Lockdown के 64वें दिन 'देशबंदी' के फैसले को लेकर सरकार और विपक्ष में गर्मागर्म बहस

Lockdown के 64वें दिन 'देशबंदी' के फैसले को लेकर सरकार और विपक्ष में गर्मागर्म बहस

चीन ने मंगलवार को कहा कि वह महामारी के कारण भारत में फंसे हुए अपने छात्रों, पर्यटकों और कारोबारियों को वापस लाने के लिए उड़ानें भेजने की योजना बना रहा है। चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला नागरिकों को सहायता प्रदान करने की कड़ी में लिया गया है।

देश में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या मंगलवार को 1.45 लाख पहुंच गई। वहीं बड़ी संख्या में प्रवासी कामगारों के अपने-अपने राज्य लौटने से बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में कोविड-19 मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। स्थिति यह है कि ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आने वाले दिनों के और चुनौती भरा होने की चेतावनी देते हुए इस महामारी को नियंत्रित करने और इसके उन्मूलन के लिए नयी रणनीति बनाने की मांग की है। पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे ज्यादा प्रभावित महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में भी बड़ी संख्या में नए मामले सामने आए हैं। वहीं दिल्ली, पंजाब, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों से भी नए मामले आए हैं। कुछ विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि प्रवासी श्रमिक लौट कर जिन क्षेत्रों में जा रहे हैं वहां सघन निगरानी की जाए। हालांकि, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि देश में इलाज के बाद कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त होने वाले लोगों की दर बढ़ रही है और यह कई देशों के मुकाबले बेहतर है। संवाददाता सम्मेलन में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा, ‘‘हमारे देश में लोगों के संक्रमण मुक्त होने की दर बेहतर हो रही है और वर्तमान में यह 41.61 प्रतिशत है। कोविड-19 से मरने वालों का आंकड़ा 15 अप्रैल के 3.3 प्रतिशत से कम होकर फिलहाल 2.87 प्रतिशत हो गया है जो दुनिया में सबसे कम है।’’ मंत्रालय ने सुबह के बुलेटिन में कहा कि देश में अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण से 4,167 लोगों की मौत हुई है जबकि अभी तक 1,45,380 लोग इससे संक्रमित हुए हैं। सोमवार सुबह आठ बजे से मंगलवार सुबह आठ बजे तक देश में कोविड-19 के 6,535 नए मामले आए हैं और संक्रमण से 146 लोग की मौत हुई है। फिलहाल देश में कोरोना वायरस संक्रमण के लिए 80,000 से ज्यादा लोगों का इलाज चल रहा है जबकि 60,000 से ज्यादा लोग इलाज के बाद संक्रमण मुक्त होकर घर लौट चुके हैं। पिछले तीन सप्ताह में जिन पांच राज्यों में कोविड-19 के मामले तेजी से बढ़े हैं, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने उन्हें निषिद्ध क्षेत्रों के ट्रेंड का विश्लेषण करने और सूक्ष्म योजनाओं को उचित तरीके से लागू करते हुए स्थिति में सुधार करने को कहा है। ये पांच राज्य हैं उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश। कई राज्य अपने यहां बढ़ रहे कोविड-19 के मामलों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से अन्य राज्यों से लौट रहे लोगों को जिम्मेदार बता रहे हैं। गौरतलब है कि लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे कामगारों को उनके घर पहुंचाने के लिए एक मई से विशेष ट्रेनें चल रही हैं साथ ही उसी दिन से विशेष विमानों से लोगों को विदेश से वापस लाया जा रहा है। इतना ही नहीं, सोमवार से चरणबद्ध तरीके से घरेलू विमान सेवा भी बहाल हो गई है। 79 नए मामलों के साथ कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या राज्य में 1,517 पहुंचने के बाद ओडिशा में कोविड-19 स्थिति को लेकर हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री पटनायक ने कहा कि महामारी से निपटने के लिए नयी रणनीति की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, ‘‘विमान और ट्रेन सेवाएं बहाल होने के मद्देनजर अगले 15 से 30 दिन बेहद चुनौती भरे होने वाले हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि हम इस सब से पेशेवर तरीक से निपट लेंगे।’’ पिछले 24 दिन में श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से तीन लाख से ज्यादा लोग ओडिशा लौटे हैं। आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, भारतीय रेल ने एक मई से लेकर अभी तक 3,276 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें से 44 लाख से ज्यादा प्रवासी श्रमिकों को उनके गंतव्य पर पहुंचाया है। इनमें से सबसे ज्यादा ट्रेनें गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली से चली हैं और सबसे ज्यादा ट्रेनें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंढ, ओडिशा और मध्य प्रदेश पहुंची हैं।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को बताया कि आप सरकार ने सात मई से अभी तक 196 विशेष ट्रेनों से करीब 2.41 लाख लोगों को उनके घर भेजा है। इनमें से करीब सवा लाख लोग बिहार गए हैं, जबकि 96,610 उत्तर प्रदेश, 3,000 झारखंड, 2,500 पश्चिम बंगाल और 2,100 लोग मध्य प्रदेश गए हैं। कई विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि प्रवासी श्रमिकों के अपने घर लौटने से श्रम शक्ति की कमी उत्पन्न होगी तथा इससे अर्थव्यवस्था और प्रभावित होगी। ऐसे में महामारी और लॉकडाउन के कारण पहले ही पटरी से उतर चुकी अर्थव्यवस्था अब रेंगने लगेगी।

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साख निर्धारण कंपनी क्रिसिल ने आज कहा कि भारत अब तक की सबसे खराब मंदी की स्थिति का सामना कर रहा है। उसने कहा कि आजादी के बाद यह चौथी और उदारीकरण के बाद पहली मंदी है तथा यह संभवत: सबसे भीषण है। रेटिंग एजेंसी के अनुसार, कोरोना वायरस महामारी तथा उसकी रोकथाम के लिये जारी ‘लॉकडाउन’ (बंद) से अर्थव्यवस्था में चालू वित्त वर्ष में 5 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है। क्रिसिल ने भारत के जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के आकलन के बारे में कहा, ‘‘पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट की आंशका है।’’ उसने कहा, ‘‘वास्तविक आधार पर करीब 10 प्रतिशत जीडीपी स्थायी तौर पर खत्म हो सकती है। ऐसे में हमने महामारी से पहले जो वृद्धि दर देखी है, अगले तीन वित्त वर्ष तक उसे देखना या हासिल करना मुश्किल होगा।’’ 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में चार चरणों में लगाए गए लॉकडाउन का लक्ष्य पूरा नहीं होने का दावा करते हुए आज कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए कि ‘विफल लॉकडाउन’ के बाद अब कोरोना संकट से निपटने और जरूरतमंदों को मदद देने के लिए उनकी रणनीति क्या है? गांधी ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘‘मोदी जी ने 21 दिन में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई जीतने की बात कही थी। लगभग 60 दिन हो चुके हैं। हिंदुस्तान पहला देश है, जो बीमारी के बढ़ने के बावजूद लॉकडाउन हटा रहा है। दुनिया के बाकी देशों ने लॉकडाउन तब हटाया, जब बीमारी कम होना शुरू हुई।’’ उन्होंने दावा किया, ''ऐसे में ये स्पष्ट है कि हमारे यहां लॉकडाउन विफल हो गया है। जो लक्ष्य मोदी जी का था, वो पूरा नहीं हुआ।’’

वहीं भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लॉकडाउन विफल रहने के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के दुगुनी होने की दर तीन दिन से बेहतर होकर अब 13 दिन हो गई है जो भारत की सफलता है। भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मोदी सरकार के लॉकडाउन लागू करने के निर्णय के कारण यह सुनिश्चित हुआ है कि भारत को अमेरिका, फ्रांस, स्पेन जैसे देशों की तुलना में कम प्रभावित होना पड़ा। भारत अब कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित 10 देशों में शामिल है और विशेषज्ञों का कहना है कि जांच क्षमता में वृद्धि के साथ ही यात्रा प्रतिबंधों में ढील तथा प्रवासियों की यात्रा जैसी चीजें अधिक मामले सामने आने के कारणों में शामिल हैं। 

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया के अनुसार, मामलों में वर्तमान बढ़ोतरी अधिकतर ‘हॉटस्पॉट’ क्षेत्रों से सामने आ रही है, लेकिन आगामी दिनों में अधिक लोगों के यात्रा करने से कोविड-19 के मामलों में और वृद्धि की संभावना है। गुलेरिया ने कहा, ‘‘जो लोग लक्षणमुक्त हैं या जो लक्षण-पूर्व की स्थिति में हैं, वे स्क्रीनिंग तंत्र से गुजरकर उन जगहों पर पहुंच सकते हैं जहां कम मामले हैं।’’ उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए आवश्यकता इस बात की है कि उन इलाकों पर करीब से नजर रखी जाए जहां प्रवासी लौटे हैं। गुलेरिया ने यह भी कहा कि क्योंकि अब जांच क्षमता में वृद्धि हो गई है, इसलिए भी अधिक मामले सामने आ रहे हैं। 

प्रवासियों के अपने गांव लौटने और रेल तथा हवाई यात्रा की आंशिक शुरुआत पर टिप्पणी करते हुए इंडियन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन और इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रीवेंटिव एंड सोशल मेडिसिन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. चंद्रकांत एस पांडव ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रसार के लिए दरवाजे खुल गए हैं। उन्होंने कहा, ‘‘कोरोना वायरस के लिए जंगल में आग की तरह फैलने का माहौल उत्पन्न करने का यह एक स्पष्ट उदाहरण है। आगामी कुछ दिनों में, मामलों में नाटकीय वृद्धि होगी। हालांकि यह सच है कि हमेशा के लिए लॉकडाउन नहीं रह सकता, लेकिन शुरुआत बहुत ही सधे हुए तरीके से होनी चाहिए थी।’’ दिल्ली में कोविड-19 से अभी तक 288 लोग की मौत हुई है जबकि 412 नए मरीज सामने आने के साथ ही शहर में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या 14,465 पहुंच गई है। पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अल्पन बंदोपाध्याय ने बताया कि प्रदेश में कोरोना वायरस के 193 नये मामले सामने आये हैं और इसके साथ ही मंगलवार को राज्य में संक्रमित लोगों की संख्या चार हजार को पार कर गयी। पिछले 24 घंटे में वायरस के संक्रमण के कारण कम से कम पांच लोगों की मौत हो गयी। इसके साथ ही प्रदेश में मरने वालों की संख्या बढ कर 211 हो गयी है। 

असम के स्वास्थ्य मंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि कोरोना वायरस संक्रमण के 47 नए मामले सामने आए हैं। इसी के साथ कुल मामले 595 पर पहुंच गए हैं। केरल में मंगलवार को कोविड-19 के 67 नए मामले सामने आए। अकेले पलक्क्ड़ जिले में ही 29 मामले सामने आए और राज्य में एक लाख से अधिक लोगों पर निगरानी रखी जा रही है। तमिलनाडु में आज कोरोना वायरस संक्रमण से नौ लोगों की मौत हो गयी जबकि प्रदेश में संक्रमण के 646 नये मामले सामने आये। इसके साथ ही प्रदेश में मरने वालों की संख्या बढ़कर 127 हो गयी है जबकि संक्रमितों की कुल संख्या 17 हजार 728 पर पहुंच गयी है। महाराष्ट्र में आज कोविड-19 के 2091 नये मामले सामने आने के साथ प्रदेश में कुल संक्रमितों की संख्या 54,758 हो गई है, राज्य में कोरोना वायरस से 97 और लोगों की मौत के साथ महामारी से जान गंवाने वालों की संख्या 1,792 तक पहुंची।

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घरेलू विमानन सेवा का दूसरा दिन

देश भर में घरेलू उड़ान सेवा शुरू होने के दूसरे दिन आंध्र प्रदेश में भी मंगलवार को घरेलू उड़ानों का संचालन शुरू हो गया। इस दौरान शाम पांच बजे तक देश भर के विभिन्न हवाई अड्डों से 325 उड़ानें रवाना हुयीं जबकि 283 उड़ान अपने गंतव्यों तक पहुंची। हालांकि कई उड़ानें रद्द भी हुयीं जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। अब, पश्चिम बंगाल को छोड़कर पूरे देश में यात्री सेवाएं शुरु हो गयी हैं। मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद जैसे कई हवाई अड्डों पर उनकी क्षमता से काफी उड़ानों का संचालन हुआ। सोमवार की ही तरह मंगलवार को भी कई यात्रियों को हवाई अड्डों पर पहुंचने के बाद पता लगा कि उनकी उड़ानें रद्द हो गयी हैं। ऐसे कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जतायी। नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा, ‘‘घरेलू नागरिक उड्डयन आपरेशन का सुचारू संचालन। हमारे हवाई अड्डों से दूसरे दिन 26 मई को शाम पांच बजे तक 325 उड़ानें रवाना हुयीं और 283 उड़ानें पहुंची जिनमें 41,673 यात्रियों ने यात्रा की।’’ उन्होंने कहा, "आधी रात को पूरा विवरण आने के बाद दिन भर की अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।" वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को चेन्नई हवाई अड्डा से 20 उड़ानें रवाना होंगी और इतनी ही संख्या में उड़ानें वहां आएंगी। हालांकि पुरी ने रविवार को कहा था कि वहां आने वाली 25 उड़ानों का संचालन हो सकता है जबकि रवाना होने वाली उड़ानों के संबंध में कोई सीमा नहीं है। आंध्र प्रदेश में विमानन सेवा की शुरुआत मंगलवार को हुयी और अधिकारियों ने कहा कि विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम हवाईअड्डों से दिन भर में आठ-आठ उड़ानों का संचालन होगा। अधिकारियों ने बताया कि देश के सबसे बड़े हवाई अड्डे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर मंगलवार को 277 उड़ानों का संचालन होगा। उन्होंने बताया कि दिन में करीब 25 उड़ानें रद्द की गयीं। देश के दूसरे सबसे व्यस्त हवाई अड्डे मुंबई पर सोमवार को सिर्फ 47 उड़ानों का संचालन हुआ और मंगलवार को 41 उड़ानें का संचालन हुआ। मुम्बई हवाई अड्डे पर मंगलवार को 22 उड़ानें रवाना हुयीं जबकि 19 उड़ानें आयीं। तीन उड़ानों को रद्द कर दिया गया। मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएएल) ने 25 मई से घरेलू यात्री सेवाओं को फिर से शुरू करने की घोषणा करते हुए रविवार को कहा था कि वह कुल 50 उड़ानों का संचालन करेगी। अधिकारियों ने बताया कि इंडिगो की रांची जाने वाली उड़ान सुबह 6.30 बजे रवाना होने वाली पहली उड़ान थी। आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम की सदस्य आरती चड्ढा ने मंगलवार को अपनी मां के लिए इंडिगो की मुंबई-चंडीगढ़ उड़ान में एक सीट बुक की थी। उनकी मां लॉकडाउन के कारण पिछले दो महीने से मुंबई में फंसी हुई थीं। इस उड़ान को रद्द कर दिया गया और जब चड्ढा ने ट्विटर पर इंडिगो से इसके बारे में पूछा, तो कंपनी ने जवाब दिया कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण उड़ान "प्रभावित" हुयी है। उन्होंने ट्विटर पर कहा, "क्या हम मुंबई से उड़ान भरने वाली 25 उड़ानों की सूची प्राप्त कर सकते हैं? एयरलाइंस टिकट बुक कर रही हैं, लेकिन उड़ान रद्द होने का संदेश नहीं भेज रही हैं, आखिरी समय में रद्द कर रही हैं, पैसे काट रही हैं।" पश्चिम बंगाल में घरेलू उड़ानों का संचालन बृहस्पतिवार से शुरू होगा। केंद्र सरकार ने रविवार को घोषणा की थी कि आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल में सोमवार को कोई घरेलू उड़ान नहीं जाएगी जबकि मुंबई, चेन्नई और हैदराबाद हवाईअड्डों से कम उड़ानों का संचालन होगा। पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु ने कोरोना वायरस से संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए घरेलू उड़ानों के सोमवार से शुरु होने के प्रति अनिच्छा जतायी थी। अधिकारियों ने बताया कि बेंगलुरु से 79 यात्रियों को लेकर पहला विमान सुबह छह बजकर 55 मिनट पर विजयवाड़ा पहुंचा। उन्होंने कहा कि स्पाइसजेट की यह उड़ान वापसी में 68 यात्रियों को लेकर रवाना हुई। विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर पहली उड़ान बेंगलुरु से सुबह सात बजे पहुंची। उन्होंने कहा, “विजयवाड़ा में चार उड़ान इंडिगो के, दो-दो स्पाइसजेट और एअर इंडिया के हैं।” अधिकारियों ने कहा कि विशाखापत्तनम हवाईअड्डे से बुधवार को आठ उड़ानों का संचालन निर्धारित है। कोविड-19 महामारी के कारण करीब दो महीनों तक बंद रहने के बाद भारत में सोमवार से घरेलू उड़ानों का संचालन शुरू हुआ और पहले दिन 428 उड़ानों से 30,550 यात्रियों को उनकी मंजिलों तक पहुंचाया गया। हालांकि करीब 630 उड़ानें रद्द भी हुईं।

न्यायालय का निर्देश

देश में कोरोना वायरस महामारी की वजह से लागू लॉकडाउन के कारण प्रवासी कामगारों को हो रही परेशानियों का उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को स्वत: ही संज्ञान लेते हुये कहा कि उन्हें इस समय नि:शुल्क भोजन और आवास की जरूरत है और संबंधित सरकारों को उन्हें राहत प्रदान करनी चाहिए। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशनकौल और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने इन कामगारों की दयनीय स्थिति और उनके समक्ष पेश आ रही कठिनाईयों का संज्ञान लेते हुये कहा, ''केन्द्र और राज्य सरकारों को इन कामगारों के लिये नि:शुल्क भोजन और आवास के साथ ही पर्याप्त परिवहन की सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।’’ पीठ ने कहा कि हालांकि केन्द्र और राज्य सरकारों ने इन कामगारों को राहत प्रदान करने के लिये कदम उठाये हैं लेकिन ये ‘अपर्याप्त हैं और इनमें कुछ कमियां हैं।’ पीठ ने कोविड-19 महामारी के संक्रमण के दौरान लागू लॉकडाउन की वजह से महानगरों से पैदल और साइकिल पर अपने अपने घर की ओर जा रहे इन कामगारों की दयनीय स्थिति के बारे में मीडिया की तमाम खबरों का स्वत: ही संज्ञान लिया। पीठ ने इस स्थिति को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और केन्द्र और राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को नोटिस जारी किये और उनसे 28 मई तक जवाब मांगा है। इस मामले में न्यायालय अब 28 मई को आगे विचार करेगा। पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘‘इस न्यायालय को अनेक पत्र और समाज के विभिन्न वर्गो से कई प्रतिवेदन मिले हैं जिनमें प्रवासी कामगारों की परेशानियों को उजागर किया गया है। इन कामगारों की वेदना आज भी सुनाई पड़ रही है और बड़ी संख्या में वे सड़कों, राजमार्गो, रेलवे स्टेशनों और राज्यों की सीमाओं पर फंसे हुये हैं।’’ पीठ ने कहा, ‘‘हम इन कामगारों, जो देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे हुये हैं, की समस्याओं और परेशानियों का स्वत: संज्ञान ले रहे हैं। समाचार पत्रों की खबरों में लगातार इन कामगारों की परेशानियों और पैदल तथा साइकिल पर लंबी दूरी तय करने के बारे में विचलित करने वाली तस्वीरों को दिखाया जा रहा है। समूचे देश में लॉकडाउन की मौजूदा स्थिति में समाज के इस वर्ग को संबंधित सरकार, विशेषकर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों से संकट की इस घड़ी में, से मदद की जरूरत है।’’ न्यायालय ने कहा कि इन प्रवासी कामगारों की यह भी शिकायत है कि जहां पर वे फंसे हैं या जहां से वे पैदल ,साइकिल या परिवहन के दूसरे साधनों से आगे बढ़े हैं, वहां प्रशासन द्वारा खाना और पानी भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। पीठ ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि इस स्थिति से राहत दिलाने के लिये ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। अत: हम स्थिति की गंभीरता को देखते हुये केन्द्र और सभी राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को अपने अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हैं। हम निर्देश देते हैं कि स्वत: संज्ञान में ली गयी इस याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई की जायेगी और हम सालिसीटर जनरल से इस मामले में सहयोग करने का आग्रह करते हैं। सुनवाई की अगली तारीख पर केन्द्र सरकार द्वारा किये गये सारे उपायों और इस संबंध में उठाये जाने वाले कदमों की जानकारी न्यायालय के संज्ञान में लायी जाये।’’ पीठ ने इस मामले को 28 मई के लिये सूचीबद्ध करते हुये न्यायालय की रजिस्ट्री को निर्देश दिया कि इस आदेश की प्रति सालिसीटर जनरल तुषार मेहता और राज्यों को उनके वकीलों के माध्यम से आज ही उपलब्ध करायी जाये ताकि उनके जवाब यथाशीघ्र न्यायालय के समक्ष आ सकें। लॉकडाउन के दौरान प्रवासी कामगारों की दयनीय स्थिति के लिये कार्यपालिका की जवाबदेही निर्धारित नहीं करने की वजह से अनेक वकील और कार्यकर्ता न्यायपालिका की आलोचना कर रहे हैं। शीर्ष अदालत ने कामगारों के पलायन के दौरान उनकी कठिनाइयों से संबंधित एक अन्य मामले की सुनवाई के समय टिपपणी की थी कि देश में इन कामगारों के आवागमन पर निगाह रखना या उसे रोकना अदालतों के लिये असंभव है और इस संबंध में सरकार को ही आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। केन्द्र ने न्यायालय को सूचित किया था कि पलायन कर रहे इन कामगारों को सरकार उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिये परिवहन सुविधा मुहैया करा रही है लेकिन उन्हे पैदल ही चलने की बजाये अपनी बारी का इंतजार करना होगा।

विदेशियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर

दिल्ली पुलिस ने कोविड-19 महामारी के दौरान वीजा नियमों का उल्लंघन कर निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात के कार्यक्रम में भाग लेने तथा मिशनरी गतिविधियों में शामिल होने के मामले में मंगलवार को 82 विदेशियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया। अधिकारियों ने बताया कि 20 देशों से संबंध रखने वाले इन विदेशियों के खिलाफ पुलिस ने 20 आरोपपत्र दायर किए हैं और मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एस जमील ने आरोपपत्र पर विचार के लिए 12 जून की तारीख निर्धारित की है। आरोपपत्र के अनुसार इन आरोपियों में अफगानिस्तान, ब्राजील, चीन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कजाकिस्तान, मोरक्को, ब्रिटेन, यूक्रेन, मिस्र, रूस, जॉर्डन, फ्रांस, ट्यूनीशिया, बेल्जियम, अल्जीरिया, सऊदी अरब, फिजी और सूडान तथा फिलीपीन के लोग शामिल हैं। तबलीगी जमात ने मार्च में यहां निजामुद्दीन क्षेत्र में एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया था जो कोरोना वायरस के प्रसार का एक बड़ा ‘हॉटस्पॉट’ बनकर उभरा था। देश में अप्रैल में कोविड-19 के मामलों में अचानक वृद्धि हुई और तबलीगी जमात के कायर्क्रम में शामिल हुए सैकड़ों लोग कारोना वायरस से संक्रमित पाए गए। निजामुद्दीन मरकज में आयोजित कार्यक्रम में विदेशियों सहित कम से कम नौ हजार लोग शामिल हुए थे। कार्यक्रम के बाद अनेक लोग अपने गृह राज्यों तथा देश के अन्य क्षेत्रों में चले गए थे। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इन लोगों की पहचान के लिए चलाए गए एक बड़े अभियान के बाद इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले सदस्यों और उनके संपर्क में आए लोगों को पृथक-वास में रखा गया। पुलिस ने कहा, ‘‘उन्होंने न सिर्फ कोविड-19 महामारी के मद्देनजर जारी दिशा-निर्देशों और महामारी अधिनियम से संबंधित नियम-कानूनों का उल्लंघन किया, बल्कि आपदा प्रबंधन कानून और दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 का उल्लंघन किया।’’ निजामुद्दीन थाना प्रभारी की शिकायत पर 31 मार्च को थाने की अपराध शाखा में तबलीगी जमात के नेता मौलाना साद कंधालवी तथा छह अन्य के खिलाफ महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन कानून 2005 और विदेशी अधिनियम तथा भादंसं की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बताया कि कार्यक्रम में शामिल हुए कुछ लोगों की कोरोना वायरस से मौत के बाद कंधालवी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला भी दर्ज किया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार टूरिस्ट वीजा पर भारत आए विदेशी नागरिक मरकज में आयोजित कार्यक्रम में ‘‘अवैध रूप से’’ शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वीजा नियमों का उल्लंघन करने के साथ ही इन विदेशी नागरिकों ने ऐसी स्थिति उत्पन्न कर दी जिससे बड़े पैमाने पर संक्रामक रोग फैला और इनके साथियों तथा आम जनता की जान को खतरा पैदा हुआ। पुलिस ने कहा कि मामले में आरोपी 900 से अधिक विदेशी नागरिक 34 विभिन्न देशों से ताल्लुक रखते हैं और विदेशी कानून, महामारी अधिनियम, आपदा प्रबंधन कानून तथा भादंसं की विभिन्न धाराओं के तहत देश-वार आरोपपत्र तैयार किए जा रहे हैं। संबंधित दंड संहिताओं में विभिन्न अपराधों के लिए छह महीने से लेकर आठ साल की कैद तक का प्रावधान है।

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गलतबयानी कर रहे हैं राहुल: भाजपा

भाजपा ने मंगलवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लॉकडाउन विफल रहने के आरोप को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के दोगुनी होने की दर तीन दिन से बेहतर होकर अब 13 दिन हो गई है जो भारत की सफलता है। भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि मोदी सरकार के लॉकडाउन लागू करने के निर्णय के कारण यह सुनिश्चित हुआ है कि भारत को अमेरिका, फ्रांस, स्पेन जैसे देशा के तुलना में कम प्रभावित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब पूरे देश को एक स्वर मे बात करनी चाहिए, तब कांग्रेस विरोध की राजनीति करती है और उसके आरोप सत्य से कोसों दूर होते हैं । इसलिये कांग्रेस को ऐसी राजनीति नहीं करनी चाहिए। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''राष्ट्रीय आपदा की घड़ी में जब समग्र भारत कोविड-19 की महमारी से निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है तब ऐसे समय में कांग्रेस नकारात्मक राजनीति की पराकाष्ठा पार कर रही है । कांग्रेस की इस नकारात्मक राजनीति से देश की जनता ने कब का किनारा कर लिया है।’’ उन्होंने कहा कि आज की राहुल गांधी की प्रेस वार्ता कांग्रेस की इसी नकारात्मक राजनीति का उदाहरण है । राहुल गांधी ने प्रेस वार्ता में जो कुछ भी बोला है, वह झूठ के पुलिंदे के सिवा और कुछ नहीं है। जावड़ेकर ने कहा, ''मैं राहुल गांधी को बताना चाहता हूं कि जब देश में सम्पूर्ण लॉकडाउन लगा था तब तीन दिन में ही संक्रमण की संख्या दोगुनी हो रही थी जबकि अब 12-13 दिन में संक्रमण के मामले दोगुने हो रहे हैं यह देश की सफलता है।’’ उन्होंने कहा कि जब कोरोना के प्रसार को रोकने के लिये देश में लॉकडाउन लगाया गया था तब भी कांग्रेस ने हाय तौबा मचाया था। अब लॉकडाउन धीरे धीरे हट रहा है, तब भी कांग्रेस इसके विरोध में है कि लॉकडाउन क्यों हटाया जा रहा है? उन्होंने सवाल किया कि यह कांग्रेस का दोहरा रवैया और पाखंड नहीं तो और क्या है? जावड़ेकर ने कहा कि समय पर लॉकडाउन लगाने के लिये पूरी दुनिया में भारत की प्रशंसा हो रही है। भारत के जिस कदम की पूरी दुनिया प्रशंसा करती है, कांग्रेस को उसका विरोध करने की आदत है। उन्होंने कहा कि 3000 ट्रेनों में लाखों की संख्या में प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों पहुंचाया गया, जो ऐतिहासिक है। 

वहीं, भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने दावा किया कि राहुल गांधी के प्रेस वार्ता से स्पष्ट होता है कि वह मानते हैं कि महाराष्ट्र सरकार कोरोना के निपटने में सही ढंग से काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में श्रमिकों को समस्याओं का सामना करना पड़ा और वहां सरकार कुछ भी करने में विफल रही। राज्य में कांग्रेस गठबंधन में शामिल है लेकिन सिर्फ सत्ता का सुख प्राप्त करना चाहती है। गौरतलब है कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने देश में चार चरणों में लगाए गए लॉकडाउन के विफल रहने का आरोप लगाते हुए मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि आगे कोरोना संकट से निपटने और जरूरतमंदों को मदद देने की उनकी रणनीति क्या है? उन्होंने अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए यह भी कहा कि गरीबों और मजदूरों को 7500 रूपये की मदद दी जाए और राज्य सरकारों को केंद्र की तरफ से पूर्ण मदद मिले।

मजबूत नेतृत्व का प्रदर्शन करें

भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से कोरोना वायरस की महामारी के बीच मजबूत नेतृत्व का प्रदर्शन करने के लिए कहा। उल्लेखनीय है कि देश में कोविड-19 के आए मामलों में सबसे अधिक मरीज महाराष्ट्र में हैं। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए विपक्षी नेता ने कहा कि ठाकरे को शिवसेना नीत सरकार के अन्य घटकों (सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल कांग्रेस और राकांपा) के समर्थन की जरूरत है और उनका ध्यान बिना किसी निहित हितों के कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ होना चाहिए। फडणवीस ने दावा किया, ‘‘इस समय राज्य सरकार में कोई समन्वय नहीं है। शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की हुई बैठक में कांग्रेस के मंत्रियों को आमंत्रित नहीं किया गया।’’ राजभवन के राजनीति के केंद्र बनने के आरोपों पर जवाब देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राज्यपाल को ज्ञापन सौंपना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘‘जब मुख्यमंत्री सुलभ नहीं हो और जब समस्या का समाधान नहीं हो, तब हम कहां जाएं?’’ फडणवीस राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ राजभवन में हाल में हुई बैठक का संदर्भ दे रहे थे जिसमें उन्होंने कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में राज्य सरकार की कथित विफलता की शिकायत की थी। शिवसेना ने फडणवीस की राज्यपाल के साथ हुई मुलाकात पर आपत्ति जताया और भाजपा का नाम लिए बिना राज्य सरकार को अस्थिर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। इस बीच, फडणवीस ने राज्य की सत्ता पर काबिज महाराष्ट्र विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार से कहा कि वह कोरोना वायरस की महामारी के खिलाफ लड़ाई में विपक्ष को भरोसे में ले। उन्होंने कहा, ‘‘जब हम रचनात्मक सुझाव देते हैं तो हमें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाता है। आप (सत्तारूढ़ पार्टियां) राजनीति में शामिल हैं और हम पर आरोप लगा रहे हैं।’’ कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के तरीके पर सरकार की आलोचना करते हुए फडणवीस ने कहा, ‘‘लोगों को एंबुलेंस तक नहीं मिल रही। अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या अपर्याप्त है। निजी अस्पताल लोगों से भारी कीमत वसूल रहे हैं। ऐसा लगता है कि प्रशासन पर से सरकार का नियंत्रण समाप्त हो गया है।’’ फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र को केंद्र सरकार द्वारा घोषित 20 लाख करोड़ के ''आत्मनिर्भर’’ पैकेज से 78 हजार करोड़ रुपये मिल सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘केंद्र पहले ही महाराष्ट्र को कोरोना वायरस की महामारी से लड़ने के लिए 28,104 करोड़ रुपये की राशि दे चुका है। केंद्रीय पैकेज में राज्य का हिस्सा 1.65 लाख करोड़ रुपये का है। सरकार को प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए साहसिक कदम उठाने जरूरत है।’’ 

कांग्रेस ने बस का इंतजाम किया

तेलंगाना में कांग्रेस ने मंगलवार को कहा कि कोविड-19 लॉकडाउन के चलते यहां फंसे 40 प्रवासी श्रमिकों को उसके द्वारा इंतजाम की गई एक बस से लखनऊ भेजा गया है। कांग्रेस की ओर से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं लोकसभा सदस्य एन उत्तम कुमार रेड्डी ने तेलंगाना में पार्टी मुख्यालय गांधी भवन से आज बस को रवाना किया। कांग्रेस ने पिछले सप्ताह 80 प्रवासी श्रमिकों को उत्तर प्रदेश और ओडिशा में उनके मूल स्थान पहुंचाने के लिए दो बसों का इंतजाम किया था। प्रदेश नेताओं ने कहा था कि बसें उन श्रमिकों की मदद करने के कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से जारी निर्देश के अनुसार मुहैया करायी गईं, जो कोविड-19 लॉकडाउन के बीच अपने मूल स्थान जाने के इच्छुक हैं। उन्होंने यह भी दावा किया था कि प्रदेश इकाई द्वारा मुख्य सचिव को पत्र लिखकर प्रवासी मजदूरों के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन की टिकटों के संबंध में योगदान की पेशकश की गई लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी। यह पेशकश कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के उस बयान के बाद की गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि पार्टी यात्रा खर्च वहन करने के लिए तैयार है।

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नागरिक समाज की भूमिका की सराहना की

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के कोरोना वायरस संकट से उबरने में, वहां के प्रशासन और नागरिक समाज की भूमिका की मंगलवार को सराहना की। कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, सिंह ने लद्दाख के उपराज्यपाल आरके माथुर के साथ एक बैठक में कोविड-19 महामारी से निपटने में केंद्रशासित प्रदेश के प्रशासन की भूमिका की सराहना की। बयान में कहा गया है कि लद्दाख ने ही सबसे पहले पूरे देश को आगाह किया था जब वहां ईरान से लौटे कई तीर्थयात्रियों के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुयी थी। लेकिन इसका श्रेय वहां के प्रशासन और नागरिक समाज को जाता है कि लद्दाख उन क्षेत्रों में है जो सबसे पहले कोरोना वायरस के प्रकोप से उबरा। उन्होंने बैठक के दौरान कोविड-19 की स्थिति और अन्य मुद्दों पर चर्चा की जिनमें नवगठित केंद्रशासित प्रदेश में विकास गतिविधियों की बहाली शामिल है। कार्मिक राज्य मंत्री सिंह ने लद्दाख और पूर्वोत्तर क्षेत्र को प्राथमिकता देने के स्पष्ट निर्देशों के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि उठाए गए कदमों के कारण पहले के मुकाबले अब लद्दाख में राशन, सब्जियों और फल के भंडार अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं।

कांग्रेस का देशव्यापी ऑनलाईन अभियान

प्रवासी श्रमिकों एवं अन्य लोगों की आवाज केन्द्र सरकार तक पहुँचाने के उद्देश्य से राजस्थान कांग्रेस 28 मई को एक आनलाइन अभियान चलाएगी। राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने बताया कि मौजूदा हालात में संकट के दौर से गुजर रहे लाखों प्रवासी श्रमिकों, किसानों, संगठित क्षेत्रों के कामगारों, एमएसएमई, छोटे कारोबारियों और दैनिक मजदूरों की आवाज को केन्द्र सरकार तक पहुँचाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर यह अभियान चलाया जा रहा है। कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मंगलवार को इस बारे में सभी राज्यों के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों एवं कांग्रेस विधायक दलों के नेताओं के साथ वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से बैठक की और ऑनलाइन अभियान की तैयारियों पर चर्चा की। पायलट ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी एवं वरिष्ठ पार्टी नेता राहुल गांधी द्वारा समय-समय पर केन्द्र सरकार को प्रवासी श्रमिकों एवं मजदूरों की पीड़ा को कम करने हेतु अनेक उपयोगी सुझाव दिए गए जिन्हें केन्द्र सरकार ने सिरे से नकार दिया तथा प्रवासी श्रमिकों, किसानों, दैनिक मजदूरों, एमएसएमई, लघु उद्यमियों और गैर-संगठित क्षेत्रों के कामगारों को किसी प्रकार का सहयोग करने की बजाय उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया है, इसलिए इन वर्गों की आवाज को केन्द्र सरकार तक पहुँचाने के उद्देश्य से उक्त अभियान चलाया जायेगा। वरिष्ठ कांग्रसे नेता ने कहा कि इस अभियान में कांग्रेस पार्टी मांग करेगी कि लॉकडाउन के कारण अपना रोजगार खो चुके ऐसे परिवारों को केन्द्र सरकार तुरन्त प्रभाव से 10 हजार रुपये नकद की मदद करे जो आयकर के दायरे से बाहर हैं। पायलट ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के कारण वर्तमान परिस्थिति में ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध करवाकर आर्थिक सम्बल प्रदान करने में मनरेगा योजना मददगार साबित हुई है। उन्होंने बताया कि राजस्थान में मनरेगा के तहत श्रमिक नियोजन 40 लाख से अधिक हो गया है जो कि गत 10 वर्षों में सर्वोच्च है।

ओला ने पुनः शुरू की सेवा

ऑनलाइन वाहन बुकिंग के लिए मंच उपलब्ध कराने वाली कंपनी ओला ने राष्ट्रीय राजधानी में इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पुनः सेवा प्रदान करना शुरू कर दिया है। कंपनी ने मंगलवार को एक वक्तव्य जारी कर यह जानकारी दी। वक्तव्य में कहा गया कि दिल्ली हवाई अड्डे पर कार में धूमन करने, चालकों का तापमान मापने और प्रत्येक यात्री के सवार होने से पहले कार की जांच करने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित कर्मचारियों को तैनात किया जाएगा। कंपनी की पहल ‘सुरक्षित यात्रा के लिए दस कदम’ के तहत कार चालक और यात्रियों की सुरक्षा के लिए एहतियाती उपाय निर्धारित किए गए हैं। ओला के प्रवक्ता आनंद सुब्रमण्यम ने कहा, “कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने के लिए हम इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के दल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।” दिल्ली के अतिरिक्त हैदराबाद, मुंबई, बेंगलुरु, अहमदाबाद, अमृतसर, पटना, वाराणसी समेत 21 अन्य शहरों में लोग ओला कैब बुक कर सकते हैं। कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा के वास्ते उठाए गए एक कड़े कदम के तहत कार चालकों और ग्राहकों में से किसी के मास्क न लगाने पर यात्रा रद्द करने का विकल्प दिया गया है। कार चालकों को सैनिटाइजर और संक्रमण रोधी तरल भी दिए जाएंगे। वक्तव्य के अनुसार सभी कारों को यात्रा के बाद संक्रमण मुक्त किया जाएगा। यात्रियों के लिये भी मास्क लगाना और हाथ सैनिटाइज करना अनिवार्य होगा। कार का वातानुकूलन बंद रहेगा और खिड़कियां खुली रहेंगी। एक कार में दो व्यक्तियों को ही यात्रा करने की अनुमति होगी। वक्तव्य में कहा गया कि संक्रमण से बचने के लिए ग्राहकों को ऑनलाइन भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

विभिन्न उद्योगों का सर्वेक्षण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लॉकडाउन के दौरान राज्य में लौटे प्रवासी मजदूरों को कुटीर, लघु एवं मंझोले उद्यमों (एमएसएमई) समेत विभिन्न उद्योगों में उनकी दक्षता के हिसाब से समायोजित करने के लिये सर्वेक्षण के आदेश दिये हैं। राज्य के गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने मंगलवार को बताया कि मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लॉकडाउन व्यवस्था की समीक्षा करते हुए प्रवासी मजदूरों और कामगारों को उनकी दक्षता के अनुरूप समायोजित करने के लिये एमएसएमई समेत सभी प्रकार के उद्योगों का सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिये। उन्होंने बताया कि योगी ने प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने का संकल्प दोहराया तथा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के माध्यम से कामगारों और श्रमिकों से संवाद करने और उनके कौशल के आकलन (स्किल मैपिंग) का काम 15 दिनों में पूरा करके उन सभी का डेटा संकलित करने के निर्देश भी दिये। अवस्थी ने बताया कि अन्य राज्यों से आए कामगारों एवं श्रमिकों के कौशल आकलन के प्रथम चरण में कुल 14,75,424 लोगों ने अपना पंजीकरण कराया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने कामगारों एवं श्रमिकों के नए राशन कार्ड बनाने के आदेश दिये और कहा कि एक जून से शुरू होने वाले खाद्यान्न वितरण अभियान के अगले चरण की तैयारियां अभी से शुरू कर दी जाएं। अवस्थी के मुताबिक मुख्यमंत्री ने समय तय करके सार्वजनिक पार्कों में मॉर्निंग वॉक की अनुमति देने तथा उनके बीच एक दूसरे से दूरी सुनिश्चित करने के लिए वहां गश्त करने के निर्देश भी दिये। योगी ने कहा कि वित्तीय तथा औद्योगिक संस्थानों सहित सभी महत्वपूर्ण स्थलों पर गश्ती व्यवस्था व्यवस्था को सुदृढ़ रखा जाए। अवस्थी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कहा है कि एल-1, एल-2 तथा एल-3 कोविड-19 चिकित्सालयों में बेड की संख्या को इस माह के अन्त तक बढ़ाकर एक लाख बेड किया जाए। अभी तक 80 हजार बेड तैयार हो गये हैं। अधिक से अधिक लोगों की जांच का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक जिले में एक जांच प्रयोगशाला की स्थापना के कार्य को गति प्रदान की जाए। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि देश में सबसे अधिक कामगार उत्तर प्रदेश में आये हैं। राज्य में अब तक 1454 ट्रेन के माध्यम से 20.17 लाख से अधिक कामगार एवं श्रमिकों को लाये जाने की व्यवस्था की गई है। इनमें से अब तक 1265 रेलगाड़ियों से 17 लाख लोगों को प्रदेश में लाया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अगले 24 घंटे में उत्तर प्रदेश में 100 और रेलगाड़ियां आयेंगी। सभी जनपदों में जिलाधिकारी द्वारा सम्बन्धित जिलों में ट्रेन से आ रहे कामगारों/श्रमिकों का स्वास्थ्य परीक्षण कराकर उनको उनके घर तक पहुंचाया जा रहा है। अवस्थी ने बताया कि प्रदेश में अब तक 1009 हॉटस्पॉट क्षेत्र हैं, जिनमें 48,95,090 लोगों को चिन्हित किया गया है। इन क्षेत्रों में कोरोना संक्रमित पाये गये लोगों की संख्या 2488 है।

44 लाख प्रवासी श्रमिकों को घर पहुंचाया

भारतीय रेलवे ने एक मई से 3,276 ‘श्रमिक स्पेशल’ ट्रेनों से करीब 44 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके गंतव्य स्थानों तक पहुंचाया है। आधिकारिक डेटा के मुताबिक कुल 2,875 ट्रेनों को रद्द किया गया जबकि 401 चलाई जा रही हैं। रेलवे ने कहा कि 25 मई को 223 'श्रमिक विशेष ट्रेनों' ने 2.8 लाख यात्रियों पहुंचाया गया। रेलवे ने कहा कि इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (आईआरसीटीसी) ने यात्रा कर रहे प्रवासियों के लिए 74 लाख से अधिक मुफ्त भोजन के पैकेट और एक करोड़ से अधिक पानी की बोतलें वितरित की हैं। रेलवे ने कहा, ‘‘अंतर-राज्यीय आवाजाही के दौरान रेलवे मेमू / डेमू और अन्य ट्रेन सेवाएं प्रदान करके राज्य सरकारों की सहायता कर रहा है। रेलवे ने अब तक 11 लाख से अधिक यात्रियों की आवाजाही राज्य के भीतर की है।’’ शीर्ष पांच राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों जहां से अधिकतम ट्रेनें चलाई गई हैं वे गुजरात (897), महाराष्ट्र (590), पंजाब (358), उत्तर प्रदेश (232) और दिल्ली (200) हैं। जिन पांच राज्यों जहां से अधिकतम ट्रेनें रद्द की गई हैं वे उत्तर प्रदेश (1,428), बिहार (1,178), झारखंड (164), ओडिशा (128) और मध्य प्रदेश (120) हैं। श्रमिक स्पेशल ट्रेंने मुख्यत: राज्यों के अनुरोध पर चलाई जा रही हैं जो प्रवासी मजदूरों को उनके गृह राज्यों तक भेजना चाहते हैं। भारतीय रेलवे जहां प्रत्येक ट्रेन को चलाने में आ रहे कुल खर्च का 85 प्रतिशत उठा रहा है वहीं शेष 15 प्रतिशत किराये के रूप में राज्यों द्वारा वसूला जा रहा है। कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन का अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा है साथ ही लाखों प्रवासी मजदूरों की आजीविका पर भी पड़ा है। शहरों से पैदल ही अपने गांवों को लौट रहे प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा करीब दो महीने तक सुर्खियों में रही। सड़क दु्र्घटना में अनेक की मौत भी हुई। भारतीय रेलवे ने यह भी बताया कि रेल मार्गों पर ट्रैफिक की समस्या जो 23 और 24 मई को दिखी थी,वह अब खत्म हो गई। इसने बताया, “यह भीड़-भाड़ बिहार और उत्तर प्रदेश तक जाने वाले मार्गों पर दो तिहाई से ज्यादा रेल ट्रैफिक के एक जगह मिलने के कारण और स्वास्थ्य प्रोटोकॉल की वजह से टर्मिनल की देर से मंजूरी मिलने की वजह से हुई।” रेलवे ने बताया, “राज्य सरकारों के साथ सक्रिय परामर्श के जरिए और सफर के लिए अन्य व्यावहारिक मार्गों की तलाश कर यह मामला सुलझा लिया गया है।’’

डब्ल्यूएचओ ने किया आगाह

कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में तीव्र वृद्धि से निपटने में ब्राजील और भारत के संघर्ष करने के बीच एक शीर्ष स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि विश्व अब भी महामारी के बीचोंबीच फंसा हुआ है और इसने वैश्विक अर्थव्यवस्था के तेजी से पटरी पर लौटने और अंतरराष्ट्रीय यात्रा फिर से शुरू होने की उम्मीद धुंधली कर दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्यकारी निदेशक डॉ. माइक रयान ने कहा, ‘‘अभी, हम दूसरे (महामारी के) चरण में नहीं हैं। हम वैश्विक स्तर पर इसके पहले चरण के बीचोंबीच हैं।’’ रयान ने संक्रमण के मामले बढ़ने वाले क्षेत्रों--दक्षिण अमेरिका, दक्षिण एशिया और अन्य इलाकों- की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘हम अब भी एक ऐसे चरण में हैं, जहां रोग वास्तव में बढ़ता ही जा रहा है।’’ भारत में लगातार सातवें दिन रिकार्ड संख्या में नये मामले सामने आये। मंगलवार को संक्रमण के 6,535 मामले सामने आये, जिसके साथ कुल संख्या बढ़ कर 145,380 हो गई। वहीं, अब तक कुल 4,167 लोगों की मौतें भी हुई हैं। वायरस भारत के कुछ गरीब, अधिक आबादी वाले इलाकों में तेजी से फैला है, जिससे यह पता चलता है कि सरकार संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिये किस कदर चुनौती का सामना कर रही है। भारत में ज्यादातार मामले पश्चिम राज्य महाराष्ट्र और गुजरात से सामने आये हैं। पूर्वी राज्यों में भी संक्रमण के मामले बढ़े हैं क्योंकि लॉकडाउन के कारण देश के अन्य हिस्सों में फंसे प्रवासी श्रमिक वहां लौट रहे हैं। इसके बावजूद भारत ने दो महीने बाद सोमवार को घरेलू वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं बहाल करने की इजाजत दे दी। इस बीच, डब्ल्यूएचओ ने अर्थव्यवस्था को फिर से खोलने के लिये ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो और अन्य की उम्मीदों पर फानी फेर दिया। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि अधिकारियों को महामारी के प्रसार को रोकने के लिये पर्याप्त जांच करनी चाहिए। ब्राजील में संक्रमण के 3,75,000 मामले सामने आ चुके हैं, जो अमेरिका के 16 लाख मामलों के बाद दूसरे स्थान पर है। ब्राजील में 23,000 लोगों की कोविड-19 से मौत हुई है। रयान ने कहा कि ब्राजील में संक्रमण की अत्यधिक दर का मतलब है कि उसे लोगों को घरों के अंदर रखने के कुछ उपायों को अपनाना चाहिए, भले ही इसका अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव क्यों न पड़ता हो। उन्होंने कहा, ‘‘आपको वह सबकुछ करते रहना चाहिए जो आप कर सकते हैं।’’ हालांकि, साओ पाउलो के गवर्नर जोआवो दोरिया की योजना एक जून से पाबंदियों में ढील देने की है। ब्राजील से आने वाले विदेशियों के लिये मंगलवार से प्रभावी होने वाले अमेरिकी यात्रा प्रतिबंध दो दिन पहले लगा दिया गया। हालांकि, यह अमेरिकी नागरिकों पर लागू नहीं होता। रूस में मंगलवार को कोविड-19 से 174 लोगों की मौत होने के साथ कुल मृतक संख्या 3,807 पहुंच गई। संक्रमण के करीब 9,000 नये मामले सामने आने के साथ कुल मामले 3,60,000 के आंकड़े को पार कर गये हैं। रूस में तुलनात्मक रूप से मृत्यु दर कम रहने पर रूस और पश्चिमी देशों में भी विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, रूसी अधिकारियों ने आंकड़ों में हेरफेर करने के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। स्पेन की विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि यूरोपीय संघ के सदस्य देशों को सीमाएं खोलने के लिये सहमत होना चाहिए और संयुक्त रूप से यह तय करना चाहिए कि कौन सा गैर ईयू देश यात्रा के लिये सुरक्षित है। अरांचा गोंजालेज लाया ने कहा कि 27 देशों के आर्थिक संगठन के विभिन्न तारीखों पर चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन हटाने के बावजूद भी एक देश से दूसरे देश के बीच यात्रा बहाल करने पर सामूहिक रूप से फैसला करना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘यूरोपीय क्षेत्रों में आवाजाही की स्वतंत्रता फिर से शुरू करने के लिये हमें अपने यूरोपीय साझेदारों के साथ काम करना प्रारंभ करना होगा।’’ मंत्री ने कहा कि स्पेन पर्यटकों का स्वागत करने के लिये उत्सुक है। दक्षिण कोरिया ने सार्वजनिक वाहनों एवं टैक्सी में यात्रा करने वाले लोगों के लिये मास्क पहनना मंगलवार को जरूरी कर दिया। यह देश बुधवार को 24 लाख बच्चों के स्कूल लौटने के लिये तैयारी में जुटा हुआ है। अमेरिका स्थित जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के मुताबिक, दुनियाभर में वायरस से 55 लाख लोग संक्रमित हुए हैं। 3,46,000 से अधिक लोगों की मौत हुई हैं। यूरोप में करीब 1,70,000 लोगों की, जबकि अमेरिका में करीब एक लाख लोगों की जान गई हैं।

-नीरज कुमार दुबे





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