• नवरात्रि के दौरान करें उपवास, लेकिन बरतें कुछ सावधानी

किसी भी व्यक्ति की पाचन शक्ति को बढ़ाने और उसमें सकारात्मकता के इजाफे के लिए एक आदर्श तरीका बताया जा है नवरात्र उपवास। क्योंकि एक वर्ष में 4 नवरात्र आते हैं, यानी प्रत्येक तीन माह पर होता है एक नवरात्र।

भारतीय सभ्यता व संस्कृति में उपवास का खास महत्व है। इसकी आध्यात्मिक व वैज्ञानिक उपादेयता में भी अब किसी को कतई संशय नहीं है। पूजा-पाठ, ब्रत-उपवास की परंपरागत सोच पर जब तरह तरह के वैज्ञानिक शोध हुए और बार बार इसकी प्रासंगिकता स्वयंसिद्ध हुई, तब जाकर इसकी लोकप्रियता बढ़ी। अब तो शरीर को डिटॉक्स करने का एक सशक्त माध्यम व अवसर समझा जा रहा है नवरात्र उपवास।

जानकारों की राय में, किसी भी व्यक्ति की पाचन शक्ति को बढ़ाने और उसमें सकारात्मकता के इजाफे के लिए एक आदर्श तरीका बताया जा है नवरात्र उपवास। क्योंकि एक वर्ष में 4 नवरात्र आते हैं, यानी प्रत्येक तीन माह पर होता है एक नवरात्र। वैसे तो शारदीय और चैत्र नवरात्र लोकप्रिय है, लेकिन आषाढ़ और पौष नवरात्र को गुप्त नवरात्र माना जाता है जो सन्तों व साधकों के लिए होता है। 

इसे भी पढ़ें: जानिए नवरात्रि व्रत के दौरान खुद को किस तरह करें डिटॉक्स

भारत में वर्ष के 4 नवरात्र, महीने की 2 एकादशी, साप्ताहिक उपवास, पर्व-त्यौहार ब्रत-उपवास का मानव स्वास्थ्य से गहरा नाता बताया जाता है। इससे न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है, बशर्ते कि कुछ अपेक्षित सावधानियां बरती जाएं और कुछ वैज्ञानिक बातों का अनुकरण परंपरा मूलक तथ्यों के साथ साथ किया जाए।

# हाई प्रोफाइल अस्पताल की हेड डायटीशियन का ये है कहना

इस बारे में जब मैंने यशोदा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, कौशाम्बी की हेड डायटीशियन भावना गर्ग से बातचीत की, तो वे बताती हैं कि नवरात्रि हमारे जीवन में वजन कम करने और स्वस्थ भोजन के पैटर्न को बढ़ाने के लिए बहुत अच्छा समय है। हालांकि, उन्होंने खुलासा किया कि नवरात्रि के दौरान या अन्य मौके पर हम में से कई लोग गलत तरीके से उपवास करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि आप उपवास के दौरान अधिक तला हुआ और प्रोसेस्ड भोजन और जूस आदि का सेवन करते हैं तो इससे उपवास के लाभ की बजाय हमारे शरीर का संतुलन बिगाड़ जाता है।

# नवदिवसीय उपवास की ऐसे कीजिए 3-3 दिवसीय प्लानिंग, होगी सहूलियत

उन्होंने दो टूक बताया कि एक निश्चित कार्यक्रम का पालन करके हम पहले तीन दिनों के लिए फलों के आहार के साथ अपने उपवास के दिनों की शुरुआत कर सकते हैं। आप सेब, केला, पपीता, तरबूज और अंगूर जैसे मीठे फल खा सकते हैं या उपवास कर रहे व्यक्ति को नट्स और सीड्स की फ्रूट स्मूदी दे सकते हैं। फिर अगले तीन दिनों में, आप ताज़े नारियल पानी, छाछ और दूध आंवला जूस के साथ दिन भर के लिए पारंपरिक नवरात्रि आहार जो नीचे दिया गया है, का एक समय का भोजन कर सकते हैं। और आखिरी तीन दिनों के दौरान, आप एक पारंपरिक नवरात्रि आहार का पालन कर सकते हैं। 

# नवरात्र के पारंपरिक उपवास आहार का है अपना महत्व

दरअसल, एक पारंपरिक नवरात्रि उपवास आहार है जो हमारी पाचन आग को शांत करता है। यह निम्नलिखित अवयवों का संयोजन हो सकता है। पहला, कुट्टू के आटे की रोटी, उपवास चावल (शमक चावल), उपवास चावल से डोसा; साबूदाना, सिंघाडा का आटा, राजगिरा (चौलाई), सूरन, अरबी, उबले हुए शकरकंद आदि से बने व्यंजन। दूसरा, मक्खन (घी), दूध और छाछ। इन सभी का शरीर पर शीतलन प्रभाव पड़ता है। तीसरा, दही को लौकी और कद्दू, ककड़ी, खीरा के साथ मिलाया जाता है। 

इसे भी पढ़ें: मधुमेह से हैं पीडि़त तो नवरात्रि में व्रत रखते समय इन बातों पर जरूर दें ध्यान

चतुर्थ, बहुत सारे तरल पदार्थ- नारियल पानी, सब्जी सूप, नींबू पानी, मक्खन दूध, फल और बीज की स्मूथी आदि। ऊर्जा प्रदान करने के अलावा, वे निर्जलीकरण को रोकते हैं और उपवास के दौरान जारी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं। पंचम, आहार में फाइबर होने के लिए पपीता, नाशपाती, और सेब, सलाद में कच्ची सब्जियों के साथ फलों का सलाद।

# उपवास के समय ध्यान रखिए ये महत्वपूर्ण बात

आपके लिए उपवास करते समय ध्यान रखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं- पहला, स्वस्थ खाना पकाने के तरीकों का उपयोग करें जैसे कि रोस्टिंग, उबालना, स्टीमिंग और ग्रिलिंग। दूसरा, पहले कुछ दिनों के लिए अनाज से बचें। फिर, किसी भी तले और भारी भोजन से बचें, फिर ओवरईटिंग से बचें। तीसरा, संपूर्ण पोषक तत्वों के सेवन के लिए नट्स और बीजों के साथ फल लें। चौथा, भारी नाश्ते से शुरू करें और दोपहर का भोजन और हल्के डिनर के साथ समाप्त करें। एक दिन में 150-200 ग्राम सलाद और बहुत सारे तरल पदार्थ शामिल करना उचित है।

# ऐसे तोड़िये अपना उपवास, होगा लाभ

अब आपको बता दें कि अपना उपवास कैसे तोड़ना चाहिए। जब आप शाम या रात को अपना उपवास तोड़ते हैं, तो हल्का भोजन करें। भारी भोजन से बचें क्योंकि यह न केवल प्रणाली को पचाने के लिए कठिन बनाता है, बल्कि सफाई प्रक्रिया और उपवास के सकारात्मक प्रभावों को भी पूर्ववत करता है। आसानी से पचने योग्य भोजन कम मात्रा में खाएं। वहीं, योग और ध्यान, स्ट्रेचेस, ट्विस्ट और ब्रिस्क वॉक, साइकिलिंग उपवास प्रक्रिया के पूरक हैं। यह डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को तेज करता है और आप ऊर्जा और स्फूर्ति महसूस करेंगे।

# ये है आपका नवरात्र उपवास मेनू

आपकी सुविधा के लिए यहां पर एक नवरात्र नमूना मेनू प्रस्तुत कर रहे हैं। यदि आप इसका पालन करेंगे तो यह और अच्छा रहेगा। सर्वप्रथम खाली पेट सुबह गुनगुना पानी लें। फिर सुबह का नाश्ता में फल के साथ सूखे मेवे एवं सीड्स लें। उसके बाद मध्य सुबह में ताजा नारियल पानी और राजगिरा गुड़ लड्डू लें। ततपश्चात दोपहर का भोजन में सलाद थाली, कुट्टू की रोटी, घीया सब्जी और दही रायता के साथ लें। फिर संध्या में रोस्टेड मखाना के साथ चाय, ग्रीन टी, बटरमिल्क व होम मेड सूप लें। फिर रात का खाना में  मखाना खीर लें। उसके बाद सोते समय में नट्स के साथ दूध लें। अंत में, हरिनाम, देवी नाम स्मरण करते हुए गहरी नींद लें। कल्याणकारी दिनचर्या होगी।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार