Seema Kauliraman: पीएचडी शोध से खेल में मिलती है मदद, कांस्य पदक विजेता सीमा का बयान

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राष्ट्रमंडल खेलों की कांस्य पदक विजेता Seema Kauliraman ने कहा है कि पीएचडी के उनके शोध विषय से उन्हें खेलों में काफी मदद मिलती है। उन्होंने बताया कि इस शोध से वह शारीरिक और मानसिक रूप से हर चुनौती के लिए तैयार रहती हैं।

नयी दिल्ली, तीन अगस्त राष्ट्रमंडल खेलों की महिला चक्का फेंक स्पर्धा में कांस्य पदक जीतने वाली सीमा कालीरमण ने कहा कि कल्पना और सकारात्मक आत्म-चर्चा पर डॉक्टरेट के उनके शोध विषय से उन्हें खेलों में काफी मदद मिलती है और इससे वह शारीरिक और मानसिक रूप से किसी भी चुनौती के लिए तैयार रहती हैं। सीमा हरियाणा के भिवानी स्थित चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनका शोध अकादमिक क्षेत्र से परे उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।

ग्लास्गो से घर लौटने के बाद 27 वर्षीय सीमा ने पीटीआई से कहा, ‘‘मेरे शोध का विषय है खेल प्रदर्शन पर कल्पना और सकारात्मक आत्म-चर्चा प्रशिक्षण का प्रभाव। यह सीधे तौर पर मेरे खेल से जुड़ा है और मैं इसके सिद्धांतों को स्वयं पर लागू करती हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं प्रतियोगिता के दौरान शांत बने रहने, अपनी क्षमता बढ़ाने और मांसपेशियों की रिकवरी पर ध्यान देती हूं। मेरा पीएचडी शोध इन्हीं पहलुओं पर केंद्रित है और इससे मुझे बहुत मदद मिली है।

हमें सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।’’ राष्ट्रमंडल खेलों में 58.65 मीटर के थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतना सीमा के लिए एक उल्लेखनीय वापसी थी, क्योंकि वह 2025 एशियाई चैंपियनशिप में पोडियम से चूक गई थीं और केवल 16 सेंटीमीटर से चौथे स्थान पर रही थीं। सीमा ने कहा कि उनका पूरा ध्यान अब जापान में होने वाले एशियाई खेलों पर टिका है। उन्होंने कहा, ‘‘एशियाई खेलों में अब सिर्फ एक महीना बचा है।

आराम करने का तो सवाल ही नहीं उठता। मेरा पूरा ध्यान अब एशियाई खेलों पर है।

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