पैकेज बुक करते समय टूर ऑपरेटर से ज़रूर पूछें यह सवाल

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  दिसंबर 12, 2020   17:41
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पैकेज बुक करते समय टूर ऑपरेटर से ज़रूर पूछें यह सवाल

चाहे आप एक ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल के माध्यम से छुट्टी का पैकेज बुक कर रहे हों या किसी टूर ऑपरेटर पर भरोसा कर रहे हों, आपको अपने गंतव्य, बजट और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए टूर ऑपरेटर से पैकेज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ अवश्य हासिल करनी चाहिए

हर कोई छुट्टी के लिए तैयार महसूस करना पसंद करता है। यदि आपने अपनी छुट्टी बुक करने में मदद करने के लिए एक ट्रैवल एजेंट का उपयोग करने का फैसला किया है तो आपको अपने प्रोग्राम और गंतव्य का विस्तृत विवरण उस ट्रेवल एजेंट से शेयर करना नितांत आवश्यक है। एक पैकेज टूर, पैकेज वेकेशन या पैकेज हॉलिडे में एक टूर ऑपरेटर के रूप में जाने जाने वाले वेंडर द्वारा विज्ञापित और बेचे जाने वाले परिवहन, आवास, भोजन और साइट-सीइंग आदि शामिल होते हैं।

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चाहे आप एक ऑनलाइन ट्रैवल पोर्टल के माध्यम से छुट्टी का पैकेज बुक कर रहे हों या किसी टूर ऑपरेटर पर भरोसा कर रहे हों, आपको अपने गंतव्य, बजट और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए टूर ऑपरेटर से पैकेज के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियाँ अवश्य हासिल करनी चाहिए। चूंकि गलत प्रश्नों के सही उत्तर प्राप्त करने की तुलना में सही प्रश्न पूछना अधिक महत्वपूर्ण है, इसलिए आपको कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों को ज़रूर पूछना चाहिए।

भ्रमण की योजना बनाना एक रोमांचक और कदाचित एक कठिन काम है। अपनी यात्रा के लिए एक पेशेवर और उसके द्वारा दी जाने वाली पेशकशों को चुनते समय समझदारी  और सही जानकारी होना बहुत जरूरी है। जब आप एक टूर कंपनी के साथ हॉलिडे पैकेज बुक करते हैं तो आप एक बड़ी प्रतिबद्धता बनाते हैं। ऐसे बहुत सारे प्रश्न हैं जो आपको पैकेज लेने से पहले अवकाश पैकेजों के बारे में पूछना चाहिए। 

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न जिन्हे आप टूर ऑपरेटर से यात्रा का प्लान करते समय पूंछ सकते हैं:

पैकेज में क्या शामिल है और क्या नहीं?

यात्रा में कीमतों के साथ यात्रा पैकेज व्यापक रूप से साझा किए जाते हैं। लेकिन उन पैकेजों में क्या शामिल है या क्या शामिल नहीं किया गया है, इसकी जाँच महत्वपूर्ण है। यात्रा की व्यवस्था, भोजन या यहां तक कि करों को स्पष्ट करें और अंतिम मिनट के तनाव से बचने के लिए सभी निष्कर्षों और बहिष्करणों के बारे में लिखित रूप में या ईमेल पर इसकी जानकारी लें।

यात्रा बाल-सुलभ है?

यात्रा विशेषज्ञ से पूछना सुनिश्चित करें कि क्या सभी जगह बच्चे के अनुकूल हैं, अगर बच्चों के लिए कोई विशेष गतिविधियाँ, जैसे मनोरंजन पार्क आदि हैं और बच्चों के साथ यात्रा करना सुरक्षित है।

पिकअप और ड्रॉप पॉइंट क्या हैं?

उन कम्यूट विकल्पों की जाँच करें जो आपके लिए संभव हैं और उसी के अनुसार अपने एजेंट के साथ पिक-अप और ड्रॉप पॉइंट तय करें। अपने गंतव्य पहुंचने पर यह सुनिश्चित करें कि क्या स्थानीय दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए होटल या किसी अन्य स्थान से परिवहन और संचार की सुविधा आपको दी जा रही है या नहीं, ताकि बाद में कोई संदेह या असमंजस की स्थिति न उत्पन्न हो सके।

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पारगमन में कितने घंटे लगेंगे?

कस्बों और शहरों के बीच यात्रा समय लेने वाली होती है। इसके अलावा, स्थानों के बीच आवागमन के लिए आपके द्वारा चुने गए परिवहन के मोड को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि आप जो यात्रा पैकेज खरीदते हैं, उसका अधिकांश भाग उपयोग करने के लिए आवश्यक दिनों की संख्या बढ़ा या घटा सकते हैं।  

प्रत्येक दर्शनीय स्थल पर कितना समय बिताया जाता है?

कभी-कभी कुछ स्थान आपको दूसरों की तुलना में अधिक रुचि दे सकते हैं। आप ऐसी जगहों पर सभवतः अधिक समय व्यतीत करें। दूसरी ओर, कुछ जगहें ऐसी भी हो सकती हैं जो आपको कम से कम दिलचस्पी देती है। इसलिए अपने टूर गाइड के साथ उस समय के ब्रेकअप की समुचित योजना बनाएं जो, आपकी और उनकी संचार योजना दोनों को आसान बना देगा।

क्या उनके पास खराब मौसम की कोई नीति है?

मौसम की स्थिति कुछ ऐसी होती है जो किसी भी व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं है। इसलिए यह जानना सबसे महत्वपूर्ण है कि यदि मौसम कभी अनुकूल नहीं रहता है तो आपकी यात्रा योजनाओं का क्या होता है? क्या आपके ट्रैवल एजेंट के पास रिफंड पॉलिसी है? क्या वे आसानी से इसे पुनर्निर्धारित कर सकते  हैं? 

क्या उनके टूर पैकेज में सभी भोजन शामिल हैं?

भारत में कुछ ऑफबीट ट्रैवल कंपनियां आमतौर पर अपने पैकेज में भोजन शामिल करती हैं। हालांकि, यह व्यक्तिपरक होता है और एक ट्रैवल एजेंट का दूसरे में भिन्न होता है। विशेष रूप से पूछें कि क्या सभी भोजन या कोई विशेष भोजन (नाश्ता, दोपहर या रात का भोजन) टूर पैकेज का एक हिस्सा है या नहीं। यह आपकी यात्रा के दिन की योजना को चाक-चौबंद करने में आपकी मदद करेगा और भोजन को दौरे का हिस्सा नहीं होने की स्थिति में आपको आवश्यक प्रावधान करने में सहायक होगा ।

पैकेज रद्द करने की नीति क्या है?

शेड्यूलिंग और भुगतान आमतौर पर समय से पहले किया जाना चाहिए। किसी भी पैकेज को बुक करने से पहले लागू किए गए शुल्कों को जान लें कि क्या आपको अपनी योजनाओं में कोई अंतिम बदलाव करना है या रद्द करना है। रद्द करने की नीतियों को समझना और रद्द करने पर लागू फीस के प्रतिशत पर पारस्परिक रूप से सहमत होना आवश्यक है।

मुझे अपनी यात्रा के लिए क्या दस्तावेज चाहिए?

यात्रा के लिए बहुत सी जगहों को विशेष परमिट की आवश्यकता होती है। अपने ट्रैवल एजेंट से जांच लें कि क्या कोई विशेष दस्तावेज है जो उस गंतव्य में आवश्यक है, जिसे आपने छुट्टी के लिए चुना है। फोटो पहचान, चिकित्सा प्रमाण पत्र और बैंक स्टेटमेंट जैसे व्यक्तिगत दस्तावेजों की आवश्यकता हो सकती है और आपको उन सभी डाक्यूमेंट्स को अपने पास रखना चाहिए। यह आपकी यात्रा पर उत्पन्न होने वाली किसी भी बाधा को समाप्त कर देगा।

आपकी यात्रा के आधार पर (यदि आप विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं) कुछ देशों को वीजा की आवश्यकता होती है, जिसके लिए मेडिकल सर्टिफिकेट, विवाह प्रमाणपत्र और बैंक स्टेटमेंट जैसे व्यक्तिगत दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। 

- जे. पी. शुक्ला







कृष्ण जन्मभूमि मथुरा है बेहद खास, इन प्रसिद्ध जगहों पर जरूर जाएं एक बार!

  •  सिमरन सिंह
  •  फरवरी 24, 2021   10:17
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कृष्ण जन्मभूमि मथुरा है बेहद खास, इन प्रसिद्ध जगहों पर जरूर जाएं एक बार!

अगर आप मथुरा जा रहे हैं तो सबसे पहले कृष्ण जन्मभूमि मंदिर ही जाएं। कृष्ण जन्मभूमि से ही आपको ये साफ हो गया होगा कि ये कृष्ण भगवान का जन्म स्थान है। बता दें कि इस मंदिर को उसी कारागार के बाहर बनाया गया है जहां भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था।

भगवान कृष्ण की नगरी कहलाई जाने वाला धार्मिक स्थल मथुरा दुनियाभर में पर्यटकों के बीच प्रसिद्ध है। यहां भगवान कृष्ण के दर्शन करने के लिए विश्वभर से पर्यटक आते हैं। ये स्थल भगवान श्री कृष्ण जन्मभूमि से भी जाना जाता है। विशेषतौर होली मानाने के लिए यहां दूर-दूर से लोग आया करते हैं। यहां कृष्ण मंदिर के अलावा कई अन्य जगह भी हैं जहां आप घूमने के लिए जा सकते हैं। मथुरा से करीब 56 किलोमीटर की दूरी पर आगरा है। आप चाहें तो मथुरा के साथ-साथ आगरा भी घूमने जा सकते हैं। वहीं, अगर आप मथुरा घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आज हम आपको जिन प्रमुख जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं वहां आप घूमने जा सकते हैं। आइए आपको मथुरा के कुछ प्रमुख स्थानों के बारे में बताते हैं...

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कृष्ण जन्मभूमि

अगर आप मथुरा जा रहे हैं तो सबसे पहले कृष्ण जन्मभूमि मंदिर ही जाएं। कृष्ण जन्मभूमि से ही आपको ये साफ हो गया होगा कि ये कृष्ण भगवान का जन्म स्थान है। बता दें कि इस मंदिर को उसी कारागार के बाहर बनाया गया है जहां भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था। कहते हैं कि यहां कृष्ण भगवान की शुद्ध सोने से बनी 4 मीटर की मूर्ति थी, जिसको महमूद गजनवी द्वारा चुरा लिया गया था। 

बांके बिहारी मंदिर

मथुरा के सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक बांके बिहारी मंदिर है। ये राधा वल्लभ मंदिर के पास स्थित है। बता दें कि भगवान कृष्णा का दूसरा नाम बांके बिहारी भी है। इस मंदिर में बांके बिहारी की मूर्ति काले रंग की होती है। इस मंदिर में पहुंचने के लिए आपको संकरी गलियों से जाना पड़ेगा।

द्वारकाधीश मंदिर

अगर आप भगवान कृष्ण से संबंधित घटनाएं कलाकृतियां देखना चाहते हैं तो द्वारकाधीश मंदिर जा सकते हैं। ये मंदिर विश्राम घाट के निकट स्थित है। इसका निर्माण साल 1814 में किया गया था। इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगी रहती है, खासतौर पर जन्माष्टमी में यहां ज्यादा भीड़ देखने को मिलती है।

मथुरा संग्रहालय

मंदिर के दर्शन करने के अलावा आप म्यूजियम भी देखने जा सकते हैं। साल 1974 में मथुरा संग्रहालय का निर्माण किया गया था। इस संग्रहालय का पहले नाम "कर्जन म्यूजियम ऑफ आर्कियोलॉजी" था। यहां आप कुषाण और गुप्त वंश से संबंधित कई कलाकृतियां देख सकते हैं। यहां अनोखी वास्तुकला और कई कलाकृतियों हैं, इसका चित्र भारत सरकार के स्टैंप पर भी छापा गया है।

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कुसुम सरोवर

मथुरा के प्रमुख स्थानों में से एक कुसुम सरोवर है। ये लगभग 60 फीट गहरा और 450 फीट लंबा है। इस सरोवर का नाम राधा के नाम पर रखा गया है। कहते हैं कि यहां भगवान कृष्ण और राधा मिलने के लिए आया करते थे। कुसुम सरोवर में कई लोग नहाने भी आते हैं, यहां का पानी शांत और साफ-सुथरा है। यहां पर होने वाली शाम की आरती यहां का मुख्य आकर्षण केंद्र, कई पर्यटक इस दृष्य को अपने कैमरे में भी कैद करते हैं।

गोवर्धन पर्वत

अगर आप मथुरा घूमने आए हैं तो गोवर्धन पर्वत के दर्शन करने भी जरूर जाएं। इसका हिन्दू पौराणिक साहित्य में बेहद खास महत्व है। पौराणिक ग्रंथो के अनुसार भगवान कृष्ण ने अपनी एक छोटी उंगली से इस पर्वत को उठा लिया था। इस पर्वत का दर्शन करने वाले लोग इसके चक्कर जरूर लगाते हैं। मान्यता है कि ऐसा करना अच्छा होता है और भगवान कृष्ण की खास कृपा होती है।

कंस किला

जयपुर के महाराजा मानसिंह द्वारा कंस किले का निर्माण किया गया था। अकबर के नवरत्नों में मानसिंह शामिल थे। हिन्दू और मुगल वास्तुकला के मिश्रण का अच्छा नमूना ये मंदिर यमुना नदी के किनारे स्थित है।

- सिमरन सिंह







10 साल पहले नक्सलियों का गढ़ था त्रिपुरा का बंश ग्राम, आज है पर्यटकों का पसंदीदा स्थल

  •  रेनू तिवारी
  •  फरवरी 18, 2021   17:25
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10 साल पहले नक्सलियों का गढ़ था त्रिपुरा का बंश ग्राम, आज है पर्यटकों का पसंदीदा स्थल

त्रिपुरा भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्यों में एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। विरासत और ऐतिहासिक स्थल, सैकड़ों साल पुराने मंदिर, वन्यजीव स्थल और एक संपन्न कला और शिल्प उद्योग, त्रिपुरा का आकर्षण हैं।

त्रिपुरा भारत के सभी पूर्वोत्तर राज्यों में एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्य है। विरासत और ऐतिहासिक स्थल, सैकड़ों साल पुराने मंदिर, वन्यजीव स्थल और एक संपन्न कला और शिल्प उद्योग,  त्रिपुरा का आकर्षण हैं। एक समय में त्रिपुरा में कुछ ऐसी घटनाएं हुई जिसकी वजह से इस राज्य की छवि पर असर पड़ा लेकिन अब हालत पूरी तरह से बदल चुके हैं। त्रिपुरा पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन पसंद बनता जा रहा है। पिछले कुछ सालों में पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई हैं। त्रिपुरा भारत के उन यात्रा स्थलों में से एक है जो परिवारों, दोस्तों, कपल और सोलो यात्रियों को आकर्षित करता हैं। वैसे तो त्रिपुरा में घूमने के लिए कई बेहतरीन हॉटस्पॉट है लेकिन आजकल एक खास स्थल की लोकप्रियता काफी बढ़ गयी है। इस खूबसूरत जगह का नाम है बंश ग्राम।

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त्रिपुरा के कटमारा गांव की सीमा के तहत अगरतला से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित, बंश ग्राम त्रिपुरा में सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां पर आप देख सकते हैं कि भारी संख्या में पर्यटकों का जमावड़ा है। इस जगह के बारे में अभी ज्यादा जानकारी गूगल पर उपलब्ध नहीं है लेकिन जो लोग वहां जा चुके हैं उन्होंने इस जगह की काफी तरीफें की है। बंश ग्राम में आप नैचुरल खूबसूरती देख सकते है। घनें जंगल, शुद्ध हवा, झीलों से घिरे बंश ग्राम में पर्यटकों के लिए काफी अच्छी व्यवस्था है। 

आज से दस साल पहले बंश ग्राम में एक ऐसा हादसा हुआ था जिसके बाद इस जगह को यहां के निवासी छोड़कर भाग गये थे। एक दशक से भी कम समय पहले, बंश ग्राम इलाका अपनी उग्रवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता था। 1999 में पंचबती हत्याकांड के बाद विशेष रूप से प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन ऑल त्रिपुरा टाइगर फोर्स (ATTF) द्वारा बंश ग्राम में 18 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गयी थी। हत्या के बाद बड़ी संख्या में लोग यहां से भाग गए थे।

बंश ग्राम नाम के इस इलाके में एक बहुत की शानदार रेस्टोरेंट भी है जहां पर्यटक खाने पीने के लिए आते हैं। इस जगह का नाम बंश ग्राम है। बंश ग्राम के संस्थापक मन्ना रे ने कहा कि उन्होंने इसे बनाया था। स्थानीय संसाधनों के उपयोग से इको-टूरिज्म डेस्टिनेशन को बढ़ावा देने के लिए सुंदर बांस का सहारा लेकर इस जगह को बनाया है। प्रकृतिक चीजों से बना बंश ग्राम  लोगों के बीच काफी मशहूर हो रहा है। बांस की झोपड़ियों से लेकर कुर्सियां, मेज, पुल, वॉचटावर यहां सब कुछ बांस से बना है।







गुवाहाटी को क्यों कहा जाता था प्राग्ज्योतिषपुर? जानिए घूमने के प्रसिद्ध स्थल

  •  जे. पी. शुक्ला
  •  फरवरी 16, 2021   17:42
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गुवाहाटी को क्यों कहा जाता था प्राग्ज्योतिषपुर? जानिए घूमने के प्रसिद्ध स्थल

गुवाहाटी भारतीय राज्य असम का सबसे बड़ा शहर है और पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा महानगर भी है। भारत में सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक, गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र के दक्षिण तट पर स्थित है। दिसपुर, राज्य की राजधानी, शहर के भीतर स्थित है।

गुवाहाटी को ऐतिहासिक रूप से प्रागज्योतिषपुर के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'पूर्व की रोशनी'। शहर की एक ऐतिहासिक उत्पत्ति है, और यह इस तथ्य से निर्धारित किया जा सकता है कि महाभारत में राक्षस राजा नरकासुर की राजधानी के रूप में प्रागज्योतिषपुर का उल्लेख किया गया है। प्रागज्योतिषपुर, जिसे अब आधुनिक गुवाहाटी के भीतर का एक क्षेत्र माना जाता है, वर्मन राजवंश (350-650 A.D) के तहत मध्य युगीन कामरूप साम्राज्य का एक प्राचीन शहर और राजधानी था।

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कालिका पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने यहां नक्षत्रों का निर्माण किया था इसलिए इस शहर को प्राक् (प्राचीन या पूर्व) और ज्योतिष (नक्षत्र) कहा जाता था।

गुवाहाटी भारतीय राज्य असम का सबसे बड़ा शहर है और पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा महानगर भी है। भारत में सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में से एक, गुवाहाटी ब्रह्मपुत्र के दक्षिण तट पर स्थित है। दिसपुर, राज्य की राजधानी, शहर के भीतर स्थित है।

गुवाहाटी पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख शैक्षिक केंद्र है। सम्मानित संस्थानों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (IIT), भारत में तकनीकी अध्ययन के क्षेत्र में समर्पित एक स्वायत्त संस्थान है। कॉटन यूनिवर्सिटी, तत्कालीन कॉटन कॉलेज विज्ञान और कला के क्षेत्र में एक बहुत पुरानी संस्था है।

पर्यटकों के आकर्षण

गुवाहाटी अपने कामाख्या मंदिर के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो रेलवे स्टेशन से 10 किमी की दूरी पर नीलाचल पहाड़ी के ऊपर स्थित है। दुनिया में शक्ति पूजा के तांत्रिक मंदिरों में सबसे पवित्र होने के लिए प्रसिद्ध, कामाख्या, 10 वीं शताब्दी में कोच राजा नर नारायण द्वारा बनवाया गया था। देवी को प्रसन्न करने के लिए पशु बलि देना यहाँ एक आम बात है। कामाख्या के ऊपर एक और छोटा सा मंदिर है, भुवनेश्वरी, जहाँ से शहर का विहंगम दृश्य देखा जा सकता है।

पूर्वी गुवाहाटी में एक और पहाड़ी है, नवग्रह मंदिर- "नौ ग्रहों का मंदिर", ज्योतिष और खगोल विज्ञान की एक प्राचीन जगह। शहर और इसके आसपास के क्षेत्र वन्यजीवों से समृद्ध हैं। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, जो अपने प्रसिद्ध एक सींग वाले भारतीय गैंडे के लिए जाना जाता है, यहाँ से 214 किमी दूर है।

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गुवाहाटी में घूमने की जगहें

- असम राज्य चिड़ियाघर और वनस्पति उद्यान

- नामेरी नेशनल पार्क

- उमानंद आइलैंड

- कामाख्या मंदिर

- असम स्टेट म्यूजियम

- गुवाहाटी प्लैनेटेरियम

- नेहरू पार्क

- पोबितोरा वन्यजीव अभ्यारण्य

- अफ्रेस्को ग्रैंड क्रूज

- अकोलंद 

- ड्रीमलैंड एम्यूजमेंट पार्क

- मदन कामदेव

कैसे पहुंचे?

यह शहर समुद्र तल से 55 मीटर की ऊँचाई पर ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है। गुवाहाटी तीन महत्वपूर्ण सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्ग 31, 37 और 40 का जंक्शन है। यह नदी से दो भागों में विभाजित है और उत्तरी गुवाहाटी लगभग एक अलग शहर है। कोई इसे सराय घाट पुल या नदी पर चलने वाले घाटों के माध्यम से देख सकता है। कोलकाता, गुवाहाटी का सबसे महत्वपूर्ण शहर लगभग 1182 किमी दूर है।

यहाँ लोकप्रिया गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है जो न केवल गुवाहाटी शहर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है, बल्कि उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कई अन्य शहरों को भी जोड़ता है।

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गुवाहाटी रेलवे स्टेशन उत्तर पूर्वी क्षेत्र का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन है। देश भर से ट्रेनें गुवाहाटी तक पहुंचती हैं। राज्य के अन्य हिस्सों और पड़ोसी शहरों के लिए बसें और अन्य पर्यटक वाहन आसानी से उपलब्ध रहते हैं। कामाख्या नाम का एक और छोटा स्टेशन  भी है जो पूरी तरह कार्यात्मक है।

गुवाहाटी में एक अच्छी सड़क की व्यवस्था है, जो पड़ोसी राज्यों के सभी हिस्सों को जोड़ती है। गुवाहाटी से गुजरने वाली सड़कें मेघालय, मिज़ोरम और मणिपुर जैसे राज्यों के लिए जीवन-रेखा का काम करती हैं। बस और वाहन आसानी से उपलब्ध हो सकते हैं।

जाने का सबसे अच्छा समय

गुवाहाटी एक सुंदर गंतव्य है और हर मौसम में इसका अलग आकर्षण होता है। लेकिन अक्टूबर से मार्च का समय असम में छुट्टी का आनंद लेने का सबसे अच्छा समय है।

जे. पी. शुक्ला







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