8 साल, कई हार, लेकिन फिर भी नहीं मानी हार... Asian Games 2026 में Vidarsa ने भारत के लिए जीता सिल्वर

जापान के नागोया में एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाजी टीम ने महिला 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। एलावेनिल वलारिवन, सोनम म्हास्कर और विदर्सा विनोद की टीम ने यह पदक हासिल किया। निशानेबाज विदर्सा ने इसे 8 साल की कड़ी मेहनत का नतीजा बताते हुए सफलता का श्रेय अपने कोच मनोज कुमार और परिवार को दिया।
जापान के नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारतीय निशानेबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया है। एलावेनिल वलारिवन, सोनम म्हास्कर और विनोद विदर्सा की भारतीय टीम ने महिला 10 मीटर एयर राइफल टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। इस पदक के साथ भारतीय टीम ने एशियन गेम्स में अपने प्रदर्शन को और मजबूत किया है।
8 साल की मेहनत के बाद मिला पदक
सिल्वर मेडल जीतने के बाद भारतीय निशानेबाज विदर्सा के. विनोद ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा, "सबसे पहले मैं बहुत खुश और आभारी हूं कि हमें यह पदक मिला। हमने यह पदक भारत और अपने देश के लिए जीता है, इसलिए मुझे बहुत गर्व है।" विनोद ने बताया कि इस स्तर तक पहुंचने के लिए उन्हें करीब 8 साल का लंबा इंतजार और कड़ी मेहनत करनी पड़ी।
उन्होंने कहा, "यहां तक पहुंचने और इस स्तर पर मुकाबला करने में लगभग 8 साल लग गए। सफर बहुत मुश्किल था। मुझे बहुत सारे त्याग करने पड़े और कई असफलताओं का सामना करना पड़ा।"
#WATCH | Aichi-Nagoya Asian Games 2026: On winning the Silver medal, Indian shooter Vidarsa K Vinod says, "First of all, I am so happy and so grateful that we have this medal. We got this medal for India, for our country, so I am so proud. It took almost 8 years to come here, to… https://t.co/Hylvg015qE pic.twitter.com/Aq2YygGbDK
— ANI (@ANI) September 20, 2026
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हार के बाद भी नहीं मानी हार
विनोद ने अपनी सफलता का श्रेय लगातार मेहनत और हार न मानने के जज्बे को दिया। उन्होंने कहा कि मुश्किलों के बावजूद उन्होंने कभी पीछे हटने का फैसला नहीं किया। उन्होंने कहा, "सफर मेरे लिए बहुत कठिन था, लेकिन मैं हार मानने के लिए तैयार नहीं थी और इसी वजह से आज यहां हूं।"
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कोच और परिवार को दिया पदक का श्रेय
विनोद ने अपने पदक को सबसे पहले अपने कोच मनोज कुमार को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि उनकी सफलता के पीछे कोच की सबसे बड़ी भूमिका रही है।
उन्होंने कहा, "मैं अपना पदक सबसे पहले अपने कोच मनोज कुमार को समर्पित कर रही हूं। मेरी सफलता के पीछे सबसे अहम व्यक्ति वही हैं।" इसके बाद उन्होंने अपने माता-पिता, परिवार, पति और भाई को भी अपनी सफलता का श्रेय दिया।
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