Lockdown के 66वें दिन SC का बड़ा आदेश- प्रवासी मजदूरों का नहीं लगेगा रेल-बस किराया

Lockdown के 66वें दिन SC का बड़ा आदेश- प्रवासी मजदूरों का नहीं लगेगा रेल-बस किराया

श्रमिक विशेष रेलगाड़ियों से घर लौटने वाले प्रवासियों की मौत ‘‘छोटी एवं छिटपुट’’ घटनाएं हैं और इसके लिए रेलवे को उत्तरदायी नहीं ठहरा जा सकता। यह बात बृहस्पतिवार को पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कही जिस पर विवाद हो गया है।

कोविड-19 महामारी के कारण पलायन कर रहे प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा का स्वत: संज्ञान लिये गये मामले में उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों से अपने गंतव्य जाने के इच्छुक श्रमिकों से रेल या बस का कोई किराया नहीं लिया जायेगा और उन्हें खाना और पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत ने विभिन्न स्थानों पर फंसे इन श्रमिकों के मामले में करीब ढाई घंटे की सुनवाई के बाद अंतरिम निर्देश दिये और कहा कि संबंधित राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश अपने यहां विभिन्न स्थानों पर फंसे कामगारों को भोजन उपलब्ध कराने के स्थान के बारे में उन्हें वहीं सूचित करेंगी जहां वह वे अपनी बारी के लिये ट्रेन या बस का इंतजार कर रहे हैं। न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई के बाद अपने निर्देशों में कहा कि इन श्रमिकों की यात्रा जिस राज्य से शुरू होगी, वे अपने यहां के स्टेशन पर भोजन और पानी उपलब्ध करायेंगे और यात्रा के दौरान इन श्रमिकों को भोजन तथा पानी रेलवे मुहैया करायेगा। न्यायालय ने कहा कि बसों में यात्रा के दौरान भी इन कामगारों को खाना और पानी उपलब्ध कराना होगा। इस मामले में न्यायालय अब पांच जून को आगे विचार करेगा। पीठ ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे कामगारों के पंजीकरण की व्यवस्था देखें और यह सुनिश्चित करें कि ये कामगार अपने गंतव्य के लिये जल्द से जल्द ट्रेनों या बसों में सवार हों। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस संबंध में पूरी जानकारी सभी संबंधित प्राधिकारियों के लिये प्रकाशित की जानी चाहिए। पीठ ने कहा कि इस समय उसकी चिंता इन प्रवासी मजदूरों की तकलीफों और परेशानियों को लेकर है जो जल्द से जल्द अपने अपने पैतृक स्थानों पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। न्यायालय ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि संबंधित राज्य सरकारें और केन्द्र शासित प्रदेश आवश्यक कदम उठा रहे हैं लेकिन इसके बाद भी कामगारों के यात्रा के पंजीकरण, उन्हें घर भेजने तथा उनके खाने-पीने के बंदोबस्त में अनेक कमियां पायी गयी हैं। पीठ ने सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता के इस कथन का भी संज्ञान लिया कि राज्य सरकारों को यह निर्देश दिये गये हैं कि सड़कों पर पैदल ही चल रहे कामगारों को बस या दूसरे वाहन की सुविधा उपलब्ध करायी जाये। पीठ ने कहा कि सड़कों पर पैदल ही जा रहा कोई भी कामगार दिखााई पड़ने पर उसे तत्काल आवास शिविर में पहुंचाया जाये और उसके लिये भोजन तथा दूसरी सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि इस समय इन कामगारों की दुर्दशा को देखते हुये तत्काल ही कुछ अंतरिम निर्देश देने की आवश्यकता है। कोविड-19 महामारी की वजह से चार घंटे की नोटिस पर 25 मार्च से देश में लागू लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों में लाखों भूखे प्यासे श्रमिक विभिन्न जगहों पर फंस गये। उनके पास ठहरने की भी सुविधा नहीं थी। इन श्रमिकों ने आवागमन का कोई साधन उपलब्ध नहीं होने की वजह से पैदल ही अपने-अपने घर की ओर कूच कर दिया था जिससे उनकी स्थिति काफी दयनीय हो गयी थी। न्यायालय ने कहा कि इन प्रवासी कामगारों की संख्या, इन्हें भेजने की योजना, इनके पंजीकरण के तरीके और दूसरी संबंधित जानकारियों का विवरण रिकार्ड पर लाया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा कि रेलवे को राज्य सरकार के अनुरोध पर उसे ट्रेन उपलब्ध करानी होगी। न्यायालय ने इस मामले को पांच जून के लिये सूचीबद्ध करते हुये कहा कि केन्द्र और कुछ राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों ने नोटिस पर अपने जवाब दाखिल किये हैं। पीठ ने सॉलिसीटर जनरल द्वारा केन्द्र की ओर से दी गयी इस दलील का भी संज्ञान लिया कि एक से 27 मई के दौरान इन कामगारों को ले जाने के लिये कुल 3,700 विशेष ट्रेन चलायी गयी और सीमावर्ती राज्यों में अनेक कामगारों को सड़क मार्ग से पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि बुधवार तक करीब 91 लाख प्रवासी कामगारों को उनके पैतृक घरों तक पहुंचाया गया है। मेहता ने पीठ से कहा कि ये कामगार जब अपने गंतव्य पर पहुंचते हैं तो संबंधित राज्य सरकार उनके पृथकवास और स्क्रीनिंग करने जैसी आवश्यकताओं को देखती है। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों ने अपने यहां राहत शिविर बनाये हैं जहां प्रवासी कामगारों को खाना और दूसरी सुविधायें उपलब्ध करायी जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सारे कामगार अपने पैतृक राज्य नहीं जाना चाहते हैं और इनमें से कुछ काम करना चाहते हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने इन कामगारों की दयनीय स्थिति के संबंध में केन्द्र से अनेक तीखे सवाल पूछे। न्यायालय ने जानना चाहा कि आखिर इन कामगारों को अपने पैतृक शहर पहुंचने में कितना समय लगेगा और उनकी यात्रा के किराये का भुगतान कौन करेगा। न्यायालय ने इन कामगारों के लिये भोजन और पानी की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया। पीठ ने मेहता से जानना चाहा कि आखिर इन श्रमिकों की यात्रा के भाड़े के भुगतान को लेकर किस तरह का भ्रम है। पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इन कामगारों को अपने घर लौटने के लिये यात्रा के भाड़े का भुगतान करने के लिये बाध्य नहीं किया जाये। पीठ ने कामगारों की दुर्दशा पर चिंता वयक्त करते हुये मेहता से सवाल किया, ‘‘सामान्य समय क्या है? यदि एक प्रवासी की पहचान होती है तो यह तो निश्चित होना चाहिए कि उसे एक सप्ताह के भीतर या दस दिन के अंदर पहुंचा दिया जायेगा? वह समय क्या है? ऐसे भी उदाहरण हैं जब एक राज्य प्रवासियों को भेजती है लेकिन दूसरे राज्य की सीमा पर उनसे कहा जाता है कि हम प्रवासियों को नहीं लेंगे, हमें इस बारे में एक नीति की आवश्यकता है।’’ 

80 प्रतिशत संख्या उत्तर प्रदेश, बिहार जाने वालों की

केंद्र ने बृहस्पतिवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि कोविड-19 के संक्रमण को रोकने के लिए लागू लॉकडाउन के बाद देशभर में फंसे प्रवासी मजदूरों में 80 प्रतिशत संख्या उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वालों की है। इन दोनों राज्यों ने भी प्रवासियों के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अदालत को अवगत कराया। बिहार ने शीर्ष अदालत को बताया कि टिकट के लिए पैसा चुकाने वाले प्रवासियों को वह किराए का भुगतान कर रही है। उत्तर प्रदेश के लिए पेश वकील ने बताया कि भोजन और अन्य सुविधाओं के साथ 1,000 रुपये नकदी देकर उन्हें पृथक-वास में रहने को लेकर प्रेरित करने के लिए कदम उठाए गए हैं। केंद्र की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण के नेतृत्व वाली पीठ को बताया कि इन प्रवासी मजदूरों में करीब 80 प्रतिशत संख्या उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वालों की रही है। मेहता ने पीठ को बताया कि पृथक-वास के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार भोजन, दवा, पानी और अन्य सुविधाओं के लिए भुगतान करती है और पृथक-वास में रहने की अवधि खत्म होने पर उन्हें बसों से संबंधित स्थानों तक पहुंचा दिया जाता है। पीठ में न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति एमआर शाह भी थे। उत्तर प्रदेश के लिए पेश वकील ने पीठ को बताया कि हालात से निपटने के लिए राज्य ने असाधारण कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों को लाने के लिए विशेष ट्रेनें चलायी गयीं और हर चरण में इससे जुड़े विभिन्न मसलों से निपटने के लिए राज्य ने एक तंत्र की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिकों के लिए कैंप लगाए गए और वहां पर उन्हें खाना मुहैया कराया गया। बिहार सरकार की ओर से पेश वकील ने शीर्ष अदालत को बताया कि ट्रेनों से आने वालों के अलावा सड़क मार्ग से करीब 10 लाख प्रवासी राज्य पहुंचे। उन्होंने कहा कि पंचायत, प्रखंड और ग्राम स्तर पर पृथक-वास केंद्रों में जरूरी व्यवस्था की गयी है और बाहर से आए लोगों को वहां रखा जा रहा है। बिहार के वकील ने बताया कि प्रवासी श्रमिकों द्वारा किए गए टिकट के खर्चे के लिए राज्य सरकार उन्हें भुगतान कर रही है। इस पर, पीठ ने कहा कि बिहार लगता है अकेला ऐसा राज्य है जो प्रवासियों को खर्चे का भुगतान करने पर काम कर रहा है। इसी तरह, राजस्थान के लिए पेश वकील ने पीठ को बताया कि राज्य ने सीमा पर कैंप लगाए और वहां पर करीब 7.5 लाख लोग पहुंचे। मामले में महाराष्ट्र की ओर से वकील जब पेश हुए तो पीठ ने उनसे पूछा कि कितने लोग घर जाने के लिए इंतजार कर रहे हैं और क्या उन्हें खाना मुहैया कराया गया है या नहीं। महाराष्ट्र के वकील ने जब राज्य द्वारा किए गए खर्चे के बारे में बताना चाहता तो पीठ ने कहा कि इसमें उसकी दिलचस्पी नहीं है। एक वकील ने पीठ से कहा कि राज्यों की तरफ से हलफनामा दाखिल करना महत्वपूर्ण होगा ताकि शीर्ष अदालत को राज्यों द्वारा किए गए काम का पता चलेगा। पीठ ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों से जुड़े मुद्दों पर अपना हलफनामा दाखिल करने के लिए वह राज्यों को समय देगा। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए करीब ढाई घंटे तक सुनवाई के बाद न्यायालय ने बृहस्पतिवार को निर्देश दिया कि इन श्रमिकों को उनके घर पहुंचाने के लिये उनसे ट्रेन या बसों का किराया नहीं लिया जाये और इसका खर्च राज्य वहन करे। यात्रा के दौरान इन प्रवासी कामगारों को स्टेशनों पर राज्य और रास्ते में रेलवे को भोजन उपलब्ध कराना होगा। पीठ ने यह भी कहा कि बसों में यात्रा के दौरान भी इन मजदूरों को भोजन और पानी उपलब्ध कराना होगा।

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टीका बनाने की कोशिश

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के विजय राघवन ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत में करीब 30 समूह कोरोना वायरस के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें बड़े उद्योग घरानों से लेकर वैज्ञानिक तक हैं। राघवन ने कहा कि इन 30 में से 20 समूह बहुत तेज रफ्तार से काम कर रहे हैं। उन्होंने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘भारत में बड़े उद्योगों से लेकर वैज्ञानिक तक करीब 30 समूह कोविड-19 के खिलाफ टीका विकसित करने की कोशिश में लगे हैं जिनमें से 20 अच्छी रफ्तार से काम कर रहे हैं।’’ राघवन ने किसी समूह का नाम नहीं लिया, लेकिन कहा कि इनमें से कुछ प्री-क्लीनिकल स्तर पर हैं और अक्टूबर तक क्लिनिकल स्तर पर पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में टीका बनाने में करीब 10 साल लगते हैं और इसकी लागत करीब 20 से 30 करोड़ डॉलर तक आती है, लेकिन दुनिया भर में कोरोना वायरस के लिए एक साल के अंदर टीका बनाने के लक्ष्य के साथ काम हो रहा है। राघवन ने कहा, इसके लिए समांतर प्रक्रिया जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘‘किसी टीके पर काम करने और यह देखने कि यह 10 साल की अवधि तक काम करता है या नहीं, और इस पर निवेश करने के बजाय हमें 100 टीकों के विकास पर निवेश करना होगा। दुनिया एक ही समय में 100 से अधिक टीकों पर निवेश कर रही है।’’ वरिष्ठ वैज्ञानिक ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो से तीन अरब डॉलर की लागत आएगी। राघवन ने कहा कि यह भी जरूरी है कि टीके की खोज पर काम करने के दौरान गुणवत्ता से समझौता किये बिना नियामक प्रक्रिया से गुजरा जाए। टीके के विकास में भारतीय कंपनियों और संस्थाओं के कामकाज पर रोशनी डालते हुए उन्होंने कहा कि देश में ही इसे बनाने के प्रयास चल रहे हैं। दूसरी तरफ भारतीय कंपनियों और संस्थाओं ने इसी मिशन पर काम कर रहीं बाहर की संस्थाओं के साथ भी साझेदारी की है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी के लिए टीका सुलभ बनाना भी बड़ी चुनौती का काम है क्योंकि सबसे अधिक कमजोर वर्ग को इसकी सर्वाधिक जरूरत होगी। राघवन ने कहा कि नयी दवा बनाना बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम होता है और इसी तरह टीका बनाने में बहुत लंबा वक्त लगता है। उन्होंने कहा, ‘‘कई प्रयास विफल हो जाते हैं और इस तरह आपको बहुत कोशिशें करनी होती हैं।’’ राघवन ने कहा कि वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) कोरोना वायरस से निपटने के लिए विभिन्न प्रकार की दवाओं के इस्तेमाल पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर और एआईसीटीई ने दवा की खोज के लिए हैकाथन भी शुरू की है।

गंतव्य तक पहुंचे

नागर विमानन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कुल 460 घरेलू उड़ानों ने 34,336 यात्रियों को बुधवार को उनके गंतव्यों तक पहुंचाया। कोविड-19 लॉकडाउन में दो महीने तक बंद रहने के बाद देश में घरेलू विमानन सेवाएं सोमवार से फिर चालू हूईं। सोमवार को 428 और मंगलवार को 445 घरेलू उड़ानों का परिचालन हुआ। नियामक नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के आंकड़ों के मुताबिक इस साल लॉकडाउन की घोषणा से पहले फरवरी में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या करीब 4.12 लाख प्रतिदिन थी। लॉकडाउन से पहले भारतीय हवाईअड्डे प्रतिदिन औसतन 3,000 घरेलू उड़ानों का परिचालन करते थे। पुरी ने ट्वीट किया, ''भारत ऊंची उड़ान भर रहा है। 27 मई 2020 को रात 11 बजकर 59 मिनट तक 460 घरेलू उड़ानों ने 34,336 यात्रियों के साथ उड़ान भरी। जबकि इस समय तक 464 उड़ानों ने 33,525 यात्रियों के साथ लैंडिंग की।’’ यदि कोई विमान रात बारह बजे से पहले उड़ान भरता है और उसकी लैंडिंग 12 बजे के बाद होती है तो उसके उड़ान भरने को पिछले दिन में जबकि लैंड करने को अगले दिन में गिना जाता है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का परिचालन देश में 25 मार्च से निलंबित है।

स्पीकअप इंडिया

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और पार्टी के अन्य नेताओं ने बृहस्पतिवार को सरकार से आग्रह किया कि मजदूरों को मुफ्त परिवहन सेवा उपलब्ध कराने के साथ ही गरीब परिवारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) की तत्काल वित्तीय मदद प्रदान की जाए। साथ ही मनरेगा के तहत कार्यदिवसों को 200 दिन किया जाए। सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर कांग्रेस की ओर से चलाए गए ‘स्पीकअप इंडिया’ अभियान के तहत पार्टी के शीर्ष नेताओं के साथ ही राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश एवं जिला इकाइयों के पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं ने गरीबों, मजदूरों, किसानों और छोटे कारोबारियों की मदद की मांग उठाई। कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अजय माकन और पार्टी के सोशल मीडिया विभाग के प्रमुख रोहन गुप्ता के मुताबिक इस अभियान में 57 लाख से अधिक लोगों ने अलग-अलग सोशल मीडिया मंचों के जरिए अपनी बात रखी और इनके जरिए कांग्रेस 10 करोड़ लोगों तक पहुंचने में सफल रही। माकन ने ‘वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा, ‘‘इस अभियान के बाद हमें उम्मीद है कि सरकार जागेगी और हमारी मांगों को स्वीकार करेगी।’’ रोहन गुप्ता ने कहा, ‘‘सोशल मीडिया का हमारे अभियान ने पूरी दुनिया में नंबर एक पर ट्रेंड किया। यह इस बात का प्रमाण है कि लोग हमारी मांगों का समर्थन कर रहे हैं।’’ सोनिया गांधी ने इस अभियान के तहत एक वीडियो जारी कर सरकार से यह आग्रह किया कि वह मनरेगा के तहत 200 कामकाजी दिन सुनिश्चित करे और सभी जरूरतमंदों के लिए राशन का प्रबंध करे। कांग्रेस नेता ने दावा किया कि करोड़ों रोजगार चले गए, लाखों धंधे चौपट हो गए, कारखानें बंद हो गए, किसानों को फसल बेचने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। यह पीड़ा पूरे देश ने झेली, पर शायद सरकार को इसका अंदाजा ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, ‘‘पहले दिन से ही कांग्रेस के सब साथियों, अर्थशास्त्रियों, समाजशास्त्रियों और समाज के अग्रणी हर व्यक्ति ने बार-बार सरकार को यह कहा कि ये वक्त आगे बढ़ कर घाव पर मरहम लगाने का है। मजदूर हो या किसान, उद्योग हो या छोटे दुकानदार, सरकार द्वारा सबकी मदद की जानी चाहिए। न जाने क्यों केंद्र सरकार यह बात समझने और लागू करने से लगातार इंकार कर रही है?’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारा केंद्र सरकार से फिर आग्रह है कि खज़ाने का ताला खोलिए और ज़रूरत मंदों को राहत दीजिये। हर परिवार को छह महीने के लिए 7,500 रुपये प्रतिमाह सीधे नकद भुगतान करें और इमें से 10,000 रुपये फौरन दें।’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने यह मांग भी की कि सरकार मज़दूरों की सुरक्षित और मुफ्त यात्रा का इंतजाम कर उन्हें घर पहुंचाए, उनके लिए रोजी-रोटी का इंतजाम भी करे, राशन का इंतजाम भी करें, मनरेगा में 200 दिन का काम सुनिश्चित करे और छोटे और लघु उद्योगों को कर्ज देने की बजाय आर्थिक मदद दे, ताकि करोड़ों नौकरियां भी बचें और देश की तरक्की भी हो। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी इस अभियान के तहत सरकार से आग्रह किया कि मौजूदा समय में देश को कर्ज नहीं बल्कि वित्तीय मदद की जरूरत है और ऐसे में सरकार गरीबों के खाते में छह महीने के लिए 7500 रुपये प्रति माह भेजे तथा एमएसएमई को आर्थिक पैकेज दे। गांधी ने कहा, ‘‘कोविड के कारण भारत में एक तूफान आया हुआ है। सबसे ज्यादा चोट गरीब जनता को लगी है। मजदूरों को सैकड़ों किलोमीटर भूखा-प्यासा और पैदल चलना पड़ रहा है। एमएसएमई हमारे देश की रीढ़ की हड्डी हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार देते हैं। ये एक के बाद एक करके बंद हो रहे हैं।’’ उनके मुताबिक आज हिंदुस्तान को कर्ज की नहीं, पैसे की जरूरत है। गरीब आदमी को पैसे की जरूरत है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि भाजपा संकट के समय राजनीति नहीं करे और सबके साथ मिलकर देशवासियों की मदद करे। उन्होंने भी सरकार से आग्रह किया, ''गरीबों के खाते में तत्काल 10-10 हजार रुपये डाले जाएं और इसके साथ अगले छह महीनों के लिए हर गरीब परिवार को 7500 रुपये मासिक दिया जाए। जो प्रवासी मजदूर घर पहुंच चुके हैं उनके लिए मनरेगा के कार्य दिवस को 100 दिन से बढ़ाकर 200 दिन किया जाए। छोटे कारोबारियों की मदद के लिए सरकार वित्तीय पैकेज दे।’’ कांग्रेस के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी इस अभियान के तहत सरकार से ये मांगें कीं।

केरल में 84 नये मामले सामने आये

केरल में बृहस्पतिवार को कोरोना वायरस संक्रमण के एक दिन में सर्वाधिक 84 मामले सामने आये, जिसके साथ ही प्रदेश में इससे संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ कर 1088 हो गयी। इस बीच, राजस्थान से यहां आये तेलंगाना के एक व्यक्ति की वायरस के संक्रमण के कारण मौत हो गयी। सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मरने वाला व्यक्ति जयपुर तिरूवनंतपुरम विशेष ट्रेन में 22 मई को सवार हुआ था। उसके साथ उसका परिवार भी था। वह यहां बिना किसी जरूरी दस्तावेज के पहुंचा था। बयान में कहा गया है कि उस व्यक्ति की कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आने से मौत बुधवार को हो गयी। उसे यहां सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था और निगरानी में रखा गया था। उसके नमूने की जांच रिपोर्ट आज आयी। बयान में कहा गया है कि प्रदेश में छह लोगों की कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि तेलंगाना के इस व्यक्ति को मरने वालों की राज्य की सूची में शामिल किया जाएगा या नहीं। इससे पहले 26 मई को प्रदेश में एक दिन में सर्वाधिक 62 मामले सामने आये थे। इसके बाद मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने लोगों को सामुदायिक संक्रमण के प्रति चेताया था और कहा था कि जो लोग निगरानी में हैं अगर वह स्वास्थ्य दिशा-निर्देश का पालन नहीं करते हैं तो दिक्कत आयेगी। विजयन ने आज कहा, '‘प्रदेश में अबतक सामुदायिक संक्रमण का प्रसार नहीं हुआ है। लेकिन हम यह नहीं कह सकते हैं कि ऐसा कभी नहीं होगा।'’ उन्होंने कहा कि राज्य में अभी 526 लोगों का इलाज चल रहा है और 1.15 लाख लोगों को निगरानी में रखा गया है। विजयन ने कहा कि ताजा मामलों में से 31 विदेश से आये हैं और 48 दूसरे राज्यों— महाराष्ट्र, तमिलनाडु एवं कर्नाटक से आये हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पांच लोगों संक्रमित लोगों के संपर्क में आने के कारण संक्रमण का शिकार हुये हैं। उन्होंने यह भी बताया कि आज तीन लोगों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दी गयी है।

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सांसद रवि किशन गोरखपुर पहुंचे

स्थानीय सांसद रवि किशन लॉकडाउन के बाद पहली बार बृहस्पतिवार को मुंबई से गोरखपुर शहर पहुंचे हैं। सोशल मीडिया पर लॉकडाउन के दौरान उनके अपने संसदीय क्षेत्र से गायब रहने पर सवाल उठ रहे थे। उन्होंने बताया, ‘‘संसद के अनिश्चितकाल के लिये स्थगित होने की घोषणा के बाद मैं मुंबई अपने परिवार से मिलने चला गया था। उसके दूसरे दिन ही लॉकडाउन की घोषणा हो गयी और घरेलू उड़ानों पर भी रोक लग गयी।'' सांसद किशन ने कहा, ‘‘मैं मुंबई में था, लेकिन वहां गोरखपुर के लोगों के लिये काम कर रहा था और लोगों को घर भेजने के इंतजाम में लगा हुआ था। अब मैं आ गया हूं। ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा करूंगा और जरूरतमंदों की हर तरह से मदद करूंगा।''

रियल एस्टेट क्षेत्र पर ध्यान देने का आग्रह

राकांपा प्रमुख शरद पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि लॉकडाउन के दौरान रियल एस्टेट क्षेत्र पूरी तरह से बर्बाद हो गया है और उन्हें (मोदी को) व्यक्तिगत तौर पर इस मामले पर गौर करना चाहिए। पवार ने 27 मई की तिथि वाले अपने पत्र में मांग की है कि प्रधानमंत्री इस क्षेत्र को पटरी पर लाने के लिए कदम उठायें जो कि बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। पवार ने पत्र बृहस्पतिवार को ट्विटर पर साझा किया जिसमें उन्होंने लिखा है, ‘‘अभूतपूर्व महामारी कोविड-19 और उसके बाद लागू देशव्यापी लॉकडाउन के चलते रियल एस्टेट क्षेत्र पूरी तरह से बर्बाद हो गया है।’’ उन्होंने कहा कि श्रमिकों की वापसी, लगभग तीन महीने से काम और बिक्री रुकने, मांग और आर्थिक गतिविधियों में ठहराव आने से यह उद्योग प्रभावित हुआ है जो ‘‘राष्ट्रीय जीडीपी में काफी योगदान करता है।’’ पूर्व मंत्री ने कहा कि ‘द कन्फेडरेशन आफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन आफ इंडिया’ (सीआरईडीएआई) ने भी मोदी को इस संकट के बारे में एक खुला पत्र लिखा है और उनसे तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि सीआरईडीएआई ने कुछ सिफारिशें की हैं जैसे एक बार (रिण) पुनर्गठन, अतिरिक्त संस्थागत वित्तपोषण, दंड ब्याज माफ करना, उपभोक्ता मांग बढाने के लिए नीतिगत नवाचार, कच्चे माल के कार्टिलेज को नियंत्रित करना, किफायती मकान पर लगने वाले जीएसटी के मानदंड में बदलाव और क्षेत्र की मदद के लिए स्पेशल विंडो फॉर कम्प्लीशन आफ कंस्ट्रक्शन आफ अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउजिंग प्रोजेक्ट्स (एसडब्ल्यूएएमआईएच) कोष क्रियाशील करना शामिल हैं। स्पेशल विंडो फॉर कम्प्लीशन आफ कंस्ट्रक्शन आफ अफोर्डेबल एंड मिड-इनकम हाउजिंग प्रोजेक्ट्स (एसडब्ल्यूएएमआईएच) कोष का गठन सरकार द्वारा एलआईसी और एसबीआई जैसे वित्तीय संस्थानों के योगदान से 4.5 लाख आवासीय इकाइयों वाली 1600 से अधिक रुकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिए किया गया था। पवार ने पत्र में कहा, ‘‘यदि आप इस मामले पर निजी तौर पर ध्यान देंगे और अर्थव्यवस्था के सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक को पटरी पर लाने के लिए कदम उठाएंगे तो मैं आभारी रहूंगा।’’ 

बिजली की मांग बढ़ी

पारा चढ़ने के साथ ही साथ चौथे चरण के ‘लॉकडाउन’ (बंद) में वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से बिजली की मांग पिछले साल मई के हिसाब से इस सप्ताह सामान्य स्तर के करीब आ गयी है। बिजली मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार मांग बढ़ने से बिजली की अधिकतम आपूर्ति 26 मई को 1,66,420 मेगावाट पहुंच गयी। एक साल पहले इसी महीने में बिजली की अधिकतम मांग 1,82,530 मेगावाट थी। यानी सालाना आधार पर बिजली की मांग अभी 8.8 प्रतिशत कम है। माह के पहले पखवाड़े में 15 मई को बिजली की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिये लिये की गयी आपूर्ति 1,41,870 मेगावाट रही। यह पिछले साल के मई 2019 में इसी अवधि की तुलना में 22 प्रतिशत कम है। विशेषज्ञों के अनुसार मई के दूसरे पखवाड़े में बिजली की मांग बढ़ी है और इसका कारण गर्मी बढ़ना और चार मई से देशव्यापी बंद के चौथे चरण में वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियां बढ़ना है। देश में 25 मार्च से ‘लॉकडाउन’ है। अप्रैल महीने में कुछ ढील दी गयी लेकिन मौसम अपेक्षाकृत ठंड होने और औद्योगक एवं वाणिज्यिक गतिविधियां सीमित होने से पिछले महीने में बिजली की मांग में तेजी नहीं आयी। अप्रैल में मांग को पूरा करने के लिये बिजली की अधिकतम आपूर्ति 1,32,770 मेगावाट रही जबकि पिछले साल अप्रल में यह 1,76,810 मेगावाट थी। अप्रैल महीने में बिजली की मांग 1,16,890 मेगावाट (आठ अप्रैल) से 1,32,770 मेगावाट (30 अप्रैल) रही। उद्योग मंडल सीआईआई ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में कहा कि मांग कम होने के कारण वितरण कंपनियों की आय में 30,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है और 50,000 करोड़ रुपये की नकदी की कमी का सामना करना पड़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल में संकट से जूझ रही वितरण कंपनियों को 90,000 करोड़ रुपये की नकदी उपलब्ध कराने की घोषणा की है। वितरण कंपनियों के ऊपर उत्पादक कंपनियों का 94,000 करोड़ रुपये बकाया है।

प्रवासी श्रमिकों को विमान से घर भेजा

दिल्ली स्थित एक मशरूम फार्म में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों को उनके नियोक्ता ने हवाईसेवा से उनके घर पहुंचा कर एक नयी मिशाल पेश की है। बिहार के समस्तीपुर जिला निवासी ये प्रवासी श्रमिक जब पटना हवाईअड्डा पर उतरे तो इस यात्रा की खुशी उनके मास्क लगे चेहरों पर साफ नजर आ रही थी। इन श्रमिकों में से एक नवीन राम ने बताया, “हम दिल्ली में पप्पन सिंह गहलोत के स्वामित्व वाले एक मशरूम फार्म में काम करते हैं। हम कुछ समय के लिए अपने परिवारों से मिलना चाहते थे लेकिन लॉकडाउन के कारण ऐसा करने में असमर्थ थे।’’ उन्होंने कहा, “जब श्रमिक स्पेशल ट्रेनें शुरू हुईं, तो हमने इनमें से एक पर सवार होने के बारे में सोचा लेकिन हमारे नियोक्ता ने कहा कि कोरोना वायरस के बढते संक्रमण के मद्देनजर वे हमें ट्रेन से यात्रा करने की अनुमति नहीं देंगे और हम लोगों के लिए हवाई टिकट की व्यवस्था की। हम में से किसी ने भी कभी नहीं सोचा था कि हम एक दिन विमान से उड़ान भरेंगे।’’ उक्त फार्म में काम करने वाले जीवछ राम ने कहा, "हमारे नियोक्ता ने ना केवल हवाई टिकट की व्यवस्था की बल्कि वाहन की भी बुकिंग की है जोकि हमें पटना से समस्तीपुर हमारे गाँव तक पहुँचाएगा।’’ गहलोत, जिनसे कुछ समाचार चैनलों ने दिल्ली में बात की, ने कहा, "इस यात्रा की लागत लगभग 68,000 रुपये है। लेकिन यह कोई बड़ी बात नहीं है। वे लंबे समय से मेरे लिए काम कर रहे थे और मैं चाहता था कि वे अपने घर खुशी के साथ जाएं, स्वस्थ रहें और प्रफुल्ल मनोभाव से वापस आएं।’’ जब पटना में इन प्रवासियों से पूछा गया कि क्या वे दिल्ली लौटने और अपने नियोक्ता के लिए काम करने के लिए तैयार होंगे, तो लखींद्र राम सहित उनके अन्य सह यात्रियों ने एक स्वर में कहा "क्यों नहीं? हम अपने नियोक्ता को कैसे छोड़ सकते हैं जिसने हमारी इतनी देखभाल की है? हम अगस्त के अंत तक लौट आएंगे। हमने उनसे वादा किया है।’'

राष्ट्रीय खेल अनिश्चितकाल के लिये स्थगित

पहले से ही कई बार टल चुके 36वें राष्ट्रीय खेल कोरोना वायरस महामारी के कारण अब अनिश्चितकाल के लिये टाल दिये गए हैं। ये खेल अक्टूबर नवंबर में गोवा में होने थे। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने हाल ही में गोवा सरकार से कहा था कि वह इस साल 20 अक्टूबर से चार नवंबर के बीच राष्ट्रीय खेलों का आयोजन करे। कोरोना महामारी के बढते प्रकोप के कारण इन्हें स्थगित करने का फैसला किया गया। आईओए अध्यक्ष नरिंदर बत्रा द्वारा भेजे गए एक बयान में गोवा के उप मुख्यमंत्री और खेल का भी प्रभार देख रहे मनोहर अजगांवकर ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय खेल आयोजन समिति ने कोरोना महामारी के कारण खेलों को स्थगित करने का फैसला किया है।’’ उन्होंने कहा, ''समिति सितंबर के आखिरी में बैठक करेगी और राष्ट्रीय खेलों की तारीख तय की जायेगी। गोवा सरकार केंद्रीय खेल मंत्रालय से सलाह लेगी । खेलों के आयोजन के लिये चार महीने की अग्रिम सूचना चाहिये होगी।’’ पिछले राष्ट्रीय खेल केरल में 2015 में हुए थे। आगामी राष्ट्रीय खेल पहले नवंबर 2018 में होने थे लेकिन फिर अप्रैल 2019 तक के लिये स्थगित कर दिये गए। आम चुनाव के कारण गोवा सरकार ने इन्हें फिर टाल दिया। खेलों का बुनियादी ढांचा लगभग तैयार हो चुका है और ऐसे में खेल स्थगित होने से राज्य सरकार को भारी नुकसान होगा। कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में खेल बंद है। भारत में इंडियन प्रीमियर लीग समेत कई टूर्नामेंट स्थगित कर दिये गए हैं। गोवा के ग्रीन जोन में होने से खेलों के आयोजन की संभावना लग रही थी लेकिन पिछले कुछ दिनों में वहां कोरोना वायरस के 68 मामले पाये गए।

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वापस लाने का काम दो-तीन दिन में समाप्त हो जाएगा

लॉकडाउन के कारण देश के विभिन्न हिस्सों मे फंसे उत्तर प्रदेश के कामगारों को वापस लाने का काम अगले दो-तीन दिन में पूरा हो जाएगा। उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी ने इस आशय की जानकारी देते हुए बृहस्पतिवार को बताया कि अन्य राज्यों ने सूचित किया है कि वापसी के इच्छुक प्रवासी उनके यहां नहीं हैं या बहुत कम संख्या में हैं। अपर मुख्य सचिव, गृह और सूचना अवनीश अवस्थी ने बताया, ‘‘ट्रेनों और बसों से प्रवासी कामगारों को वापस लाने का पूरा अभियान अगले दो-तीन दिन में समाप्त हो जाएगा। अभी तक करीब 26 से 27 लाख प्रवासी लौटे हैं।’’ उन्होंने बताया कि गुजरात, दिल्ली, पंजाब, तेलंगाना, कर्नाटक, राजस्थान, हरियाणा आदि राज्यों से ज्यादातर प्रवासी श्रमिक वापस आ चुके हैं और इन राज्यों से वापस आने वाले श्रमिकों की संख्या अब नगण्य है। उन्होंने बताया कि अभी तक प्रवासी श्रमिकों को लेकर राज्य में 1,411 ट्रेनें आयी हैं और अगले कुछ दिन में इनकी संख्या 1,551 हो जाएगी। अवस्थी ने बताया कि अब प्रदेश में महाराष्ट्र और कुछ दक्षिणी राज्यों से ट्रेनें आनी हैं। राज्य में सबसे ज्यादा 490 ट्रेनें गुजरात से आयी हैं, जबकि महाराष्ट्र से 327, पंजाब से 228, दिल्ली से 94, कर्नाटक से 53 और राजस्थान से 33 ट्रेनें आयी हैं। अवस्थी ने बताया कि दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए सभी जनपदों के जिलाधिकारी ट्रेनों से लौट रहे कामगारों को जांच के बाद उनके घर जाने की व्यवस्था कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 234 ट्रेन से 2,99,861 कामगार एवं श्रमिक गोरखपुर लौटे हैं जबकि लखनऊ में 94 ट्रेन से 1,22,179 लोग आए हैं। उन्होंने बताया कि 100 ट्रेनें वाराणसी आयी हैं, वहीं आगरा में 10, कानपुर में 17, जौनपुर में 110, बरेली में 12, बलिया में 66, प्रयागराज में 61, रायबरेली में 21, प्रतापगढ़ में 68, अमेठी में 16, मऊ में 46, अयोध्या में 35, गोण्डा में 66, उन्नाव में 27, बस्ती में 70, आजमगढ़ में 35, कन्नौज में तीन, गाजीपुर में 31, बांदा में 16, सुल्तानपुर में 23, बाराबंकी में 12, सोनभद्र में 03, आम्बेडकरनगर में 23, हरदोई में 19, सीतापुर में 10, फतेहपुर में आठ, फर्रूखाबाद में दो, कासगंज में नौ, चंदौली में 13, इटावा में एक, मानिकपुर (चित्रकूट) में एक, एटा में एक, जालौन में दो, रामपुर में दो, शाहजहांपुर में दो, अलीगढ़ में छह, भदोही में दो, मिर्जापुर में 10, देवरिया में 93, सहारनपुर में चार, चित्रकूट में तीन, बलरामपुर में 19, मुजफ्फरनगर में एक, झांसी में पांच, पीलीभीत में एक ट्रेन आयी है। ट्रेनें कौशांबी, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, महराजगंज, संत कबीर नगर, कुशीनगर, हमीरपुर, बहराइच, लखीमपुर खीरी भी पहुंच रही हैं। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश में गुजरात से 490 ट्रेन से 7,12,678 लोग, महाराष्ट्र से 327 ट्रेन से 4,55,005 लोग, पंजाब से 228 ट्रेन से 2,67,383 कामगारों/श्रमिकों को लेकर प्रदेश में आ चुकी हैं। इसके साथ ही तेलंगाना से 23, कर्नाटक से 53, केरल से 11, आन्ध्र प्रदेश से 10, तमिलनाडु से 30, मध्य प्रदेश से दो, राजस्थान से 35, गोवा से 18, दिल्ली से 94, छत्तीसगढ़ से एक, पश्चिम बंगाल से एक, उड़ीसा से एक, असम से दो, त्रिपुरा से एक, हिमाचल प्रदेश से तीन, उत्तराखण्ड से एक तथा उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से 81 ट्रेनों के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जनपदों में कामगारों/श्रमिकों को पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में कहीं भी, किसी भी जनपद में कोई पैदल यात्रा ना करे। कामगार/श्रमिक स्वयं तथा अपने परिवार को जोखिम में डालकर पैदल अथवा अवैध व असुरक्षित वाहन से घर के लिए यात्रा ना करें। सरकार समस्त श्रमिकों/कामगारों के लिए सुरक्षित यात्रा हेतु पर्याप्त निःशुल्क बस एवं ट्रेन की व्यवस्था कर रही है।

12 यात्री कोविड-19 से संक्रमित

इंडिगो की चार उड़ानों में यात्रा करने वाले कुल 12 ऐसे यात्रियों में कोविड-19 के संक्रमण की पुष्टि हुई है जिनमें इसके लक्षण नहीं थे। एयरलाइन ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। कोरोना वायरस से निपटने के लिए देश भर में लगाए गए लॉकडाउन के कारण करीब दो महीने से बंद घरेलू विमान सेवाओं को सोमवार को बहाल किया गया। तब से तीन विभिन्न एयरलाइन के 16 यात्री कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं। इंडिगो ने कहा कि मंगलवार को दिल्ली-जम्मू की उड़ान से यात्रा करने वाले तीन मुसाफिरों को, बुधवार को बेंगलुरू-कोयंबटूर की यात्रा करने वाले छह यात्रियों को, बुधवार को दिल्ली-कोयंबटूर की उड़ान में सवार दो यात्रियों को और इसी दिन बेंगलुरु-मदुरै के विमान में सवार एक यात्री को नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण की पुष्टि हुई है। उसने बृहस्पतिवार को एक बयान में कहा, ‘‘इंडिगो की उड़ानों में यात्रा करने वाले कुछ यात्री 28 मई, 2020 को कोविड-19 संक्रमित मिले हैं जिनमें रोग के लक्षण नहीं थे। इनमें तीन यात्री 26 मई की दिल्ली से जम्मू की उड़ान संख्या 6ई 955 में सवार थे, छह यात्री 27 मई को बेंगलुरु से कोयंबटूर की उड़ान संख्या 6ई 6992 में सवार थे, दो यात्रियों ने 27 मई को दिल्ली से कोयंबटूर की उड़ान संख्या 6ई 908 में यात्रा की थी।’’ इससे पहले एयरलाइन ने दिन में एक बयान में कहा, ‘‘27 मई 2020 को बेंगलुरु से मदुरै जा रहे इंडिगो के विमान 6ई 7214 से यात्रा करने वाले एक यात्री को संक्रमण की पुष्टि हुई है जिसमें कोई लक्षण नहीं थे। मदुरै के पृथक-वास केन्द्र में उसकी कोविड-19 की अनिवार्य जांच की गई और रिपोर्ट में उसके संक्रमित होने की पुष्टि हुई।’’ इंडिगो ने बताया कि यात्री ने विमान में सवार अन्य यात्रियों की तरह मास्क, ‘फेस शील्ड’ और दस्ताने पहनने सहित सभी एहतियाती उपाय किए थे। एयरलाइन ने कहा कि हमारे विमानों को मानक संचालन प्रक्रिया के तहत नियमित रूप से संक्रमण मुक्त किया जाता है। उसने कहा, ‘‘चालक दल के सदस्यों को भी 14 दिन तक पृथक-वास में रहने को कहा गया है और सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत हम दूसरे यात्रियों को भी इसकी जानकारी दे रहे हैं ताकि हमारे यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।’’ वहीं स्पाइसजेट ने बुधवार को कहा था कि सोमवार को दिल्ली होकर अहमदाबाद से गुवाहाटी जाने वाली उसकी एक उड़ान में सवार दो यात्रियों के कोविड-19 से संक्रमित होने की पुष्टि हुई। इससे पहले, मंगलवार को इंडिगो ने कहा था कि 25 मई की शाम को उसकी चेन्नई से कोयंबटूर की उड़ान 6ई 381 में सवार एक मुसाफिर कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया था। एअर इंडिया ने बुधवार को बताया कि एलायंस एयर की राष्ट्रीय राजधानी से लुधियाना की उड़ान में सवार एक यात्री कोरोना वायरस से संक्रमित पाया गया है। इसके बाद चालक दल के पांच सदस्यों समेत कुल 41 लोगों को पृथक-वास में भेज दिया गया है।

अभी दुकान खोलने को तैयार नहीं

रेलवे फूड वेंडिंग एसोसिएशन ने कहा है कि वह कोविड-19 संकट के चलते अभी देश में रेलवे प्लेटफॉर्म पर सेवाएं शुरू करने को तैयार नहीं है। इसने अधिकारियों से आग्रह किया कि वे दुकान खोलने का दबाव न बनाएं। विषाणु के प्रसार को रोकने के लिए 25 मार्च को कोविड-19 लॉकडाउन शुरू होने के समय से ही रेलवे प्लेटफॉर्म पर दुकानें बंद हैं। रेलवे बोर्ड ने हालांकि 21 मई को एक पत्र के जरिए सभी क्षेत्रीय रेल इकाइयों को रेलवे स्टेशनों के भीतर स्थित सभी दुकानों को तत्काल प्रभाव से खोलने का निर्देश दिया। अखिल भारतीय रेलवे खान-पान लाइसेंसिज वेल्फेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रवींद्र गुप्ता ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वी के यादव को 28 मई को एक पत्र लिखकर कहा, ‘‘कोई भी अपने व्यवसाय को लंबे समय तक बंद नहीं रखना चाहता और खाली नहीं बैठना चाहता, लेकिन अपनी इकाइयों को अनुकूल स्थितियों में संचालित करना चाहता है।’’ इसने कहा, ‘‘देश के अधिकतर राज्यों में जारी लॉकडाउन/निषिद्ध क्षेत्रों/रेड जोन की वजह से इकाइयों (दुकानों) को फिर से खोलने में बहुत सी बाधाएं और अभूतपूर्व स्थितियां हैं।’’ पत्र में यह भी कहा गया है कि अधिकतर विक्रेता लॉकडाउन की वजह से अपने गृहनगरों को चले गए हैं। इसमें विक्रेताओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि प्लेटफॉर्म पर व्यक्तियों और सामग्री की सुरक्षा के लिए कोई प्रबंध नहीं किया गया है। गुप्ता ने पत्र में कहा गया कि श्रमिक स्पेशल ट्रेन प्रवासी मजदूरों को लगातार ले जा रही हैं जो लूटपाट और तोड़फोड कर रहे हैं तथा उन्होंने कुछ दुकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। एसोसिएशन ने रेलवे से यह आग्रह भी किया कि प्लेटफॉर्म स्थित दुकानों को पुन: खोलने के उचित समय दिया जाना चाहिए। इसने कहा कि दुकानें खोलने के लिए अधिकारियों को भय का माहौल उत्पन्न करने और दबाव बनाने से रोका जाना चाहिए। पत्र में यह भी कहा गया कि क्योंकि अभी बहुत कम ट्रेन चल रही हैं, इसलिए इस समय दुकानें खोलने का कोई औचित्य नहीं है। देश में नौ हजार रेलवे स्टेशनों पर लगभग एक लाख स्थायी दुकान हैं।

14 हजार से अधिक मामले

मुंबई के 24 वार्ड में से छह वार्ड में कोरोना वायरस संक्रमण के 14 हजार से अधिक मामले हैं जबकि शहर में संक्रमितों की कुल संख्या 33 हजार से अधिक है। बृहन्मुंबई नगर निगम ने यह जानकारी दी। बृहन्मुंबई नगर निगम द्वारा वार्ड वार एकत्रित आंकड़ों के अनुसार इन छह वार्डों में से प्रत्येक में 2000 से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले हैं। इसके अनुसार जी—उत्तर वार्ड इस सूची में शीर्ष पर है जहां कुल 2,728 कोरोना संक्रमण के मामले हैं। इस वार्ड में धारावी, दादर एवं माहिम जैसे इलाके हैं। इसके बाद ई, एफ—उत्तर, एल, एच—पूर्व तथा के— पश्चिम का नंबर आता है जहां क्रमश: 2,438, 2,377, 2,321, 2,094 and 2,049 संक्रमण के मामले हैं। ग्राफिक के अनुसार इन छह वार्डों में कोविड—19 मरीजों की संख्या 14,007 हो गयी है। कोरोना वायरस संक्रमण के लिहाज से देश में मुंबई सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र है जहां संक्रमितों की संख्या 33 हजार 835 हो गयी है और बुधवार की रात तक 1044 लोगों की मौत हो चुकी है। बीएमसी की वार्ड स्तर पर जारी इस ग्राफिक के अनुसार विभिन्न अस्पतालों में इलाज के बाद 9,054 लोगों को छुट्टी दी जा चुकी है। इसके अनुसार मुंबई में केवल तीन वार्ड ऐसे हैं जहां कोरोना वायरस संक्रमण के मामले 500 से कम है। आर—उत्तर वार्ड में सबसे कम 309 संक्रमित मामले हैं। इस वार्ड में पश्चिमी उपनगर का क्षेत्र आता है। इसी तरह दक्षिण मुंबई के सी एवं बी वार्ड में क्रमश: 280 एवं 435 संक्रमित मामले हैं। बीएमसी के ग्राफिक में यह भी बताया गया है कि 24 में से नौ ऐसे वार्ड हैं जहां संक्रमितों की संख्या एक हजार से कम है। नौ अन्य वार्ड में संक्रमितों की संख्या एक हजार से दो हजार के बीच है। जी—दक्षिण वार्ड में अप्रैल में सबसे अधिक मामला सामने आया था। इस वार्ड में हाजी अली और वर्ली इलाका शामिल है। हालांकि अब यह सातवें स्थान पर आ गया है और यहां संक्रमण के 1,905 मामले सामने आये हैं। जी—दक्षिण वार्ड के बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व प्रदेश के पर्यटन मंत्री अदित्य ठाकरे करते हैं जो मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेटे हैं। बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि जी—उत्तर के कुल 2728 संक्रमित मामलों में से 1639 मामले अकेले धारावी में है। ग्राफिक के अनुसार अब तक कुल 9054 मरीजों को इलाज के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी है। इसके अनुसार मुंबई में कोविड—19 के मरीजों की संख्या में दैनिक बढोत्तरी का प्रतिशत 5.17 फीसदी है।

मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू

उत्तराखंड के उद्यमशील युवाओं और कोविड-19 के कारण राज्य में लौटे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने हेतु मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत कुशल और अकुशल दस्तकारों, हस्तशिल्पियों और बेरोजगार युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के तहत राष्ट्रीयकृत बैंकों, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों के माध्यम से लाभार्थियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग :एमएसएमई: विभाग द्वारा योजना के अन्तर्गत मार्जिन मनी की धनराशि अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी। विनिर्माण क्षेत्र में परियेाजना की अधिकतम लागत 25 लाख रुपये और सेवा व व्यवसाय क्षेत्र के लिए अधिकतम लागत 10 लाख रूपये होगी। एमएसएमई नीति के अनुसार वर्गीकृत श्रेणी ए में मार्जिन मनी की अधिकतम सीमा कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, श्रेणी बी में 20 प्रतिशत तथा सी व डी श्रेणी में कुल परियोजना लागत का 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी के रूप में देय होगी। उद्यम के दो वर्ष तक सफल संचालन के बाद मार्जिन मनी अनुदान के रूप में समायोजित की जायेगी। योजना के अन्तर्गत सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों द्वारा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत जबकि विशेष श्रेणी के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का पांच प्रतिशत स्वयं के अंशदान के रूप में जमा करना होगा। इस योजना के अन्तर्गत आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए जबकि शैक्षिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं रखी गयी है। आवेदक अथवा उसके परिवार के सदस्य को योजना के तहत केवल एक बार लाभ मिलेगा। लाभार्थियों का चयन अधिक आवेदन प्राप्त होने पर व्यवहारिकता के आधार पर ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए एमएसएमई विभाग के नियंत्रणाधीन उद्योग निदेशालय को नोडल विभाग बनाया गया है जबकि जिला स्तर पर योजना का क्रियान्वयन जिला उद्योग केन्द्र द्वारा किया जायेगा। मुख्यमंत्री रावत ने अधिकारियों को इस योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश देते हुए कहा कि जन प्रतिनिधियों एवं जिलास्तरीय अधिकारियों के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये जिससे अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें।

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जोखिम के बावजूद रूस में सैन्य परेड की तैयारी

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप जारी है। ऐसे में भारत में बृहस्पतिवार को एक बार फिर संक्रमण के मामलों में जबरदस्त उछाल देखा गया जबकि रूस में भी लॉकडाउन में धीरे-धीरे ढील देने के कारण संक्रमण के मामलों में लगातार बढ़ोतरी जारी है। रूस में कोरोना वायरस संक्रमण के बृहस्पतिवार को आठ हजार 371 नए मामले सामने आये जिससे देश में वायरस से संक्रमितों की संख्या बढ़कर तीन लाख 79 हजार पर पहुंच गई। कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में रूस अमेरिका और ब्राजील के बाद दुनिया में तीसरे स्थान पर है। रूस की राजधानी मास्को में मार्च से ही लॉकडाउन में छूट दी गयी है और वहां गैर खाद्य स्टोरों, ड्राइ क्लीनर्स और मरम्मत की दुकानों को खोलने की अनुमति दी गयी थी। देश के कुल संक्रमितों में से आधे मामले राजधानी में हैं। शहर के महापौर ने भी घोषणा की कि लोगों को कुछ प्रतिबंधों के साथ सुबह में पार्क में जाने तथा खेल गतिविधियों में हिस्सा लेने की अनुमति दी गयी है। इस सप्ताह की शुरुआत में रूस के राष्ट्रपति व्लादामीर पुतिन ने घोषणा की थी कि रूस 24 जून को द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी की हार को लेकर मनायी जाने वाली सैन्य परेड का आयोजन करेगा जबकि वायरस के मामलों के मद्देनजर पहले इसे स्थगित करने की योजना थी। रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा कि आयोजन में शिरकत करने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों समेत विश्व के अन्य नेताओं को न्योता दिया जाएगा। वहीं, पूरी दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाले कोरोना वायरस ने अमेरिका में सबसे भयंकर तबाही मचायी है, जहां इस वायरस के संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले लोगों की संख्या एक लाख को पार कर गई है। अमेरिका में एक तिहाई लोगों की मौत दुनिया की वित्तीय राजधानी माने जाने वाले न्यूयॉर्क, उसके नजदीकी इलाके न्यूजर्सी और कनेक्टिकट में हुई हैं। अमेरिका में लास वेगास के जुआघर और वाल्ट डिज्नी वर्ल्ड को भी दोबारा खोले जाने की योजना बनायी जा रही है। इस बीच, भारत में पिछले 24 घंटे में 194 और लोगों की मौत हो जाने से बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक इस घातक बीमारी से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 4,531 हो गई और संक्रमण के 6,566 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 1,58,333 हो गई। यह उछाल ऐसे में देखे जा रहा है, जब आने वाले रविवार को लगभग दो महीने से लागू देशव्यापी लॉकडाउन का चौथा चरण समाप्त होने वाला है। ऐसी संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार नए दिशा-निर्देश के साथ लॉकडाउन को विस्तार दे सकती है। इस महीने की शुरुआत में भारत में दोबारा दुकानों को खोलने के साथ ही व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी तय नियमों के साथ काम शुरू करने की अनुमति दी गयी थी। साथ ही कुछ विशेष ट्रेनों और घरेलू यात्री उड़ानों को भी चरणबद्ध तरीके से शुरू किया गया है। दक्षिण कोरिया में पिछले 50 दिन में बृहस्पतिवार को सबसे ज्यादा कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं। नए मामले चिंता का विषय है क्योंकि इससे देश के कठिन प्रयासों पर पानी फिर सकता है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संक्रमण के उभरते मामलों का पता लगाना मुश्किल है और सामाजिक दूरी समेत अन्य तरह के कदम उठाए जाने की जरूरत है। कोरिया बीमारी नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र ने कहा कि नए 79 मामलों में से 67 सियोल मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र से है। दक्षिण कोरिया की कुल 5.1 करोड़ आबादी में से आधी आबादी यहीं रहती है। वहीं, कुछ अन्य देशों में कुछ सुधार देखने को मिला है। स्पेन और इटली में पिछले दो महीने में कोरोना वायरस संक्रमण के नए मामलों में कमी देखी जा रही है। इसी तरह, चीन में बृहस्पतिवार को केवल दो मामले सामने आए जो विदेश से आए लोग हैं। न्यूजीलैंड में पिछले छह दिन से कोई संक्रमित सामने नहीं आया है और अब वहां कोविड-19 के केवल आठ मरीज का इलाज चल रहा है। जॉन हॉप्किंस विश्वविद्यालय के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे विश्व में अब तक 57 लाख से अधिक लोग इस घातक वायरस की चपेट में आ चुके हैं जबकि 355,000 से अधिक मरीजों की मौत हो चुकी है।

-नीरज कुमार दुबे