Unlock 5 के 62वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, उपचाराधीन मरीजों की संख्या कुल संक्रमितों का 4.60 प्रतिशत

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  दिसंबर 1, 2020   21:45
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Unlock 5 के 62वें दिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा, उपचाराधीन मरीजों की संख्या कुल संक्रमितों का 4.60 प्रतिशत

मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि संक्रमण के नए मामलों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 4,35,603 मरीज उपचाराधीन हैं। देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के कुल 31,118 नए मामले आए। केरल, दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगगढ़ जैसे राज्यों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटी है जबकि उत्तराखंड, गुजरात, असम और गोवा में मरीजों की संख्या बढ़ी है।

नयी दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक देश में कोविड-19 के उपचाराधीन मरीजों की संख्या पांच लाख से नीचे बनी हुई है और यह कुल संक्रमितों का महज 4.60 प्रतिशत है। मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि संक्रमण के नए मामलों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और 4,35,603 मरीज उपचाराधीन हैं। देश में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के कुल 31,118 नए मामले आए। केरल, दिल्ली, कर्नाटक, छत्तीसगगढ़ जैसे राज्यों में उपचाराधीन मरीजों की संख्या घटी है जबकि उत्तराखंड, गुजरात, असम और गोवा में मरीजों की संख्या बढ़ी है। पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 31,118 मामले आए जबकि 41,985 मरीज ठीक हो गए। अब तक 88,89,585 मरीजों के स्वस्थ हो जाने से ठीक होने की दर 93.94 प्रतिशत हो गयी है। स्वस्थ होने वाले मरीजों में से 76.82 प्रतिशत रोगी 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के थे। केरल में सबसे ज्यादा 6055 मरीज ठीक हो गए। दिल्ली में 5824 मरीज ठीक हो गए। मंत्रालय ने कहा कि संक्रमण के 77.79 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश से आए। महाराष्ट्र में सबसे अधिक 3837 मामले आए। दिल्ली में 3726 और केरल में 3382 मामले आए। पिछले 24 घंटे में 482 मरीजों की मौत हो गयी। इनमें से 81.12 प्रतिशत मामले 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश के थे। दिल्ली में 108 मरीजों की मौत हो गयी। महाराष्ट्र में 80 और पश्चिम बंगाल में 48 और लोगों ने दम तोड़ दिया। देश में संक्रमण के नए मामलों के साथ संक्रमितों की संख्या 94,62,809 हो गयी। संक्रमण के कारण 482 और मरीजों की मौत होने से मृतकों की संख्या 1,37,621 हो गयी।

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पूरे देश की आबादी को कोविड-19 का टीका लगाने की बात कभी नहीं कही: केंद्र सरकार

केंद्र सरकार ने मंगलवार को कहा कि पूरे देश की आबादी को कोविड-19 का टीका लगाने के बारे में कभी कोई बात नहीं हुई। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने प्रेसवार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा कि कोविड टीका अभियान का उद्देश्य संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ना होगा। उन्होंने कहा, हमारा उद्देश्य संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ना होगा। अगर हम आबादी के कुछ हिस्से का टीकाकरण करने और संक्रमण के प्रसार की श्रृंखला को तोड़ने में सक्षम हैं तो हमें देश की पूरी आबादी के टीकाकरण की आवश्यकता नहीं होगी। भार्गव ने कहा, मास्क की भूमिका भी बेहद अहम है और टीकाकरण के बाद भी यह जारी रहेगी। क्योंकि हम एक समय में आबादी के छोटे हिस्से के साथ यह शुरू कर रहे हैं इसलिए वायरस के संक्रमण प्रसार की श्रृंखला को तोड़ने में मास्क की भूमिका बेहद अहम होगी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने कहा कि पूरे देश की आबादी को कोविड-19 का टीका लगाने के बारे में कभी कोई बातचीत नहीं हुई। उन्होंने कहा, मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि सरकार ने पूरे देश की आबादी के टीकाकरण के बारे में कभी नही कहा।

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अप्रिय चिकित्सा घटना’ के शुरुआती निष्कर्षों के मद्देनजर परीक्षण रोकने की आवश्यकता नहीं थी: सरकार

केंद्र ने मंगलवार को कहा कि चेन्नई में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के कोविड-19 टीके के परीक्षण में हिस्सा लेने वाले एक भागीदार के कथित तौर पर दिक्कतों का सामना करने के संबंध में शुरूआती निष्कर्षों के मद्देनजर परीक्षण रोकने की आवश्यकता नहीं थी। केंद्र ने कहा कि यह दवा नियामक को पता लगाना है कि घटना और प्रयोग में कोई संबंध है या नहीं। सीरम इंस्टीट्यूट के परीक्षण में ‘अप्रिय चिकित्सा घटना’ होने के आरोपों पर सरकार ने कहा कि इसका टीका निर्माण की समय-सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा। चेन्नई में ‘‘कोविशील्ड’’ टीका के परीक्षण के तीसरे चरण में 40 वर्षीय एक व्यक्ति ने गंभीर दुष्प्रभाव की शिकायतें कीं जिसमें तंत्रिका तंत्र में खराबी आना और बोध संबंधी दिक्कतें पैदा होना शामिल है। उसने परीक्षण को रोकने की मांग करने के अलावा सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) एवं अन्य से पांच करोड़ रुपये का मुआवजा भी मांगा है। बहरहाल, एसआईआई ने रविवार को इन आरोपों को ‘‘दुर्भावनापूर्ण और मिथ्या’’ बताकर खारिज कर दिया और कहा कि वह सौ करोड़ रुपये का मुआवजा मांगेगा। आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि दवाओं या टीके या अन्य स्वास्थ्य प्रयोगों में ‘अप्रिय चिकित्सा घटनाएं’ होती हैं।

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कैबिनेट सचिव ने राज्यों के साथ कोविड-19 के टीके को लेकर समीक्षा बैठक की

कैबिनेट सचिव राजीव गौबा ने मंगलवार को राज्यों के शीर्ष अधिकारियों के साथ कोविड-19 के टीकों के उपलब्ध होने के बाद इसे लोगों को दिये जाने के बंदोबस्त की समीक्षा की तथा उनसे स्वास्थ्यकर्मियों आदि का डेटाबेस तैयार करने को कहा जिन्हें प्राथमिकता के साथ टीका लगाया जाएगा। बैठक में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, स्वास्थ्य सचिवों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट सचिव ने कोविड-19 रोधी टीके काउपयोग शुरू करने के इंतजाम की समीक्षा की और राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों से उन प्राथमिकता वाले समूह का डेटाबेस तैयार करने को कहा जिन्हें प्रारंभिक चरण में टीका लगाया जाएगा। तीन दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अहमदाबाद, हैदराबाद और पुणे का दौरा कर इन शहरों में टीका उत्पादन इकाइयों में टीके के विकास और उत्पादन की प्रक्रिया की समीक्षा की थी। केंद्र सरकार कोरोना वायरस का टीका उपलब्ध होने पर इसके त्वरित और प्रभावी वितरण के लिए कदम उठा रही है। 

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गुजरात: भाजपा सांसद अभय भारद्वाज का कोविड-19 संक्रमण से निधन

गुजरात से भाजपा के राज्यसभा सदस्य अभय भारद्वाज का मंगलवार को चेन्नई के एक अस्पताल में कोविड-19 संक्रमण के इलाज के दौरान निधन हो गया।उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने यह जानकारी दी। भारद्वाज (66) जाने-माने वकील थे और इसी साल जून में राज्यसभा के लिए चुने गए थे।अगस्त में पार्टी की बैठकों और राजकोट में हुए रोड शो में भाग लेने के बाद वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। सांसद के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया। उन्होंने ट्वीट किया, गुजरात से राज्यसभा सांसद अभय भारद्वाज जी एक प्रतिष्ठित वकील थे और समाज सेवा में तत्पर रहते थे। बहुत दुख की बात है कि हमने राष्ट्रीय विकास के बारे में चिंतन करने वाले एक विलक्षण और व्यावहारिक व्यक्तित्व को खो दिया। उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना। ओम शांति। गुजरात कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अर्जुन मोडवाडिया ने भी भारद्वाज की मौत पर दुख जताया। 

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कर्नाटक में कोविड-19 के 1,330 नये मामले, 14 मरीजों की मौत

कर्नाटक में मंगलवार को कोरोना वायरस संक्रमण के 1,330 नए मामले सामने आये तथा 14 मरीजों की मौत हो गई। इसके साथ ही राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 8,86,227 तक पहुंच गई, जबकि मृतकों की संख्या 11,792 हो गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, आज 886 मरीजों को ठीक होने के बाद अस्पतालों से छुट्टी दे दी गई। राज्य मेंअब तक 8,50,707 लोग इस संक्रमण से मुक्त हो चुके हैं। विभाग के अनुसार, राज्य में अभी 23,709 मरीजों का इलाज चल रहा है। उनमें से 336 ‘आईसीयू’ में हैं। बेंगलुरु शहर में मंगलवार को संक्रमण के 758 नये मामले सामने आये।

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जम्मू कश्मीर में कोविड-19 के 454 नए मामले, आठ मरीजों की मौत

जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को कोविड-19 के 454 नए मामले सामने आए और पिछले 24 घंटे में आठ लोगों की मौत हो गई। यह जानकारी अधिकारियों ने दी। अधिकारियों ने बताया कि केंद्रशासित प्रदेश में संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,10,678 हो गई है। वहीं, मृतकों की संख्या बढ़कर 1,702 हो गई है। अधिकारी ने बताया कि नए मामलों में से 217 मामले जम्मू संभाग से तथा 237 मामले कश्मीर घाटी से सामने आए हैं। अधिकारियों ने बताया कि श्रीनगर जिले में सबसे ज्यादा 118 नये मामले सामने आए जबकि जम्मू में 95 लोग संक्रमित पाये गए। उन्होंने बताया कि अब केंद्रशासित प्रदेश में 5,000 मरीजों का इलाज चल रहा है और अभी तक 1,04,068 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। इस बीच, जम्मू-कश्मीर में पिछले 24 घंटे में आठ लोगों की मौत हुई। इनमें से पांच मरीजों की मौत जम्मू में और तीन की मौत कश्मीर घाटी में हुई।





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राष्ट्रीय उजालों का स्वागत ही गणतंत्र दिवस का संकल्प

  •  ललित गर्ग
  •  जनवरी 26, 2021   09:25
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राष्ट्रीय उजालों का स्वागत ही गणतंत्र दिवस का संकल्प

हर भारतीय को अपने देश में शांति, सौहार्द और विकास के लिये संकल्पित होना चाहिए। कर्तव्य-पालन के प्रति सतत जागरूकता से ही हम अपने अधिकारों को निरापद रखने वाले गणतंत्र का पर्व सार्थक रूप में मना सकेंगे।

इक्कहतर वर्षों के बाद आज हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली झाड़ियों से बाहर निकलकर अपनी गौरवमय उपस्थिति का अहसास करा रहा है। अनायास ही हमारा ध्यान गणतंत्र की स्थापना से लेकर आज तक ‘क्या पाया, क्या खोया’ के लेखे-जोखे की तरफ चला जाता है। इस दिन हर भारतीय को अपने देश में शांति, सौहार्द और विकास के लिये संकल्पित होना चाहिए। कर्तव्य-पालन के प्रति सतत जागरूकता से ही हम अपने अधिकारों को निरापद रखने वाले गणतंत्र का पर्व सार्थक रूप में मना सकेंगे। और तभी लोकतंत्र और संविधान को बचाए रखने का हमारा संकल्प साकार होगा। क्योंकि गणतंत्र के सूरज को राजनीतिक अपराधों, स्वार्थों, घोटालों और भ्रष्टाचार के बादलों ने घेर रखा है। हमें किरण-किरण जोड़कर नया सूरज बनाना होगा। हमने जिस संपूर्ण संविधान को स्वीकार किया है, उसमें कहा है कि हम एक संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथ-निरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य है। यह सही है और इसके लिए सर्वप्रथम जिस इच्छा-शक्ति की आवश्यकता है, वह हमारी शासन-व्यवस्था में सर्वात्मना नजर आने लगी है। शासन व्यवस्था के साथ-साथ जनजीवन में भी अपने गणतंत्र के लिये गर्व एवं गौरव का भाव पनपना चाहिए।

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एक वो समय था जब 26 जनवरी से 1 सप्ताह पहले ही दिल्ली को आतंकी खतरे की वजह से छावनी में बदल दिया जाता था और अब सुरक्षित वातावरण के चलते गणतंत्र दिवस पर राजधानी की सड़कों पर ट्रैक्टर रैली निकालने की भी अनुमति दी जा रही है। ऐसा सशक्त एवं प्रभावी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कारण ही संभव हुआ। कोरोना महामारी, प्राकृतिक संकट, आर्थिक अस्तव्यस्तता एवं राजनीतिक उथल-पुथल, अन्तर्राष्ट्रीय बदलाव, किसान आन्दोलन एवं कश्मीर की शांति एवं लोकतंत्र की स्थापना जैसे विविध परिदृश्यों के बीच गणतंत्र दिवस का स्वागत हम इस सोच और संकल्प के साथ करें कि अब हमें कुछ नया करना है, नया बनना है, नये पदचिह्न स्थापित करने हैं एवं बीते सत्तर वर्ष के नुकसानों की भरपाई करनी है। बीते वर्षों की कमियों एवं राजनीतिक आपदा स्थितियों पर नजर रखते हुए उनसे लगे घावों को भरने एवं नये उत्साह एवं ऊर्जा से भरकर नये जीवन को गढ़ने का संकल्प लेना है। दूसरे के अस्तित्त्व को स्वीकारना, सबका विकास-सबका साथ, पर्यावरण संरक्षण, रोगप्रतिरोधक क्षमता का विकास एवं दूसरे के विचारों को अधिमान देना- यही शांतिप्रिय, स्वस्थ, सुशासन एवं सभ्य समाज रचना के आधारसूत्र हैं और इन्हीं आधारसूत्रों को गणतंत्र दिवस की आयोजना का संकल्पसूत्र बनाना होगा।

तीन हजार वर्षों में पांच हजार लड़ाइयां लड़ी जा चुकी हैं। एकसूत्र वाक्य है कि ''मैदान से ज्यादा युद्ध तो दिमागों से लड़े जाते हैं।'' आज भी भारत पाकिस्तान एवं चीन की कुचालों एवं षडयंत्रों से जूझ रहा है, हमने कोरोना काल में भी इन देशों को माकुल जबाव दिया, अब और अधिक सशक्त तरीकों से इनको जबाव देना है। हमने वर्ष 2020 के संकट वर्ष में भी आशा एवं विश्वास के नये दीप जलाये हैं, प्रभु श्री राम के मन्दिर का शिलान्यास हुआ, कोरोना को परास्त करने के लिये दीपक जलाये, तालियां बजायी, विदेशों को दवाइयां एवं मेडिकल सहायता भेजी, कोरोना के कारण जीवन निर्वाह के लिये जूझ रहे पीडितों की सहायता के लिये अनूठे उपक्रम किये। यह केवल देश के नागरिकों की जागरूकता एवं वोट सही जगह डालने से ही संभव हुआ है। देश का जागरूक नागरिक आज किसान आन्दोलन के नाम पर हो रही राजनीति को भी समझ रहा है। यह किसानों के हितों का नहीं, राजनीतिक हितों का एवं देश की एकता एवं सुरक्षा को खण्डित करने का एक महाषड़यंत्र है। हो सकता है सड़कों पर तमाशा राजनैतिक मजबूरी हो। किसान भी देश के है और नागरिक भी तो इसी भारत देश के है फिर 26 जनवरी से दुश्मनी क्यों? गणतंत्र दिवस पर निशाना क्यों? देश की आर्थिक स्थिति एवं सीमाओं की सुरक्षा अब सशक्तीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है ऐसे में हम सभी का दायित्व है कि इस लड़ाई में हम साथ खड़े होकर देश को विश्व में एक बहुत सम्मानित पायदान पर लेकर जाएं। लद्दाख में तनाव का माहौल है और हमारी सशस्त्र सेनाएं विषम परिस्थितियों में भी डटकर मुकाबला कर रही है, कश्मीर में भी हमारी सेना चुनौती का सामना कर रही है। कोरोना से भी देश जूझते हुए संकटों से बाहर आया है। देश में जब भी कोई विपत्ति आई है, तब सभी जवान और किसान देश हित में एक साथ खड़े होते रहे हैं। इतिहास गवाह है कि हमारे देश के किसानों ने हर युद्ध में सशस्त्र सेनाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनका साथ दिया है और विजय दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाई है, फिर आज क्यों किसी बहकावे में आकर वे देश हित को दांव पर लगा रहे हैं?

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यह कैसी राजनीति है, यह कैसा विपक्ष की जिम्मेदारियों का प्रदर्शन है, जिसमें अपनी राजनीतिक स्वार्थ की रोटियां सेंकने के नाम पर जनता के हितों की उपेक्षा की जा रही है। केन्द्र सरकार या भाजपा में कहीं शुभ उद्देश्यों एवं जन हितों की कोई आहट भी होती है तो विपक्षी दलों एवं कांग्रेस में भूकम्प-सा आ जाता है। मजे की बात तो यह है कि इन राजनेताओं एवं राजनीतिक दलों को केन्द्र सरकार एवं भाजपा की एक भी विशेषता या अच्छाई दिखाई नहीं देती। कुछ विपक्षी नेताओं की बातें यह साबित करती हैं कि हमारे देश के विपक्ष का मानसिक स्तर कितना गिर गया है। किसानों को गुमराह करने के साथ ही स्वदेशी कोरोना वैक्सीन पर चल रही स्तरहीन राजनीति हमारे वैज्ञानिकों का अपमान है, उनके आत्मविश्वास को कमजोर करने का षडयंत्र है, उजालों पर कालिख पोतने का प्रयास है। इन षडयंत्रों एवं राजनीतिक कुचालों को नाकाम करना हमारे गणतंत्र दिवस का बड़ा संकल्प होना चाहिए।

आज हमारी समस्या यह है कि हमारी ज्यादातर प्रतिबद्धताएं व्यापक न होकर संकीर्ण होती जा रही हैं जो कि राष्ट्रहित के खिलाफ हैं। राजनैतिक मतभेद भी नीतिगत न रह कर व्यक्तिगत होते जा रहे हैं। लोकतंत्र में जनता की आवाज की ठेकेदारी राजनैतिक दलों ने ले रखी है, पर ईमानदारी से यह दायित्व कोई भी दल सही रूप में नहीं निभा रहा है। ''सारे ही दल एक जैसे हैं'' यह सुगबुगाहट जनता के बीच बिना कान लगाए भी स्पष्ट सुनाई देती है। क्रांति तो उम्मीद की मौजूदगी में ही संभव होती है। हमारे संकल्प अभी अधूरे हैं पर उम्मीदें पुरजोश। हम एक असरदार सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक क्रांति की आस लगाए बैठे हैं। इसे शांतिपूर्ण तरीके से हो ही जाना चाहिए बिना किसी बाधा के। गणतंत्र दिवस का अवसर इस तरह की सार्थक शुरूआत के लिये शुभ और श्रेयस्कर है।

गणतंत्र बनने से लेकर आज तक हमने अनेक कीर्तिमान स्थापित किये हैं। इन पर समूचे देशवासियों को गर्व है। लेकिन साक्षरता से लेकर महिला सुरक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर अभी भी बहुत काम करना बाकी है। आज देश में राष्ट्रीय एकता, सर्वधर्मसमभाव, संगठन और आपसी निष्पक्ष सहभागिता की जरूरत है। क्योंकि देश के करोड़ों गरीब उस आखिरी दिन की प्रतीक्षा में हैं जब सचमुच वे संविधान के अन्तर्गत समानता एवं सन्तुलन के अहसास को जी सकेंगे। इन विसंगतियों एवं विषमताओं को दूर करने के साथ-साथ हमें शिशु मृत्यु दर को नियंत्रित करना होगा, सड़क हादसों पर काबू पाना होगा, प्रदूषण के खतरनाक होते स्तर को रोकना होगा, संसद की निष्क्रियता एवं न्यायपालिका की सुस्ती भी अहम मुद्दे हैं। बेरोजगारी का बढ़ना एवं महिलाओं का शोषण भी हमारी प्रगति पर ग्रहण की तरह हैं।

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देश का प्रत्येक नागरिक अपने दायित्व और कर्तव्य की सीमाएं समझें। विकास की ऊंचाइयों के साथ विवेक की गहराइयां भी सुरक्षित रहें। हमारा अतीत गौरवशाली था तो भविष्य भी रचनात्मक समृद्धि का सूचक बने। बस, वर्तमान को सही शैली में, सही सोच के साथ सब मिलजुल कर जी लें तो विभक्तियां विराम पा जाएंगी। पर एक बात सदैव सत्य बनी हुई है कि कोई पाप, कोई जुर्म व कोई गलती छुपती नहीं। वह रूस जैसे लोहे के पर्दे को काटकर भी बाहर निकल आती है। वह चीन की दीवार को भी फाँद लेती है। हमारे साउथ ब्लाकों एवं नाॅर्थ ब्लाकों में तो बहुत दरवाजे और खिड़कियाँ हैं। कुछ चीजों का नष्ट होना जरूरी था, अनेक चीजों को नष्ट होने से बचाने के लिए। जो नष्ट हो चुका वह कुछ कम नहीं, मगर जो नष्ट होने से बच गया वह उस बहुत से बहुत है। संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य होने के महत्व को सम्मान देने के लिये मनाया जाने वाला यह राष्ट्रीय पर्व मात्र औपचारिकता बन कर न रह जाये, इस हेतु चिन्तन अपेक्षित है।

- ललित गर्ग







Unlock-5 का 117वां दिन: 19.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को लगाये जा चुके हैं टीके

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 25, 2021   21:33
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Unlock-5 का 117वां दिन: 19.5 लाख से अधिक लाभार्थियों को लगाये जा चुके हैं टीके

मंत्रालय ने कहा कि इनमें दिन के दौरान 7,171 सत्रों में टीके लेने वाले 3,34,679लाभार्थी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट देर रात संकलित की जाएगी। टीकाकरण अभियान के 10वें दिन शाम 7.10 बजे तक टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव के कुल 348 मामले सामने आये हैं।

नयी दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि देश में कोविड-19 के खिलाफ टीका लगवाने वाले लाभार्थियों की संख्या सोमवार शाम तक बढ़कर 19.5 लाख से अधिक हो गई है। मंत्रालय ने कहा कि सोमवार शाम 7.10 बजे तक कुल 35,853 सत्रों में कुल 19,50,183 लाभार्थियों को टीके लगाये गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि इनमें दिन के दौरान 7,171 सत्रों में टीके लेने वाले 3,34,679लाभार्थी शामिल हैं। मंत्रालय ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट देर रात संकलित की जाएगी। टीकाकरण अभियान के 10वें दिन शाम 7.10 बजे तक टीकाकरण के बाद प्रतिकूल प्रभाव के कुल 348 मामले सामने आये हैं। मंत्रालय ने कहा, ‘‘देशव्यापी कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम सफलतापूर्वक 10वें दिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया गया।’’ अस्थायी रिपोर्ट के अनुसार टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद सोमवार शाम 7.10 बजे तक टीका लगवाने वाले लाभार्थियों की कुल संख्या में कर्नाटक में 2,30,119, आंध्र प्रदेश में 1,55,453, पश्चिम बंगाल में 1,21,615, गुजरात में 91,110, बिहार में 88,200, केरल में 71,976, तमिलनाडु में 68,916, मध्य प्रदेश में 56,586 और दिल्ली में 33,219 लाभार्थी शामिल हैं।

राजस्थान में कोरोना संक्रमण से और दो लोगों की मौत, 193 नये संक्रमित

राजस्थान में कोरोना वायरस संक्रमण के 193 नये मामले सोमवार को आये इससे अब तक राज्य में संक्रमितों की कुल संख्या 3,16,845 हो गई है। वहीं राज्य में संक्रमण से दो और लोगों की मौत हो गई जिससे राज्य में संक्रमण से कुल मरने वालों की संख्‍या 2,760 हो गयी है। अधिकारियों ने बताया कि सोमवार शाम छह बजे तक के बीते 24 घंटों में राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण से और दो लोगों की मौत हुई है। जिससे मरने वालों संख्या अब बढ़कर 2760 हो गयी। राज्य में अब तक जयपुर में 514,जोधपुर में 301, अजमेर में 221, कोटा में 169,बीकानेर में 167, भरतपुर में 120, उदयपुर में 115, पाली में 109 औरसीकर में 100संक्रमितों की मौत हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान राज्य में 370 लोग कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हुए इससे राज्य में अब तक कुल 3,11,117 लोग ठीक हो चुके हैं। इसके साथ हीसंक्रमण के 193 नये मामले सामने आने से राज्य में इस घातक वायरस से संक्रमितों की अब तक की कुल संख्या 3,16,845 हो गयी जिनमें से 2,968 रोगी उपचाराधीन हैं। नये मामलों में जयपुर में 30, कोटा में 24, नागौर में 22, अलवर में 21, जोधपुर में 11 व भीलवाड़ा में 10 नये संक्रमित शामिल हैं।

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गुजरात में कोरोना वायरस के 390 नए मामले, तीन की मौत

गुजरात में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 390 नए मामलों की पुष्टि हुई तथा तीन संक्रमितों की मौत हुई। स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि राज्य में कुल मामले 2,59,487 हो गए हैं तथा मृतक संख्या 4379 पहुंच गई है। विभाग ने एक विज्ञप्ति में बताया कि कुल 707 लोगों को दिन में अस्पतालों से छुट्टी दी गई है जिसके बाद राज्य में संक्रमण मुक्त हुए मरीजों की संख्या 2,50,763 हो गई है।

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महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के 1842 नए मामले, 30 की मौत

महाराष्ट्र में सोमवार को कोरोना वायरस के 1842 नए मरीजों की पुष्टि हुई तथा 30 संक्रमितों की मौत रिपोर्ट हुई। एक हफ्ते में यह दूसरी बार है जब मामले दो हजार से कम आए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक बयान में बताया कि राज्य में कुल मामले 20,10,948 हो गए हैं तथा मृतक संख्या 50,815 पहुंच गई है। राज्य में 18 जनवरी को 1924 नए मामले आए थे। विभाग ने बताया कि 30 मौतों में से 12 बीते 48 घंटे में हुई हैं जबकि एक पिछले हफ्ते हुई थी। शेष 17 मौतें पिछले हफ्ते से पहले अवधि हुई थी लेकिन आंकड़ों में अब जोड़ा गया है। बयान में बताया गया है कि राज्य में एक दिन में 3080 मरीजों को अस्पतालों से छुट्टी दी गई है। इसके बाद राज्य में कुल 19,15,344 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं। बयान के मुताबिक, राज्य में 43,561 लोग संक्रमण का उपचार करा रहे हैं। विभाग ने बताया कि राज्य में सबसे ज्यादा 348 मामले मुंबई में सामने आए हैं और सात संक्रमितों की मौत हुई है। राजधानी में कुल मामले 3,06,398 हो गए हैं तथा मृतक संख्या 11,311 हो गई है। मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर) में 668 मामले रिपोर्ट हुए हैं। क्षेत्र में कुल 6,89,460 मामले आए हैं। नागपुर शहर में 181 और पुणे महानगरपालिका क्षेत्र में 102 नए मामलों की पुष्टि हुई है। महाराष्ट्र में मृत्यु दर 2.53 फीसदी है।

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दिल्ली में कोरोना वायरस के 148 नए मामले

राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को कोरोना वायरस के 148 नए मामलों की पुष्टि हुई जो नौ महीनों में सबसे कम हैं। वहीं नमूनों के संक्रमित पाए जाने की दर 0.31 प्रतिशत है। जनवरी में यह चौथी बार है कि दैनिक आधार पर रिपोर्ट होने वाले मामलों की संख्या 200 से कम है। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में कुल मामले 6,34,072 हो गए हैं तथा पांच और संक्रमितों की मौत के बाद मृतक संख्या 10,813 पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग के बुलेटिन में बताया गया है कि सोमवार को संक्रमण का उपचार करा रहे मरीजों की संख्या 1694 रही।

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हरियाणा में कोरोना वायरस के 118 नए मामले, चार की मौत

हरियाणा में सोमवार को कोरोना वायरस के 118 नए मरीजों की पुष्टि हुई तथा चार संक्रमितों कीमौत हो गई। राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने एक बुलेटिन में बताया कि हरियाणा में कुल मामले 2,67,231 हो गए हैं तथा मृतक संख्या 3014 पहुंच गई है। बुलिटेन के मुताबिक, फरीदाबाद, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर और पलवल जिले में एक-एक मरीज की मौत हुई है। नए मरीजों में गुरुग्राम के 28 और फरीदाबाद के 19 मामले शामिल हैं। बुलेटिन में बताया गया है कि संक्रमण का इलाज करा रहे मरीजों की संख्या 1378 है जबकि 2,62,929 लोग संक्रमण मुक्त हो चुके हैं।

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बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण से और चार लोगों की मौत, संक्रमित मामले बढकर 2,59,979 हुए

बिहार में कोरोना वायरस संक्रमण के कारण पिछले 24 घंटे के दौरान चार और व्यक्ति की मौत हो जाने से इससे मरने वालों की संख्या सोमवार को 1,483 पहुंच जाने के साथ इस रोग से अबतक संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढकर 2,59,979 हो गयी। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक बिहार में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण से भागलपुर, जहानाबाद, मुंगेर तथा सारण जिले में एक—एक मरीज की मौत हो जाने के साथ प्रदेश में इस रोग से संक्रमित होकर मरने वालों की संख्या सोमवार को बढ़कर 1,483 हो गयी। बिहार में रविवार अपराह्न चार बजे से सोमवार चार बजे तक कोरोना वायरस संक्रमण के 82 नए मामले प्रकाश में आने के साथ इससे संक्रमित होने वालों की संख्या अबतक 2,59,897 पहुंच गयी है। पिछले 24 घंटे के भीतर 69,269 सैम्पल की जांच की गयी और कोरोना वायरस संक्रमित 222 मरीज ठीक हुए। बिहार में अबतक 2,05,60,357 नमूनों की जांच की गयी है जिनमें संक्रमित पाए गए 2,56,008 मरीज ठीक हुए हैं। बिहार में वर्तमान में कोविड-19 का 2265 लोगों का इलाज चल रहा है और कोरोना मरीजों का रिकवरी प्रतिशत 98.56 है।





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गणतंत्र बने इतने वर्ष हो गये पर अब भी जारी है जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव

  •  ब्रह्मानंद राजपूत
  •  जनवरी 25, 2021   14:45
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गणतंत्र बने इतने वर्ष हो गये पर अब भी जारी है जाति, धर्म के आधार पर भेदभाव

गणतंत्र दिवस हमारे संविधान में संस्थापित स्वतंत्रता, समानता, एकता, भाईचारा और सभी भारत के नागरिकों के लिए न्याय के सिद्धांतों को स्मरण और उनको मजबूत करने का एक उचित अवसर है। क्योंकि हमारा संविधान ही हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है।

गणतंत्र दिवस हर वर्ष जनवरी महीने की 26 तारीख को पूरे देश में देश प्रेम की भावना से ओत-प्रोत होकर मनाया जाता है। भारत के लोग हर साल 26 जनवरी का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि 26 जनवरी को ही 1950 में भारतीय संविधान को एक लोकतांत्रिक प्रणाली के साथ भारत देश में लागू किया गया था। कहा जाए तो 26 जनवरी को ही हमारे गणतंत्र का जन्म हुआ। और भारत देश एक गणतांत्रिक देश बना। हमारे देश को आजादी तो 15 अगस्त 1947 को ही मिल गयी थी, लेकिन 26 जनवरी 1950 को भारत एक स्वतंत्र गणराज्य बना और भारत देश में नए संविधान के जरिए कानून का राज स्थापित हुआ। यह दिन उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को भी याद करने का दिन है, जिन्होंने अंग्रेजों से भारत को आजादी दिलाने के लिए वीरतापूर्ण संघर्ष किया। आज के दिन ही भारत ने विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की स्थापना के लिए उपनिवेशवाद पर विजय प्राप्त की।

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गणतंत्र दिवस हमारे संविधान में संस्थापित स्वतंत्रता, समानता, एकता, भाईचारा और सभी भारत के नागरिकों के लिए न्याय के सिद्धांतों को स्मरण और उनको मजबूत करने का एक उचित अवसर है। क्योंकि हमारा संविधान ही हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है। अगर देश के नागरिक संविधान में प्रतिष्ठापित बातों को अनुसरण करेंगे तो इससे देश में अधिक लोकतान्त्रिक मूल्यों का उदय होगा। भारत का संविधान सबको सामान अधिकार देता है, भारतीय संविधान किसी से भी जाति, धर्म, ऊंच-नीच और अमीरी-गरीबी के आधार पर कभी भी भेदभाव नहीं करता है।

आज बेशक भारत विश्व की उभरती हुई शक्ति है। लेकिन आज भी देश काफी पिछड़ा हुआ है। देश में आज भी कन्या जन्म को दुर्भाग्य माना जाता है, और आज भी भारत के रूढ़िवादी समाज में हजारों कन्याओं की भ्रूण में हत्या की जाती है। सड़कों पर महिलाओं पर अत्याचार होते हैं। सरेआम महिलाओं से छेड़छाड़ और बलात्कार के किस्से भारत देश में आम बात हैं। कई युवा (जिनमें भारी तादात में लड़कियां भी शामिल हैं) एक तरफ जहां हमारे देश का नाम ऊंचा कर रहे हैं। वहीं कई ऐसे युवा भी हैं जो देश को शर्मसार कर रहे हैं। दिनदहाड़े युवतियों का अपहरण, छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न कर देश का सिर नीचा कर रहे हैं। हमें पैदा होते ही महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाता है पर आज भी विकृत मानसिकता के कई युवा घर से बाहर निकलते ही महिलाओं की इज्जत को तार-तार करने से नहीं चूकते। इस सबके लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार शिक्षा का अभाव है। शिक्षा का अधिकार हमें भारतीय संविधान में मौलिक अधिकारों के रूप में अनुच्छेद 29-30 के अन्तर्गत दिया गया है। लेकिन आज भी देश के कई हिस्सों में में नारी शिक्षा को सही नहीं माना जाता है। नारी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार के साथ भारतीय समाज को भी आगे आना होगा। तभी देश में अशिक्षा जैसे अँधेरे में शिक्षा रुपी दीपक को जलाकर उजाला किया जा सकता है।

देश में आज अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश विरोधी ताकतें बढ़ रही हैं, यही देश विरोधी ताकतें संविधान की गलत तरीके से व्याख्या करती हैं। यही देश विरोधी ताकतें देश में अराजकता फैलाने में अहम् भूमिका निभाती है। आज देश में देश विरोधी ताकतें संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों का गलत तरीके  से उपयोग कर रही हैं। अभिव्यक्ति की आजादी का दुरूपयोग करना भारतीय संविधान का अपमान है। देश में आज कुछ ताकतें तुष्टिकरण का काम कर रही हैं और देश को धर्म के आधार पर बांटने का प्रयास कर रही हैं।  देश में आज इन्ही देश विरोधी ताकतों की शह पर कोई पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाता है तो कोई भारत मुर्दाबाद के नारे लगाता है और कुछ राजनैतिक दल ऐसे लोगों की तरफदारी करके उनका साथ देकर उनको संरक्षण देते हैं। ऐसे देश विरोधी लोग इन्हीं राजनैतिक दलों कि शह पर देश का माहौल खराब करने की कोशिशें करते हैं। आज देश में कुछ राजनैतिक दल वोट बैंक की राजनीति की खातिर ऐसे लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। यह देश के लिए बहुत ही खतरनाक स्थिति है। बेशक हमारा संविधान हमें अभिव्यक्ति की आजादी देता है लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का अर्थ ये नहीं है कि देश की बर्बादी के नारे लगाए जाएँ और देश के टुकड़े-टुकड़े करने की कसमें खायी जायें। देश की बर्बादी के नारे लगाने वाली ताकतें आज आरोप लगाती हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को हिन्दू राष्ट्र बनाने की तरफ अग्रसर हैं। ऐसे लोग भूल जाते हैं कि हिन्दुस्तान पहले से ही हिन्दू राष्ट्र है, यह हिन्दुस्तान के बहुसंख्यक हिन्दुओं की ही सहिष्णुता है जो खुद हिन्दुस्तान को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र मानते हैं और देश में किसी भी प्रकार का धर्म और सम्प्रदाय के आधार पर भेदभाव नहीं करते हैं। 1947 में देश का विभाजन धार्मिक आधार पर हुआ था जिसमंे पाकिस्तान बना और उसने मुस्लिम देश बनना पसंद किया और बहुसंख्यक हिन्दू वाले राष्ट्र हिन्दुस्तान ने धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनना पसंद किया। हिन्दुस्तान चाहता तो 1947 में खुद को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर सकता था लेकिन यह हिन्दुओं की ही सहिष्णुता थी जो देश में सभी वर्गों और धर्मों के सम्मान के लिए देश को धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र बनाया। 1947 में आजादी के समय नेहरु-लियाकत समझौता हुआ था। इस समझौते के अनुसार पाकिस्तान से आए मुस्लिमों और पहले से ही भारत में रह रहे मुस्लिमों की रक्षा भारत को करनी थी और पाकिस्तान में रह गए हिंदू, ईसाई, सिख और बौद्धों (समस्त अल्पसंख्यक वर्ग) की रक्षा पाकिस्तान को करनी थी। लेकिन  पाकिस्तान ने इसके विपरीत जाकर पाकिस्तान को मुस्लिम राष्ट्र घोषित किया। हिन्दुस्तान ने देश में संविधान को लागू करकर और अपने आप को धर्मनिरपेक्ष मानकर अपने लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करीं। इसके बाद 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश नया देश बना। लेकिन बांग्लादेश ने भी अपने आप को मुस्लिम राष्ट्र घोषित कर लिया। आजादी के बाद से ही पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को धार्मिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी है आज इसी का परिणाम है कि पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की आबादी में कई गुना गिराबट आई है। आजादी के बाद से ही अल्पसंख्यकों को उत्पीड़न की वजह से पाकिस्तान को छोड़कर भारत में पलायन करना पड़ा और यही स्थिति बांग्लादेश बनने के बाद बांग्लादेश के अल्पसंख्यकों की रही। पाकिस्तान और बांग्लादेश में रह रहे अल्पसंख्यकों में सबसे अधिक संख्या हिन्दुओं की रही है। आज ऐसे ही अल्पसंख्यक जो कि समय-समय पर पाकिस्तान और बांग्लादेश में हर तरीके की प्रताड़ना झेलकर हिन्दुस्तान में पलायन कर के आये उनको भारत सरकार नागरिकता देने का काम कर रही है। ऐसे धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए भारत की सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम,  भारत की संसद में पारित किया है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019  द्वारा सन 1955 का नागरिकता कानून को संशोधित करके यह व्यवस्था की गयी है कि 31 दिसम्बर सन 2014 के पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण जिन हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी एवं ईसाईओं  को भारत पलायन करना पड़ा, ऐसे  हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी एवं ईसाई धर्म के लोगों भारत की नागरिकता प्रदान की जा सकेगी। नागरिकता कानून में संशोधन करके नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 बनाना सरकार की एक बहुत अच्छी पहल है, इसका सभी देशवासिओं को स्वागत करना चाहिए। और जो लोग भारत विरोधी ताकतों के बहकावे में आकर नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 का विरोध कर रहे हैं, ऐसे लोगों को समझ लेना चाहिए कि यह कानून नागरिकता छीनने वाला नहीं बल्कि नागरिकता देने वाला है। लेकिन भारत के मुस्लिम समुदाय में देश विरोधी ताकतों द्वारा यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस कानून से उनकी नागरिकता चली जायेगी और मुसलमानों के अधिकार छिन जाएंगे, ये सब सच नहीं है। नागरिकता (संशोधन) अधिनियम आने के बाद देश विरोधी ताकतों और कुछ राजनैतिक दलों ने वोट बैंक की खातिर लोगों में काफी भ्रम फैलाया है, जिससे देश में काफी जगह अराजकता देखने को मिली और काफी जगह दंगे जैसी स्थिति देखने मिली। लोगों को बिना सोचे समझे ऐसे किसी भी काम में शामिल नहीं होना चाहिए जिससे कि देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचे।  इसी प्रकार देश में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) पर भ्रम फैलाकर अराजकता पैदा की जा रही है। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर  (एनआरसी) नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर है, जो भारत से अवैध घुसपैठियों को निकालने के उद्देश्य से एक प्रक्रिया है। देश में केवल असम राज्य में ही राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू है। आज जरुरत है कि लोगों को किसी के बहकावे में न आकर संवैधानिक व्यवस्थाओं का विध्वंस नही करना चाहिये।

आज भारत देश बेशक एक गणतांत्रिक देश हो, जिसमे संविधान का पालन किया जाता हो, लेकिन आज भी देश में महिलाओं पर धार्मिक आधार पर तीन तलाक और बहुविवाह के जरिए अन्याय किया जाता है। जो कि मुस्लिम महिलाओं के लिए न्यायोचित नहीं है। इसके खिलाफ मुस्लिम समाज की महिलाये काफी तादात में आगे आ रही हैं। यह काबिलेतारीफ है। भारतीय आबादी का बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय है, इसलिए नागरिकों का बड़ा हिस्सा और खासकर महिलाओं को निजी कानून की आड़ में पुराने रूढ़िवादी कानूनों और सामाजिक प्रथाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। इक्कीसवीं सदी में समय के साथ मुस्लिम लोगों को भी आधुनिकता का बुरका पहनना होगा। अगर मुस्लिम लोग वही पुराने रीति-रिवाजों और कानूनों का बुरका ओढ़े रहे तो मुस्लिम समुदाय और पिछड़ जाएगा। अगर मुस्लिमों को आगे बढ़ना है तो पुरुषों और महिलाओं के समान अधिकारों की बात करनी होगी। और अपने समुदाय में समानता लानी होगी। भारत देश में लोग किसी धर्म के आधार पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव नहीं चाहते। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में 3 तलाक को अमान्य और असंवैधानिक घोषित किया था और केंद्र सरकार से 6 महीने के अन्दर तीन तलाक के दुरूपयोग को लेकर कानून बनाने के लिए कहा था। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैंसले को ध्यान में रखते हुए केंद्र की मोदी सरकार संसद में तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित ‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक को संसद के दोनों सदनों में बड़ी मशक्कत के बाद पास कर चुकी है और आज मुस्लिम महिलाओं को मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम के रूप में सुरक्षा कवच मिल चुका है। मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम आने के बाद कोई भी मुस्लिम मर्द गैरकानूनी तरीके से तीन तलाक देने से पहले 10 बार सोचेगा।

भारत देश  बेशक एक स्वतंत्र गणराज्य सालों पहले बन गया हो। लेकिन इतने सालों बाद आज भी देश में धर्म, जाति और अमीरी गरीबी के आधार पर भेदभाव आम बात है। लोग आज भी जाति के आधार पर ऊंच-नीच की भावना रखते हैं। आज भी लोगों में सामंतवादी विचारधारा घर करी हुयी है और कुछ अमीर लोग आज भी समझते हैं कि अच्छे कपडे पहनना, अच्छे घर में रहना, अच्छी शिक्षा प्राप्त करना और आर्थिक विकास पर सिर्फ उनका ही जन्मसिध्द अधिकार है। इसके लिए जरूरत है कि देश में संविधान द्वारा प्रदत्त शिक्षा के अधिकार के जरिए लोगों में जागरूकता लायी जाये। जिससे कि देश में  धर्म, जाति, अमीरी-गरीबी और लिंग के आधार पर भेदभाव न हो सके। 

भारत में संविधान लागू हुए बेशक 72 साल के करीब होने आये, लेकिन अब भी भारत देश में बाल अधिकारों का हनन हो रहा है।  छोटे-छोटे बच्चे स्कूल जाने की उम्र में काम करते दिख जाते हैं। आज बाल मजदूरी समाज पर कलंक है। इसके खात्मे के लिए सरकारों और समाज को मिलकर काम करना होगा। साथ ही साथ बाल मजदूरी पर पूर्णतया रोक लगनी चाहिए। बच्चों के उत्थान और उनके अधिकारों के लिए अनेक योजनाओं का प्रारंभ किया जाना चाहिए। जिससे बच्चों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव दिखे। और शिक्षा का अधिकार भी सभी बच्चों के लिए अनिवार्य कर दिया जाना चाहिए। गरीबी दूर करने वाले सभी व्यवहारिक उपाय उपयोग में लाए जाने चाहिए। बालश्रम की समस्या का समाधान तभी होगा जब हर बच्चे के पास उसका अधिकार पहुँच जाएगा। इसके लिए जो बच्चे अपने अधिकारों से वंचित हैं, उनके अधिकार उनको दिलाने के लिये समाज और देश को सामूहिक प्रयास करने होंगे। आज देष के प्रत्येक नागरिक को बाल मजदूरी का उन्मूलन करने की जरुरत है। और देश  के किसी भी हिस्से में कोई भी बच्चा बाल श्रमिक दिखे, तो देश के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह बाल मजदूरी का विरोध करे। और इस दिशा में उचित कार्यवाही करें साथ ही साथ उनके अधिकार दिलाने के प्रयास करें।

भारत देश में कानून बनाने का अधिकार केवल भारतीय लोकतंत्र के मंदिर भारतीय संसद को दिया गया है। जब भी भारत में कोई नया कानून बनता है तो वो संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पास होकर राष्ट्रपति के पास जाता है। जब राष्ट्रपति उस कानून पर बिना आपत्ति किये हुए हस्ताक्षर करता है तो वो देश का कानून बन जाता है। लेकिन आज देश के लिए कानून बनाने वाली भारतीय लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था भारतीय संसद की हालत दयनीय है। जो लोग संसद के दोनों सदनों में प्रतिनिधि बनकर जाते हैं, वो लोग ही आज संसद को बंधक बनाये हुए हैं। जब भी संसद सत्र चालू होता है तो संसद सदस्यों द्वारा चर्चा करने की बजाय हंगामा किया जाता है। और देश की जनता के पैसों पर हर तरह की सुविधा पाने वाले संसद सदस्य देश के भले के लिए काम करने की जगह संसद को कुश्ती का मैदान बना देते हैं। जिसमें पहलवानी के दांवपेचों की जगह आरोप प्रत्यारोप और अभद्र भाषा के दांवपेंच खेले जाते हैं। जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। आज जरुरत है कि देश के लिए कानून बनाने वाले संसद सदस्यों के लिए एक कठोर कानून बनना चाहिए।  जिसमे कड़े प्रावधान होने चाहिए। जिससे कि संसद सदस्य संसद में हंगामा खड़ा करने की जगह देश की भलाई के लिए अपना योगदान दें।  

भारत देश में कानून का राज स्थापित हुये बेशक कई दशक हो गए हों लेकिन आज भी देश के बहुत लोग अपने आप को कानून से बढ़कर समझते हैं। और तमाम तरह के अपराध करते हैं। आज जरूरत है भारत के प्रत्येक नागरिक को भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त कानूनों का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए। और उनका पालन करने के लिए जागरूक करना चाहिए, जिससे की समाज और देश में फैले अपराधों पर रोक लग सके। इसके साथ-साथ भारतीय संविधान द्वारा भारतीय नागरिकों को दिए गए मौलिक अधिकारों को जन-जन तक सरकार को पहुँचाना चाहिए। इन मौलिक अधिकारों को देश के आखिरी आदमी तक पहुँचाने के लिए सरकार के साथ-साथ भारतीय समाज की भी अहम भूमिका होनी चाहिए। तभी भारत देश रूढ़िवादी सोच से मुक्ति पा सकता है। 

गणतंत्र दिवस प्रसन्नता का दिवस है इस दिन सभी भारतीय नागरिकों को मिलकर अपने लोकतंत्र की उपलब्धियों का उत्सव मनाना चाहिए और एक शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण एवं प्रगतिशील भारत के निर्माण में स्वयं को समर्पित करने का संकल्प लेना चाहिए। क्योंकि भारत देश सदियों से अपने त्याग, बलिदान, भक्ति, शिष्टता, शालीनता, उदारता, ईमानदारी, और श्रमशीलता के लिए जाना जाता है। तभी सारी दुनिया ये जानती और मानती है कि भारत भूमि जैसी और कोई भूमि नहीं, आज भारत एक विविध, बहुभाषी, और बहु-जातीय समाज है। जिसका विश्व में एक अहम स्थान है। आज का दिन अपने वीर जवानों को भी नमन करने का दिन है जो कि हर तरह के हालातों में सीमा पर रहकर सभी भारतीय नागरिकों को सुरक्षित महसूस कराते हैं। साथ-साथ उन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को याद करने का भी दिन हैं, जिन्होंने हमारे देश को आजाद कराने में अहम भूमिका निभाई। आज 72वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत के प्रत्येक नागरिक को भारतीय संविधान और गणतंत्र के प्रति अपनी वचनबद्धता दोहरानी चाहिए और देश के समक्ष आने वाली चुनौतियों का मिलकर सामूहिक रूप से सामना करने का प्रण लेना चाहिए। साथ-साथ देश में शिक्षा, समानता, सदभाव, पारदर्शिता को बढ़ावा देने का संकल्प लेना चाहिए। जिससे कि देश प्रगति के पथ पर और तेजी से आगे बढ़ सके।

- ब्रह्मानंद राजपूत







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