• मजबूरी! सड़क पर बिस्कुट और चिप्स बेच रही देश की पहली महिला पैरा शूटिंग चैंपियन

एक समय में देश के सर्वश्रेष्ठ पैरा एयर पिस्टल निशानेबाजों में से एक माने जाने वाले दिलराज ने अपने करियर में दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीते हैं।

भारत की पहली दिव्यांग निशानेबाज दिलराज कौर इस समय काफी मुशिकल घड़ी से गुजर रही है। आपको बता दें कि पारिवारिक संकट का सामना कर रही 34 वर्षीय दिलराज अब देहरादून में गांधी पार्क के पास सड़क किनारे एक स्टाल से बिस्कुट और चिप्स बेचते नज़र आ रही है। कौर ने अपनी इस हालात को लेकर कहा कि, "मैंने भारत के लिए पदक जीते हैं , जब ​​देश की जरूरत थी तो मैं वहां थी, लेकिन अब जब मुझे जरूरत है तो कोई नहीं है।" पिता और भाई की मृत्यु के बाद से दिलराज को काफी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है और इसी मजबूरी में वह दून की सड़को पर चिप्स और बिस्कुट बेच रही है ताकि वह अपने और अपनी मां के लिए घर का खर्चा निकाल सकें। 

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एक समय में देश के सर्वश्रेष्ठ पैरा एयर पिस्टल निशानेबाजों में से एक माने जाने वाले दिलराज ने अपने करियर में दो दर्जन से अधिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीते हैं। वह अपनी मां गुरबीत के साथ देहरादून में किराए के मकान में रहती है। उन्होंने कहा, "हमारी वित्तीय स्थिति बहुत खराब है, यही वजह है कि हमें अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए बिस्कुट और चिप्स बेचने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।" दिलराज ने कहा कि उन्हें उत्तराखंड के पैरा-शूटिंग समुदाय से कोई मदद नहीं मिली है। बता दें कि दिलराज कौर स्पोर्ट्स कोटे के आधार पर सरकारी नौकरी की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि, "मैंने कई बार खेलों में अपनी उपलब्धि के आधार पर नौकरी के लिए अपील की है, लेकिन कुछ नहीं हुआ।" आपको बता दें कि जब देहरादून में गांधी पार्क के गेट पर मंगलवार को जब वह चिप्स और बिस्कुट बेचते नज़र आई तो उनकी मदद करने  के लिए लोगों की भीड़ उमड़ गई।