नेचुरल ब्यूटी से घिरे ढाका में है मिला-जुला इस्लामिक और बंगाली कल्चर

By सुषमा तिवारी | Publish Date: Dec 27 2018 5:39PM
नेचुरल ब्यूटी से घिरे ढाका में है मिला-जुला इस्लामिक और बंगाली कल्चर
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ढाका बांग्लादेश की राजधानी होने के अलावा बांग्लादेश का औद्यौगिक और प्रशासनिक केन्द्र भी है। लेकिन ये शहर बूढ़ी गंगा नदी के तट बसा है इसलिए ये काफी खूबसूरत भी है। ढाका को राजनीतिक गतिविधियों का गढ़ माना जाता है।

भारत के पड़ोसी देश के बारे में तो आपने सुना ही होगा... एक बड़ा ही खूबसूरत देश है... हम बात कर रहे हैं खूबसूरत बांग्लादेश की। बांग्लादेश की राजधानी ढाका घूमने के लिए बहुत ही अच्छी जगह है। यहां से भारत का कोई सरहदी दुश्मनी का नाता नहीं है न ही गोली लगने का डर, तो आप जा सकते हैं ढाका घूमने के लिए। यहां पर एक्सप्लोर के लिए बहुत कुछ है। नेचुरल ब्यूटी से घिरे ढाका में मिला-जुला इस्लामिक और बंगाली कल्चर आपको देखने को मिलेगा। 

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औद्यौगिक और प्रशासनिक केन्द्र
 
ढाका बांग्लादेश की राजधानी होने के अलावा बांग्लादेश का औद्यौगिक और प्रशासनिक केन्द्र भी है। लेकिन ये शहर बूढ़ी गंगा नदी के तट बसा है इसलिए ये काफी खूबसूरत भी है। ढाका को राजनीतिक गतिविधियों का गढ़ माना जाता है लेकिन यहां की खूबसूरती पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है। 



ढाका का इतिहास
 
मुगल शासन काल में ढाका को जहांगीर नगर के नाम से जाना जाता था। उस समय यह बंगाल प्रांत की राजधानी था। वर्तमान ढाका का निर्माण 19वीं शताब्दी में अंग्रेजों के अधीन हुआ। जल्द ही कलकत्ता के बाद ढाका बंगाल का दूसरा सबसे बड़ा नगर बन गया। बंटवारे के बाद ढाका पूर्वी पाकिस्ताान की राजधानी बना। 1972 में यह बंगलादेश की राजधानी बना। यहां पुरानी और नई सभ्यताओं के कई नमूने देखने को मिलते हैं। 
 


 
पर्यटक ढाका क्यों आते हैं? 
 
यहां राष्ट्रीय स्मारक देखने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। यह स्मारक ढाका से थोड़ा ही दूर लगभग 35 किलोमीटर दूर साभर में स्थित है। इस स्मारक का डिजाइन मोइनुल हुसैन ने तैयार किया था। यह स्मारक उन लाखों सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने बंगलादेश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।


 
 
ढाका में बना लालबाग किला काफी विशाल है। इस किले का निर्माण बादशाह औरंगजेब के पुत्र शाहजादा मुहम्मद आजम ने करवाया था। यह किला भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) का मूक गवाह है। 1857 में जब स्थानीय जनता ने ब्रिटिश सैनिकों के विरुद्ध विद्रोह किया था तब 260 ब्रिटिश सैनिकों ने यहीं शरण ली थी। इस किले में पारी बीबी का मकबरा, लालबाग मस्जिद, हॉल तथा नवाब शाइस्ता खान का हमाम भी देखने योग्य है। यह हमाम वर्तमान में एक संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया है।
 
धान, गन्ना और चाय का सबसे ज्यादा व्यापार यहीं से होता है। टोंगी, तेजगांव, डेमरा, पागला, कांचपुर में रोजाना जरूरत की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। मोतीझील यहां का मुख्य कमर्शियल एरिया है। ढाका का प्रसिद्ध सदरघाट बूढ़ी गंगा नदी पर बना हुआ है। यहां हर वक्त सैलानियों से लेकर स्थानीय लोगों की चहल-पहल देखी जा सकती है। सदरघाट के सुंदर नजारों को देखने के लिए बोट, स्टीमर, पैडल स्टीमर, मोटर आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं।
 
-सुषमा तिवारी

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