अधिकारी को विजिटिंग कार्ड दिखाना डॉक्टर पर पड़ा भारी, लग गया 500 का जुर्माना

By रेनू तिवारी | Publish Date: Jul 25 2019 4:38PM
अधिकारी को विजिटिंग कार्ड दिखाना डॉक्टर पर पड़ा भारी, लग गया 500 का जुर्माना
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डॉ. मनोज गोस्वामी ने आयुक्त से अपनी समस्या बताई कि मेरे घर का रैंप न तोड़ा जाएं वह उसे खुद ही तोड़ लेंगे, नगर आयुक्त उसकी समस्या को ध्यान से सुना और उसका समाधान भी किया।

कई बार कुछ बहुत छोटी-छोटी सी गलतियां होती हैं जिनपर हम ध्यान नहीं देते और ये छोटी सी गलती हमें भारी पड़ जाती है। कुछ ऐसा ही हुआ गाजियाबाद के एक डॉक्टर के साथ। डॉक्टर गाजियाबाद के नगर आयुक्त से मिलने के लिए उनके दफ्तर पहुंचे थे। रिसेप्शन पर उन्होंने अपना विजिटिंग कार्ड दिया और कहा कि अधिकारी जी से मिलना हैं। डॉक्टर का नगर आयुक्त को विजिटिंग कार्ड देना भारी पड़ गया। नगर आयुक्त ने डॉक्टर पर 500 रुपये जुर्माना लगा दिया। अब आप सोच रहे होंगे अधिकारी जी ने ऐसा क्यों किया?

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दरअसल ऐसा हुआ कि गाजियाबाद के पटेल नगर के निवासी डॉ. मनोज गोस्वामी अपने घर के सामने बनें रैंप को तोड़े जाने से नाराज थे। वह घर के आगे से रैंप को न तोड़े जाने की गुहार लेकर गाजियाबाद के नगर आयुक्त दिनेश चंद्र सिंह से मिलने पहुंचे। अपनी पहचान बताने के लिए उन्होंने अपना विजिटिंग कार्ड नगर आयुक्त के पास भेजा। डॉक्टर का विजिटिंग कार्ड देख कर अधिकारी ने डॉक्टर के ऊपर 500 रुपये का जुर्माना लगा दिया है। अधिकारी जी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि डॉक्टर का विजिटिंग कार्ड प्लास्टिक का था और गाजियाबाद में प्लास्टिक का उपयोग प्रतिबंधित है।

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अब खुद नगर आयुक्त ने जुर्माना लगाया तो जुर्माना देना पड़ेगा , डॉक्टर ने जुर्माना राशि दी और नगर आयुक्त ने रसीद काटकर उन्हें थमाई। ये हिसाब-किताब करने के बाद डॉ. मनोज गोस्वामी की आगे की बात सुनी गई। डॉ. मनोज गोस्वामी ने आयुक्त से अपनी समस्या बताई कि मेरे घर का रैंप न तोड़ा जाएं वह उसे खुद ही तोड़ लेंगे, नगर आयुक्त उसकी समस्या को ध्यान से सुना और उसका समाधान भी किया। नगर आयुक्त ने पटेल चौक के सिटी जोन प्रभारी सुधीर कुमार शर्मा  इस समस्या के बारे में बताया और कहा कि रैंप को न तोड़ा जाए। डॉक्टर साहब की गुहार तो सुन ली गई लेकिन 500 की चपत लग गई। 

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में 2016 से माइक्रॉन से कम की पॉलिथीन का प्रयोग नहीं किया जा सकता ये यूपी में प्रतिबंधित है। 2018 में इस कानून में संसोधन किया गया और तब से अब प्रदेश में हर तरह की प्लास्टिक को बैन कर दिया गया हैं। उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक का किसी भी प्रकार का कैरी बैग, पॉलिथीन, थर्माकॉल समेत प्लास्टिक से बर्तनों, खिलोने प्रतिबंध लगा दिया गया। 

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