Tejaswin Shankar ने Asian Games में जीता कांस्य, रजत गंवाने पर जताई निराशा

भारतीय एथलीट तेजस्विन शंकर ने नागोया में एशियाई खेलों की डेकाथलॉन स्पर्धा में 7,934 अंक जुटाकर कांस्य पदक अपने नाम किया। हालांकि वह दूसरे स्थान पर न आ पाने और रजत पदक चूकने से निराश हैं। जापान के युमा मुरुयामा ने स्वर्ण और चीन के चेन एक्स ने रजत पदक जीता।
राष्ट्रीय रिकॉर्डधारी तेजस्विन शंकर ने एशियाई खेलों की डेकाथलॉन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर एक बार फिर खुद को साबित किया, लेकिन शीर्ष दो में जगह नहीं बना पाने की कसक उन्हें कचोट रही है। पिछले एशियाई खेलों में रजत पदक जीतने वाले तेजस्विन ने रविवार को 7,934 अंक के साथ कांस्य पदक जीता। जापान के युमा मुरुयामा ने 8,123 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के चेन एक्स ने 8,012 अंक जुटाकर रजत पदक अपने नाम किया।
मुरुयामा ने पिछले एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीता था। तेजस्विन ने निराशा भरे अंदाज में कहा, ‘‘तीसरा स्थान वह नहीं था, जिसके लिए मैं लक्ष्य बना रहा था। मुझे इस कांस्य के सिलसिले को खत्म करना होगा।
इस समय मैं काफी निराश हूं। मुझे नहीं लगता कि मैंने कांस्य जीता है, बल्कि मैंने रजत गंवाया है।’’ दिल्ली के 27 वर्षीय एथलीट ने 10 स्पर्धाओं वाली डेकाथलॉन की आखिरी स्पर्धा 1500 मीटर दौड़ 4:33.09 के समय के साथ जीती। उन्होंने मुरुयामा (4:33.92) को पीछे छोड़ा।
हालांकि, 1500 मीटर के नतीजे का पदकों पर खास असर नहीं पड़ा, क्योंकि इससे पहले ही मुरुयामा स्वर्ण पदक के लिए पर्याप्त अंक हासिल कर चुके थे। तेजस्विन जानते थे कि स्वर्ण पदक उनकी पहुंच से बाहर है, लेकिन 1500 मीटर दौड़ के दौरान उनके दिमाग में फरवरी में चीन में हुई एशियाई इंडोर चैंपियनशिप की हेप्टाथलॉन स्पर्धा के दौरान मुरुयामा से 1000 मीटर दौड़ में मिली हार चल रही थी। इंडोर चैंपियनशिप में सात स्पर्धाएं होती है।
तेजस्विन ने कहा, ‘‘उस समय बात पदक की नहीं थी, बल्कि इस बात की थी कि युमा ने एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में आखिरी एक किलोमीटर में मुझे हरा दिया था। सोशल मीडिया पर उस दौड़ की रील काफी चलती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब भी मैं वह रील देखता हूं, मुझे लगता है कि स्वर्ण जीतने के बावजूद मैं उस एक किलोमीटर में उसे नहीं हरा सका। इसलिए 1500 मीटर की पूरी दौड़ के दौरान जब वह मुझसे आगे था, मेरे दिमाग में यही चल रहा था कि मुझे उसे पकड़ना है।
आखिर में मैं उसे वही जवाब दूंगा, जो उसने उस दिन मुझे दिया था।’’ तेजस्विन ने 1500 मीटर दौड़ जीतने पर संतोष जताया। उन्होंने लंबी कूद और ऊंची कूद में भी जीत हासिल की। उन्होंने कहा, ‘‘वह पूरी दौड़ में आगे था।
उसने एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में भी ऐसा ही किया था। मुझे पता था कि कब बढ़त लेनी है और मैंने बिल्कुल वही किया। 1500 मीटर में अपने प्रदर्शन से मैं काफी संतुष्ट था।’’ एशियाई खेलों से पहले तेजस्विन ने तीन डेकाथलॉन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया था।
इनमें ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेल भी शामिल थे, जहां उन्होंने कांस्य पदक जीता था। इसके अलावा उन्होंने एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में हेप्टाथलॉन में भी हिस्सा लिया था। उनका मानना है कि इस साल एक प्रतियोगिता ज्यादा हो गई।
उन्होंने कहा, ‘‘मुरुयामा ने अप्रैल में एक डेकाथलॉन में हिस्सा लिया और फिर मई में एक और प्रतियोगिता में उतरे, हालांकि वह उसे पूरा नहीं कर सके। यह उनका दूसरा डेकाथलॉन था। ये चीजें मायने रखती हैं।
मैं 30 जनवरी से लगातार प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले रहा हूं। मैं किसी को दोष नहीं दे रहा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस साल मैंने चार प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। मैं खुश हूं कि भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) ने मुझे राष्ट्रीय अंतरराज्यीय चैंपियनशिप से हटने की अनुमति दी।’’ मई में फेडरेशन कप के दौरान 8,057 अंक का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले तेजस्विन इस बार उस आंकड़े के करीब नहीं पहुंच सके, लेकिन पूरे सत्र में उनका प्रदर्शन लगातार अच्छा रहा।
उन्होंने कहा, ‘‘इस साल मेरी हर डेकाथलॉन में 7,900 से अधिक अंक रहे हैं। यह अपने आप में मेरे सुधार को दर्शाता है। एक बड़े प्रदर्शन से ज्यादा महत्वपूर्ण निरंतरता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अब मुझे 8,300 अंक तक पहुंचने के लिए 300 और अंक जुटाने होंगे और अगले साल विश्व चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई करना होगा।
यही मेरी अगली चुनौती है।’’ प्रतियोगिता खत्म होने के बाद तेजस्विन अब अमेरिका लौटकर अपनी पढ़ाई और शिक्षण संबंधी जिम्मेदारियां संभालेंगे। वह अमेरिका की कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी के काइन्सियोलॉजी विभाग में स्नातक शिक्षण सहायक हैं। साल के बाकी महीनों में कुछ आराम करने के बाद वह अपनी यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं मंगलवार को अमेरिका वापस जा रहा हूं। मेरी विश्वविद्यालय की जिम्मेदारियां हैं। मैं ‘टीचिंग असिस्टेंट’ हूं और मुझे विद्यार्थियों के ‘असाइनमेंट’ जांचने हैं।
मैं एक सप्ताह से अपने छात्रों से नहीं मिला हूं, इसलिए मुझे वापस जाकर काम शुरू करना होगा।’’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कंसास के अपने छात्रों के लिए आदर्श बन सकते हैं, तो तेजस्विन ने कहा, ‘‘बिल्कुल नहीं। मुझे किसी के लिए आदर्श बनने की परवाह नहीं है। अगर कोई मेरी प्रशंसा करना चाहता है तो यह ठीक है।
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