसंत पंचमी के दिन प्रायः शिशुओं का अन्नप्रासन भी कराया जाता है। इस अनुष्ठान में शिशु को पहली बार अन्न खिलाया जाता है। यही नहीं बसंत पंचमी के दिन बच्चों का अक्षरारम्भ भी कराया जाता है ताकि ज्ञान की देवी सरस्वती उन पर प्रसन्न हों और उन्हें विद्वान होने का आशीर्वाद दें।
 
बसंत पंचमी और पीला रंग 
 
बसंत ऋतु में पीले रंग का विशेष महत्व है। बसंत ऋतु को पीले रंग का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पूजा विधि में भी पीले रंग के वस्तुओं का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही पीले रंग के कपड़े पहनने को भी वरीयता दी जाती है। यही नहीं बसंत पंचमी के दिन पीले रंग के व्यंजन भी बनाए जाते हैं जिनमें मीठे चावल, केसरिया शीरा, बूंदी के लड्डू और राजभोग विशेष रूप से पसंद किए जाते हैं। 


 
देवी सरस्वती 
 
ऐसा माना जाता है कि माघ महीने की शुक्ल पंचमी को ज्ञान की देवी सरस्वती प्रकट हुईं थीं। इसलिए बसंत पंचमी को देवी सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है जिससे प्रसन्न होकर साधकों को ज्ञानवान होने का आशीर्वाद दें। देवी सरस्वती को शारदा, भगवती, वीणा वादिनी और बागीश्वरी के नाम से भी जाना जाता है। इनके एक हाथ में वीणा और दूसरे हाथ में पुस्तक और माला होती है। सरस्वती देवी को ज्ञान, कला और संगीत की देवी मानी जाती है। इनके आशीर्वाद से अज्ञानता रूपी अंधकार का नाश हो जाता है।


 
पूजा का शुभ मुहूर्त
 
बसंत पंचमी पर पूजा का मुहूर्त सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 12 बजकर 32 मिनट तक है। इसका अर्थ है कि 5 घंटे से अधिक समय पूजा का शुभ मुहूर्त है जिसमें पूजा सम्पन्न की जा सकती है।
 
पूजा की विधि
 
बसंत पंचमी के दिन पूजा करते समय सफेद या पीले रंग के वस्त्रों को धारण करें। साथ ही देवी सरस्वती को पीले या सफेद रंग के फूलों को अर्पित करें। देवी सरस्वती को दही, मिसरी या केसर युक्त खीर का भोग लगा सकते हैं। बसंत पंचमी के दिन देवी को दूध, दही, घी और नारियल भी चढ़ाया जाता है।
 
कामदेव की पूजा 
 
बसंत पंचमी के दिन कामदेव और उनकी पत्नी रति की भी पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कामदेव बसंत के मित्र है तथा बसंत ऋतु के आगमन से वह माहौल को खुशनुमा और रोमांटिक बना देते हैं। 
 
- प्रज्ञा पाण्डेय

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