• कोलंबिया से हारने के बाद मुक्केबाज मैरीकॉम का तोक्यो ओलंपिक का सफर खत्म

गौरतलब है कि, कोविड-19 महामारी के बीच खेलों की तैयारियों की चुनौतियों के बारे में बात करते हुए मैरीकॉम ने कहा कि,‘‘मैं भाग्यशाली हूं कि मैं उपकरणों के साथ छोटा सा जिम बना सकी लेकिन अभ्यास जोड़ीदार की कमी थी जो ‘आई कांटेक्ट’ और सब चीज के लिये काफी अहम होता है। ’’

छह बार की विश्व चैम्पियन एम सी मैरीकॉम (51 किग्रा) का दूसरा ओलंपिक पदक जीतने का सपना गुरुवार को यहां तोक्यो खेलों के प्री क्वार्टरफाइनल में रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता इंग्रिट वालेंसिया से 2-3 से हारकर समाप्त हो गया। कई बार की एशियाई चैम्पियन और 2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मैरीकॉम ने इस चुनौतीपूर्ण मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ दिया लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सकी। यह 38 वर्षीय महान मुक्केबाज की अंतिम ओलंपिक मुकाबला होगा। जब रैफरी ने मुकाबले के अंत में वालेंसिया का हाथ ऊपर उठाया तो मैरीकॉम की आंखों में आंसू थे और चेहरे पर मुस्कान थी।

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जिस तरीके से वालेंसिया पहली घंटी बजने के बाद भागी थी, उससे लग रहा था कि यह मुकाबला कड़ा होने वाला है और ऐसा ही हुआ। शुरू से ही दोनों मुक्केबाज एक दूसरे पर मुक्के जड़ रही थीं लेकिन वालेंसिया ने शुरूआती राउंड 4-1 से अपने नाम कर दबदबा बना लिया। मणिपुर की अनुभवी मुक्केबाज मैरीकॉम ने शानदार वापसी कर दूसरे और तीसरे राउंड को 3-2 से अपने नाम किया। पर शुरूआती राउंड की बढ़त से वालेसिंया इस मुकाबले को जीतने में सफल रहीं। भारतीय मुक्केबाज ने दूसरे और तीसरे राउंड में दाहिने ‘हुक’ का बखूबी इस्तेमाल किया। मैरीकॉम 2019 विश्व चैम्पियनशिप के क्वार्टरफाइनल में पहले वालेंसिया को हरा चुकी हैं। कोलंबियाई मुक्केबाज की यह मैरीकॉम पर पहली जीत है। मैरीकॉम की तरह 32 साल की वालेंसिया भी अपने देश के लिये काफी अहम खिलाड़ी हैं। वह पहली महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने ओलंपिक खेलों में अपने देश का प्रतिनिधित्व किया और वह पहली महिला मुक्केबाज हैं जिन्होंने देश के लिये ओलंपिक पदक जीता।