शरणार्थियों के प्रति जनता व प्रशासन को जागरूक करता है विश्व शरणार्थी दिवस

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शरणार्थियों के जीवन-यापन, उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य तथा अन्य जरूरतों के लिए कई देशों में कई संस्थाएं काम कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएचसीआर (यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूज़ी) एक ऐसी ही संस्था है जो शरणार्थियों की मदद के लिए, उन्हें कानूनी हक दिलाने और उन्हें पुनः अपना जीवन बसर करने के प्रति उपयुक्त हल तलाशने में उनकी सहायता करती है।

शरणार्थी वह लोग होते हैं जो हिंसा, संघर्ष, युद्ध, उत्पीड़न या प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ या भूकंप जैसी मुसीबतों के चलते असहाय, लाचार और निराश्रय होकर अपने देश और घरों को छोड़कर किन्ही अन्य देशों में शरण लेने पर मजबूर हुए हों। ‘विश्व शरणार्थी दिवस’ ऐसे ही विस्थापित लोगों के साहस, शक्ति और संकल्प को प्रतिष्ठित करने और उनकी समस्याओं को समझने के लिए प्रतिवर्ष 20 जून को मनाया जाता है। शरणार्थियों को अंग्रजी भाषा में ‘रिफ्यूजी’ कहा जाता है। 

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आपदा-विपदा से ग्रसित कोई एक व्यक्ति भी शरणार्थी हो सकता है और बहुत सारे लोगों का समूह भी।  सीरिया में हुई जंग तो आपको याद ही होगी जिसके चलते वहां के लाखों लोगों को अन्य देशों की शरण में जाना पड़ा। भारत की बात करें तो यहां काफी संख्या में तिब्बत और बांग्लादेश से आए शरणार्थी आपको मिल जाएंगे। म्यांमार, लीबिया, सीरिया, अफ़गानिस्तान, यूनान, मलेशिया व कई अफ्रीकी देशों से भी प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में नागरिक अन्य देशों में शरणार्थी बनकर पहुंचते हैं। वेनेजुएला जैसे देश में आर्थिक संकट के चलते नागरिक को मजबूरीवश दूसरे देशों की शरण लेना पड़ रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में शरणार्थियों की संख्या 6.56 करोड़ से भी ज्यादा है। 

शरणार्थियों के जीवन-यापन, उनके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य तथा अन्य जरूरतों के लिए कई देशों में कई संस्थाएं काम कर रही हैं। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूएनएचसीआर (यूनाइटेड नेशन्स हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूज़ी) एक ऐसी ही संस्था है जो शरणार्थियों की मदद के लिए, उन्हें कानूनी हक दिलाने और उन्हें पुनः अपना जीवन बसर करने के प्रति उपयुक्त हल तलाशने में उनकी सहायता करती है। इस कार्य के लिए यूएनएचसीआर को 1954 व 1981 में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। 

गौरतलब है कि अफ्रीकी देशों की एकता को अभिव्यक्त करने के लिये 4 दिसंबर, 2000 को संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) द्वारा एक प्रस्ताव पारित किया गया था जिसमें ऑर्गनाइजेशन ऑफ अफ्रीकन यूनिटी (ओएयू) अंतर्राष्ट्रीय शरणार्थी दिवस को अफ्रीकी शरणार्थी दिवस के साथ 20 जून को मनाने के लिये सहमत हुआ था, उसके बाद 2001 से प्रतिवर्ष दुनिया भर में 20 जून को विश्व शरणार्थी दिवस मनाया जा रहा है।

इंटरनेशनल रेस्क्यू कमिटी और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन विश्व शरणार्थी दिवस पर कई गतिविधियाँ आयोजित करते हैं जिनमें शरणार्थी स्थलों का निरीक्षण करना, उनकी समस्याओं से संबंधित फिल्मों का प्रदर्शन करना, गिरफ्तार शरणार्थियों की मुक्ति के लिये विरोध प्रदर्शन तथा जेल में बंद शरणार्थियों के लिये समुचित चिकित्सकीय सुविधा और नैतिक समर्थन उपलब्ध कराने के लिये रैलियों का आयोजन करना जैसी  गतिविधियां शामिल हैं।

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आपको बता दें कि हर साल विश्व शरणार्थी दिवस को एक विशेष विषय के साथ मनाया जाता है। साल 2018 में विश्व शरणार्थी दिवस का विषय था ‘‘अब से कहीं ज्यादा, हमें शरणार्थियों के साथ खड़े होने की जरूरत है’’ वहीं साल 2019 को विश्व शरणार्थी दिवस का विषय रखा गया है कि ‘‘शरणार्थियों से हमारा वैश्विक रिश्ता है।’’ और सच भी है कि मानवता को किसी देश जहान की सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता, देशों की सीमाओं से पहले इंसान का इंसान से रिश्ता है।

  

दोस्तों, अपने देश अपने घरों से विस्थापन के कारण शरणार्थियों को सामाजिक विघटन, असुरक्षा की भावना, नए वातावरण से तालमेल न बैठा पाना, बेरोजगारी और भूख जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आज 20 जून यानि विश्व शरणार्थी दिवस है इस विशेष दिन हर किसी का कर्तव्य है कि शरणार्थियों के प्रति प्रेम और मानवता का भाव रखते हुए उन्हें समस्याओं से निपटने में उनकी हर संभव मदद करें।

अमृता गोस्वामी

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